चुदाई का दर्द मजे में बदल गया

युवराज
हैलो मेरा नाम युवराज है। मैं आगरा का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 21 साल है। यह मेरी सत्य घटना है। अगर आप लोगों का साथ रहा तो और भी आपबीती आप तक लेकर आऊँगा।
यह बात तब की है जब मैं 18 साल का था। मैंने किसी के साथ भागीदारी में जमीन खरीद-बिक्री का काम आरम्भ किया था।
सर्दी की वजह से मैं और मेरा भागीदार दुकान के बाहर धूप सेंक रहे थे। तभी वहाँ से एक लड़की दुकान के पास से निकली, जो बहुत ही सुन्दर थी।
मैंने अपने भागीदार मानी से पूछा- यार.. यह लड़की जो अभी यहाँ से निकली है, कौन है और कहाँ रहती है?
तो मानी बोला- इसका नाम स्वीटी है और इसी मोहल्ले में रहती है।
मानी भी इसी मोहल्ले का रहने वाला था।
मैं- यार क्या मस्त लड़की है… ऊपर से नीचे तक कयामत है.. बहुत सुन्दर है।
मानी बोला- विकी यह किसी के हाथ नहीं आती।
मैं- मैं इसको अपनी बना कर रहूँगा। तुम बस इसका मोबाइल नम्बर लेकर दे तो… फिर मेरा काम देखो।
मानी- मोबाइल नम्बर तो नहीं मालूम है घर का लैंड-लाइन नम्बर मिल सकता है।
मैं- ठीक है वो ही दे दो।
मुझे स्वीटी के घर का लैंड-लाइन नम्बर मिल गया।
उसके बाद मैंने यह पता कर लिया कि वो गुरुनानक पब्लिक स्कूल में सिलाई टीचर की जॉब करती है।
मैंने उसे कई बार घर पर फोन करके लड़की की आवाज़ निकाल कर स्वीटी की स्टूडेंट बन कर उसका मोबाइल नम्बर हासिल कर लिया। फिर मैंने स्वीटी को फोन किया, उसने फोन अटेंड किया।
‘हैलो’ सुनते ही मैं बोला- स्वीटी जी आपने ‘मिस-कॉल’ की थी.. कोई काम था।
‘नहीं.. मैंने कोई ‘मिस-कॉल’ नहीं की… आप कौन हैं और आप मेरा नाम कैसे जानते हैं?’ वो हैरान होकर बोली।
मैं- स्वीटी अभी भी नहीं पहचाना.. मैं विकी!
स्वीटी- कौन विकी!
मैंने उसको और हैरान करने के लिए उसको उसके स्कूल का नाम, सिलाई टीचर की जॉब.. वो कहाँ रहती है.. यह सब बता दिया।
वो यह सब सुन कर बोली- पर मैं आप को नहीं जानती। मुझे यह बता दो कि आप मेरे बारे में इतना कैसे जानते हो.. प्लीज़ बता दीजिए.. आप आप कौन हैं?
‘अगर तुम कल स्कूल के पास छुट्टी के बाद मिलो, तो सब बता दूँगा..!’
‘मैं क्यों मिलूँ.. आप से?’
और उसने फोन कट कर दिया। दोबारा फोन करने पर उसने फोन अटेंड नहीं किया। उसी दिन शाम के समय स्वीटी ने मेरे मोबाइल पर ‘मिस-कॉल’ की।
मैंने उसी समय उस को फोन किया तो वो बोली- सच बताओ… तुम मेरे बारे में सब कैसे जानते हो?
मैं- अगर कल मुझे मिलो, तो मैं सब बता दूँगा!
‘ना-ना’ करते फिर वो मिलने को राज़ी हो ही गई, उसने कहा- मैं छुट्टी के समय स्कूल के सामने दवाई की दुकान में रहूँगी, आप वहीं आ जाना, पर मैं आप को पहचानूँगी कैसे?
मैं- मैं वहाँ दुकान के पास आकर तुमको फोन करूँगा। अगले दिन छुट्टी के समय मेडिकल दुकान पर स्वीटी खड़ी थी। मैंने उसको फोन किया- हाय स्वीटी.. सामने देखो मैं यहाँ हूँ।
वो दुकान से निकल गई और फोन पर बोली- आप मुझे सामने वाली गली में मिलो!
मैं गली में जाकर स्वीटी से मिला।
वो बोली- अब बताओ कि आप मुझे कैसे जानते हैं और क्या चाहते हो?
मैं- सड़क पर ही बता दूँ.. कहीं बैठ कर बात करते हैं!
स्वीटी- मैं घर के लिए लेट हो रही हूँ.. मैं कल से परेशान हूँ, आप मुझे तंग ना करो!
मैं- स्वीटी मैं तुम्हें घर ले चलता हूँ!
