मेरी छात्रा की पहली चुदाई

(Meri Student Ki Pahli Chudai)

यह कहानी मैं अपने प्यार दीक्षा के कहने पर लिख रहा हूँ, उम्मीद है दीक्षा की पहली चुदाई आपका लन्ड खड़ा कर देगी।

मेरा नाम इशांत है, मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। हाइट 6 फुट 2 इंच है, दिखने में भी अच्छा हूं, लंड भी भगवान ने बढ़िया दिया है, लम्बा है और मोटा है।
कॉलेज टाइम तक 3-4 लड़कियों की चुदाई कर चुका था पर लन्ड महाराज को शांति मिलती ही नहीं थी।

कॉलेज खत्म हुआ प्लेसमेंट हुई नहीं और मैं जॉब की तलाश में इधर उधर धक्के खा रहा था यह घटना उन्हीं दिनों की है। मेरे एक दोस्त के भाई का ट्यूशन इंस्टिट्यूट है उसने जब मुझे वहां पढ़ाने के लिए कहा. पहले तो मैंने मना कर दिया पर फिर यह सोच कर हामी भर दी कि चलो कुछ नहीं से 8000/- ही बेहतर हैं।

मुझे ग्यारहवीं क्लास को मैथ पढ़ाना था, गिन कर चार स्टूडेंट्स थे पर अपनी एक स्टूडेंट दीक्षा को देखते ही मैं उस पर फिदा हो गया था। इतनी ग़ोरी की छूने से मैली होने का डर… देखने में बिल्कुल अदिति राव हैदरी… पर उससे भी मासूम होंठ इतने लाल कि देखते ही उन्हें चूसने को जी मचलना शुरू कर देता. इस सबके ऊपर से उसकी 5.1 फुट की छोटी सी हाइट के बावजूद उसके मम्मे कम से कम 34डी आकार के रहे होंगे और अप्सरा सी एक हाथ में समा जाने वाली कमर उसे किसी मर्द के लन्ड के लिए कहर बनाते थे।

पहले ही दिन से मैं उसे चोदने के सपने देखने लगा था। पर करता क्या… कोई मौका हाथ ही नहीं आ रहा था.
पर सही ही कहते हैं कि ऊपर वाला जब भी देता है छप्पर फाड़ के देता है।

अक्टूबर अभी शुरू ही हुआ था कि मेरे घर वाले सभी 10 दिनों के लिए घूमने मसूरी चले गए मैं अपनी जॉब के कारण नहीं जा पाया, ऊपर से स्टूडेंट्स के टेस्ट चल रहे थे तो कैसे जाता।
एक दो दिन बाद मुझे दोस्त के भाई ने बुलाया और बताया कि दीक्षा मैथ में फेल हो गयी है और उसकी कमी को पूरा करने के मुझे उसे एक्सट्रा टाइम देना होगा।
हमने दीक्षा के माता पिता से बात की और वो दीक्षा को मेरे घर पढ़ने के लिए भेजने को राजी हो गए। मेरा दिल तो सातवें आसमान पर था क्योंकि मैं जानता था कि मैं पहला किला फतेह कर चुका हूँ।
मैंने जानबूझ कर दीक्षा को सुबह 6 बजे का टाइम दिया।

अगले दिन उसे आना था, मैं 5 बजे ही जाग चुका था पर जानबूझ कर सिर्फ बरमूडा और बनियान पहने बैठा रहा ताकि उसे अपने नागराज के दर्शन करवा के गर्म कर सकूँ।
पूरे 6 बजे घर की डोरबेल बजी और सोने की एक्टिंग करते हुए मैंने घर का दरवाजा खोला.

