फर्स्ट सेक्स: कुंवारी चुत कुंवारा लंड

(First Sex: Kunwari Chut aur Kunwara Lund)

मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ. पहली बार मुझे मौका मिला है अपनी कहानी अन्तर्वासना पर प्रकाशित करवाने के लिए… आप सभी तक अपनी सेक्स स्टोरी भेज रहा हूँ. मुझे कुछ चूक हो जाए, तो माफ कर दीजिएगा.

मेरा नाम राज है, मैं नागपुर में रहता हूँ. मेरी उम्र 30 साल है. मैं देखने में साधारण सा ही हूँ. मेरे लंड का आकार भी 5″ का है.

यह बात तब की है, जब मैं करीब बीस साल का था और बी.कॉम के सेकंड इयर में पढ़ रहा था. अब जो इस कहानी की नायिका है, उसके बारे में भी सुन लीजिए. उसका नाम रचना है. वो देखने में तो रानी मुखर्जी की तरह दिखती है. उसका बदन भरा हुआ है. नयन नक्श तो इतने अच्छे हैं कि देखने वाला उसे देखते ही मुठ मारने पर आमदा हो जाए. उसका मादक फिगर 32-27-32 का है.. उम्र 19 की है. अभी इतना ही जब उसको नंगी देखूँगा, तब अन्दर का विवरण लिखूंगा.

एक दिन मेरी साइकिल खराब हुई पड़ी थी और मुझे कॉलेज में जाना था. मैंने ऑटो से जाना उचित समझा. मैं ऑटो स्टैंड गया, सुबह का वक्त था.. उस वक्त शोरगुल भी नहीं था. कुछ देर में ही एक ऑटो रिक्शा मेरे सामने आकर रुका. जैसे ही मैं ऑटो में बैठा, मुझे एक मीठी सी आवाज सुनाई दी. मैंने मुड़ कर देखा, तो एक लड़की दौड़ कर आकर ऑटो में बैठ गई. उसने ऑटो वाले से मेरे ही कॉलेज का नाम बोला, यह सुन कर मेरा मन खुश हो गया. पहली बार इतनी खूबसूरत लड़की मेरे पास बैठी थी. ऑटो वाले ने ऑटो स्टार्ट किया और हम अपनी राह पर चल पड़े.

उस लड़की का नाम मुझे बाद में मालूम हुआ कि उसका नाम रचना है. रचना ने शॉर्ट टॉप पहना था और नीचे चुस्त काली जींस पहनी हुई थी. वो जींस और टॉप में सच में कहर ढा रही थी. मैं उसके ही सोच में डूब गया. इतने में एक गड्ढे में से ऑटो निकली और उसका रेशम सा नाज़ुक बदन मुझसे टकरा गया. मेरे शरीर ने अनोखे अहसास का अनुभव किया.

उसने मुझसे हटते हुए सॉरी कहा और सीधी बैठ गई. मैंने उससे कहा- कोई बात नहीं.
हम दोनों एक बार मुस्कुराए और बातों का सिलसिला शुरू हो गया.

उसने मुझे पूछा कि आप किधर जा रहे हैं. मैंने कॉलेज का नाम बताया तो वो मुझसे खुलने लगी. उसने मेरे बारे में नाम आदि पूछा.
मुझे थोड़ी सी झिझक हुई, मैंने मेरा नाम बताया और कहा कि मैं बी कॉम में पढ़ रहा हूँ.

ये सुन कर वो खुश हुई और उसने बताया कि वो इस शहर में नई नई आई है. वो गडचीरोली के छोटे गाँव से है, यहां रूम करके रहती है. उसने भी मेरे ही कालेज में आर्ट में एडमीशन लिया है.

इतने में हमारा कॉलेज आ गया और हम दोनों कॉलेज में आ गए. उसने मुझे अपनी क्लास के बारे में बताया, हम दोनों के क्लास ऊपर नीचे थे. मतलब ऊपर के माले में उसका और ग्राउंड फ्लोर पर मेरा क्लास रूम था. मैंने उसका फोन नम्बर मांगा, उसने तुरंत दे भी दिया और हम जुदा हो गए.

ऐसे ही हाय बाय में पूरे एक सप्ताह चला गया. बाद में हम दोनों दोस्त बन गए. हम क्लास बंक मारते और बातें करते रहते. एक दिन शाम के वक्त मैंने उसको कॉल किया और हमारी बातें शुरू हुईं. कुछ ही समय में हम दोनों एक दूसरे के सामने खुल कर बात करने लगे.

