उसका पति उसकी चुत चोदने में नाकाबिल था-1

(Uska Pati Uski Chut Chodan me Nakabil Tha- Part 1)

माँ क़सम, उसको चोदने में मुझे जो मजा आया, मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता. क्योंकि मुझसे चुदने की क्रिया उसने नहीं छोड़ी थी.
उसको चोदते चोदते मैं थक गया लेकिन एक घंटे के बाद मैंने जब उससे पूछा- और चाहिए?
तो उसने कहा- हां..
मैंने पूछा- कितनी देर?
उसने कहा- तुम कितनी देर टिक सकते हो?
मैं चमत्कृत रह गया.

वो सेक्स की इतनी भूखी थी कि उसकी चुत में जैसे चुदाने की आग लगी थी. उसकी चूत एकदम गरम थी. अभी तक मैंने जितने भी धक्के लगाए थे, उससे उसकी आग नहीं बुझी थी. अब वह चाहती थी कि मैं उसको अलग अलग आसनों से चोदूँ, जैसे डॉगी स्टाइल में, बैठ के, खड़े होकर…

उसकी ये बेताबी देखकर मुझे मेरी औरत ध्यान आई. बिल्कुल ठंडी, मुर्दा हो.. चुदने के वक्त ऐसी पड़ी रहती थी जैसे मैं बलात्कार कर रहा हूँ.
मेरे जिंदगी के वे साढ़े तीन घंटे इतने खूबसूरत गुजरे कि मैं स्वर्गलोक में विचरण कर रहा था.
दोस्तो, यह पूरी कहानी अभी इसी वक्त सुनाता हूँ.. मजा लीजिएगा.

ये एक ऐसा हसीन मौका था मेरे जिन्दगी का.. जो वाकिया मैं भुलाये नहीं भूल सकता.

जून की एक ऐसी ही गर्म धूप भरी दोपहर थी, मेरी बीवी बच्चे मायके गए हए थे, मैं अकेला ही मेरे घर में था, इतने में मेरे घर एक सेल्स गर्ल यानि एक लड़की कोई सामान बेचने आई. मैंने उसे अंदर बुला लिया.
कोच पर बैठे बैठे उसने मुझ से मेरा नाम पूछा, मैंने बताया.
लेकिन उसने उसके बाद मुझे जो कुछ भी कहा, उससे मेरे हौसले बढ़ गए.
उसने कहा- तुम अगर मेरा ये प्रोडक्ट खरीदो तो मैं तुम्हें ऐसी ट्रीट दूंगी जो तुम जिंदगी भर नहीं भूल सकते.
मैं सोच में पड़ गया कि ऐसा क्या होगा, जो ये मुझे देना चाहती है?

तभी उसने एक मस्ती भरी अंगड़ाई ली और पूछा- बेडरूम कहाँ है?
पहले तो मैं थोड़ा झिझका.. क्या बला थी ये? कहीं मैं किसी साजिश का शिकार तो नहीं हो रहा? मेरे मन में भय भी था और एक जवान लड़की की चूत मिलाने की आस भी…

मैंने “क्यों..” पूछते हुए उसे बेडरूम का दरवाजा बताया.
उसने कहा कि उसकी सलवार का नाड़ा ढीला हो गया है, वह उस को कस आकर बाँधना चाहती है.

सलवार का नाड़ा खुलने की बात तो मेरे समझ में आई, लेकिन उसकी अंगड़ाई ने मुझे उत्तेजित कर दिया. दो मिनट बाद बेडरूम से उसकी आवाज आई, सुनते हो मेरी गाँठ ही नहीं बंध रही है.. आओ न, गाँठ बांध दो.

मैं मेरे बेडरूम में गया. वहां का नजारा देखकर मुझे बड़ा अचरज हुआ वह अधनंगी सामने के बेड पर लेटी थी. उसका एक हाथ अपनी ब्रा का हुक खोल रहा था.
यह देख कर मेरे नीचे के भाग में एक हलचल होने लगी थी, लंड का आकार बढ़ने लगा था, मैं थोड़ा डर गया था क्योंकि इस तरह से कोई लड़की एकदम बेडरूम में घुसकर मेरे पौरुष को ललकारेगी, यह मैं समझ नहीं पा रहा था.

