मेरी गांड की चुदाई की गे सेक्स स्टोरीज-2

मेरी गांड की चुदाई की गे सेक्स स्टोरीज-1

अब तक आपने गांड चुदाई की कहानी में पढ़ा कि सुकांत के बड़े भाईसाहब ने रात को मेरी जम कर गांड मारी।
अब आगे..

हॉस्टल के कमरों की दीवारें वैसे ही बहुत पतली होती हैं.. और जरा सी आवाज पर लौंडे कान लगाए रहते हैं।
सुबह लड़के पूछ रहे थे कि कल आपके कमरे बहुत हंगामा हो रहा था।
मैंने कह दिया कि गेस्ट आए थे।

जब सात बजे तक लौटा तो वे लोग जाने को तैयार थे.. सुकांत उनका बैग उठाए था.. उन्हें भेजने जा रहा था।

मैं तैयार होकर क्लास अटेन्ड करने चला गया.. दिन भर कॉलेज में रहा शाम को पढ़ रहा था कि दस बजे करीब सुकांत आया। वो मेरे से नजरें नहीं मिला रहा था। फिर हम सोने के लिए अपने बेड पर लेट गए, तब वह मेरे बेड पर आया।

पहले तो बड़ी देर तक चुपचाप बैठा रहा, मैंने कहा- क्या बात है?
वह चुप रहा।
मैंने कहा- लेट जा..
वह मेरे साथ लेट गया.. फिर बोला- सर सर.. ये सब मेरी वजह से हुआ।
मैंने कहा- क्या?
वह बोला- भाई साहब ने जो किया। वे मेरे होम टाउन में भी ये सब करते रहते हैं। हम भाइयों की मार दी.. किसी को नहीं छोड़ा, मेरे मामा के बेटे गेस्ट आए थे, उनकी भी मार दी थी। तब घर में बहुत हल्ला हुआ आपने तो कुछ नहीं कहा। पर सोचा न था आपके साथ भी करेंगे आई एम सो सॉरी।

मैंने कहा- हाँ बड़ी बात है.. पर हो गया तो हो गया। जैसे तेरे भाई मेरे भी बड़े भाई.. तू कह तो रहा है उन्होंने तेरी भी मारी। चलो मेरी भी मार दी कोई बात नहीं।
फिर वह- बोला सर, पर मुझे चैन नहीं पड़ेगा.. मेरी तो भाई ने और दोस्तों ने घर पड़ोस और स्कूल में कई बार मारी है, मेरे होम टाउन में लौंडेबाजी बहुत होती है। जो चाचा मेरे साथ लेटे थे, वे भी लौंडेबाजी में पकड़े गए थे, सब चलता है गनीमत है भतीजे को छोड़ दिया। पर आपके साथ गलत हुआ, बदले में आप मेरी मार लो तो मैं समझूंगा आपने माफ किया।
मैंने कहा- यार रहने दे मैंने माफ किया.. कोई बदला नहीं लेना तू परेशान न हो। सिर्फ तेरा ही टाउन ऐसा नहीं है, सभी टाउन ऐसे ही होते हैं।
सुकांत- सर आप मुझसे नाराज हैं माफ नहीं कर रहे हैं.. मैं मानता हूँ आपके साथ बहुत गलत हुआ.. क्या मुझे पसंद नहीं करते? मैं तैयार हूँ।

वह मेरे पजामे के ऊपर से मेरा लंड सहलाने लगा.. फिर पायजामे का नाड़ा खोलने लगा।
मैंने कहा- अच्छा अपना पेंट उतार.. और अंडरवियर खोल, मैं तेरी इच्छा पूरी कर दूँ।
वह बहुत खुश हो गया.. फटाफट उसने पेंट उतार कर हैंगर पर टांग दिया। अंडरवियर उतार कर अपने बेड पर फेंक दिया और बिल्कुल नंगा होकर मेरे साथ लेट गया।
‘सर आपके कपड़े?’

