पहले प्यार की नशीली चुदाई-1

Pahle Pyar ki Nashili Chudai-1
नमस्कार मित्रो, मैं सेमोन जैसवाल कलकत्ता का रहने वाला हूँ।
मैंने बी.कॉम में ग्रेजुएशन किया हुआ है और फिलहाल अपना खुद का बिज़नेस संभाल रहा हूँ।

मैं दिखने में हल्का सांवला हूँ.. पर जिम जाने से मेरा शरीर गठीला है।

मेरा लण्ड साढ़े छह इंच लम्बा और ढाई इन्च व्यास से थोड़ा ज्यादा मोटा है।

मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे इस साईट की सारी कहानियाँ अच्छी लगती हैं।
यह मेरी पहली कहानी है.. जो आप लोगों के साथ साझा करना चाहता हूँ।

बात तब की है जब मैं स्कूल में पढ़ता था।

हम जिस घर में रहते थे, वो भाड़े का था.. हम किराएदार थे, पर भाग्य के साथ देने पर वो पूरा मकान हमने खरीद लिया था।

आप तो जानते ही हैं दोस्तों कि पुराने मकान पास-पास सटे हुए होते थे।
हमारे बगल के मकान में एक बंगाली परिवार रहता था।
उस परिवार में अंकल, आंटी, उनकी लड़की पायल और उसका छोटा लड़का संदीप थे।

हमारे उनसे अच्छे सम्बंध थे और मैं और पायल हमउम्र होने के कारण अच्छे दोस्त थे।

पायल दिखने में बहुत सुन्दर थी.. एकदम गोरी-चिट्टी.. हाइट 5’4″, उसके नितम्बों तक नागिन से लहराते लम्बे और सीधे बाल.. भूरी मदमस्त आँखें.. रसीले गुलाबी होंठ.. 32-2834 का कटाव लिए हुए मादक जिस्म.. कुल मिला कर वो हसीन परी सी मस्त माल थी।

हम सभी बातें एक-दूसरे से शेयर करते थे और पढ़ाई में भी विषय आदि एक जैसे होने के कारण साथ-साथ पढ़ते थे।

एक बार हम गणित के सवाल साथ में हल कर रहे थे। उस दिन वो ढीली सलवार-कमीज़ पहन कर आई थी.. हल्का सा मेकअप और अच्छा सा परफ्यूम लगाया हुआ था।

दोस्तो.. क्या बताऊँ.. वो उस दिन क्या मस्त माल लग रही थी।

गणित का सवाल हल करने वो बार-बार झुक कर लिख रही थी और उसकी गोरी-गोरी चूचियाँ मेरा ध्यान आकर्षित कर रही थीं.. इसी वजह से मेरा हर बार गलत उत्तर आ रहा था।
वो यह देख कर बोली- अगर ऐसे ही करोगे तो इम्तिहान में गोल-गोल लड्डू मिलेगा।

दोस्तो, मेरा मन तो किन्हीं और लड्डुओं में लगा हुआ था।

उस दिन के बाद से मेरी नीयत बदल गई..
अब अकेले में पायल के बारे में सोच कर मेरा खड़ा हो जाता जाता था।
फिर क्या.. मैं पायल से ज्यादा मिलने लगा.. चोरी-चोरी उसे देखता था.. बाथरूम के छेद से उसे नहाते हुए और कभी कपड़े बदलते हुए..
मतलब अब मैं उसको अधिक से अधिक देखने की कोशिश करने लगा।
उसे भी इसका एहसास होने लगा था कि मैं आजकल इतना बदल सा गया हूँ।

वो पाँच दिसम्बर की रात थी.. उसका जन्मदिन था.. तो मैंने उसे मैसेज कर जन्मदिन की बधाई दी और साथ ही ‘आई लव यू’ लिखकर भेज दिया और जब देर तक उसका कोई रिप्लाई नहीं आया तो मैं मायूस हो कर सो गया।

अचानक से रात को मेरे दरवाज़े पर किसी की दस्तक हुई..
मैं सोच में पड़ गया इतनी रात को कौन होगा।

दरवाज़ा खोला तो देखा पायल थी..
मैंने समय देखा तो रात के ढाई बज रहे थे।
मैं कुछ बोलता इससे पहले उसने मेरे कमरे में घुस कर दरवाज़ा बंद कर दिया और यह कहकर मुझसे लिपट गई- तुमने आज बहुत अच्छा गिफ्ट दिया है मुझे जानू…

उसके मुँह से ‘जानू’ सुन कर मेरे दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं और मैंने कस कर उसे गले लगा लिया।

फिर धीरे से उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया और धीरे-धीरे चूमता रहा।

हम दोनों गर्म होने लगे थे।

अचानक से मेरा हाथ उसकी चूची पर चला गया तो वो चौंक गई और बोली- नहीं.. ये सब मत करो.. यह गलत है।

मैंने उसे समझाया- जानू, प्यार में कुछ भी गलत नहीं होता है..

