कानपुर वाली गर्लफ़्रेंड की झांट भरी कुंवारी चूत चुदाई

(Kanpur Wali girlfriend Ki Jhant bhari Kunwari Choot Chudai)

बात तब की है.. जब मेरी पहली पोस्टिंग बंगाल में हुई और एक दिन मुझे एक रॉंग नंबर से फोन आया। पहले तो मैंने फोन काट दिया.. पर मुझे उस लड़की की आवाज बहुत अच्छी लगी.. तो मैंने वापस उस नंबर पर फोन किया।

उसने अपना नाम सीमा बताया.. उम्र 21 और अपना घर कानपुर के पास किसी गाँव में बताया। मैंने उसको अपने बारे में बताया। इत्तफाक से मैं भी कानपुर का हूँ और मैंने उससे दोस्ती कर ली।
अब उससे बातें जब तब होने लगीं।

एक दिन मैंने उससे उसकी फोटो मांगी.. तो उसने अपनी एक तस्वीर मुझे फोन पर भेजी। फोटो में उसको देखकर मैं तो पागल सा हो गया। दोस्तो.. क्या कमाल की लड़की थी।

उसका एक अप्सरा की तरह गोरा रंग.. छरहरा बदन.. मानो एक हुस्न की मल्लिका हो। उसके बाल जैसे एक काली नागिन की तरह लहराते लंबे और काले.. दिखने में रेशमी मुलायम और बाल। उसके गुलाबी होंठ.. उठी हुई चूचियां.. गोरे गाल.. बस यूं समझ लीजिए कि कैटरीना लगती थी।

उसे देखते ही मैं तो उसका दीवाना हो गया और उसको प्यार करने लगा।
एक दिन मैंने उसको फोन पर प्रपोज़ किया.. तो उसने भी मुझे ‘आई लव यू विवेक’ कहकर मेरे प्रपोजल का जवाब दे दिया।

अब तो मैं सातवें आसमान पर था। हम दोनों को फोन पर बात करते चार महीने बीत गए थे। अब मैं सीमा से मिलने को बेताब था और सीमा भी मुझसे मिलने को तड़प रही थी।

मैं एक महीने की छुटटी लेकर कानपुर पहुँच गया। अगले दिन सीमा ने मुझे अपने गाँव के पास के कस्बे में मिलने बुलाया। मैं सीमा से मिलने गया.. उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। यहाँ वो फोटो से भी ज्यादा सेक्सी और हॉट लग रही थी।

मैंने उसे एक फूलों का गुलदस्ता और कुछ चॉकलेट दिए। कुछ देर बैठ कर बातें की और वापस आ गया। जाते वक़्त मैंने सिर्फ उसके गालों पर हाथ फेरा और ‘अपना ख्याल रखना’ कह कर वापस आ गया।

शाम को उसका फोन आया.. वो बोली- आई लव यू विवेक.. अब मैं तुम पर पूरा भरोसा कर सकती हूँ।
मैंने पूछा- सीमा ऐसा क्यों कह रही हो.. सब ठीक तो है.. क्या हुआ?
वो बोली- विवेक जिस तरह आज तुमने मुझे छुआ तक नहीं.. उससे मुझे यकीन हो गया है कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो। अब मैं तुमसे मिल कर तुम्हें बहुत प्यार करना चाहती हूँ विवेक।

मैंने बोला- पर हम मिलेंगे कहाँ सीमा?
वो बोली- वो सब तुम मुझ पर छोड़ दो.. मैं तुम्हें बाद में फोन करती हूँ।
उसने फोन काट दिया।

अगले दिन सुबह सीमा का फोन आया। वो बोली- विवेक मैं आज शाम को कानपुर आ रही हूँ। तुम मुझे सिटी के पास वाले हाईवे से पिक कर लेना। वहाँ से हम मेरी एक फ्रेंड मोनिका के घर चलेंगे। मोनिका पढ़ाई के लिए कमरा किराए पर लेकर शहर में रहती है और उसका मकान-मालिक भी शहर से बाहर है.. पर उसके पास कमरा सिर्फ एक ही है। वहाँ हम लोग मोनिका के सो जाने के बाद चुपके से प्यार करेंगे।

मैंने सीमा को आने वादा किया और फोन काट दिया।
शाम को अपने घर में दोस्त की शादी का बहाना बनाकर सीमा को लेने पहुँच गया। वहाँ से मैं और सीमा मोनिका के घर गए। मोनिका ने हमारा स्वागत किया। फिर हमने खाना खाया.. अब तक रात के दस बज चुके थे।

