दो भाइयों से मेरी गांड चुदाई

(Do Bhaiyon Se Meri Gand Chudai)

हैलो मेरे दोस्तो, मैं बहुत दिनों बाद आपके सामने मेरी तीसरी गे सेक्स स्टोरी बताने जा रहा हूँ। मैंने पहले सोचा कि लिखना बंद कर दूँ, लेकिन आप लोगों के लगातार मेल्स ने मुझे अपने अनुभव आपके सामने लाने में दोबारा प्रोत्साहित कर दिया।

बिना समय बिताए आपके लंड और गांड को टटोलने के साथ मैं अपनी सेक्स स्टोरी पर आता हूँ। यह स्टोरी भी मेरी अपने असल अनुभव के आधार पर लिखी गई है।

बात मई महीने की है जब मुझे अत्यंत गर्मी लग रही थी और पंखे से काम नहीं चल पा रहा था। अब रात को सुकून से सोने के लिए मैंने सोचा एक ए सी लिया जाए ताकि कोई दोस्त-वोस्त भी आए तो कोई तक़लीफ़ ना हो। मैंने सभी इलेक्ट्रॉनिक शॉप्स को ट्राई करके डिसाइड कर लिया कि मुझे कौन सा एसी ही ठीक रहेगा।

दुकानदार ने मुझसे बोला- इंस्टाल करने में एक-दो दिन लग जाएँगे।

मैं मान गया। पहले दिन बस एसी डिलीवरी करने आए और दो दिन बाद एसी फिटिंग करने वाले का फोन आया। सुबह का टाइम था और मेरी छुट्टी भी थी। उस साइड आवाज़ सुनकर मुझे थोड़ा अच्छा फील हुआ क्योंकि आवाज़ किसी बच्चे की नहीं बल्कि एक मर्द के जैसी थी। मेरा एड्रेस ढूँढते हुए वो वैसे ही परेशान हो गया था। मैंने देखा वो बाइक पर आया था, साथ में उसका एक हेल्पर भी था।
मैंने बाहर से इशारा किया कि जिससे वो फोन पे बात कर रहा है.. वो मैं ही हूँ।

उसने बाइक पार्क की और ऊपर आ गया। उसको देख कर मेरी गांड से पानी निकलने लगा। वो 26-27 साल का बंदा, देखने में जाट, आखें भूरी, हल्की सी दाड़ी, ऊंचाई भी लगभग 5’9” की, चौड़ी छाती बाहर को निकली हुई जैसे कि कसरत करने वालों की होती हैं और वो कपड़े भी ठीक-ठाक से पहन कर आया था।
उसके साथ में एक मरियल सा बंदा था, लेकिन देखने में वो भी ठीक-ठाक ही था।

मैंने उसे अन्दर बुलाया और बिठा कर पानी पिलाया। उसने अपना नाम आसिफ़ बताया और दूसरे का नाम रमीज़।

जब मैंने पानी की बॉटल आगे बढ़ाई तो आसिफ़ ने तिरछी नज़र से मुझे देखा, उसने पूछा कि क्या मैं अकेला रहता हूँ?
मैंने जवाब दिया- नहीं, लेकिन फैमिली वाले बाहर गए हुए हैं।

मैंने शॉर्ट्स पहने हुए थे, और बिना अंडरवियर के पहना था। ऊपर खाली एक वेस्ट पहनी थी।

आसिफ़ ने अपना काम स्टार्ट किया, वायर निकाले और कुछ औजार निकाले, वायर्स को काटना शुरू किया। मैं उसे घूरे जा रहा था और मैंने नोटिस किया कि वो भी बार-बार मुझे छुप-छुप कर देखे जा रहा था।

फिर मैं उनको और कुछ मदद का प्रस्ताव रखके साइड में बैठ गया।
आसिफ़ ने पूछा कि मुझे एसी कहाँ लगवाना है?
मैंने इशारे से बोल दिया।

अचानक से मैंने रमीज़ को देखा तो उसने मुझे देख लिया था कि मैं आसिफ़ को घूरे जा रहा हूँ। मुझे शरम आ गई और मैंने आखें नीचे कर लीं।
रमीज़ ने भी मुस्कुराहट दे दी।

ऐसे करते-करते लगभग एक घंटा हो गया था।

आसिफ़ ने बोला कि रमीज़ उसका छोटा भाई है.. और वो पहले दुबई में था। फिर वहां काम पसंद नहीं आया तो इंडिया वापस आ गया।
मैंने पूछा कि उनकी कोई गर्लफ्रेंड है कि नहीं?

