मेरी अंतरंग डायरी: ग्रुप सेक्स में कौमार्य विसर्जन-1

(My Intimate Diary: Loosing Virginity In Group Sex- Part 1)

मेरा नाम निखिल मल्होत्रा है. मेरे डैड एक सफल बिज़्नेसमैन हैं. जब मैं छोटा था, तभी मेरे मम्मी की मृत्यु हो गयी. मेरे डैड बहुत बिज़ी रहते थे तो मेरी पढ़ाई के लिए मुझे बोरडिंग स्कूल भेज दिया गया. बोरडिंग स्कूल के ससख्त अनुशासन के कारण मेरा मन कभी वहाँ लगा नहीं. वहाँ कुछ पसंद था, तो स्पोर्ट्स. बॉक्सिंग मुझे बहुत पसंद था. अपनी फ्रस्ट्रेशन दूसरों पे निकल पाता था. शुरू से फिज़िकल आक्टिविटी में इन्वॉल्व होने के कारण मैं बहुत ही स्ट्रॉंग था बाकी लड़कों से.

यह तो रहा मेरा बचपन, अब मैं घर वापस आ गया था. डैड ने मेरी वापसी के खुशी में बड़ी पार्टी रखी थी. शाम को पार्टी शुरू हुए, बहुत से लोग आने लगे, पापा के फ्रेंड्स और उनकी परिवार. सब मेरे से बहुत ही गर्मजोशी से मिल रहे थे. डैड और उनके दोस्त थोड़ी देर बाद ड्रिंक्स और अपनी बातों में बिज़ी हो गये. अब मैं हमउम्र लोगों के बीच में था. सब मेरे से बड़ा फ्रेंड्ली बात कर रहे थे. स्पेशली गॅल्स कुछ ज़्यादा ही एग्ज़ाइटेड थी मेरे से बात करने को. मुझे इतने अटेंसन की आदत नहीं थी, बाय्स हॉस्टल में पढ़ने के कारण लड़कियों के साथ पार्टी की वेसी आदत नहीं थी. वैसे मैं कोई वर्जिन नहीं था,लेकिन यहाँ का माहौल कुछ नया था.

खैर जब इसकी बात हो ही गयी तो मैं अपनी वर्जिनिटी लूज़िंग की कहानी से शुरू करता हूँ.

हम तीन दोस्त थे पक्के मैं, प्रभु और कीकु. हम सारे स्कूल की रग्बी टीम में थे, तीनों की काफ़ी बनती थी. स्ट्रिक्ट बाय्स हॉस्टल में रहने के कारण हमारी लड़कियों से मेल जोल नहीं था लेकिन उमंगें बहुत थी जैसे किसी भी किशोर की होती हैं. कीकु अपने चचेरे भाइयों से खूब खुला हुआ था. उसके 18वें जन्मदिन पे उसके एक भाई ने उसे कॉल करा, बोले- भाई बड़े हो रहे हो, तमन्नाएँ मचल रही होंगी. कुछ किया या नहीं? या भाई की नाक कटाएगा?
कीकु हंसते बोला- क्या भाई, पापा ने बाय्स हॉस्टल में डाल दिया, गॅल्स को ताड़ने भी शहर जाना पड़ता है.

उसके भैया बोले- टेन्शन ना ले भाई के होते… खानदानी परंपरा जारी रहेगी. 18 में भाई के वर्जिनिटी जानी चाहिए.
कीकु- क्या भाई, कैसे? अच्छा मज़ाक करते हो?
भैया- तू किसी तरह हॉस्टल से निकल, रूम और लड़की का इन्तजाम मैं कर दूँगा.

यह सारी बातें कीकु ने ग्रुप में बताई. वो बोला- मेरी फट रही है, तुम लोग क्या बोलते हो. तुम लोग भी आओ, तो मैं बोलता भाई को!
हम लोग बोले- नेकी और पूछ पूछ… सारे भाई एक दिन ही वर्जिनिटी तोड़ते हैं.

रविवार को हमें शाम को बाहर जाने की अनुमति होती थी मगर नौ बजे से पहले वापस आना होता. हम सारे रग्बी मॅच खेलने के बाद नहा धोकर निकले. कीकु के भाई ने पहले से सारी डीटेल व्हाट्सऐप कर दी थी. हम तीनों पहुँचे होटल, मगर जैसे जैसे अंदर जा रहे थे, डर भी लग रहा था.

कीकु ने भाई के दिए नंबर पे कॉल किया. उधर से एक लड़की की आवाज़ आई- हाय! आई एम रूबी, कौन बोल रहे हो?
कीकु काँपते बोला- कीकु हियर!!
रूबी- मैं आपकी ही काल की प्रतीक्षा कर रही थी, रूम नम्बर 305 में आ जाओ!

जोश में आकर हम पहुँच तो गये, लेकिन हमारे पसीने छुट रहे थे.
प्रभु बोला- भाई ! ठीक नहीं लग रहा, चलते हैं वापस!
कीकु बोला- फट्टू, तेरी हमेशा फटी रहती है. चल चुपचाप!
मैं और प्रभु कीकु के पीछे चल पड़े.