मैंने कुछ नहीं कहा तो उसी ने मेरा पजामा नीचे खिसका दिया.. अंडरवियर उतार दिया।
अब हम दोनों नंगे लेटे थे.. उस खटिया में जगह ही कितनी थी, अतः एक-दूसरे से चिपके ही थे। वह मेरा लंड सहलाने लगा.. लंड खड़ा हो गया तो उसने मुँह में ले लिया।

वह अपने बड़े भाई की तरह पुराना खिलाड़ी था। उसका माफी माँगना तो बहाना था। वह बड़ी जोरदारी से लंड चूस रहा था। फिर उसने मुँह में से लंड निकाल दिया और मेरी तरफ देखने लगा। पर उसे हाथ से पकड़े था.. मैंने उसे देखा तो हंस दिया।

मैं समझ गया कि इसे गांड मराने की जल्दी है।
मैंने कहा- पलट जा यार..
उसने जल्दी से मेरी तरफ पीठ कर ली मैंने उसके चूतड़ पर हाथ फेरा। मैं अपने हाथ उसके चिकने चूतड़ों पर फेर रहा था.. तभी मैंने हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ लिया व उसे दो-तीन बार आगे-पीछे किया। उसका लंड एकदम कड़क था पर उसने मेरे हाथ से अपना लंड छुड़ाया और मेरे हाथ को अपने चूतड़ पर रख दिया। फिर मेरी बीच की उंगली पकड़ कर उसे अपनी गांड पर रख दी। मैं अपनी उंगली से उसकी गांड सहला रहा था। फिर मैंने उंगली में थूक लगा कर उसकी गांड में घुसेड़ दी और आगे-पीछे करने लगा। दो-तीन बार उंगली की कि उसकी गांड थोड़ी ढीली पड़ी। उसने पीछे की ओर हाथ बढ़ा कर मेरा लंड पकड़ लिया।

मैंने उससे कहा- यार टेबिल पर से क्रीम की शीशी उठा ला।

वह उठा और क्रीम की शीशी ले आया, पर मुझे नहीं दी.. खुद खोल कर अपनी उंगली से निकाल कर मेरे लंड पर पोती और मुस्कुराने लगा।
मैंने कहा- ला थोड़ी सी मैं ले लूं।
उसने शीशी आगे बढ़ा दी। मैंने दो उंगलियों में ली.. तो वह मौन प्रश्नवाचक नजरों से देख रहा था। मैंने उसे पलटने का इशारा किया.. वह पलटा और मैं उसकी गांड में क्रीम लगाने लगा। वह रिलैक्स था.. मैंने क्रीम लगीं अपनी दोनों उंगलियां उसकी गांड में ठूंस दीं। थोड़ी देर उंगलियां आगे-पीछे कीं।

अब मैंने उसे औंधे हो जाने को कहा और अपना क्रीम लिपटा लंड उसकी गांड पर टिका दिया। थोड़ी देर उसकी गांड पर लंड हाथ में लेकर टच किया.. वह गांड को भींच रहा था।
मैंने कहा- सुकांत भाई, डाल रहा हूँ ढीली करना..

और इसी के साथ लंड पेल दिया.. सुपारा अन्दर हो गया था।
‘हाँ भाई थोड़ी टांगें चौड़ा ले..’
और मैंने बाकी का लंड भी दे पेला। अब आधा अन्दर हो गया था। सुकांत प्रसन्न था। मैंने उसके सर के नीचे से तकिया लेकर उसकी कमर के नीचे रख दिया, इसे गांड थोड़ी ऊंची हो गई।
अब एक धक्का और लगाया तो पूरा लंड उसकी गांड के अन्दर था।

मैंने कल ही तो एक बहुत एक्सपर्ट गांड मारने वाले से गांड मरा कर कुछ नई टेक्नीक सीखी थीं.. उन्हें ही उनके भतीजे पर लागू कर रहा था।

अब मैं लंड डाले थोड़ा रुका.. मैंने सुकांत की गर्दन में हाथ डाल दिया और उसका चुम्बन लेने लगा। जब कि कल वाले भाईसाहब चूमा-चाटी में यकीन नहीं रखते थे.. उनका पूरा ध्यान केवल गांड पर और लंड के आनन्द पर था। लौंडे का क्या हो रहा है.. इससे उन्हें कोई मतलब न था.. लौंडे की फट रही है तो फटे।

