पूजा के साथ वो चौबीस घंटे-1

प्रेषक : आदित्य

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम आदित्य है, मैं 6 फीट 1 इंच का गोरा लड़का हूँ, मेरा लंड भी काफी मोटा और बड़ा है जिस वजह से बहुत सी लड़कियाँ मुझ पर मरती हैं। मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सारा कहानियाँ पढ़ी तो मुझे लगा कि मुझे भी अपना सच्चा अनुभव शेयर करना चाहिए।

अभी मैं इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष का छात्र हूँ। यह बात तब की है जब मैं गयारहवीं में था। मैं दिल्ली में एक प्राइवेट इंस्टिट्यूट में आई आई टी की तैयारी करता था। यह अप्रैल की बात है जब एडमिशन शुरू ही हुए थे। मेरे बैच में पूजा नाम की एक लड़की ने एडमिशन लिया जो मेरे गृहनगर से थी। उसे मेरे रूम पार्टनर ने कुछ ही दिन में पटा लिया।

पूजा दिखने में बला की खूबसूरत थी। क्या फिगर था साली का !! 34-26-36 का। क्या बड़े बड़े चूचे और क्या मस्त चूतड़ थे उसके ! मेरा तो उसे देखते ही उसकी गांड मारने का दिल करता था पर अपने दोस्त के वजह से कुछ नहीं कर सकता था। वो अक्सर हमारे कमरे पर मेरे दोस्त के साथ आती थी जिस वजह से हम दोनों के बीच भी दोस्ती हो गई थी पर मैं उससे ज्यादा बातें नहीं करता था।

वो जब भी हमारे रूम में आती थी, मैं उसके चूतड़ और चुच्चे घूरता और फिर बाथरूम में जाकर उसके नाम की मुठ मार लेता था। इसी तरह हमारे 2 साल बीत गये और हम दिल्ली से वापस अपने अपने अपने कॉलेज में शिफ्ट हो गये। मेरा दोस्त इतना सीधा था कि उसने दो साल में उसके साथ कुछ नहीं किया।

पूजा चेन्नई में अपने कॉलेज में थी और मेरा दोस्त भोपाल में और मैं यहाँ बैंगलोर में आ गया। कॉलेज अलग होने के कारण मेरे दोस्त का और पूजा का ब्रेकअप हो गया। मुझे इसके बारे में पता चला तो मैंने सोचा कि अब अपना काम पूरा करता हूँ। मैंने उसका नंबर पता किया और उससे बातें करने लगा। इस तरह से हमारे बीच नजदीकियाँ बढ़ गई। मुझे लगने लगा कि वो मुझे पसंद करने लगी है तो मैंने उसके छुटियाँ में उससे बैंगलोर घूमने के लिए बुलाया। वो मान गई, मुझे तो लगा कि जैसे आधा काम हो गया।

छुट्टियाँ शुरु हुई और वो बैंगलोर आई और अपनी सहेली के यहाँ रुकी। मैं उससे मिलने गया और अपना कमरा दिखाने ले आया। मैंने मन ही मन उसे आज रात चोदने का सोच रखा था। किस्मत ने भी साथ दिया और शाम में तेज बारिश होने लगी जिस वजह से रात को उसे मेरे रूम पर रुकना पड़ा।

हम दोनों ने खाना खाया और फिर इंग्लिश मूवी देखने लगे। मूवी में सेक्स सीन आया तो मेरा भी जोश जाग गया और मैंने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। उसने कुछ आपत्ति नहीं जताई तो मेरा भी उत्साह बढ़ा और मैंने उसके बदन पर हल्का हल्का सा हाथ फ़िराना शुरु कर दिया और फ़िर उसके चुचे भी दबा दिए।

उसने जैसे ही कुछ बोलना चाहा तो मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा दिया।

अब वो भी उत्तेजित होने लगी थी। मैं उसके दोनों चुचे दबा रहा था। धीरे धीरे उसने भी साथ देना शुरु किया और मेरा लंड पकड़ लिया, मैं उसके शरीर की गर्मी महसूस कर सकता था।