फिर एक दिन बातों बातों में मैंने उसे प्रपोज कर दिया. उसने हंस कर हामी भर दी. अब रोज रात को हम दोनों की प्यारी प्यारी बातें होती थीं. हम रोज देर तक बातें करते रहते, इसी तरह धीरे धीरे फोन सेक्स चैट भी होने लगी. वो नंगी हो कर अपनी चूत में उंगली करती और मैं उसके नाम की मुठ मारता.
हम दोनों के शरीर मिलन की आस में तड़फने लगे थे. ऐसे ही दिन गुजरते रहे.

एक दिन हमें मौका मिल गया. उसका मकान मालिक 10-15 दिन के लिए गाँव गया था. उसने सुबह ही फोन पर घर आने का न्योता दे दिया. मैंने भी घर में बोला कि कॉलेज से सीधा दोस्त के घर जाऊंगा और कल सुबह ही आ पाऊंगा.

ऐसा बोल कर मैं घर से निकल गया. रास्ते में मेडिकल स्टोर से से कॉण्डम का बड़ा पैकेट लिया और सेक्स टाईम बढ़ाने वाली गोलियां ले लीं. एक प्रोविजन स्टोर से कुछ खाने का सामान लिया और चल दिया. उसके घर के पास जा कर मैंने फोन किया.

उसने कहा- आ जाओ, गेट यूं ही उड़का है.

मैं इधर उधर देखता हुआ तेजी से उसके घर की तरफ गया और जल्दी से गेट खोलकर अन्दर घुस गया. अन्दर आते ही मैंने झट से दरवाज़ा बंद करके उसकी तरफ देखा. वो खड़ी शर्मा रही थी. मैंने उससे चिपक गया, उससे चिपकते ही मेरे शरीर में अलग ही रोमांच भर गया. मैं उसकी जवानी के सागर में गोता लगाने लगा.

कुछ देर यूं ही चिपका चिपकी हुई और चुम्माचाटी चालू हो गई. आधा घंटा कैसे बीता, पता ही नहीं चला.

इस वक्त उसने नाईट ड्रेस पहनी हुई थी, चूमा चाटी का दौर खत्म हुआ, तो उसने कहा कि तुम बैठो मैं नहाकर आती हूँ.

मैं भी नहाने के लिए उसके पीछे पीछे चल गया. बाथरूम के पास जाकर वो रूक गयी, उसने मेरे तरफ एक चुदासी नजर डालते हुए आँख मारी और बाथरूम में घुस गयी. अन्दर जाते ही उसने अपने सारे कपड़े उतारे और शावर चालू कर दिया. मैंने भी देख लिया था कि इसने दरवाजा लॉक नहीं किया था. सो मैं दबे पाँव बाथरूम की तरफ गया और दरवाजे को थोड़ा धक्का दे दिया. दरवाजे में झिरी से बन गई, अन्दर झाँकने के बाद मैंने जो नजारा देखा, उससे मेरा लंड आन्दोलन करने पर उतारू हो गया और पेंट फाड़ कर बाहर आने को मचलने लगा. उसका एकदम नंगा बदन, बदन से फव्वारे का बहता हुआ पानी, उसके सिर से उतर कर गांड की तरफ जाता हुआ बड़ा मादक लग रहा था. उसका चेहरा

दीवार की तरफ था, तो उसने अब तक मुझे नहीं देखा था.. या देखना नहीं चाहती थी. मैं चुपके से उसके पीछे गया और उसे पकड़ लिया. वो थोड़ा सकपका गयी, मैं उसके पीछे से पूरा चिपक गया. उसकी भीगी हुई उभरी गांड की दरार पर मेरा लंड दस्तक दे रहा था.

रचना भी पूरी तरह से गरम हो गयी थी और मेरा साथ दे रही थी. मैं उसके गीले बदन से लिपट गया और गीला नंगा बदन सहलाने लगा. फिर से चुम्माचाटी चालू हो गई.

अब धीरे धीरे मैंने मेरे कपड़े पूरे खोल दिए और नंगा हो गया. कुछ देर बाथरूम में मस्ती करने के बाद मैं रचना को अपनी गोद में उठा कर बेड पर ले गया. हम दोनों गीले बदन थे और बेड पर लेटे लेटे एक दूसरे को सहला रहे थे.