मैं धीरे से उसके पास गया… और उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, उसके दोनों चुचे उछल कर बाहर आ गए. मेरा लंड भी तनतना रहा था. मैंने लंड को बाहर निकालने के लिए पैंट की जिप खोली. उस लड़की ने मेरी तरफ गुस्से से देखा.

“रुको.. मैं बाहर निकालती हूँ…” यह कह कर उसने मेरी जिप में से लंड बाहर निकाला और उसे हाथों से हथियाने लगी. फिर उसने लंड को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
आह.. क्या नजारा था, क्या तड़प थी उस लड़की में.. मेरा तो हौसला बढ़ गया.
मैंने उसकी दोनों चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. उसकी नर्म गर्म चुचियां जैसे मेरे पंजों का इंतजार कर रही थीं.

मैंने उस लड़की से पूछा- इतनी गर्म कैसे हुई हो तुम?
उसने कहा- पूछो मत राजा, एक तो मेरा मर्द साला नामर्द है, दूसरा जिस जगह से में आ रही हूँ वह एक बुड्ढा था, साले ने सामान तो लिया, लेकिन जब कुछ करने का वक्त आया, तो पूरा ढीला पड़ गया कमीना? मेरी भूख भी पूरी शांत नहीं कर सका. इसके बाद मैंने तुम्हारा दरवाजा खटखटाया तो सामने तुम आए, घर में कोई नहीं है, ये देख कर मैं थोड़ी रिलेक्स हुई. नीचे मेरी चुत में आग लगी थी. समझ नहीं आ रहा था कि कहाँ आग बुझाऊं. तुमको देखा तो लगा मेरी आग तुम्हीं बुझा सकते हो. मैंने पांसा फेंका, मेरी जीत हुई, तुम्हारे लंड की हलचल को मैं आते ही देख चुकी थी. फिर मेरे दिल में आया कि बाहर किसी और से चुदाओ, अपनी गांड मराओ, इससे बेहतर है कि तुमसे ही चुदा लूँ…

उसकी बेबाक लम्बी कहानी सुनकर मैंने उसके मम्मे दबा दिए.
तो उसने पूछा- हाय तुम्हारे लंड का साइज क्या है राजा?
“तुम्हीं बताओ रानी? तुम्हारी ही चुत में जाएगा.”
“ये मेरे खयाल से करीबन सांत इन्च का लंबा बम्बू है.. अब मैं चुदूँगी तो मेरी पूरी भूख मिटेगी. चल आजा सामने से मेरे राजा, पहले तू मेरी चुत का बाजा बजा, फिर मेरी गांड का सत्यानाश कर, आज तुझे खुली चुत है.”

साली थी बड़ी रंगीली, उसने मेरे लंड को अपनी चूत पर लगाया. मैंने आव देखा न ताव.. एक जोरदार झटका पूरे जोर से मारकर अपना पूरा लंड उसकी चुत में घुसेड़ दिया.
“आआअह.. स्स्स्स्स.. बापरे.. मर गई.. क्या मूसल लौड़ा है तेरा.. मेरी तो जान ही निकल गयी थी. अच्छा हुआ पहले से चुदाई हुई हूँ, वरना आज तो मेरी खैर नहीं थी. बाकी तुम हो दमदार! क्या चोदते हो राजा, फुल मजा आ गया चुदने का. आज से मैं तुम्हारी हुई. अब आज मुझे कहीं और चुदाने की जरूरत ही नहीं है. बड़ा दमदार लौड़ा है तुम्हारा.”

मैंने उसके दोनों पैर मेरे कंधे पर रखे, फिर मैंने उसकी ऐसी धुनाई की कि साली चुदक्कड़ को नानी याद आ गयी.
उसकी चुत का पूरा सत्यानाश करके मैंने उससे पूछा- और चाहिए?
उसने कहा- हाँ राजा, दबा के चोदो..

