गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई की कहानी

(Real Chudai Ki Kahani : Girl Friend Ki Pahli Chudai)

हाय दोस्तो, मेरा नाम अनिल है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 24 साल है.. ये मेरी पहली कहानी है. मुझे आशा है कि ये सेक्स स्टोरी आप सबको पसंद आएगी.

ये घटना आज से एक साल पहले का है. मेरी गर्लफ्रेंड का नाम दीपिका है, ये नाम बदल दिया है. मैं पहले आपको उसके बारे में बता देता हूँ, उसका फिगर 34-28-34 का है, वो देखने बहुत ब्यूटीफुल है.
हम दोनों एक कॉमन फ्रेंड के जरिये उसकी बर्थडे पार्टी में मिले थे. वहाँ पर हमारी बात हुई और धीरे धीरे हमारी दोस्ती परवान चढ़ी. हम दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए और फिर हमारी फोन पर बात होने लगी. हम जल्दी ही अच्छे और क्लोज़ फ्रेंड बन गए.

एक दिन मैंने उसको प्रपोज़ किया और उसने हाँ बोल दिया.
फिर हमारी फोन पर घंटों बात होने लगी थी. एक बार हम दोनों मूवी देखने गए. मूवी देखते टाइम मैं उसके हाथों को सहलाने लगा और उसके कंधे पर हाथ रखे, उसको हौले से प्रेस किया, उसने मुझे देखा और एक प्यारी सी स्माइल दे दी.
झंडी हरी देखी तो फिर मैं उसकी जींस पे हाथ ले गया हो और हाथ फेरने लगा. वो बोलने लगी- प्लीज़ अनिल मत करो, मुझे कुछ हो रहा है.

मैंने उसका मुँह अपनी तरफ करके उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और उसको किस करने लगा. वो भी मेरा साथ देना लगी. चूमाचाटी के दौरान ही मेरा हाथ खुद ब खुद उसके मम्मों पे चला गया और मैं उसके मम्मों को उसकी टी-शर्ट के ऊपर से दबाने लगा.
वो एकदम से गरम होने लगी थी. अब वो भी मुझे जोर से किस करने लगी और मेरे बालों को नोंचने लगी.

मैंने अपना हाथ उसकी टी-शर्ट और ब्रा के अन्दर डाल कर उसके मम्मों को सहलाया और दबाने लगा. उसके मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगीं- आआहह.. अनिल धीरे से दबाओ ना.. दर्द हो रहा है..
फिर मैंने उसका हाथ लेकर अपनी जींस के ऊपर रखा दिया और बोला- मेरे लंड को सहलाओ.
मैं भी उसकी जींस के ऊपर से उसकी चुत को सहलाने लगा. वो भी मेरे लंड को दबाते हुए मसलने लगी. मैंने आगे बढ़ते हुए उसकी जींस की चैन खोल कर पेंटी के ऊपर से उसकी चुत सहलाने लगा. उसकी पेंटी चुत के पानी से गीली हो गई थी.

फिर मैंने उसकी पेंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चुत को सहलाया, तो उसकी चुत पर छोटे छोटे बाल उगे हुए थे. मुझे उसकी चुत को सहलाने में बड़ा मज़ा आ रहा था. मैंने अपनी पेंट की चैन खोल कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया और वो मेरे लंड को मसलने लगी.

अब वो धीरे धीरे ‘आअहह ओह.. आआहह..’ की आवाज़ निकाल रही थी. मूवी खत्म होने वाली थी इसलिए हम दोनों को ये खेल बीच में ही छोड़ना पड़ा और अपने कपड़े ठीक करके हम बाहर निकल आए.

अब हमारी फोन पे सेक्स चैट होने लगी और मैंने उसको सेक्स चैट में उसको अलग अलग पोज़िशन में चोदना चालू कर दिया. इसके साथ ही हम दोनों मुठ मार के खुद को शांत कर लेते. हम दोनों सेक्स करना चाहते थे, पर हमको कोई सेफ जगह नहीं मिल रही थी.

फिर एक दिन मेरे मम्मी पापा गाँव किसी काम से जाने वाले थे, मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. मैंने ये बात अपनी डार्लिंग दीपिका को बताई तो वो भी खुश हो गई. फाइनली हमारी एक दूसरे के साथ सेक्स करने की कामना पूरी होने वाली थी.

अगले दिन मम्मी पापा पांच दिन के लिए गाँव जाने वाले थे. वो रात मानो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. अगले दिन वो दिन आ गया, मैं मम्मी पापा को स्टेशन छोड़ कर आ गया, साथ ही आते वक़्त अपनी जीएफ को अपने साथ अपने घर लेता आया. उसको घर लाने से पहले ही रास्ते में मैंने कॉंडम का एक पैकेट ले लिया था.

घर के अन्दर घुसते ही हम एक दूसरे को किस करने लगे. हम दोनों की जीभें आपस में फाइट करने लगीं, हमारी स्मूच 15 मिनट तक चली. इस बीच मैं उसके मम्मों को दबाने लगा. फिर मैं उसको गोद में उठाकर मम्मी पापा के बेडरूम में ले गया और बेड पे लेटा दिया.