मैं किस करते करते उसकी चुत पर चला गया. आह.. रेशम जैसी चिकनी चुत देख कर चूत पर होंठों को लगा कर मैं बेतहाशा चूसने लगा. रचना वासना से सीत्कार भरने लगी, बाद में मैंने मेरा लंड रचना के हाथ में दे दिया. उसके मुलायम हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लंड और अधिक फुदकने लगा.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैं झट से रचना की टांगों के बीच में बैठ गया. रचना भी गरम हो गयी थी. मैंने झट उसकी चुत की फांकों में लंड घिसा तो रचना मचल उठी. मैंने एक धक्का लगाया, पर लंड फिसल कर बाहर को निकल गया. मैंने कई बार कोशिश की, फिर भी लंड चुत में नहीं जा रहा था. हम दोनों फर्स्ट टाइम सेक्स कर रहे थे तो कुछ परेशानी हो रही थी.

रचना ने संयम दिखाया और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर चुत के मुँह पर रख कर धक्का देने को कहा. मैंने वैसा ही किया. लेकिन इस बार भी लंड रचना की चुत में नहीं गया.

फिर मुझे लगा कि क्यों ना कुछ चिकनाई लगा कर लंड अन्दर डालूँ. मुझे जल्द ही उसकी वैसलीन की शीशी मिल गई. मैंने खूब सारी वैसलीन रचना की चुत में लगा दी और थोड़ी अपने लंड में लगा ली. अब मैंने लंड को फिर से चुत पर सैट किया, रचना ने भी हाथ से लंड को थाम रखा था. मैंने जोर से एक झटका दे मारा. इस झटके के साथ लंड का सुपारा उसकी चुत की फांकों को चीरता हुआ अन्दर घुस गया.

दर्द के मारे रचना की तेज चीख निकली और वो रोने लगी. उसका रोना देख कर मैं डर गया. मैंने मेरा लंड बाहर निकाल लिया और रचना को चुप कराने लगा. इसके बाद हम दोनों ने कुछ नहीं किया. बस यूं ही चिपके हुए लेटे रहे. रात को हम दोनों चिपक कर सो गए.

देर रात को मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि रचना मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर सहला रही थी. मैंने उसकी आँखों में देखा तो बस प्यार शुरू हो गया.

मैंने उससे पूछा- करना है?
उसने कहा- हां करना है.
मैंने कहा- चिल्लाओगी तो नहीं?
बोली- हां… चिल्लाऊंगी.
मैंने कहा- क्यों?
बोली- दर्द होगा तो कैसे चुप रहूँगी?
मैंने कहा- फिर कैसे होगा?
बोली- तुम इस बार मेरी चिंता मत करना, वो तो एक बार दर्द होगा ही.

बस हम दोनों फिर से लग गए. इस बार मैंने उसकी टांगों को उठा कर अपने कंधों पर ले ली थीं और उसके मुँह पर अपना मुँह लगा दिया था. उसने भी मेरा लंड पकड़ कर अपनी चुत की फांकों में फंसाया और मैंने उसी वक्त तेज ठोकर दे मारी. उसकी चीख निकली लेकिन मेरे मुँह के ढक्कन के कारण घुट कर रह गई.

बस कुछ देर भयंकर दर्द हुआ, लेकिन जैसा कि होता आया है. उसकी गांड ने उठाना शुरू किया तो मैंने लंड को गति दे दी. धकापेल चुदाई हुई. तभी वो एकदम से अकड़कर झड़ गई और उसकी चुत की आग से मेरा लंड भी पिघल गया. मैंने भी अपने लंड का लावा उसकी चुत में छोड़ दिया.

जब पानी निकल गया, तब हम दोनों को होश आया कि कंडोम तो लगाया ही नहीं था.

खैर अब क्या हो सकता था, हम लोग हंसने लगे और दूसरे दिन दवा लेने की बात कहकर हम दोनों फिर से चूत चुदाई की क्रिया में लग गए.

उस रात हम दोनों ने चार बार चुदाई का मजा लिया और चूंकि अब दवा लेने का मन बना लिया था तो मैंने हर बार उसकी चूत में ही अपना रस छोड़ा.

दोस्तो, आगे कैसे मैंने उसकी धुंआधार चुदाई की.. वो आपके मेल भेजने के बाद लिखूंगा. आप मुझे बताएं कि मेरे फर्स्ट टाइम सेक्स की कहानी आपको कैसी लगी.
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