माँ की चुदाई देखी पापा के दोस्त से

(Maa Ki Chudai Dekhi Papa Ke Dost Se)

दोस्तो मेरा नाम सोना झा है। मैं इस साल 19 साल की हुई हूं। मेरे पापा दुबई में रहते हैं और यहां मैं और मेरी मां ही होती है। हमारा घर टाउन से थोड़ा दूर है क्योंकि हम पहले किराए के मकान में रहते थे लेकिन अब नया घर ले लिया है। अभी इधर ज्यादा आबादी नहीं है, 2-3 घर ही बने है।
पापा को दुबई में 3 साल हो गए हैं और अब 2 साल बाद वो वापस आएंगे। पापा के बाहर रहने से मम्मी अकेली सी पड़ जाती थी। मैं तो स्कूल में ही व्यस्त रहती हूं।

अब बात करती हूं मैं अपने साथ हुई सच्ची घटना की… जो हो सकता है आपको अजीब सा लगे… मगर बिल्कुल सच है।

अब मैं अपने बारे में बताती हूं। मैं 5 फीट 3 इंच की हूँ, बहुत गोरी त्वचा के साथ दिखने में मेरा अच्छा चेहरा है। फिगर की बात करू तो 32-28-32 होगी। लड़कों की भाषा में कहूं तो मैं एक अच्छा खासा माल हूं। अच्छे अच्छों का मुझे देख कर खड़ा हो जाता है; सब मुझे खा जाने वाली नजरों से देखते हैं।

यह बात आज से लगभग एक साल पहले की है जब मैंने जवानी में कदम रखना शुरू ही किया था यानी 18 साल की हो गयी थी, उन दिनों मेरी चूत पे बाल आ रहे थे।

हमारे पुराने मोहल्ले में पापा के जिगरी दोस्त सतबीर अंकल रहते थे तो वो कभी कभी हमें देखने मिलने हालचाल पूछने चले आते थे।

फिर एक दिन ऐसा आया जिसने मेरी ज़िन्दगी बदल डाली। मैं सतबीर अंकल को अच्छा इंसान समझती थी लेकिन मेरे मन का यह भ्रम आज टूटने वाला था।

वो 14 फरवरी यानी वेलेंटाइन डे का दिन था मैं स्कूल से वापस आयी अपने घर। वहाँ देखा तो घर का दरवाज़ा खुला हुआ था जो कि बहुत अजीब लगा मुझे क्योंकि जब मां घर पर होती है तो दरवाजा बंद करके रहती है।
मैं अंदर गई और अंदर से दरवाजा लगा लिया और स्कूल से आकर मैं जरूर नहाती हूँ तो मैं नहाने चली गई।

उन दिनों मुझे सेक्स के बारे में कुछ खास पता नहीं था।

नहा के जब मैं निकली तो मैंने केवल टॉवेल लपेट रखा था तभी मुझे मां की हल्की चीख सुनाई दी। मुझे लगा कि घर में कोई घुस तो नहीं आया है… यह सोच कर मैं मां के कमरे के तरफ भागी। मैं टॉवेल में ही मां के कमरे के सामने पहुंची।

वहां जो मैंने देखा… उसे देख कर तो जैसे मेरे होश ही उड़ गए।

मां के कमरे का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था जिसमें से मैंने देखा कि मेरी मां बिल्कुल नंगी होकर लेटी हुई थी और सतबीर अंकल मेरी मां की चूत बजाये जा रहे थे। मेरी मां नंगी बहुत खूबसूरत लग रही थी बिल्कुल किसी परी की तरह।
मैंने अपनी मां को पहले कभी ऐसे नहीं देखा था ये सब मेरे लिए बिलकुल नया था।

मुझे बुरा सा लगा और मैंने झट से दरवाजा खोल दिया और तभी मेरी मां मुझे देख कर चौंक गई।
मेरी मां ने मुझे देख के झेंप के अपनी नज़रें झुका ली.