सामने दीक्षा थी सफेद शर्ट और ब्लू टाइट जीन्स पहने… लन्ड महाराज जो पहले ही जागे हुए थे, अब दीक्षा को सलामी देने लगे।
मैं- ओह दीक्षा तुम? मैं तो भूल ही गया था कि तुम्हें आज आना है।
मैंने अनजान बनते हुए कहा।

दीक्षा- सर… तो मैं वापिस जाऊं?
उसने शर्माते हुए कहा क्योंकि वो मुझे सिर्फ बुरमुडा और बनियान में देख रही थी।

मैं- नहीं नहीं… तुम अंदर आओ, मैं बस दो मिनट में फ़्रेश होकर आता हूँ।
मैंने देखा कि वो कनखियों से मेरे लौड़े को बार देख रही थी। मेरा निशाना सही जगह लग चुका था। मैं समझ गया कि यहाँ बात बनेगी, बस थोड़ी और कोशिश करनी है।
वैसे दीक्षा पढ़ने में काफी अच्छी थी. मेरे लिए यह हैरानी की बात थी कि वो स्कूल टेस्ट में फेल हो गयी है।

मैं फ्रेश होकर आया और मैंने बात शुरू- दीक्षा, तुम इस बार फेल कैसे हो गई?
दीक्षा- पता नहीं सर… इस बार टेस्ट मुश्किल था।
मैं- दीक्षा मुझे पता है तुम होनहार स्टूडेंट हो, यह मुश्किल नहीं हो सकती। तो बताओ बात क्या थी?
दीक्षा- वो… वो… सर… मैं आपको नहीं बता सकती… प्लीज सर, मैं पहले ही परेशान हूँ आप मुझे और परेशान न करो।

उसकी ऐसी बात सुनकर तो मेरा सारा जोश ही ठंडा हो गया। मुझे लगने लगा पक्का इसका कोई बॉयफ्रेंड होगा और उसी से शायद कोई लड़ाई झगड़ा चल रहा होगा। अब कुछ होने की गुंजाइश नहीं बची थी।
मैंने खुद को सामान्य किया और उसे ट्रिग्नोमेट्री पढ़ाने लगा.
क्लास खत्म हुई और वो चली गयी।

मेरा तो दिमाग चकरा रहा था, मैंने खुद से कहा- लड़की गयी हाथ से! ऊपर से फालतू जो पढ़ाना पढ़ा सो अलग।

मैं टीवी ऑन करने के लिए उसका रिमोट टेबल से उठाने लगा तो देखता क्या हूँ पेन स्टैंड के नीचे एक चिट पड़ी थी जिस पर कुछ लिखा था। मैंने चिट उठा ली, उस पर केवल तीन शब्द लिखे थे ‘शाम 6 बजे’
मेरा दिमाग एक बार फिर चक्कर खा गया, समझ में नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है। पर एक बात जो मैं समझ गया वो यह कि दीक्षा जो भी बात करने वाली थी वो उसके लिए काफी मायने रखती थी इसलिए मैं 6 बजे तक कपड़े-वपड़े पहन कर तैयार हो गया।

दीक्षा पूरे 6 बजे आई।
मैंने दरवाजा खोला, उसने पिंक कलर का छोटा सा टॉप पहना हुआ था जो उसकी नाभि तक ही आ रहा था और नीचे शार्ट निक्कर थी सफेद रंग की। उसके घुंघराले बाल उसके गोरे-2 गालों से खेल रहे थे।
मैं उसे देखता ही रह गया…

मैंने उसे अंदर आने के लिए कहा, वो अंदर आ गयी और सोफे पर चुपचाप बैठ गयी। वो कोई बात नहीं कर पा रही थी, मैं कुछ पूछता तो वो हाँ या न में गर्दन हिला देती।

आखिर कुछ देर बाद वो उठकर मेरी बगल में बैठ गयी। उसके बदन की गर्माहट से मेरा बुरा हाल हुआ जा रहा था, लन्ड जीन्स के अंदर फड़फड़ाने लगा था पर मैंने उसे छुआ नहीं। मैं जानता था छोटी सी गलती सब खेल चौपट कर सकती थी।

दीक्षा- सर… मुझे आपसे एक बात करनी है.
मैं- दीक्षा, डरो मत, तुम्हारी हर मुश्किल को सुलझाने में मैं तुम्हारी मदद करूँगा। बताओ क्या बात है?
दीक्षा- सर… सर मैं एक लड़के से प्यार करती हूँ।
उसने रुक-रुककर डरते हुए कहा।

मेरा तो दिल बैठ गया ‘लो… जिस बात का डर था वो ही हुआ!’ पर मैंने खुद से कहा पर खुद को संभाले रखा।
मैं- यह तो अच्छी बात है दीक्षा, इसमें बुराई क्या है? प्यार तो दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ है।