पर सुकांत भी बहुत एक्सपर्ट था, उसने टांगें फिर सिकोड़ लीं। वह अपनी गांड बार-बार ढीली टाइट कर रहा था। साथ ही नीचे से उसने गांड से लंड में धक्के देना शुरू कर दिए। मैं चुपचाप उसके ऊपर लंड डाले लेटा रहा.. पहले वह धीरे-धीरे कर रहा था फिर थोड़ा तेज हो गया। वो गांड के जोरदार धक्के लगा रहा था।
करीब पांच-सात मिनट बाद रुका। मैं दम साधे उसके ऊपर लेटा रहा.. मैंने पूरी दम लगाई कि लंड न झड़े.. सांस भी रोके रहा। जब वह रुक गया तो हम दोनों थोड़ी देर शांत लेटे रहे।

उसने गर्दन पीछे घुमा कर मुझे देखा.. मुस्कराया।
तब मैंने कहा- अब मैं करूं।
वह हंस दिया तो मैं शुरू हो गया। दस-पन्द्रह मिनट बाद वो फिर रूका, खेल धीरे-धीरे किया.. स्पीड बढ़ाई, कभी कम की।
फिर उसने कहा- अब थोड़े जोरदार हो जाएं..
मैंने कहा- ढीली कर!

फिर करीब तीस मिनट में हम दोनों निपट गए। दोनों यूं ही खटिया पर सुबह तक लेटे रह.. सो गए।

फिर सुबह उठ कर अपने रुटीन के कामों में लग गए। शाम को सुकांत और मैं फिर दस बजे रात तक मिले, वह मेरे बेड पर आकर लेट गया।

सुकांत बोला- सर आपने कल मजा बांध दिया.. भाई से भी ज्यादा मजा आया। भाई तो गांड बुरी तरह से रगड़ देते हैं। आपने तो मेरा ध्यान रखा.. इतनी देर तक गांड मारी लेकिन मैं फ्रेश ही रहा। कोई तकलीफ नहीं हुई.. भाई की मराई गांड तीन दिन दर्द करती है।

मैं- सुकांत भाई पर मेरा भाई साहब जितना बड़ा नहीं है.. तुमने तो बहुत दिन पहले मराई होगी। मेरा तो नया एक्सपीरियन्स है.. इतना बड़ा लंड इतना सख्त और ऐसे गांड फाड़ू धक्के.. तुम तीन दिन की कह रहे हो, मुझे जिंदगी भर याद रहेंगे।

सुकांत- अरे सर बहुत दिन नहीं.. अभी एक महीने पहले जब मैं घर गया था तो भाईसाहब ने मेरी मारी थी। पहले तो कुछ कह नहीं पाता था अब मैं भी सिकोड़ लेता हूँ.. तो वे उतनी मार नहीं पाते।

इस घटना के दो ढाई साल बाद मेरी मेडिकल की डिग्री पूरी हो गई। मैं डिग्री के बाद अस्पताल में प्रोबेशनर ट्रेनिंग में था.. मेरे रूममेट सुकांत ने फाइनल परीक्षा दी। अब हम रूममेट नहीं थे मुझे एक दूसरे हॉस्टल में सिगंल रूम मिल गया। यह प्रोबेशन पीरियड भी बस पूरा होने वाला था।

जनवरी का महीना था.. कड़ाके की ठंड पड़ रही थी।
आज मैं रात आठ बजे तक ड्यूटी पर था कि अचानक मेरे ड्यूटी रूम में सुकांत आया- सर, गुड ईवनिंग..