फिर मैं धीरे-धीरे उसकी चूची दबाने लगा.. वो कसमसाने लगी।

उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी।

हम एक-दूसरे को सहला रहे थे और एक-दूसरे में समा जाना चाहते थे। तभी उसके बाप ने उसको आवाज देना शुरू कर दी..

हम दोनों एकदम से डर गए.. मेरा लण्ड जो एकदम कड़क सा हो चला था.. बिल्कुल मुरझा सा गया.. साँस गले में अटक गई थीं.. कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें।

फिर उसका बाप बिल्डिंग के दूसरे हिस्से में गया.. तो वो जल्दी से मेरे कमरे से निकल कर भागी और कॉमन बाथरूम में चली गई।
फिर उधर से निकल कर बोली- क्या है बाबा.. मैं बाथरूम में थी।

दोस्तो, इस तरह उस समय हम बच गए..
पर अब हमारे प्रेम की नैया चल पड़ी थी..
फोन से मैसेज करने लगे..
मैसेज के जरिए हमने देर तक बात की..
सुबह स्कूल जाते वक़्त या शाम को जब कोई छत पर नहीं होता तो मैं उसे चूमना चालू कर देता..
मौका देख कर उसकी चूचियाँ दबाने लगता।

एक दिन कामदेव ने मेरी सुन ली उसके माँ-बाप किसी रिश्तेदार की शादी में गए और उसके छोटे भाई को उसका मामा ले गया।
वो घर में अकेली थी।

रात में मेरे कमरे के दरवाजे पर फिर से वही दस्तक सुनाई दी..
मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा..
देखा तो सामने मेरी जान खड़ी थी।
उसने हल्का गुलाबी रंग की नाइटी पहनी हुई थी। मैंने उसे अन्दर खींच लिया और बाँहों में लेकर चूमने लगा।

हम एक-दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे.. फिर धीरे से मैंने उसकी चूचियाँ दबानी शुरू की.. वो सिसकारने लगी।

अपना एक हाथ मैं उसके गोल और उठी हुई गाण्ड पर ले गया और ऊपर से ऊँगली फिराने लगा.. वो और गर्म होती जा रही थी।

फिर धीरे से मैंने अपना हाथ उसकी नाइटी में डाल कर उसके रसभरे सन्तरे दबाने लगा।

हम दोनों चूमते-चूमते बिस्तर पर आ गए और फिर मैंने पायल को लेटा दिया और उस पर चढ़ कर उसे चूमता रहा।

फिर नाइटी के ऊपर से उसके चूचे दबाने लगा..
उसके मुँह से बड़ी मस्त कर देने वाली मादक आवाजें आ रही थीं और वो आँखें बंद करके मज़ा ले रही थी।

फिर मैंने उसे उठा कर बैठाया और उसकी नाइटी खोल कर अलग कर दी।

यारों क्या बताऊँ.. मेरे कमरे में हल्की मद्धिम सी रोशनी थी और उसका दूध सा गोरा बदन और उस पर से मद्धिम रोशनी गुलाबी पैंटी और ब्रा किसी के भी होश उड़ा देते..

मेरे लण्ड का तो बहुत बुरा हाल था.. इतना सख्त हो गया था कि दर्द होने लगा था।

फिर मैंने उसके कंधे, गले और कान को चूमना चालू किया.. वो मदहोशी से पागल होने लगी।

वो मुझे इस कदर जकड़े हुई थी कि लगता था मुझे तोड़ देगी।

फिर मैंने ब्रा के ऊपर से उसकी एक चूची दबानी चालू की और दूसरे हाथ से पैंटी के ऊपर हाथ फिराने लगा।

पैंटी उसकी चूत के कामरस से गीली हो गई थी और मादक गंध छोड़ रही थी।

मैं उसकी चूची से होता हुआ उसके पेट चूमते हुए.. नीचे आकर पैन्टी के ऊपर से चूत चाटने लगा।

उसे तो जैसे करंट लग गया.. वो और जोर से आवेश में आवाजें निकालने लगी।

मेरा जोश और बढ़ने लगा.. मैंने और जोर से चूसना चालू किया तो वो ‘इस्सस आआअह स्स्स्स्श्ह्ह्ह’ की आवाजें निकालने लगी।

मैंने दांतों से खींच कर उसकी पैंटी अलग कर दी.. उसने शरमा कर अपने हाथ चूत पर लगा दिए।

मैंने उसकी आँखों में देखा वो एक अजब सा नशा था यारों..

अभी तूफ़ान के आने का इन्तजार था.. क्या हुआ.. क्या चुदाई हो पाई?

इसके लिए आपको मेरे अगले भाग का इन्तजार करना होगा।
आप अपने विचारों से अवगत करने के लिए मुझे ईमेल कीजिएगा।

पहले प्यार की नशीली चुदाई-2

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