मैंने उसे पेट के बल लिटाया. वह मेरी तरफ देखकर हंसी- क्या गांड मारने का इरादा है क्या?
उसकी बेतकल्लुफी देख कर मैं दंग रह गया. उसके गोल पुठ्ठों को बजाते हुए मैंने उसकी गांड पर मेरा लंड रखा. उसने मुझे थोड़ा ठहरने को कहा.

मैंने रुककर उसको देखा. साली गांड में, सामने के आइने के पास रखी क्रीम लगा रही थी.
“क्यों रानी, गांड फटने के डर से फट गयी क्या तेरी?”
“नहीं मेरे राजा तेरा सात इंची लंड पूरा का पूरा अन्दर तक घुस जाए.. इसलिए क्रीम लगा रही हूँ. तेरा तो है ही बड़ा.. मेरी गांड का छेद है अढ़ाई इंच का.. कसके डालना अन्दर..”
उसकी ये बेतक़ल्लुफ़ी क़ी बातें मुझे बहुत रास आ रही थीं.

ऐसी खुली बातें करने वाली कोई औरत मेरे साथ अभी तक नहीं सोई थी. क्या चीज थी ये.. साली पूरी चुदाऊ माल थी हरामन.. उसकी चूत तो जैसे मक्खन सी मुलायम, उस पर झांटों का नामो निशान नहीं, चूसने के लिए बेहतरीन चूत, लंड को लेने को तैयार जैसे किसी गुलाब का फूल हो.

उसके तने हुए मम्मों को देखकर उस पर से हाथों को फिराने का मन करे, मैंने उसके इसकी तुलना मेरी औरत से करना शुरू कर दिया. मेरे जेहन में एक बात आयी कि क्या मेरी औरत इस तरह का मौका मुझे दे सकती थी?
ऐसा संभव ही नहीं था. वो रात को जब मेरे पास सोने आती तो उसके शरीर से रसोई की बास इतनी आती कि मेरे मन की रोमांस की आशा ही मर जाती. फिर मैं उसके कपड़े उतारता तो देखता कि चुत से मूत की इतनी घिनौनी सी बास आ रही है कि वहाँ मुँह लगाने का दिल ही नहीं करता? चुम्मा लेने के लिए जाता तो मुँह को बास मारते पाता. वो तो एक मृत शरीर के जैसे पड़ी होती सामने, कोई हलचल नहीं.. कोई उत्तेजना नहीं.

उस बेजान औरत के सामने ये जैसे गुलाब का फूल थी. चूत चाटने का मन कर रहा था मेरा. लेकिन औरत की बात याद आकर मैंने वहाँ मुँह नहीं लगाया.
फिर वह मेरे पास आकर पेट के बल जो सोयी, तो मेरे लंड ने उसके दोनों पुठ्ठों की दरार में घुसना चालू कर दिया.
“आय हाय जानू.. क्या मस्त लग रहा है तुम से चुदा कर, ऐसे ही मारते रहो मेरी गांड…”

साली वाकई दमदार माल थी.. चढ़ाई करने लायक चूत की मालकिन थी. मेरा सात इंची लंड गांड में ऐसे ले रही थी जैसे कोई खिलौना हो. बीच बीच में उसकी “स्स्स्स्स हां.. आह.. बाप रे मर गई..” कामुक बातें मेरी उत्तेजना भी बढ़ा रही थीं.
“थोड़ा और घुसाओ.. आह.. धीरे धीरे करो.. फाड़ डालो साली को आह.. बड़ी तकलीफ देती है.. कोई मारने वाला नहीं है, मर्द साला बड़ा झांटू है. भोसड़ी वाले से कोई काम ठीक से नहीं होता. मैं रात भर चुदना चाहती हूँ, साला एक ही बार में ठंडा हो जाता है. आज मिला है सही चोदने वाला, चोद साले, फाड़ डाल मेरे दोनों छेदों को..”