अब हम फिर से एक दूसरे को किस करने लगे. मैं उसके ऊपर चढ़ गया था. मैंने उसकी टी-शर्ट निकाल दी. उसके मम्मों को ब्रा के ऊपर से चूसने लगा और दबाने लगा. उसकी ब्रा पूरी गीली हो गई थी.
वो बोल रही थी- अनिल मुझे कुछ हो रहा है.. प्लीज़ कुछ करो ना.
मैं बोला- हाँ जानू वही तो कर रहा हूँ.

फिर मैंने एक हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा खोल दी. ब्रा खुलते ही उसके मम्मे उछलने लगे. उसके सख्त चूचे देखते ही मेरे होश उड़ गए. आह.. क्या चूचे थे यार.. बिल्कुल पर्फेक्ट.. ना ज़्यादा बड़े ना ज़्यादे छोटे.. ऊपर से पिंक कलर के निप्पल.. मैं तो उन पर झपट कर टूट पड़ा. कभी एक चूचे को दबाता, तो एक चूचे को चूसता और बीच बीच में उसके मम्मों को काट भी लेता.
उसके मुँह से ‘ऊउउ.. जान धीरे से काटो ना.. आअहह हमम्म्म.. ह्म्म्म्म .. बहुत मज़ा आ रहा है.. आह.. और करो.. पी जाओ इनका दूध चूस कर खाली कर दो इनको..’
मैं भी जोश में आकर बोल रहा था- आह.. साली, आज तो इनको निचोड़ दूँगा एक भी बूंद नहीं छोड़ूँगा इनमें..

फिर मैंने उसकी जींस खींच कर उतार दी. वो अब सिर्फ़ पेंटी में मेरे सामने बेड पर लेटी हुई थी. मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए, सिर्फ़ अपनी अंडरवियर में आ गया.
तभी मेरे दिमाग़ में एक मस्ती सूझी. मैं जल्दी से फ्रीज़ में से बर्फ लेकर आया और उसके मम्मों पे धीरे लगाने लगा. उसकी मादक सिसकारियाँ निकलने लगीं. फिर मैं बर्फ उसकी कमर पे लगाने लगा.

उसकी कमर.. ओ माय गॉड.. क्या मस्त थी.. आज भी वो दिन याद करता हूँ तो लंड खड़ा हो जाता है.
उसके मुँह से ‘आअहह आअह.. जान प्लीज़ ऐसे मत करो.. मैं मर जाऊंगी..’ निकल रहा था.
मैं उसकी नाभि पे बर्फ लगा कर उसे क़िस करने लगा था और उसे अपनी जीभ से लिक कर रहा था. वो अपने हाथ मेरे बालों में घुमा रही थी.

फिर मैं धीरे से उसकी पेंटी में हाथ डाल कर उसकी चुत को सहलाने लगा. उसकी चुत बहुत गीली हो चुकी थी. मैंने उसकी चुत में एक उंगली डाली, उसकी मुँह से आवाज़ निकली ‘आहह अनिल दर्द हो रहा है..’
मैंने उसकी पेंटी उतार कर फेंक दी.. और उसकी चुत को खड़े होकर देखने लगा. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी. मैं रियल में पहली बार किसी लड़की को नंगी देख रहा था.

उसके जिस्म पर पड़ती हल्की सी सूरज की रोशनी में वो और भी क़यामत लग रही थी. मुझसे उसकी चुत को देख कर रहा नहीं गया, मैंने उसकी टांगें फैलाईं और अपनी जीभ से उसकी चुत को चाटने लगा.
हमम्म्मम.. उसकी चुत में से एक अजीब सी महक आ रही थी, जो मुझे पागल कर रही थी.

फिर मैंने उसकी चुत में एक उंगली डाली और अन्दर बाहर करने लगा. उसकी चुत को ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा. उसकी टांगें खुद ब खुद फ़ैल गईं और वो अपनी गांड उठा कर अपनी कामुक आवाजें और तेज स्वर में निकालने लगी ‘आअहह.. यस.. और करो अनिल आह आह उह आह.. आहा हां आई लव यू.. अनिल.. प्लीज़ फक मी.. पी जाओ मेरा सारा पानी.. अनिल और चाटो मेरी चुत को.. इसका सारा पानी पी जाओ.. आह ये बहुत दिनों से तड़पा रही है..’

मैं अपना अंडरवियर निकाल कर बोला- जान मेरे लंड को भी प्यार करो ना.
वो मेरे लंड को देख के बोलने लगी- कितना मस्त लंड है तुम्हारा..
और वो मेरे लंड को मसलने लगी.
मैं उससे बोला- इसको चूसो..
तो पहले मना करने लगी लेकिन मेरे ज़ोर देने पर लंड को अपने मुँह में लेके चूसने लगी.