मैंने सीमा को कहा- मोनिका को छत पर सोने के लिए मना ले और हम लोग यहाँ कमरे में लेट जायेंगे।

पर मोनिका नहीं मानी.. शायद वो भी चुपके से हम लोगों की चुदाई देखना चाहती थी। अब हमने बत्ती बुझा दी और सोने के लिए बिस्तर पर आ गए एक तरफ मैं लेटा और एक तरफ मोनिका और हम दोनों के बीच में सीमा।

सीमा मेरी तरफ पीठ करके लेटी थी.. मैंने अपने लंड को कपड़ों के ऊपर से से ही उसकी गांड में सटा दिया और अब मेरे लंड का एहसास सीमा को अपनी गांड पर हो रहा था।
उसने धीरे से कहा- विवेक ये तो बहुत बड़ा है और मोटा भी है।

मैंने कहा- घबराओ मत.. कुछ नहीं होगा। अब मैंने उसके सूट को ऊपर सरका दिया और सीमा की गोल-गोल चूचियां उसकी ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा।
सीमा को ये सब बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने अब सीमा की पीठ पर चुम्बन शुरू कर दिया.. सीमा मेरे चुम्बन से मचल उठी।

अब मैं एक हाथ से सीमा की चूचियां दबा रहा था और सीमा की पीठ पर किस कर रहा था। मैंने सीमा की ब्रा के हुक भी खोल दिए और उसकी गोल-गोल मुलायम मक्खन जैसे अनछुई चूचियां मेरे हाथों की गिरफ्त में आ गई थीं।

मैं अपने लंड का दबाव सीमा की गांड में बढ़ाते हुए उसकी चूचियां मसलने लगा। सीमा का उत्तेजना से बुरा हाल हो रहा था। उसके मुँह से हल्की-हल्की आवाजें निकलने लगीं ‘ऊऊहह.. हम्म्म.. सीईईई.. ओह्ह्ह..’

मैंने सीमा की चूची मसलते हुए उसके कान में कहा- सीमा तुम अपने सर के बालों को खोल दो।
दोस्तो, आपको बता दूँ कि मुझे सीमा के सर के बाल बहुत पसंद हैं.. उसके बाल कोई भी देखे.. तो देखता रह जाए।
उसके काले और रेशमी बाल एकदम काली नागिन से लहराते हुए लगते हैं। उसके बालों की लम्बाई इतनी अधिक है कि खुले होने पर उसके चूतड़ तक आते हैं। इसलिए सीमा हमेशा अपने बालों को जूड़ा में बांध कर रखती है।

पहले तो सीमा ने बाल खोलने के लिए मना किया.. पर मेरे जोर देने पर उसने अपने बालों को अपने जूड़े से आजाद कर दिया। बाल खुलते ही सीमा की पीठ पर नागिन की तरह लहरा गए।

अब मैं सीमा के बालों को सहलाते हुए उसकी पीठ पर चुम्बन करने लगा। सीमा के रेशमी बालों से क्या मस्त खुश्बू आ रही थी.. एकदम भीनी-भीनी सुगंध.. जो मुझे पागल कर रही थी।

मैं अब पागलों की तरह सीमा की पीठ चाटने लगा.. सीमा भी मादक सीत्कार किए जा रही थी ‘ओह विवेक.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

सलवार का नाड़ा खोल दिया

मैंने सीमा की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी सलवार नीचे खिसका दी, अब बारी उसकी चूत को सहलाने की थी।

मेरा मन तो था कि मैं सीमा की चूत के दीदार करूँ.. जिसे मैं आज अपने मूसल लंड से फाड़ने वाला था.. पर मोनिका पास में सो रही थी.. इसलिए यह संभव नहीं था।

मैंने अब उसकी पैंटी को नीचे सरका दिया और जैसे ही सीमा की चूत पर हाथ रखा, ये क्या.. मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। सीमा की चूत काली-काली झाँटों से भरी पड़ी थी।

मुझे झाँटों वाली चूत बहुत पसंद है।

मैंने सीमा से पूछा- क्या तुम अपनी झाँटों को नहीं काटती हो?