उसकी आँखों में आंसू देख कर मैं उसके पास गया और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए मैंने अपनी बात जारी रखी- दीक्षा, बोलो क्या बात है?
दीक्षा- सर पहले आप प्रॉमिस करो आप नाराज़ नहीं हो जाओगे मेरी बात सुन कर!
मैं- बाबा प्रॉमिस… अब तो बोलो क्या बात है?
दीक्षा- सर… वो और कोई नहीं, आप ही हैं। मैं दिन रात आपके बारे में ही सोचती रहती हूं इसलिए… आई… लव… यू… स्स्स… !
वो अपनी बात भी पूरी न कर सकी कि उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

मैंने दीक्षा को बांहों में भर लिया और उसके गालों पर एक किस की और बोला- दीक्षा, आई लव यू टू!
दीक्षा ने मेरी आँखों में देखा और अपना चेहरा हल्का सा ऊपर उठाया और मेरे लबों को चूम लिया।
“आई लव यू!” उसने फिर कहा उसके इन शब्दों ने मेरे लिए अजीब उलझन पैदा कर दी, एक अजीब सी भावना मेरे दिल में उमड़ पड़ी जो शायद प्यार ही थी।

मेरे हाथ जो उसकी कमर पर थे अपने आप नीचे आ गए। मेरा दिल बैचैन हो उठा, मैंने उसे जाने के लिए कह दिया.
दीक्षा- आप नाराज़ हो गए न… इसीलिए मैं नहीं बता रही थी… प्लीज नाराज़ मत हो ना।
उसकी बच्चों सी मासूमियत ने मेरे अंदर तूफान ला दिया था। एक तरफ मैं उससे प्यार करने लगा था तो दूसरी तरफ मेरी वासना बढ़ती जा रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। जिसके कारण मेरा ग़ुस्सा बढ़ता चला गया और मैं उस पर बरस पड़ा- दीक्षा जाओ यहाँ से… वरना मैं कुछ कर बैठूँगा. तुम्हें पता भी है कि तुमने किस तरह के इंसान से प्यार कर लिया है?
मैंने उसे उसकी बाजू से पकड़ कर हिलाते हुए कहा।
और सोफे पर बैठ गया।

मुझे लगा था वो डर जाएगी और चली जायेगी… पर नहीं, वो जाने के बजाए मेरे पास आ गयी और मेरी गोद में मेरी तरफ मुँह करके बैठ गई उसके विकसित स्तन मेरी मजबूत छाती से टकराने लगे, उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों से पकड़ लिया और जैसे एक माँ अपने बच्चे को चूमती है बिल्कुल वैसे ही चूमते हुई बोली- शोना क्या बात है… बोलो न?
उसके इस प्यार भरे लहजे से मैं और ज्यादा गुस्से और वासना से भर गया और उसकी टॉप को उतार कर फेंक दिया और बोला- यह चाहता हूँ मैं… बोलो दे सकोगी?

मैं सोच रहा था वो गुस्सा होगी, मारेगी या रोयेगी!
पर उसने ऐसा कुछ नहीं किया बल्कि चुपचाप अपनी ब्रा भी खोल दी। उसके गोल-2 स्तन बाहर लुढ़क पड़े।
मैंने उसके एक स्तन के गुलाबी चूचुक को अपने मुंह में ले लिया चूसने लगा.
वो सिसक उठी- आह… माँ…

उसकी सिसकारियों ने मुझे और जोश दिला दिया और मैं उसके खूबसूरत मम्मों पर भूखे भेड़िये की तरह टूट पड़ा और उन्हें कभी चूसता. जब चूसते चूसते थक जाता तो उन्हें आटे की तरह गूंधने लगता।
उसकी कामुक आहें पूरे कमरे में गूंज रही थी।

मैं पूरा गर्म हो चुका था, अब और रुकता तो लन्ड पैंट में ही झड़ जाता। मैंने उसे कमर से पकड़ के उठाया और सोफे पर फेंक दिया और उसे मेरी पैंट खोलने को कहा।
मैं- खोल इसे मेरी जान, इसमें तेरे लिए एक तोहफा है।
दीक्षा- नहीं, मुझे शर्म आती है।
मैं- साली नाटक मत कर, खोल इसे!
मैंने उसकी एक चूची को ज़ोर से मसलते हुए कहा।

वो दर्द से कराह उठी और उसने मेरी बेल्ट खोल दी और रुक गयी।
वो डर भी रही थी, शर्मा भी रही थी और झिझक भी रही थी.