आसिफ़ का जवाब सुनके मेरे होश उड़ गए- अरे, गर्लफ्रेंड पालने वाले सब चूतिए होते हैं.. कौन पाले उनको, जब आस-पास गर्लफ्रेंड जैसे और भी लोग घूम रहे हैं।
फिर उसने मेरी तरफ देख कर एक मुस्कुराहट दी। मुझे उसकी बात पहले समझ में नहीं आई लेकिन जब मुस्कुराया, तब मैंने इशारा समझ लिया।

मैंने भी थोड़ी शरारत करते हुए पूछा- अच्छा, ऐसे तो बहुत लोग हैं, तुम कैसे लोगों की बात कर रहे हो?
आसिफ़- अब तू इतना बेवकूफ़ सा तो लग नहीं रहा है कि मैं किस तरह के लोगों की बात कर रहा हूँ, ये भी न समझ पाए?
मैंने फिर भी अंजान बनते हुए बोला- मुझे क्या पता, कैसे लोगों की बात कर रहे हो.. मुझे तो सारे लोग पसंद हैं।

आसिफ़- वैसे तुझे देखकर लगता नहीं कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड भी होगी.. है कोई?
मैं- अब मुझे तो खुद लोग गर्लफ्रेंड बनाने की बात करते हैं।
आसिफ़- हम्म.. लेकिन तेरे में है क्या है जो लोग तुझे गर्लफ्रेंड बनाने की बात करते हैं?
मैं- अब वो तो लोगों को ही पूछना पड़ेगा!

और मैंने एक शरारती सी स्माइल दी।
मैंने देखा रमीज़ बड़े गौर से बातें सुने जा रहा था और मज़े लिए जा रहा था। मैं मुस्कुराया और पूछा- रमीज़, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या तुम भी बड़े भैया जैसे हो?
रमीज़ अभी कुछ बोलता.. आसिफ़ बोल पड़ा- अरे, हम दोनों भाई जो भी खाते हैं, मिल-बाँट कर खाते हैं।

मैं दोनों का इशारा समझ गया और मन में अपनी गांड चुदाई के सपने बुनने लगा।

आसिफ़ ने बोला कि तार कुछ छोटी पड़ गई है तो उसको जाना पड़ेगा और वो थोड़ी देर में वापस आ जाएगा। उसने रमीज़ को काम को जारी रखने को बोला और बाइक लेकर चला गया।

फिर रमीज़ ने आसिफ़ के जाते ही मेरे से पूछा- तो तू भैया की बात समझ गया होगा? चल, एक ग्लास पानी दे, मैं थोड़ा बेड पे थोड़ी देर के लिए बैठ जाता हूँ।

मैंने पानी का ग्लास आगे बढ़ाते हुए उसे दिया और मैं भी बेड पे बैठ गया। उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोला- तू किसी लंबी सी चीज़ पर बैठा है?
मैं हँसते हुए बोला- यह कैसा सवाल है?
रमीज़ ने अपने बालिश्त का नाप लेते हुए कहा- इतना बड़ा हो तो कैसा रहेगा.. कभी सोचा है?