तब मैंने कहा- मां ये सब क्या है?
मां के पास मेरे सवाल का कोई जवाब नहीं था।
कुछ पल वहां खामोशी छाई रही।

अचानक मां ने मुझे अपने पास बुलाया. अभी भी सतबीर अंकल का लन्ड मेरी मां की चूत में ही था।

मैं डरते डरते मां के पास गई और उनके बगल में बैठ गई। मां ने मेरी सर पर हाथ फेर कर कहा- देख बेटी, तुम्हारे पापा यहां काफी समय से नहीं हैं और मेरी जवानी बर्बाद हो रही थी इसलिए मैंने ये सब किया। तू तो समझदार लड़की है मेरी… तू भी जवान हो रही है, तेरा भी मन करता होगा ऐसा करने का?
मैंने कहा- मुझे नहीं करना ये सब।

तो मां ने सर पर हाथ फेरते हुए कहा- आज नहीं तो कल… ये मजा हरेक व्यक्ति लेता है बेटी… तू भी लेगी एक दिन… और वैसे भी तू भी इतनी खूबसूरत है, जवान है तुझे भी तो ऐसे प्यार करने वाला शख्स चाहिए।
मैं उनकी बातें सुनना नहीं चाहती थी मगर उनके बोलने के अंदाज से मैं उनकी बातें सुनने को मजबूर हो गई थी।

मां ने कहा- जवानी कुछ दिन की ही होती है मेरी बेटी… एक बार जवानी ढल गयी तो उसके बाद कोई हाथ तक नहीं लगाएगा… इसलिए अपनी मस्तानी जवानी को बर्बाद मत करो।

मां बात करते हुए मेरी जांघों को सहलाने लगी जिससे मुझे बहुत अजीब सा और अच्छा लगने लगा।

मेरी मां अपनी ही बेटी की चुदाई की बात किए जा रही थी और मैं चुपचाप उसे सुन रही थी।

अब सतबीर अंकल ने भी मेरी जांघों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मैं उन दोनों को रोकना चाहती थी मगर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

इधर सतबीर अंकल ने मेरी मां की चूत फिर से बजानी शुरु कर दी। मेरी मां की चूत को देख कर लग रहा था कि वो आज बहुत चुदी है।

अब मेरी मां ने धीरे से मेरा तौलिया खोल दिया और मेरी नाभि को उंगली से सहलाने लगी। मैं उन दोनों के सामने मतलब मेरी माँ और उनके यार के सामने अब नंगी हो चुकी थी और दोनों मेरे बदन पर हाथ फेरने लगे।
मैं चाह कर भी उन्हें नहीं रोक पा रही थी।

अब सतबीर अंकल ने मां से कहा- यार, तुमने अपनी बेटी की चूत बहुत अच्छी बनाई है।
यह कह कर सतबीर अंकल ने मेरी चूत चाटनी शुरु कर दी। अंकल का लंड अभी भी मेरी माँ की चूत में ही था. मेरी माँ धीरे धीरे अपने कूल्हे उछाल उछाल कर चुत चुदाई का मजा लगातार ले रही थी.

मैंने अपनी मां की तरफ देखा तो मां बोली- घबराओ मत बेटी, मैं हूं ना… तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।
अब सतबीर अंकल ने मेरी मां कि चूत में वीर्य गिरा कर अपना लन्ड बाहर निकाला। उनका लंड करीब आठ इंच लम्बा था। वो लंड देख कर मैं डर गई!

तो मां ने कहा- घबराओ मत बेटी, कुछ नहीं होगा, मुझे देखो कुछ हुआ क्या?

चाट चाट कर सतबीर अंकल ने मेरी चूत गीली कर दी थी।
मां ने कहा- अब मेरी बहादुर बेटी अपने अंकल का लन्ड लेकर दिखायेगी।
मैंने पूछा- मां दर्द होगा क्या?
मां बोली- मुझे दर्द हुआ क्या? नहीं ना!

मां के इस बात पर भरोसा करके मैंने खुद को सतबीर अंकल को सौंप दिया।

अब माँ ने मुझे अपने बगल में लिटा लिया, अंकल मेरी नंगी माँ के बदना के ऊपर से हट कर मेरे नंगे बदन पर आ गए, उनका लंड मेरी दोनों टांगों के बीच में घुसा जा रहा था तो मैंने अपने पैर फैला कर उनके लंड का स्वागत किया।
अंकल ने मेरे दोनों हाथ फैला दिए और जोर से दबा दिया और अपना लन्ड मेरी बेचारी चूत के ऊपर घिसने लगे।

मेरी कामुकता बढ़ने लगी, काबू से बाहर होने लगी, मैंने मां को कहा- मां मैं मर जाऊंगी… मुझे लंड चाहिए।

मेरे इतना कहते ही अंकल ने अपना लंड मेरी चूत के छेद पर निशाने पर लगाया और एक झटका मारा और मेरी चीख निकल गई.
तो मेरी नंगी माँ ने मेरा मुंह दबा दिया, मां ने कहा- मेरी बहादुर बेटी, बस एक बार दर्द होगा, फिर उसके बाद कुछ नहीं होगा मम्मा है ना तुम्हारे साथ।

माँ की बात सुन कर मैं थोड़ी शांत हुई पर मेरी चूत में भयंकर जलन हो रही थी. मगर मेरी माँ मेरे साथ में थी तो मैंने कुछ नहीं कहा।

जब दर्द कम हुआ तो अंकल ने मेरी चूत मारनी शुरू कर दी, अब मुझे भी मजा आने लगा और मैं बोलने लगी- अंकल और तेज़… फाड़ दीजिए इसे! मुझे और चाहिए!

