बरसात में मेरी ज़बरदस्त गांड चुदाई

(Barsat Me Meri Zabardast Gand Chudai)

तभी उनमें से एक ने मुझे एक हाथ मेरी जांघ पर जड़ दिया। मैं सन्न रह गया और उस पहले वाले ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया।

अब मैं भी बिना कुछ बोले उसका लंड चूसने लगा, मैं बिल्कुल नंगा बैठा हुआ उसका लंड चूस रहा था।

फिर सबने अपने कपड़े उतार दिए और बारी-बारी मैं उनका लंड चूसने लगा। वो कभी मेरे बाल खींच रहे थे, कभी मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे।

मैं सब कुछ सहते हुए उनके लंड चूसे जा रहा था, मुझे मज़ा आ रहा था।
करीब 30 मिनट उन्होंने बाद मुझे उठा कर मुझे बिस्तर पर घोड़ी जैसा बना दिया और मेरी गांड को तेल से नहला दिया।
अब मेरी गांड का की चुदाई शुरू हो गई।

पहला एपिसोड

उनमें से एक का लंड मेरी गांड के छेद पर था और मेरा दिल राजधानी की स्पीड से धक-धक कर रहा था।
तभी वज्रपात हुआ और मेरी आँख के आगे अंधेरा हो गया उसने किसी बेरहम कसाई की तरह अपना लंड मेरी गांड में ठूंस दिया। मेरी आँखें बाहर आ गईं और मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह.. ऊह..’ की आवाज़ निकलने लगी, मैं बिल्कुल बच्चों की तरह रोने लगा क्योंकि 6 इंच मोटा लंड मेरी गांड की गहराई नाप रहा था।

मैं हिलने से भी मजबूर था.. क्योंकि चार चुड़क्कड़ों ने मुझे जकड़ रखा था।
वो बस मुझे पेले जा रहा था।

थोड़ी देर इस तरह चोदने के बाद उन लोगों ने मुझे सीधा कर दिया और मेरी दोनों टांगों को मेरे सर से जोड़ दिया, अब मुझे वो इसी स्थिति में चोदने लगा, करीब 20 मिनट के बाद वो मेरी गांड में झड़ गया।

फिर शुरू हुआ एपिसोड नम्बर दो..

अब मेरा दर्द काफ़ी कम हो चुका था और थोड़ा अच्छा भी लगने लगा था। मैंने उन सबसे अपने आपको चोदने को कहा और खुद ही उल्टा होकर गांड को ऊपर उठा दिया।

दूसरे ने भी मेरी गांड मारने का कार्यक्रम चालू किया और मेरी ज़बरदस्त चुदाई शुरू हो गई। मैं उन चार के सामने चुद रहा था।

अब मेरे पैर भी दुखने लगे थे, मैंने खड़ा हो कर चोदने को कहा।
उन्होंने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया, मुझे दीवार में चिपका कर मेरी कमर पकड़ कर अपनी ओर कर लिया। अब वो अपने लंड से मेरे गांड की गहराई नापने लगा।

मुझे भी गांड मरवाने में कोई झिझक नहीं हो रही थी, मैं गांड चुदाई का मज़ा पाने लगा था। मेरा छोटा सा लंड भी खड़ा था। उसका लंड लगातार अन्दर-बाहर हो रहा था, कुछ देर के बाद वो भी मेरी गांड में ठंडा हो गया।

तीसरे राउंड में मैं बिस्तर पर गिर गया, मेरी टांगें जमीन पर नीचे थीं और शरीर बिस्तर पर पड़ा था। फिर सबने इसी पोज़िशन में मेरी गांड मारी.. लेकिन जब तक लास्ट वाला फ़ुर्सत होता.. तब तक पहले वाला फिर से तैयार हो चुका था।
इस तरह एक के बाद एक मुझे चोदा जा रहा था।

मैं घंटों तक चुदने के बाद उठने में भी मजबूर सा हो गया था। कब मेरी चुदाई खत्म हुई.. मैं नहीं जानता।

जब मैं उठा.. तो रात के 2 बज रहे थे। फिर मैं वैसे ही नंगा सो गया.. क्योंकि अब छिपाने को कुछ बचा ही नहीं था।

सुबह उठा तो फिर सबको मैंने फिर अपनी गांड का नाश्ता परोसा। उन लोगों ने यह धारावाहिक मोबाइल में क़ैद कर लिया था, बाद में मुझे इसके दर्शन भी कराए था।
बाद में मुझे पेट्रोल दिला दिया और जाने दिया।

अपनी वो गांड चुदाई मैं आज तक नहीं भूला।
कैसी लगी आपको मेरी गांड चुदाई की दास्तान.. ईमेल करना न भूलें।
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