मेरे अन्दर अचानक से लहर सी दौड़ उठी और दिल की धड़कनें तेज़ होने लगीं। मुझे समझ में नहीं आया कि क्या ज़वाब दूँ।
मैं चुप रहा तो रमीज़ ने फिर पूछा- देखेगा कि वो लंबी सी चीज़ कैसी है?
मैं- हाँ, क्यों नहीं.. दिखाओ।

लेकिन मैंने ये नज़रें नीचे करते हुए कहा था।

रमीज़ ने अपना ज़िप खोला और अचानक से अपना 7 इंच का लंड मेरे सामने रख दिया। मेरे होश उड़ गए और मैं कुछ बोल नहीं पाया। रमीज़ ने मुझे खींचते हुए मेरा हाथ पकड़ा और बोला- इसको छू कर देख, गरम होगा.. इसे अपने गाल पर लगाकर देख।

अन्दर ही अन्दर मेरे रंडीपन जाग रहा था लेकिन कुछ अपनी हरकतों में उलझा हुआ था। मैंने कुछ हरकत ना करते हुए देखा कि रमीज़ मेरे बाल पकड़ के अपने लंड के पास ले गया और बोला- अबे देख ना.. गरम है कि नहीं!

मैंने लंड छुआ तो उसने बोला- भोसड़ी के, खाली छूने से थोड़ी पता चलेगा, मुँह के अन्दर डाल के देख.. गर्म है या नहीं!

मेरे से अब रहा नहीं गया और मैंने मुँह खोल दिया। अब मैं आराम से उसका लंड अपने मुँह में लेने लगा। रमीज़ ने अब अपनी पूरी पैन्ट उतार दी और मेरे सामने खड़ा हो गया।
उसका लंड और तगड़ा हो गया.. उसने मेरे मुँह में पेलना शुरू किया।
मुझे धीरे-धीरे मज़ा आने लगा, एक तो लंड की खुश्बू, वो भी बिना धुला हुआ लंड और साथ ही इतना तगड़ा लंड। मैंने लंड को हलक तक लेने की कोशिश की और जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया।

रमीज़- शाबाश गांडू, तुझे हमने पहली नज़र में सही पहचाना था कि तू हमारे काम का ही बंदा है।

मैंने अपनी वेस्ट उतार दी.. शॉर्ट्स भी निकाल दी और पूरा नंगा हो गया। मेरी चुची देखकर रमीज़ पागल हो गया.. वो जोर-जोर से दबाने लगा। उसके दबाने से मेरे अन्दर और जोश आ गया। मैंने और तेज़ी से लंड चूसना शुरू किया।
अब रमीज़ भी पूरा नंगा हो चुका था। साथ ही साथ वो मुझ पर गालियों की बौछार करते हुए मेरा मुँह पेले जा रहा था।

अचानक से घंटी बजी, मैं डर गया और रुक गया, लेकिन रमीज़ ने मुझे बिना कुछ पहने दरवाज़ा खोलने को इशारा किया। मैंने वैसे ही किया तो देखा आसिफ़ वापस आ गया था।

वो मुझे और उसके भाई को नंगा देखके पागल हो गया और मेरे ऊपर कूद पड़ा। मेरे बाल पकड़े और मेरे ऊपर थूक मार के बोला- चल रंडी, मेरे कपड़े उतार और मेरी सेवा कर।

मैंने जल्दी-जल्दी उसके जूते खोले, मोजे, जीन्स, अंडरवियर और शर्ट उतार के साइड में रख दी।

मेरे रखते ही आसिफ़ ने मेरे मुंह अन्दर उसके पैर की उंगलियाँ डाल दीं और चूसने को कहा। मैंने वैसे ही किया और मुझे बड़ा मज़ा आने लगा। मैंने सोचा भी नहीं था कि आज एक साथ दो-दो लंड मिलेंगे।

इधर मैं आसिफ़ के ढीले लंड को जगाने जा रहा था कि रमीज़ मेरी गांड में थूक लगाना शुरू किया। अपनी उंगली मेरी गांड के छेद के आसपास छेड़खानी करने लगा। इससे मुझे गांड में खुजली होने लगी और मैं तड़प उठा। मेरे से रहा नहीं जा रहा था और मैंने अपनी गांड थोड़ी आगे कर दी। यह देखके रमीज़ को इशारा समझ में आ गया और धीरे-धीरे अपना 7 इंच का लंड मेरे अन्दर करने लगा।

वो बोला- भाई, आज क्या मस्त माल मिल गया, बहुत दिनों बाद ऐसी रांड चोदने को मिल रही है। इस साली को आज तबियत से चोदूंगा इस हरामन को.. और इसकी चिकनी गांड का भोसड़ा बना दूँगा।
आसिफ़- अरे भाई, तुझे जितना पेलना है पेल, इसकी तो आज खैर नहीं.. दो घंटे तक गांड नहीं मारने दी तो टट्टी मुँह में कर दूँगा।