स्वीटी- नो थैंक्स.. मैं चली जाऊँगी… नहीं बताना तो ना सही, मैं जा रही हूँ।
यह कह कर वो चलने लगी, तो मैंने उसको कहा- ठीक है मैं बता दूँगा, अगर तुम मेरे साथ कहीं बैठ कर बात करोगी तो!
‘ठीक है, पर आज नहीं!’
वो वहाँ से जाने लगी तो मैंने उसको अपने बाइक पर बिठा कर घर तक छोड़ दिया।
उसके अगले दिन फोन करने पर बोली- मुझसे वादा कीजिए कि पहले आप मुझे सारी बात बताओगे, तब मैं आप से ज़रूर मिलूँगी।
तो मैंने उसे बता दिया- मेरी दुकान तुम्हारे घर के पास है तुम्हारे बारे में सब कुछ कैसे मालूम किया है!
स्वीटी- वेरी स्मार्ट.. आप मुझ से क्यों मिलना चाहते हो?
मैं- स्वीटी आई लव यू.. जब से तुमको देखा है मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूँ, कल मिल रही हो ना?
‘हाँ!’ कह कर उसने फोन कट कर दिया। मुझे सारी रात नींद नहीं आई। उसके नाम की 3 बार मुठ मारी। अब तो जल्द ही चूत भी मिलने वाली थी।
अगले दिन स्कूल से थोड़ी दूर छुट्टी के समय से पहले ही मैं आ गया।
छुट्टी होते ही वो मेरे पास आई और बोली- जल्दी चलो यहाँ से.. कोई देख ना ले।
मैंने बाइक स्टार्ट की, उसको लेकर एक रेस्टोरेंट में आ गया और वहाँ 2 घंटे इधर-उधर की बातें की, कुछ खाया-पिया और फिर उसको घर तक छोड़ दिया।
अब हम दोनों हफ्ते में 2 या 3 दिन मिलने लगे थे, फोन पर भी काफ़ी बातें करते थे। रेस्टोरेंट में चुम्बन करना, मम्मों को दबाना, वो मेरा लंड पकड़ लेती, यह सब आम बात हो गई थी।
अब मैं स्वीटी की चूत चोदना चाहता था। उससे फोन पर सेक्स के बारे में बातें करना अब आम हो गया था।
एक दिन मैंने स्वीटी से फोन पर कहा- स्वीटी क्या तुम्हारा सेक्स करने को मन नहीं करता है!
तो वो बोली- करता तो है, पर कहाँ करेंगे?
मैं- वो मेरे ऊपर छोड़ दो..!
मैंने उसे सोमवार को स्कूल से छुट्टी करके मुझसे मिलने को कहा, तो वो मान गई।
मेरा लंड अब स्वीटी की चूत मारने के लिए उस दिन का इंतजार कर रहा था।
जिस रेस्टोरेंट में हम मिलते थे, उसके मैनेज़र से एक कमरा लेने की बात मैंने कर ली थी।
सोमवार को स्कूल से छुट्टी कर के वो मुझसे मिलने आ गई। उसको लेकर मैं उसी रेस्टोरेंट पहुंचा। उधर कमरे मैंने पहले ही बुक करवा लिया था।
मैनेज़र के बताए हुए कमरे में स्वीटी को लेकर मैं आ गया और कमरे को बन्द कर लिया।
स्वीटी- मुझे डर लग रहा है, कुछ होगा तो नहीं..!
मैं- नहीं, कुछ नहीं होगा..!
मैंने स्वीटी के होंठों पर चुम्बन किया और उसके चूतड़ों को दबाने लगा। कभी उसके मम्मों को कमीज़ के ऊपर से ही दबा देता। स्वीटी पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। उसके चूतड़ों को दबाते-दबाते मेरा लंड सख्त हो गया था।
स्वीटी- विकी, मुझे कुछ हो रहा है।
मैंने उसकी कमीज़ और सलवार दोनों को उतार दिया। अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में खड़ी थी। मैंने एक झटके में वो भी उतार दी और अपने कपड़े भी उतार दिए।
स्वीटी के नंगे जिस्म को देख कर मेरा लंड एकदम सख्त हो गया था। मैंने स्वीटी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसको बुरी तरह से चूमने लगा।
उसके मम्मे एकदम सख्त होकर किसी अनार की तरह हो चुके थे। जिनको मैं बारी-बारी से मुँह में लेकर चूस रहा था, दबा रहा था।
मैंने स्वीटी की चूत जिस पर छोटे-छोटे बाल थे, उसको चूमा और एक उंगली उसकी चूत में डाल दी।
स्वीटी चिल्लाने लगी, मैं एक हाथ से उसके मम्मों को लगातार दबा रहा था तो दूसरे हाथ से उसकी चूत में सटासट उंगली अन्दर-बाहर कर रहा था।
स्वीटी की चूत ने पानी छोड़ दिया था, जिस कारण मेरी ऊँगली अब आसानी से अन्दर-बाहर हो रही थी।
मैंने स्वीटी के हाथ में लंड रख और उसे चूसने को कहा तो वो बोली- नहीं विकी.. मुझे गंदा लगेगा।
पर मैं कहाँ मानने वाला था, उसको लंड चूसने के लिए मना ही लिया।
स्वीटी अब मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी, जैसे कोई बच्चा आइसक्रीम चूसता है।
मैंने लंड स्वीटी के मुँह में ही अन्दर-बाहर करना जारी रखा, मेरा पानी स्वीटी के मुँह में ही छूट गया।
लंड मुँह में होने की वजह से मजबूरन सारा पानी उसको निगलना पड़ा।
स्वीटी- यह क्या किया विकी… तुमने तो मेरे मुँह में ही पानी छोड़ दिया?