तनाव व उत्तेजना के चलते हम तीनों रूम पे पहुँचे. कीकु ने डोर नॉक किया. अंदर से सेंडल की खट-खट की आवाज़ हमारी ओर आते सुनाई दी. हमारी धड़कनें उसकी आवाज़ के साथ बढ़ रही थी.
दरवाजा खुलते देखा, एक गोरी लंबी हॉट लड़की, बड़े बड़े बूब्स और कमाल का फिगर. लाल गाउन उसके गोरे जिस्म पे कमाल लग रही थी.

वो हमें देखते हँसने लगी. बोली- अरे तुम तो छोटे हो, अंदर आओ पहले!
वो आगे बढ़ी, हम पीछे पीछे चले उसके!

उसकी कमर ऐसे मटक रही थी, उफ्फ. उसकी गाउन उसकी गांड पे फिसल रही थी. उसके गोल गोल गांड देख के ही मेरा दिमाग़ गरम हुए जा रहा था. ऊपर से उसकी पतली कमर.

वो बेड पे बैठ गयी, बोली- कभी किया है तुमने?
कीकु के पसीने छूट रहे थे, बोला- नहीं. पहली बार है.
रूबी बोली- हां, तुम्हारे भाई ने बताया था, बोला तीन लड़के हैं. ज़रा जवानी के मज़े करा दो उन्हें!

कीकु काँपते बोला- तुम अकेली हो.
रूबी हँसी- तुम नौसीखियों के लिए मैं अकेली काफ़ी हूँ.

मैं चुपचाप उसे देखे ही जा रहा था. भरे भरे बूब्स, दबाने को मन कर रहा था. रूबी ने मेरी ओर देखा, मेरी आखें उस से मिल गयी. वो मुस्कुराई- बड़ा तगड़ा है रे तू बच्चे!
उसके बच्चा बोलने से मुझे गुस्सा आ रहा था.
मुझे तमतमता देख मुझे और भड़काया- पता भी है कैसे शुरू करना है. टेबल में दूध पड़ी है, पी ले. हा हा हा!!!
मेरा दिमाग़ गरम हो चुका था. मेरा डर चला गया था और उत्तेजना बढ़ी जा रही थी, मैं बोला- दिखाता हूँ.
आगे बढ़ के उसे दबोच लिया बांहों में मैंने!
वो हँसने लगी.

उसकी पतली कमर मेरी पकड़ में थी. उसका चेहरा मेरी आँखों के सामने. मेरा चेहरा लाल हो रहा था वासना से… लग रहा था, चेहरे से आग निकल रही हो. मेरा लौड़ा उसके पेट से सटते ही फनफना उठा.
मैंने उसके होंठों की ओर देखा, लाल लिपस्टिक से और सेक्सी दिख रहे थे. मैंने अपने होंठ उसके होंठों से मिला दिए, मेरा पहला किस. मैं ज़ोर ज़ोर से उसके होंठ चूमने लगा. लिपस्टिक का स्वाद ज़ुबान पे आने लगा. मैंने उसके मुँह के अंदर अपनी जीभ डाल दी और उसे ज़ोर से अपनी ओर भींच लिया. उसके बूब्स मेरे छाती से चिपक गये. सारे शरीर में करेंट सा दौड़ गया.

उसने अपना चेहरा हटाया- वाह रे, किस पे प्रैक्टिस की तूने?
कीकु बोला- क्यूँ बे प्रभु, तू इसका रूमी है ना?
हम सब हँसने लगे.

माहौल गरम तो था, मगर कंफर्टबल हो गया था. उसने मुझे अपने से अलग किया, बोली- बैठो यहाँ… मैं तुम्हें एक जवान लड़की की खूबसूरत जिस्म का दीदार कराती हूँ सबसे पहले!

हम बेसब्र सोफे पे बैठ गये. रूबी थोड़ा पीछे हट के झुकी, अपना सैन्डल निकालने को… उसकी वक्षरेखा देख के हम सब का लौड़ा तन गया. उसने सैन्डल निकाल के साइड किया और हमारी तरफ देखा. हमारे पैंट में तने लन्ड देख के वो हँसी, बोली- लड़को… इतने में यह हाल, पूरा देख लिया तो पैंट ना फट जाए?

वो अपनी पीठ हमारी तरफ करके खड़ी हो गयी. बैक पे हाथ ले जाके गाउन की ज़िप नीचे करना शुरू करा. फिर अपनी बांहें गाउन से निकाली, गाउन धीरे से नीचे सरकाया. उसकी पूरी बैक अब हमें दिख रही थी. उसका गोरा खूबसूरत बदन और उसकी पिंक ब्रा. हमारी कामवासना बढ़ रही थी.
उसने अपना गाउन धीरे धीरे अपनी चौड़ी गांड से नीचे सरकाना शुरू करा. जैसे ही उसका गाउन उसके गांड से नीचे गया, उफ़, क्या नज़ारा था. रूबी की गोल गोल गांड हमारी तरफ थी, उसके बीच में पतली पैंटी घुसी हुई.