जल्द ही हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए. मैं उसकी चुत को चाट रहा था और वो मेरे लंड को चूस रही थी. थोड़ी देर की चूत चुसाई के बाद वो झड़ गई और ढीली पड़ गई. मैं उसकी चूत का सारा पानी पी लिया.
अब मेरे लंड का भी रस निकलने वाला था, मैं उसके मुँह को ज़ोर जोर से चोदने लगा और उसके मुँह में रस निकाल कर झड़ गया. उसने मुँह से लंड का रस थोड़ा थूक दिया और थोड़ा पी लिया.
इसके बाद भी उसने मेरे लंड को चाटना नहीं छोड़ा और पूरा लंड चाट के साफ कर दिया.

तभी मेरे घर की डोरबेल बजी, हम दोनों डर गए, मैंने उसे जल्दी से बाथरूम में भेजा और खुद देखने गया कि कौन है.
शायद कोई सेल्समैन था, घंटी बजा कर चला गया था. मैंने आवाज लगा कर दीपिका को कमरे में आने के लिए कह दिया.

फिर मैं किचन में जाकर फ्रीज में से आइसक्रीम लेकर आया. दीपिका बेड पर नंगी चित्त पड़ी अपनी चूत सहला रही थी. बड़ा ही कामुक सीन था, उसने मुझे देखा और आँख मार दी. मैंने वो आइसक्रीम उसके मम्मों पर लगा दी और थोड़ी सी उसकी चुत पर लगा दी. अब मैं उसके मम्मों को और चूत को चाटते हुए आइसक्रीम चाटने लगा. दीपिका फिर से गरम होने लगी. मैंने अपने लंड पर भी आइसक्रीम लगा दी, वो लंड को चूसने लगी. मेरा लंड थोड़ी देर में फिर से खड़ा हो गया.

अब मैं उसके सामने आ गया और बोला- जान स्टार्टिंग में थोड़ा दर्द होगा, सहन कर लेना.
वो बोली- जानू तेरे लिए तो कुछ भी कर सकती हूँ मैं.. अब और मत रूको जल्दी से पेल दो इसको मेरी चूत के अन्दर.. अब रुका नहीं जाता.

मैंने उसकी टांगें फैला कर अपना लंड उसकी चुत के छेद पे रख दिया और अन्दर घुसेड़ने लगा. दीपिका के चेहरे से दर्द साफ झलक रहा था, पर वो सहन कर रही थी. फिर मैं उसके हाथ पकड़ कर उसको किस करने लगा और एक ज़ोर का शॉट दे मारा, मेरा आधा लंड उसकी चुत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया.

वो छटपटाने लगी थी और अपने पैर पटक रही थी, पर मैंने उसको कसके पकड़ रखा था. मेरे लंड में भी जलन हो रही थी, शायद मेरे लंड का टांका टूट गया था. दीपिका की आँखों से आँसू बहने लगे थे, मैं उन आँसुओं को पी गया और उसके माथे पर किस करके उसके मम्मों को चूसने लगा.

जब वो थोड़ी सामान्य हुई तो मैं आगे पीछे होकर उसे धीरे धीरे चोदने लगा.
उसके मुँह से आवाज़ निकलने लगी- आअहह आह आह आह आह आह जान दर्द हो रहा है.. थोड़ा आराम से करो.
मैं बोला- थोड़ी देर में तुमको मज़ा आने लगेगा.

फिर मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चुत के अन्दर चला गया. इस बार उसके मुँह से ज़ोर की चीख निकली. मैं उसका मुँह बंद करना भूल गया था, मुझे लगा कहीं पड़ोसियों ने आवाज ना सुन ली हो. फिर कुछ देर बाद जब उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी. मैं समझ गया और मैं तेज धक्के लगाने लगा. थोड़ी देर बाद उसको भी मज़ा आने लगा और वो अपनी गांड उठा कर कहने लगी- आह और जोर से.. और तेज करो जान बहुत मज़ा आ रहा है.

उसकी ये बात सुन कर मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा.. और उसको किस करते हुए उसको धकापेल चोदता रहा. फिर मैंने उसकी टांगें अपने कंधे पे रखे हुए उसकी चुदाई करता रहा.
वो बोलती जा रही थी- फक मी हार्डर अनिल डार्लिंग प्लीज़ फक मी फास्ट.. आई लव यू जानू.. आआहह अहाआहा आआ.. आआहह..
पूरे कमरे में हमारी चुदाई की आवाजें सुनाई दे रही थीं ‘फ़च. फ़च फ़च..’

तभी वो झड़ कर ढीली पड़ गई, लेकिन मैं तब भी उसे धक्के लगाता रहा और उसके मम्मों को चूसने लगा. करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद मैं उसके ही अन्दर झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया.

जब हम दोनों अलग हुए तो देखा कि बेड पर उसकी चुत से निकला हुआ खून लगा हुआ था. वो थोड़ी डर गई थी, पर मैं उसको समझा दिया कि पहली बार में ऐसे ही होता है.
फिर हम दोनों ने एक साथ बाथ लिया. इसके बाद उसे लगातार पाँच दिन तक अलग अलग पोज़िशन में खूब चोदा.

तो दोस्तो, यह थी मेरी गर्लफ्रेंड के साथ मेरी पहली चुदाई की कहानी… आशा है कि आप सबको पसंद आई होगी.
आप सबके कोमेंट्स का इंतजार रहेगा.
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