तो सीमा ने कहा- काटती हूँ.. पर विवेक ये तो मैंने तुम्हारे लिए बड़ी की हैं.. एक बार तुमने मुझे सेक्स चैट में बताया था न कि तुम्हें झाँटों वाली चूत पसंद है.. तो तब से मैंने अपनी झांटें नहीं काटी। ये तुम्हारे लिए मेरी तरफ से गिफ्ट है.. लो अब जी भर के खेलो.. मेरी झाँटों से।

मैंने सीमा को किस किया और उसकी झाँटों में अपनी उंगली फंसा कर सीमा की चूत सहलाने लगा। सीमा झाँटें बहुत कोमल और घुंघराली थीं।
उसने बताया कि वो अपनी झाँटों को रोज शैम्पू करती है।

मैंने काफी देर सीमा की चूत सहलाई और फिर अपनी एक उंगली सीमा चूत में डाल दी। चूत गीली होने की वजह से उंगली आसानी से चली गई।

सीमा मचल गई.. अब मैंने अपनी उंगली की गति तेज़ कर दी और सीमा भी मादक सीत्कारें भरते हुए थोड़ी देर में झड़ गई, उसकी चूत से गर्म पानी की धार से छूट गई, सीमा ने एक लंबी सांस ली ‘ओह्ह्ह.. आअह्हह..’

इधर मेरे लंड ने भी पिचकारी छोड़ दी और स्वतः ही झड़ गया। पर अभी तो बहुत कुछ बाकी था। मेरे कुँवारे लंड को सीमा की चूत फाड़नी थी और उसकी कुंवारी चूत का रस चखना था।

अब मैंने सीमा से कहा- यार सीमा मेरा लंड अपने हाथों से सहलाओ।
सीमा मेरी तरफ घूम गई और उसने मेरी चड्डी नीचे सरका दी।

जैसे ही सीमा ने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा.. वो बोली- ओह माय गॉड विवेक.. ये क्या है.. इतनी बड़ी झाँटों वाला मूसल.. ओह माय गॉड.. तुमने अपनी झाँटों को इतना बड़ा कैसे किया.. ये तो इतनी बड़ी हैं कि झाँटों ने तुम्हारे पूरे लंड को ढक रखा है।
मैंने उसे बताया- मुझे झाँटों वाले लंड और झाँटों वाली चूत बहुत पसंद हैं।

दोस्तों वो लंड और वो चूत ही क्या.. जिस पर झाँटों का घना पहरा न हो।

सीमा बोली- अब मैं समझी विवेक.. कि तुम्हें झाँटों वाली चूत क्यों पसंद है.. क्योंकि जिसका खुद का लंड झाँटों से भरा पड़ा हो.. उसे तो झाँटों वाली चूत ही भाएगी।

सीमा ने मेरी झाँटों के बीच से मेरे लंड को निकाल लिया और उसको सहलाने लगी।
थोड़ी ही देर में मेरा लंड एक काले नाग की तरह फुंफकार मारने लगा और सीमा की चूत को डंसने के लिए इशारा करने लगा।

अब वो समय आ गया था.. जब सीमा की कुंवारी चूत की सील फटने वाली थी।
मैंने सीमा से कहा- तुम मेरी तरफ पीठ करके लेट जाओ।

उसने वैसा ही किया.. अब मेरा लंड और भी सख्त हो गया था। क्योंकि वो अब चूत में घुसने के लिए बेताब था। मैंने एक हाथ सीमा के मुँह पर रखा.. ताकि कहीं सीमा चिल्लाने न लगे, दूसरे हाथ से मैंने अपने लौड़े का टोपा सीमा की कुंवारी चूत के मुहाने पर टिकाया और निशाना साध कर एक लंबी गहरी साँस लेकर जोरदार प्रहार किया।

मेरा पहला प्रयास सफल रहा। मेरा लंड ‘घप्प्प्’ की आवाज के साथ सीमा की चूत फाड़ते हुए 2 इंच अन्दर घुस गया। सीमा के मुँह से चीख निकल गई.. चूँकि मैंने उसका मुँह दबा रखा था.. इसलिए सिर्फ वो ‘उम्ह्ह.. उह्ह्ह..’ ही कर सकी।

पर अभी तो मेरा लंड थोड़ा सा ही अन्दर गया था, अब मेरे लंड को और अन्दर जाना था.. इसलिए मैंने बिना देरी के सीमा को कहा- प्लीज़ सीमा थोड़ा और बर्दाश्त करना।

उसने भी दर्द बर्दाश्त करते हुए कहा- उह्ह.. बहुत दर्द हो रहा है.. लेकिन अब तुम जरा धीरे से करना।
‘ओके..’