मैं समझ गया इसकी तो पहली बार है इसलिए मैंने थोड़ी चालाकी दिखाई और उसे सोफे पर लिटा दिया और और खुद भी उस लेट गया और उसके गालों पर किस करते हुए मैंने काफी बार उसे ‘आई लव यू!’ कहा।
धीरे-2 उसका डर एक बार फिर मुस्कुराहट में बदल गया, उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया। आज तक मैंने उसे वासना की नज़र से ही देखा था पर आज मैं देख पा रहा था कि सच में कितनी सुंदर है वो!

मैंने उसके होंठों पर हल्की सी किस की, उसने भी वैसा ही जवाब दिया और मेरे होंठ चूमने के लिए वो हल्की सी ऊपर उठी.
पर मैं पीछे हट गया… उसने फिर कोशिश की, मैं फिर पीछे हो गया… पर फिर मैंने नीचे होकर उसके होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिया.

दीक्षा किस करने में अच्छी थी, सेक्स उसमें नेचुरल था. हम दोनों के होंठ एक दूसरे में गुत्थमगुत्था हो गए, हमारी जीभें एक दूसरे के साथ कबड्डी खेलने लगी।
यह मेरी लाइफ की बेस्ट किस थी जिसके बाद मैं जान गया था कि दीक्षा ही वो लड़की थी जिसे मैं लाइफ पार्टनर बनाऊंगा।

मेरे हाथ उसके भरे-पूरे मम्मों को फिर सहलाने लगे थे पर इस बार प्यार से।
मैं धीरे-2 नीचे हुआ और उसकी निक्कर को खोल दिया। मैंने एक नज़र उसकी तरफ देखा तो उसने हामी में सिर हिला दिया।
मेरी तो खुशी का ठिकाना ही न रहा… मैं इतने जोश में आ गया कि अगले ही पल उसके बदन से उसकी निक्कर और पैंटी अलग होकर नीचे ज़मीन पर पड़े थे।

“आप तो बड़े बेसबरे हो?” उसने शर्माते हुए कहा।
“दिकू… बेसबरा मैं नहीं, कोई और है जो इस समय मेरी पैंट में फड़फड़ा रहा है और मुझे सता रहा है” मैंने अपनी जीन्स उतारते हुए कहा।
“चल झूठे… ऐसा कोई नहीं है.” उसने बच्चों की खिलखिला के कहा।

मेरी जीन्स उत्तर चुकी थी, मैं सिर्फ कच्छे में था। मैं कच्छा भी उतारने जा रहा था कि उसने मुझे रुकने का इशारा किया अपना सर हिला के।
मैं रुक गया, वो उठी और सोफे पर घुटनों के बल बैठ गयी. उसने अपने दोनों हाथ आगे किये और मेरे कच्छे को नीचे कर दिया।

लेकिन जैसे ही उसने मेरे कच्छे को नीचे किया मेरा मूसल जैसा लन्ड उसके गालों से जा टकराया।
“ओह माई गॉड!” उसके मुँह से यकायक निकल गया।
“क्या हुआ दिकू?” मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
“कितना बड़ा है… बिल्कुल मोटे डंडे जैसा!”

“क्या कितना बड़ा है?” मुझे उसे छेड़ने में मज़ा आने लगा था
“आपका वो और क्या!”
“वो क्या दिकू?”
“आपका नुन्नू और क्या!”
“नुन्नू? वो तो बच्चों का होता है।”
यह कहते हुए मैंने उसे सोफे पर लिटा और उसकी टाँगें फैलाकर उनके बीच घुटनों के बल बैठ गया। बिल्कुल छोटी सी गुलाबी रंग की बुर थी, उसका छेद नज़र ही नहीं आ रहा था, ऐसे लग रहा था जैसे उसकी चूत की फांकों के बीच छेद ही न हो।