गाउन निकाल वो हमारी ओर मुड़ी… हमारी नज़र उसकी पिंक ब्रा में छिपे खिले हुए बूब्स पे गयी. उसके अधनंगे स्तन हमारे सामने थे. वो बोली- क्यूँ लड़को, बह तो नहीं गयी गंगा?
और हँसने लगी- हे भगवान, तुम लोगों का तंबू फटने वाला है, रूको मैं आज़ाद कर देती हूँ.

वो पहले प्रभु के पास गयी, उसकी पैंट खोली और ज़िप नीचे करने लगी. प्रभु उसके छलकते उरोजों को ही घूरे जा रहा था. रूबी ने उसका अंडरवीयर नीचे करके उसका लौड़ा बाहर निकाल दिया. वो ज़ोर ज़ोर से साँस ले रहा था. उसका इतने से भी प्री-कम निकल चुका था.

रूबी बोली- आहा, रस निकल आया!
वो झुकी और प्रभु की आँखों में देखते हुए उसके लौड़े की ओर मुँह किया, सेक्सी अंदाज़ में ज़ुबान निकालते उसका प्री-कम चाट लिया.

प्रभु तो काँप रहा था उत्तेजना में… अब उसने उसके लौड़े को तेज़ी से चाटने शुरू किया. प्रभु की छाती तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी. अब रूबी ने उसका लौड़ा अपने मुंह में ले लिया. उसका मुखचोदन शुरू कर दिया.

प्रभु आह आह करे जा रहा था. वो अब धीरे धीरे स्ट्रेच हो रहा था सोफे पे. उसकी टांगें सीधी हो चुकी थी. वो ज़ोर से आहा आहा चिल्लाया और अपना पानी रूबी में मुँह में छोड़ दिया.
रूबी ने अपनी ज़ुबान बाहर कर उसका पानी दिखाया. थोड़ा उसके लौड़े पे गिराया और बाकी पी गयी.
रूबी बोली- वाह, बहुत दिन बाद जवान ताज़ा सड़का चखने को मिला!

जब यह सब चल रहा था, तब मैंने और कीकु ने अपना लंड आज़ाद कर लिया था.
रूबी अब हमारी ओर पलटी, बोली- ओहो! मेरा लोलीपोप रेडी है.

वो कीकु के पास गयी, उसका लौड़ा अपने मुँह पूरा डाल लिया. कीकु आह आह करने लगा.
फिर रूबी ने मुझे बोला- तू बैठा हिलाता रहेगा. आ, ज़रा चिकने जिस्म को छूने का मज़ा ले!

मैं उठ के उसके पीछे आया. वो गों गों कर के कीकु का मुखचोदन कर रही थी. मैं झुक के उसके चिकने चूतड़ों पे हाथ से सहलाने लगा. पैंटी के ऊपर से मैं उसके चूत के उभार को देख पा रहा था. मैं काँपते हाथ से उसकी चूत पे हाथ फिराने लगा. वो अपनी कमर हिला हिला के मेरे हाथ पे अपने चूत घिसने लगी.

इसी बीच कीकु जवाब दे गया, काँपते हुए उसने अपना पानी रूबी के मुँह में छोड़ दिया.

अब वो बेड पे पीठ के बल लेट गयी, उसने मुझे पास बुलाया. मैं पैंट और अंडरवीर उतार कर बेड पे चढ़ गया. वो अपना सर खिसका के मेरी टाँगों के बीच ले आ गयी.
वो बोली- काफ़ी तगड़ा है तेरी उमर के लिहाज से! एक दिन तू लम्बी रेस का घोड़ा बनेगा.

मैंने झुक कर अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया. उसने मेरे लौड़े पे ज़ुबान फिरानी शुरू कर दी. उसके मुलायम नरम मुँह में मेरा लौड़ा तना जा रहा था. मेरा लौड़ा और फूल गया और लंबा हो गया. मैं उसके मुँह में अपना लौड़ा आगे पीछे करने लगा, वो गों गों कर रही थी.

अब मेरा कंट्रोल मुझ से जा रहा था, मैं ज़ोर ज़ोर से लौड़ा आगे पीछे करने लगा, जब मैं चरम पे पहुँचा, मैंने उसका सर पकड़ा और अपना पूरा लंड मुँह में घुसा दिया. मेरा लंड उसके पूरे गले तक घुस गया. रूबी की साँस रुक गयी, उसकी आँखें फटी जा रही थी. मेरी जांघों के बीच उसका चेहरा फँसा था. वो छटपटाने लगी, मैं उत्तेजना के शिखर पे सुध खो बैठा. वो ज़ोर ज़ोर से मेरी गांड पे हाथ मारने लगी. तब मुझे होश आया और उससे अलग हुआ.

कहानी जारी रहेगी.
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कहानी का अगला भाग: मेरी अंतरंग डायरी: ग्रुप सेक्स में कौमार्य विसर्जन-2