तब मैंने उसके टॉप उतार दिया, उसकी ब्रा दिख गई।

क्या चूचे थे यारो ! मैं तो उत्तेजना के मारे पागल हुआ जा रहा था… और उसका हाल तो देखने लायक था। अब मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसकी दोनों चूचियाँ मेरे सामने नंगी हो गई… मैंने उसके एक चूची पर मुँह लगा दिया और लगा रस चूसने।

करीब पंद्रह मिनट तक यही चलता रहा, फिर मुझसे नहीं रहा गया और मैंने अपना हाथ उसके चूत पर रख दिया, वो सिहर उठी और मेरा लंड जोर से दबाने लगी।

अब हम दोनों एक दूसरे के बाकी कपड़े उतार दिए और बिल्कुल नंगे हो गए। मैंने उसे अपना लंड चूसने के लिए बोला तो उसने पहले मना किया पर बाद में मान गई और चूसने लगी।

मैं उसका चूची चूस रहा था। उसके बाद मैं उसकी योनि, भग चाटने लगा। उसकी आँखें बंद हो गई थी और वो खुद ही अपने चूचों को मसल रही थी।

तब मैं समझ गया कि पूजा पूरी तरह से चुदने के लिए तयार हो चुकी है, मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रख दिया और रगड़ने लगा। इससे उसकी सिसकारियाँ और तेज हो गई।

अब वो कहने लगी- डाल दो मेरे अन्दर और चोद लो मुझे !

मैंने उसकी चूत के छेद पर अपना लंड रखा और हल्का सा जोर लगाया लेकिन मेरा लंड फिसल कर साइड में चला गया।

मैं समझ गया कि पूजा अभी तक अक्षतयौवना है, इसकी सील नहीं टूटी है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी जाँघों को फ़ैलाया और हल्का सा धक्का मारा तो मेरे लंड का आगे का हिस्सा उसकी चूत में चला गया। उसकी चीख निकल गई, मुझसे वो मुझसे बाहर निकालने के लिए गिड़गिड़ाने लगी लेकिन मेरा सब्र अब गायब हो चुका था, मैंने एक और जोर का धक्का लगाया, और मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया।

उसकी सील टूट चुकी थी, वो रो रही थी लेकिन मुझ पर इसका कोई असर नहीं था और मैंने उसके होंठ अपने होंठों में दबाए और फिर एक और जोर का धक्का लगाया। पूरा का पूरा 7 इंच का लंड उसके चूत में उतर चुका था। उसकी चीख निकल गई और वो छटपटाने लगी।

कुछ देर रुकने के बाद मैंने फिर धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किये, थोड़ी देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं उसके चूचों को चूस रहा था और धक्के लगा रहा था, धक्के पे धक्के लगा रहा था, धक्के लगाते लगाते मैं पलट गया और वो मेरे ऊपर आ गई। अब मैं उसे नीचे से चोद रहा था और उसके चूचे मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे और मैं उसको चूम रहा था।

वो सिस्कारियाँ ले रही थी- आह आह !! आ आआह फ़क मी !! सी सिआअह फ़क मी, आआह आह !!

करीब दस मिनट बाद ही वो अकड़ने लगी और चिल्लाने लगी- और तेज़ करो, और तेज़, आई लव यू सो मच, चोद दो मुझे, फाड़ दो चूत को !

इसके बाद वो झर गई। मुझमें अभी भी जोश बाकी था और मैंने धके और तेज कर दिए। करीब 15 मिनट बाद मैं और वो फिर से एक साथ झड़ गये।

मैं उसके ऊपर ही लेट गया, अपना लंड उसकी चूत में ही रहने दिया और उसके चूची मुँह में लेकर लेट गया।

इसके बाद अगले चौबीस घंटे में हम दोनों ने 5 बार अलग अलग आसनों में सेक्स किया और मैंने उसकी गांड भी मारी जिसमें उसको बहुत रुलाया।

इसे मैं अगले भाग में लिखूँगा।

मुझे मेल करके बताइए कि आपको मेरा अनुभव कैसा लगा !

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