मैं- कुछ नहीं होगा, चिंता ना करो!
मैं उसके मम्मों को दबाने लगा। स्वीटी की गाण्ड भी नरम थी, जिसको दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था। अब मैंने स्वीटी को बिस्तर के कोने पर कर लिया और खुद बिस्तर के नीचे खड़ा हो गया।
मैंने स्वीटी की चूत में उंगली डाल दी, चूत गीली होने की वजह से उंगली आसनी से अन्दर चली गई।
स्वीटी मज़े से गाण्ड को ऊपर उछाल रही थी। मेरा लंड भी काफ़ी सख्त हो रहा था।
स्वीटी- मुझे क्यों तड़पा रहे हो.. डाल दो ना..
मैं- क्या डाल दूँ?
मैं उसके मुँह से सुनना कहता था।
स्वीटी- तुम्हें नहीं पता क्या डालना है! जल्दी करो.. मैं मरी जा रही हूँ.. जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो!
मैंने स्वीटी की चूत से उंगली निकाली और उसकी उसकी दोनों टांगों को उठा कर चूत के मुँह पर लंड रख दिया और रगड़ने लगा।
मैंने ज़ोर लगा कर चूत पर लंड से एक शॉट दे मारा.. लंड का टोपा स्वीटी की चूत में जा फँसा!
इस कारण स्वीटी को दर्द होने लगा और वो रोने लगी।
स्वीटी- आहह.. मर गई…बाहर निकालो इसको.. मुझे दर्द हो रहा है..!
मैं- स्वीटी थोड़ा दर्द सह लो.. उसके बाद मजा ही आना है..!
यह कह कर मैंने उसके मम्मों की चौंच को मसलना शुरू कर दिया। जिससे स्वीटी अपना दर्द भूल गई और उसका पानी छूट गया।
उसी वक्त मैंने दूसरा शॉट भी दे मारा.. चूत गीली होने की वजह से मेरा 7″ लंबा और 3″ मोटा लंड स्वीटी की चूत में पूरा घुस चुका था।
“आआआव… आआआआअ.. मार डाला.. आआऐ ईआएआ.. आंमा.. मेरी चूत फट गई..!” स्वीटी दर्द से चिल्लाने लगी।
मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया और उसके मम्मों को चूसने लगा।
जब वो शांत हुई तो मैं अपने लंड को आगे-पीछे करने लगा, जिससे उसको अब मज़ा आने लगा था।
स्वीटी- सच मैं विकी मुझे नहीं पता था कि इतने दर्द के बाद इतना ज्यादा मज़ा भी आएगा।
चुदाई के मज़े से उसने अपनी गाण्ड उछालनी शुरू कर दी। मैंने भी लंड को अन्दर-बाहर करने की स्पीड को तेज कर दिया था। करीब 20 मिनट की चुदाई में स्वीटी दो बार पानी छोड़ चुकी थी।
मेरा भी पानी निकलने वाला था। मैंने चूत से लंड बाहर निकाल कर पानी बाहर छोड़ दिया। मेरे लंड पर स्वीटी का पानी और खून भी लग गया था।
मैं- स्वीटी.. अब मैं तुमको एक और मज़ा दूँ!
वो बोली- क्या और कैसे?
मैं- तुम्हारी गाण्ड मार के!
स्वीटी – नहीं.. नहीं.. मैं गाण्ड नहीं मरवाना चाहती.. मेरी चूत फट गई.. अब गाण्ड नहीं फ़ड़वाना चाहती हूँ तुम्हारे इस 7″ लंबे लंड से!
मैंने उसको ज्यादा मजबूर नहीं किया।
मैंने उस दिन स्वीटी की चूत 4 बार अलग-अलग आसनों में मारी।
मैं अपनी सच्ची घटना में बताऊँगा कि मैंने कैसे स्वीटी को गाण्ड मरवाने पर राज़ी किया और जम कर उसकी गाण्ड मारी।
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