मेरे मज़े का ठिकाना नहीं था, सब कुछ मेरे हिसाब से ही हो रहा था। रमीज़ ने अचानक अपनी स्पीड बढ़ा दी और मेरे टट्टे हिलने लगे।

इसको देखके आसिफ़ ने मेरी गोटियों को हाथ में पकड़ लिया और भाई को बोला- और जोर से पेल दे इस रंडी को, इसकी प्यास बुझा दे।

उधर मैंने चूस-चूस के आसिफ़ का लंड खड़ा कर दिया। उसका लंड रमीज़ से भी बड़ा और तगड़ा था। लगभग बीस मिनट तक अलग-अलग पोज़ में रमीज़ मुझे चोदता रहा और मैं आसिफ़ की गांड, उसके टट्टे और लंड चाटता और चूसता रहा।

अब आसिफ़ ने भाई को झड़ने को इशारा किया और रमीज़ ने कुत्ते की तरह मुझे चोदके अपना पानी मेरी गांड में छोड़ दिया। उसका गरम वीर्य मेरी गांड के चारों तरह बह गया और रमीज़ ने थकान की साँस ली।

लेकिन मेरी गांड को अब और एक लंड की प्यास बुझानी थी। मेरे छेद से पानी निकलते देख आसिफ़ ने अपनी जीभ निकाली और उसको चाटने लगा। मेरे अन्दर बिजली दौड़ गई.. इतना मज़ा मुझे पहले कभी नहीं आया।

फिर उसने मेरे छेद पर अपना लंड टिका कर पूरी स्पीड से लंड को अन्दर कर दिया।
मेरी हल्की सी आवाज़ आई- आआह, इतना तेज़ झटका!

फिर आसिफ़ शुरू हुआ और मुझे रंडी बनाकर चोदता रहा। मैंने भी उस टाइम नहीं देखा। अब तक मेरी गांड का भरता बन चुका था।

रमीज़ उठ खड़ा हुआ और मेरे बाल पकड़ कर उसने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया। मेरे कुछ बिना सोचे ही उसने पेशाब की धार मेरे मुँह में कर दी और एक जोर का थप्पड़ मार के बोला- पी जा सब, तेरे लिए अमृत है.. साली।
मैं बेझिझक सब पी गया क्योंकि मुझे इतनी लंबी चुदाई से प्यास भी लग रही थी।

फिर आसिफ़ ने अपना लंड बाहर निकाला और मेरे मुँह में डाल कर चूसने को कहा। मुझे अलग सा टेस्ट आ रहा था, लेकिन मैंने बड़े शौक से लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगा।
थोड़ी देर में मुझे गाढ़ा चिपचिपा सफेद वीर्य मेरे मुँह में पूरा आ गया। फिर आसिफ़ मुड़ा और मुझे अपनी गांड मेरी जीभ पर लगा कर चाटने को कहा। मैंने उसकी गांड को पूरा अन्दर तक चाटा। ऐसा स्वर्ग वाला मज़ा मुझे पहले कभी नसीब नहीं हुआ।

फिर मैं भी अपना वीर्य हाथ से निकाल कर बाथरूम में चला गया।

दोनों ने अपने कपड़े पहने और अपना एसी का काम फिटिंग करके बोला- साली, तूने अच्छा काम किया.. तुझे तो मेरे दोस्तों से मिलवाना पड़ेगा, तेरी जैसी गांडू बहुत कम हैं और ऐसी गांड को लंड हमेशा ढूँढते ही रहते हैं।

उन्होंने मेरे से काम के पैसे भी नहीं लिए और चल दिए।

दोस्तो, यह थी मेरी तीसरे अनुभव की गांड चुदाई की गे सेक्स स्टोरी।

आगे आपसे शेयर करने को और भी बहुत सारे बातें हैं। आपको यह सच्ची घटना कैसी लगी। मुझे मेल कीजिए।
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