उसके पीछे उसके बड़े भाई साहब और एक-दो लड़के थे.. सभी सजे-धजे थे, भाईसाहब भी वेल ड्रेस्ड थे।

मैंने नमस्ते की.. ड्यूटी रूम में कोई फर्नीचर नहीं था अतः मैं खुद खड़ा हो गया। एक पलंग था व मात्र एक चेयर भाई साहब को बैठने को पलंग पर कहा। पर वे खड़े ही रहे.. वे बहुत प्रसन्न दिख रहे थे।

उन्होंने बताया- वे जिस लड़की अपनी बहन की सगाई करने तब आए थे आज उसी की शादी है.. लड़के वाले ग्वालियर के हैं, अतः यहीं मैरिज हाउस से शादी कर रहे हैं।
मैं- क्या उसी लड़के से तय हो गई?
भाई साहब- नहीं इतनी देर आजकल कोई कहां रुकता है.. दूसरी जगह संबंध हुआ है.. फैमिली अच्छी है लड़का फॅारेन में इंजीनियर है, आपको चलना है अभी, हम लेने आए हैं।
मैं- मैं तैयार हूँ पर मुझे ड्यूटी पर छोड़ने वाले डाक्टर साहब आ जाएं.. आप पता बता दें, मैं वहीं आता हूँ।
भाई साहब- नहीं, अभी चलें। मैं कार लाया हूँ।
मैं- मैं सुकांत के साथ आता हूँ, डाक्टर साहब आ ही रहे होंगे रास्ते में हैं।
भाई साहब सुकांत की ओर चेहरा घुमा कर- अपने पास दो गाड़ी हैं। एक में तुम सब लोग पहुंचो।
फिर मेरी ओर मुड़ कर बोले- इन सबको अपना मेकअप करना है.. ड्रेस बदलना है.. मैं तो तैयार होकर आया हूँ, सुकांत तुम चलो, मैं डाक्टर साहब को लेकर आता हूँ.. मैं रुका हुआ हूँ।

वे सब चले गए, भाई साहब रुके रहे। मुझे ड्यूटी पर छोड़ने वाले डाक्टर साहब आ गए.. मैं भाई साहब के साथ कार में बैठ कर चल दिया।

मैंने कहा- भाई साहब, कृपया मेरे रूम पर चलें.. मैं भी कपड़े बदल लूँ।

उन्होंने कार मेरे रूम की ओर मोड़ दी हॉस्टल के ग्राउन्ड में कार से उतर कर हम अपने रूम पर पहुँचे, भाई भी साथ में रूम पर आ गए। मेरा रूम हॅास्टल का एक रुटीन कमरा था.. एक चूं चूं करती खटिया, दीवार में अलमारी बनी थी, एक कुर्सी छोटी सी टेबल थी।

भाई साहब को कुर्सी पर बिठाया.. जमीन पर कोने में रखी चटाई बिछाई, उस पर एक कम्बल दोहरा कर बिछा कर उस पर एक चादर बिछा दी। मैंने अपने कपड़े अलमारी खोल कर निकाल कर खाट पर रख दिए। तेल की शीशी टेबिल पर रखी.. क्रीम वहां पहले से रखी थी।

मैंने एक टॉवेल ली और भाई साहब से कहा- मैं जल्दी से नहा कर आता हूँ। भाई साहब- ऐसी सर्दी में..?
‘हाँ बस एक मिनट में।’

मैं नहा कर बाथरूम से निकला तो टॅावेल लपेटे था.. गीले कपड़े बाहर बरांडे में डोरी पर डाले।

मैंने लौटते में किवाड़ लगा दिए.. अन्दर आकर मैंने टॉवेल कंधे पर डाल ली। अब मैं बिल्कुल नंगा था। मैंने तेल की शीशी में से हथेली पर तेल उढ़ेला और पैरों में लगाने लगा। मेरी पीठ भाई साहब की तरफ थी.. मैं कमर झुका कर जांघों में और फिर पिंडलियों में तेल लगा रहा था। मेरे झुकने से मेरी गांड भाई साहब को दिखी.. वे कुर्सी पर कसमसाने लगे।

अब भाईसाहब के लंड को मेरी गांड दिख रही थी.. गांड चुदाई की कहानी का मजा अगले पार्ट में लिखूंगा.

कहानी का अगला भाग: मेरी गांड की चुदाई की गे सेक्स स्टोरीज-3

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