मैंने इस बार पूरी ताकत के साथ अपना लौड़ा सीमा चूत में पेल दिया.. मगर चूत बहुत कसी होने के कारण इस बार भी मेरा लंड कुछ और आगे घुस पाया।

इस बार के धक्के से सीमा और बेहाल हो गई। उसने अपना मुँह मुझसे छुड़ा लिया और धीरे से चिल्ला पड़ी- उई मम्मी.. मर गई.. आईईईई.. ओह.. छोड़ो मुझे विवेक।

शायद इस बार के लंड के प्रहार से सीमा के चूत की कौमार्य-झिल्ली फट गई थी.. इसी लिए उसकी चूत से खून की धार फूट पड़ी।
मेरा लंड सीमा के चूत के खून से सन गया।

मुझे सीमा पर बहुत तरस आ रहा था। मेरा मन कह रहा था कि सीमा को छोड़ दूँ.. पर मेरा लंड तो अब एकदम लोहे की राड की तरह और सख्त हो चुका था। लौड़े को सीमा की चूत पर तरस नहीं आ रहा था.. मेरा लौड़ा मुझसे सीमा की चूत को और फाड़ने की गुजारिश कर रहा था।

तो दोस्तो.. इस बार मैंने सीमा को बिना बताए ही प्रहार करने की सोच ली.. क्योंकि अगर मैं सीमा को बताता.. तो वो मुझे ऐसा नहीं करने देती।

अब मैंने सीमा के मुँह पर फिर से हाथ रखा और एक जोरदार प्रहार कर दिया। इस बार मेरा पूरा लंड सीमा की चूत में जड़ तक घुस गया।

सीमा इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी, उसकी तो हालत ख़राब हो गई थी।

चूंकि इस बार मैंने उसका मुँह कस के दाब लिया था.. तो वो चिल्ला तो नहीं सकी.. पर उसकी आँखों से आंसू निकल गए। वो जोर-जोर से साँस लेने लगी ‘आह्ह्ह.. आह्ह्ह्ह.. मर गई.. माँआ..’

थोड़ी देर हम दोनों यूँ ही लेटे रहे.. मैंने सीमा के आंसू पोंछे और सीमा के गाल पर किस किया। कुछ देर प्यार करने से सीमा को कुछ राहत सी मिली और तब तक लौड़े ने भी चूत में अपनी जगह बना ली थी।

अब मैं अपने लंड से धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा और साथ ही हाथ से सीमा की चूचियों को भी मसल रहा था। सीमा की पीठ और गर्दन पर लगातार चुम्बन करता जा रहा था।

थोड़ी देर में सीमा उत्तेजित होने लगी, मैंने भी उसकी चाहत को समझ कर लंड की गति को तेज़ कर दिया।

दोस्तो, सीमा की कुंवारी चूत होने की वजह से मेरा लौड़ा सीमा की चूत की दीवारों में कसा हुआ गोते खा रहा था। उसकी गर्म-गर्म चूत का एहसास मेरे लंड की खाल पर भरपूर हो रहा था।

अब हम दोनों चुदाई का भरपूर मज़ा ले रहे थे और ये भी भूल चुके थे कि हमारे बगल में मोनिका भी सो रही है.. हालांकि हम दोनों इस बात को समझ चुके थे कि मोनिका हम दोनों की हरकतों से पूरी तरह से वाकिफ है.. पर इधर उसकी क्या चिंता करना।

चुदाई चीज़ ही ऐसी है कि इसके आगे न कुछ दिखाई देता है.. न कुछ सुनाई देता है।

खैर.. मैंने सीमा की जम कर लम्बी चुदाई की और हम दोनों साथ में झड़ गए। मैंने अपना वीर्य सीमा की चूत में भर दिया। थोड़ी देर बाद हमने फिर से चुदाई की और इस तरह पूरी रात मैंने सीमा को पांच बार चोदा।

सुबह मेरी आँख खुली तो सुबह के पांच बज रहे थे और मेरा लंड तम्बू की तरह तना हुआ था। सीमा और मोनिका अभी भी सो रही थीं।

मैंने सीमा को धीरे से जगाया और कहा- सीमा अभी मुझे तुम्हारी चूत मारनी है।
सीमा बोली- क्यों.. रात भर मार कर नहीं थके.. जो अब फिर से चूत मारनी है।

इतने में मोनिका जाग गई।

आगे क्या हुआ.. वो अगली कहानी में बताऊँगा.. पर आप लोग मुझे जरूर बताना कि मेरी ये सच्ची कहानी आपको कैसी लगी।
मुझे मेल करें।
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