“क्यों री साली, तेरी चूत चोदने के लिए कोई और नहीं मिला क्या तुझे?”
“जब मैं अन्दर आयी और तुमको देखा तो मुझ चूत की मारी को ऐसा लगा कि तुम्हारा लंड मेरी शांति कर सकेगा. क्या लंड है तुम्हारा.. हाय.. मैं वारी जाऊं राजा.. चोद चोद कर मेरी गांड का भुरता बना दो राजा आह.. तुम्हारे लिये ही आज से मैं इसको रिजर्व रखूंगी. हाय रे मेरी किस्मत, आज मिला है मुझे सलीके से चोदने वाला. पूरी शांति करने वाला.. अह.. चोद राजा.. चोद.. भर दे मेरी गांड को तेरे लंड के रस से..”

उसकी गांड मारते हुए मुझे दस मिनट लगे. उसकी गांड में मेरा रस भर कर मैं अलग हुआ और एक तरफ लुढ़क गया.
जैसे ही मैं सोया उसने मेरे छाती पर अपना सर रखा.. और मेरी सीने के बूंदों से खेलने लगी.
मैंने उससे पूछा- अरे मैंने अभी तक तेरा नाम भी नहीं पूछा?
उसने हंसकर कहा- तुम्हारी रांड चुदक्कड़..
“ये भी कोई नाम हुआ रानी?”

“मेरा नाम शीला है, मैं वसंत कॉलोनी में रहती हूँ. जाते जाते में आपको मेरा पता और मोबाईल नंबर देती जाऊंगी. आपको जब भी चोदने का मन करे, मुझे मोबाइल कर देना, मैं तैयार रहूंगी तुमसे चुदने के लिए… तुम्हारे इस सात इंची लंड से मुझे प्यार हो गया है. अब मुझे इसके बिना रहा नहीं जाएगा.”
मेरी छाती के बालों से खेलते हुए उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और वह उसे हथियाने लगी.

उसकी यह अदा मुझे अच्छी लगी. मैंने उसके बालों को हाथ में लेकर थोड़ा खींचा और उसके होंठों पर होंठ रख दिए. जिन्दगी में पहली बार मुझे चुम्बन क्या होता है, इसका अहसास हुआ. उसने मेरे होंठों में अपनी जीभ मेरे मुँह में डाली और इतना सुन्दर चुम्बन लिया कि मेरे होशो हवास उड़ गए.
फिर उसने मेरे लंड को अपने होंठों में लिया और चुभलाने लगी. मेरे लंड का आकार बढ़ने लगा. फिर मेरे मन में उसकी चूत को चाटने का ख्याल आया, मेरे लंड को मुँह में लेकर वह मुझे सिक्स नाइन करने के लिए उकसाने लगी.

मैं झिझकते हुए नीचे गया. उसकी चुत में मुँह लगाने से पहले मैंने वहां की बास ली. महकती हुई चूत थी.. कहीं कोई मूत की बास नहीं. बस, मैंने चुत पर मुँह लगाया.. और शुरू हो गया. आह.. क्या मस्त चूत थी साली की.. दम से चाटने के लायक…
कुछ ही पलों में उसकी चूत का रस बाहर आ रहा था. मैंने वह रस चाट चाट कर साफ किया. मस्त टेस्ट था उस रस का.. थोड़ी नमकीन मलाई.. थोड़ी खट्टी सी..

आज बड़ा ही मस्त समय था. क्या बात थी. शायद कोई बड़ा ग्रह मेरे भाग्य में खुश था. एक ऐसी औरत से मेरा पाला पड़ा था, जो बड़ी मस्त चुदक्कड़ थी. करीब तीन घंटे उसको चोदने के बाद मुझे तसल्ली हुई कि आज बड़ा आनन्द आया.

शीला उठी, उसने कपड़े पहने, मेरे लंड का चुम्मा लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और मेरे हाथ में एक चिठ्ठी थमा कर उसने मुझसे विदा ली.

इसके बाद मैंने उसके घर जा कर भी चोदा और तभी उसका पति मेरे सामने आ गया वो भी अपने पति के साथ मेरे सामने खड़ी थी, मैं एकदम नंगा पड़ा था.
फिर क्या हुआ?
अगले पार्ट में आपसे उसके घर में इस चुदाई की कहानी को साझा करूँगा. आपके मेल का इन्तजार रहेगा.
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कहानी जारी है.
कहानी का दूसरा भाग : उसका पति उसकी चुत चोदने में नाकाबिल था-2