प्यारी सी चुम्मी मुलायम कोमल चूत पर-1

(Pyari Si Chummi Mulayam Komal Choot par- Part 1)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

मेरा नाम अलीशा (बदला हुआ नाम) है। मैं लखनऊ की रहने वाली हूँ। मैं पिछले 3-4 सालों से अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज को पढ़ रही हूँ। मैं जो कहानी लिखने जा रही हूँ.. इसमें बहुत सी बातें हैं.. इसलिए मैं कुछ बातों को हटा कर बाकी की कहानी लिख रही हूँ.. जिससे आप लोग बोर न हो जाएं।

ये मेरी पहली हिन्दी सेक्स स्टोरी है और सच्ची है.. जिससे मेरी पूरी ज़िन्दगी बदल सी गई।

बात उस समय की है.. जब मैं 12 वीं क्लास में थी। मेरा फिगर 32-28-32 का है.. जो कि मेरे टाइप की लड़की पर बहुत फिट बैठता था। मैं एक सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। मेरा स्कूल सरकारी होने की वजह से मेरी अच्छी पढ़ाई नहीं हो पाती थी.. ये आप सबको पता होगा।

मैंने अपने अब्बू से कहकर कोचिंग लगवा ली। लखनऊ के बाहरी इलाके में घर होने की वजह से मुझे कोचिंग के लिए थोड़ी दूर जाना पड़ता था।
कोचिंग का पहला दिन था.. मेरी 3 सहेलियों को छोड़कर बाकी सब नए थे।

पहले दिन जब मैं क्लास में पहुँची.. तो सभी से मेरा इंट्रोडक्शन हुआ। उसके बाद क्लास शुरू हुई और इसके बाद तो कई लोगों ने मुझसे बात की और फ्रेंडशिप भी की। उसमें से एक लड़का था.. जो बहुत ही अच्छा दिखने में था.. तथा उस पर मेरी नजर भी जाकर रुक गई थी।

पहले दिन तो ज्यादा किसी से कुछ बात नहीं हो पाई। कुछ हफ़्तों के बाद सब आपस में घुल-मिल गए थे और सब एक-दूसरे को जानने लगे थे।

सहेली चूत चुदाई की बातें बताती थी

सिर्फ मुझे ही छोड़कर मेरी तीनों सहेलियों के बॉयफ्रेंड थे। मैं तब सेक्स से कुछ ज्यादा ही शर्माती थी। बाद में मेरी एक बेस्ट फ्रेंड है शालिनी.. जिससे मैं सब कुछ बताती थी और वो भी मुझसे हर बात बताती थी।
यहाँ तक कि अति गोपनीय बातें जैसे उसने कब सेक्स किया और कहाँ किया.. ये सब बातें वो मुझे बताती थी। तब से मैं भी सेक्स की बातों में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट लेने लगी थी।

खैर.. कुछ दिन ऐसे ही बीतते गए और एक दिन शालिनी के ब्वॉयफ़्रेंड ने उसे बताया कि उसका दोस्त मुझसे दोस्ती करना चाहता है।
मैंने भी कह दिया- ठीक है कर लेती हूँ दोस्ती.. लेकिन सिर्फ दोस्ती तक ही बात रहेगी.. उससे आगे कुछ नहीं।

सब तय हो गया.. कोचिंग के बाद पार्क में मिलने का प्लान हुआ। जैसे ही मेरी नजर उसके दोस्त पर पड़ी.. मेरे दिल की धड़कन तो बहुत तेज चलने लगी। मेरी जुबान से कोई लफ्ज़ ही नहीं निकल रहे थे.. ये वही लड़का था.. जिसे मैंने पहले दिन ही क्लास में देखा था और मन ही मन उससे दोस्ती करने का सोची थी।

बातचीत शुरु हुई और उसने अपना नाम बताते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया- हैलो मेरा नाम शुभम है।
मैंने भी हाथ मिलाया और अपना नाम बताया।
कुछ देर इधर-उधर की बातों के बाद हम सब अपने-अपने घर चले गए।

मैं रात भर उसी के बारे सोचती रही और न जाने कब नींद आ गई। कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा और हम दोनों काफी मिल-जुल कर रहने लगे थे। उस समय मेरे पास मोबाइल न होने की वजह से जो बातें होती थीं.. वो कोचिंग में या तो कभी-कभी बंक मार के पार्क में होती थीं।

फिर एक दिन मेरा बर्थ-डे आया और मैंने अपने दोस्तों को पार्टी पर बुलाया.. जो एक रेस्टोरेंट में थी।
मैंने सेक्सी ब्लैक ड्रेस पहन रखी थी, आखिरकार मैं भी एक सेक्सी गोरी लड़की जो हूँ, मैं अपने आप पर बहुत ध्यान देती थी.. ताकि मेरा फिगर ख़राब न दिखे।

मेरे केक काटने के बाद सब मुझे गिफ्ट देने लगे.. आखिरी में शुभम आया और उसने कहा- आज तुम इस ब्लैक ड्रेस में बहुत खूबसूरत लग रही हो।
मेरे हाथ में गिफ्ट देते हुए बोला- इसे अकेले में खोलना।

पार्टी ख़त्म होने के बाद घर में मैंने अपना रूम बंद कर लिया.. जिससे कोई आ न पाए। फिर मैंने अपने कपड़े बदले और नाईट ड्रेस में बिस्तर पर बैठ कर शुभम का गिफ्ट खोलने लगी।

तभी मेरे दरवाजे को किसी ने खटखटाया.. मैं तुरंत गिफ्ट को किनारे रख कर दरवाजे को खोलने चली गई। जैसे ही दरवाजा खोला सामने मेरा भाई था और साथ में अम्मी और अब्बू भी थे। भाई के हाथ में एक छोटा सा पैकेट था।

मेरे हाथ में देते हुए कहा- लो आरू, अपने भाई की तरफ से गिफ्ट!

मुझे घर में सब यही बुलाते हैं और मेरा उप नाम भी यही है।

मैंने जैसे ही उसे खोला.. मैं खुशी से उछल पड़ी और भाई के गले लग गई उसमें एक सेलफोन था। पीछे से अब्बू ने कहा- आरू तेरे भाई ने ये अपनी पॉकेट मनी से लाया है।

मैं खुशी से पागल हो उठी थी।

भाई ने उस मोबाइल में नई सिम वगैरह सब डाल रखा था। थोड़ी देर बाद सब अपने-अपने कमरों में चले गए और मैं भी शुभम से लिया हुआ गिफ्ट खोलने लगी।

Comments

सबसे ऊपर जाएँ