मेरी बातें सुन कर मां हसने लगी और बोली- सतबीर इसे और दो। पूरा लंड घुसा दे मेरी बेटी की चूत में!
फिर क्या था… अंकल ने अपना बचा खुचा लंड भी मेरी चूत की गहराई में पेल दिया जिस से मुझे और दर्द होने लगा लेकिन अंकल बेधड़क मुझे चोदते चले गए और मेरी नंगी माँ मेरे पास लेती मुस्कुराती हुई अपनी जवान बेटी को अपने बाप की उम्र के आदमी से चुदती देखती रही.

करीब दस मिनट धकापेल मुझे चोदने के बाद अंकल की गति और तेज़ हो गई तो मां ने कहा- अंदर ही… अंदर ही।
इससे पहले मैं कुछ समझ पाती, मेरी चूत में अंकल का वीर्य आ गया था जिससे मुझे बहुत राहत मिली।
अब अंकल ने मुझे चूमा और फिर अपना बड़ा सा लंड निकाला और बोला- मजा आया बेटा?

मैंने शर्माते हुए कहा- जी अंकल, बहुत मजा आया।

फिर तभी मां के फोन पर पापा का फोन आ गया तो माँ ने फोन स्पीकर पे कर दिया.
तो पापा ने कहा- सतबीर मिलने आ जाता है या नहीं कभी कभार?
तो मां ने कहा- हाँ, कभी कभी आ जाते हैं हालचाल पूछने के लिए।

अब मेरे बेचारे पापा को क्या मालूम था कि उनकी खूबसूरत बीवी और प्यारी सी नन्ही बेटी उनके जिगरी दोस्त, जिस पे उनको काफी भरोसा है, उसके लन्ड का शिकार बन चुकी है और अभी भी उनके पत्नी और बेटी की चूत में उनके जिगरी दोस्त का वीर्य भरा पड़ा है।

थोड़ी देर बाद अंकल मेरे तौलिये से अपने लंड को साफ़ करके, कपडे पहन कर चलने लगे तो मैंने कहा- डियर अंकल जी, अब कब आओगे?
तो उन्होंने हंस कर कहा- जब तुम्हें मेरे लंड की जरूरत हो तो बुला लेना!
मेरी मां अब मेरी चूत देख कर बोली- मेरी बेटी, अब तू जवान हो गई है। हमारी सबसे बड़ी ताकत है हमारी चूत… जिसके लिए ये मर्द कुछ भी कर सकते हैं।

फिर मां बोली- अब बता, आज जो कुछ हुआ, इसमें कुछ गलत है क्या?
मैंने कुछ नहीं कहा और अपनी चिपचिपाती चूत को धोने बाथरूम में चली गई।

उसके बाद तो हफ्ते में तीन चार बार सतबीर अंकल हम दोनों माँ बेटी को चोदने आ जाते थे और मेरे लिए अच्छे अच्छे तोहफे भी लाते थे.
अंकल अब जब भी आते तो पहले मुझे ही चोदते थे, मेरे लिए ही तोहफे लाते थे तो मेरी माँ अब मुझसे जलने लगी थी, मुझे अपनी सौत मानने लगी थी.
मेरी माँ अब अंकल को घर आने से मना करने लगी. लेकिन माँ को भी लंड की जरूरत थी तो वो अब मेरे साथ एडजस्ट करने लगी थी. कभी कभी मैं ही अंकल को कहा देती- अंकल, आज आप मम्मी को पहले चोद दीजिये.
अंकल भी मेरी बात मां लेटे थे और मेरी माँ की चुदाई कर देते थे.

उसके बाद भी बहुत कुछ हुआ… वो सब फिर कभी मौक़ा लगा तो बताऊँगी.

तो यह थी मेरे साथ हुई सच्ची घटना… आप लोगों को कैसी लगी, मेल जरूर कीजिएगा।
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