मैंने भी चूत चुदवाना सीखा-1

(Maine Bhi Choot Chudwana Seekha- Part 1)

दोस्तो, मैं आपकी अपनी सीमा सिंह… आज मैं आपको एक और कहानी सुनाने जा रही हूँ। इस कहानी में मैं आपको बताना चाहती हूँ कि मेरे दिल में सबसे पहले सेक्स का ख्याल कैसे आया और कैसे मैं धीरे धीरे करके सेक्स के प्रति आकर्षित हुई।

बात काफी पुरानी है, एक दिन मैं स्कूल से वापिस आ रही थी, पापा के पीछे स्कूटर पर बैठी थी। रास्ते में मैंने एक जगह कुत्ते और कुतिया को सेक्स करते देखा।
भीड़ के कारण स्कूटर 2 मिनट के लिए रुका, और वो दो मिनट मैं उन कुत्ते और कुतिया को ही देखती रही। कुतिया आराम से खड़ी थी, और कुत्ता पीछे से धक्के पे धक्के मार रहा था।
हम घर आ गए।

रात को सोते हुये मुझे वही सपना आया, मैंने फिर कुत्ते और कुतिया को सेक्स करते देखा। मेरी नींद खुल गई, मैं सोचने लगी, ऐसे ये क्या करते होंगे।
इतना तो समझ में आ गया था कि कुत्ते ने अपनी पेशाब वाली जगह, कुतिया के पीछे डाली थी। मैं सोचने लगी, क्या इंसान भी ऐसे ही करते होंगे?

पहली बार अपनी चूत में उंगली घुसाई

मैंने अपने दायें हाथ की एक उंगली अपनी छोटी सी चूत पे रखी, अभी मेरी ये चूत नहीं बनी थी, पता नहीं तब इसे क्या कहते थे। अभी बाल नहीं उगे थे, मैंने अपनी उंगली अंदर डालने की कोशिश की, थोड़ी सी तो अंदर चली गई, मगर ज़्यादा नहीं गई।
मुझे लगा जैसे आगे मेरा सुराख और तंग है, जिसमें मेरी उंगली नहीं घुस सकती।

एक बार मैं अपने मामा के घर गई थी, तब रात को सोते हुये मेरे मामा के लड़के ने मेरे बूब्स दबाये, मेरे होंठ चूमे, और मेरी चूत को भी छुआ।

सच कहती हूँ, मैं तो पत्थर की हो गई, बहुत मज़ा आया। मैं चाहती थी कि वो और छूए, मगर वो बस थोड़ा सा सहला कर ही सो गया।
आधी रात के करीब मैं उठी, बाथरूम गई, जब वापिस आई, तो मैंने भी उसके साथ छेड़खानी करने की सोची और उसके पाजामे के ऊपर
से ही उसकी लुल्ली पकड़ कर देखी।

मेरे थोड़ा सा पकड़ने से ही वो सख्त हो गई, शायद भैया जाग गए, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने पाजामे में डाल दिया और मुझे अपनी लुल्ली पकड़ा दी।

गरम और सख्त… मैंने पकड़ तो ली मगर मन ही मन डर रही थी।

अब जबकि हम दोनों जाग रहे थे तो मामा के लड़के ने मेरी स्कर्ट ऊपर उठा कर मेरी चड्डी उतार दी, और मेरे दोनों बूबू टॉप से बाहर निकाल लिए, उसने दोनों बूबू दबाये और चूसे।

मैं उसकी लुल्ली पकड़े चुपचाप लेटी रही।

मेरा पहला चुम्बन

उसने अपना पाजामा उतारा और मेरे ऊपर लेट गया, मेरे होंठों में अपने होंठो में लेकर चूसा।

मुझे भी मज़ा आ रहा था तो मैंने भी उसका पूरा साथ दिया।
उसने मेरी टाँगे खोल कर अपनी लुल्ली मेरी चूत पर रखी मगर मैंने उसे कहा- आगे से नहीं, पीछे से करो!
क्योंकि मेरे दिमाग में सेक्स की पोजीशन वही कुत्ते और कुतिया वाली थी।

मैं उल्टी हो कर घोड़ी बन गई और वो पीछे से मेरे अंदर डालने की कोशिश करता रहा, मगर दोनों अंजान होने के कारण कुछ भी न कर
पाये, न वो डाल पाया, न मैं डलवा पाई।

उसको यह नहीं पता था कि चूत में डालते हैं, वो मेरी पोट्टी वाली जगह में डालने की कोशिश करता रहा और वहाँ उसकी लुल्ली घुसी नहीं।
काफी मशक्कत के बाद हम दोनों सिर्फ किसिंग करके और मेरे बूबू से खेल कर सो गए।

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