जैसे ही मैंने उसकी बुर पर लौड़ा रखा हम दोनों को ज़ोर दार करंट लगा। उसकी छोटी सी बुर पर मेरा घोड़े जैसा लन्ड अजीब लग रहा था, एक पल के लिए तो मुझे भी लगा कि नहीं जाएगा। उसके मोम्मों को कस के पकड़ लिया, वो बिल्कुल वैसे हो दिखने लगे जैसे कि गुब्बारा बीच में से दबाने पर दिखता है।
मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया पर लन्ड अंदर जाने की जगह ऊपर को फिसल गया। एक दो और धक्के लगाए पर चूत ने तो लौड़ा लेने से साफ इंकार कर दिया।

मैं यह बिल्कुल नहीं चाहता था कि घोड़ी बिदक जाए… इसलिए मैंने हाथ से उसकी चूत की फांकों को थोड़ा खोला और टोपे को किसी तरह थोड़ा सा फंसा दिया। वो आँखें बंद करके लेटी हुई थी, जैसे बच्चे इंजेक्शन लगने से पहले आँखें बंद कर लेते हैं।

मैंने उसके कंधों को मजबूती के साथ पकड़ लिया और एक कसके धक्का लगाया. पक की आवाज़ के साथ मेरा तीन इंची टोपा उसकी फुद्दी में घुस गया।
वो दर्द से बिलबिला उठी- आ आ ओह माँ मर गई!
पर उसने ‘निकालो विकालो…’ जैसी कोई चीज़ नहीं कही बल्कि अपनी टाँगों को मेरे चारों ओर कस लिया और मुझे बाहों में भर लिया।
मैं दर्द को उसके चेहरे पर साफ देख सकता था।

मैं कुछ देर के लिए रुक गया मेरे लन्ड का टोपा अभी भी उसकी छोटी सी चूत में फंसा हुआ था।
मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया और उसके पसीने से भीगे हुए बालों को सँवारते हुए कहा- बस शोना बस… हो गया!

कुछ मिनट के लाड़ से वो कुछ सामान्य हुई तो मैंने एक और धक्का दिया पर लन्ड कुछ ही अंदर जा पाया। ऊपर से उसकी साँसें तेज़ हो गयी, आंखें ऊपर चढ़ गई… उसने इतने ज़ोर से मुझे हग किया कि उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। मैं समझ गया कि ये नाजुक कली और नहीं सह पाएगी… पर मैं क्या करता लन्ड तो अभी तक लगभग बाहर ही था।

मैंने एक आखिरी कोशिश करने की सोची और पूरी ताकत से एक झटका पेल दिया और लन्ड सीधा जाके उसकी चूत की झिल्ली से टकराया पर शुक्र है भगवान का कि उसकी सील नहीं टूटी, वरना बेचारी का क्या होता ये कोई नहीं जानता।
“आ… आ… ओह… माँ…” उसकी सिसकारियाँ पूरे कमरे में एक बार फिर गूँज उठी, उसका रंग सफेद पड़ गया झटका हल्का सा भी तेज होता तो पक्का वो बेहोश हो जाती।

अब मैंने उसके कंधे छोड़ दोबारा उसके मम्मे पकड़ लिए और आधे लन्ड से ही हल्के-2 झटके देना शुरू कर दिए. लन्ड उसकी चूत में गर्मी से पिघला जा रहा था, लग रहा था अब गया तो अब गया।
पर झटके देने जारी रखे मैंने… मुझे लग रहा था मैं पहले झड़ जाऊंगा पर वो 5-6 मिनटों में ही झड़ गयी उसकी चूत रस से लबालब भर गयी।
मैंने दो चार घस्से ही और लगाए कि मेरा भी टाइम आ गया। मैंने जल्दी से लन्ड बाहर निकाला और उसके पेट पर झड़ गया।

हम दोनों ही इतने थक चुके थे कि वहीं सोफे पर ही सो गए।

एक घंटे बाद मेरी नींद खुली, वो अभी सो रही थी। मैंने उसे जगाया और उठा के बाथरूम में ले गया वहां हमने गर्म पानी का शावर लिया, फ्रेश हुए।

समय काफी हो चुका था, वो पहले ही काफी लेट थी। हमने जल्दी से कपड़े पहने एक को किस करके विदा ली।
मैं उसे जाते हुए देख रहा था… वो हल्की-2 लंगड़ा के चल रही थी।

अजीब सी प्यार भरी अनुभूति मेरे दिल को हुई कि आखिर कोई सच्चा प्यार करने वाला मुझे भी मिल गया।
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