मेरी चूत और गांड दोनों प्यासी हैं-2

(Meri Chut Aur Gand dono Pyasi Hain- Part 2)

This story is part of a series:

अब रणवीर का लंड ठीक मेरे मुँह के पास था।

मुझे लगा कि मेरे नाक के पास कुछ है। मैंने तुरंत अपने नाक के पास हाथ लगाया और भौंचक्का होकर उठ गई। मेरी नाक के पास रणवीर का लंड था। मैं जैसे ही उठी, मेरी ब्रा नीचे खिसक गई। अब हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। मैंने तुरंत रणवीर के लंड से हाथ हटाया और अपनी ब्रा उठा कर पहनने लगी।

रणवीर बिस्तर से उठ गया और मुझे ‘सॉरी’ बोलने लगा।

पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ चुदाई करूँ या मना करूँ।

मैंने रणवीर को अपने पास बुलाया और बिठाया और पूछा- क्या हुआ? यह सब क्या है?

रणवीर बोला- सॉरी यार, वो दो दिन हो गए सेक्स नहीं किया। इसलिए अजीब सा लग रहा था। जब तुम्हें इस तरह देखा तो खुद को रोक नहीं पाया। जब से शादी हुई है, लगभग मैं और श्रेया रोज़ ही हनीमून मनाते थे। अब वो अचानक से चली गई तो समझ नहीं आ रहा था कि इस बेचैनी को कैसे दूर करूँ।

मैंने कहा- वैसे तो मैंने भी काफी टाइम से सेक्स नहीं किया, पर तुम्हारे साथ समझ नहीं आ रहा। तुम शादीशुदा हो तो हमारे बीच कुछ हो भी नहीं सकता।
रणवीर का मुँह लटक गया, वो बाहर जाने लगा।

मैंने कहा- अच्छा ठीक है, पर सिर्फ एक बार! वो भी इसलिए क्योंकि मैंने भी काफी समय से किसी के साथ सेक्स नहीं किया और कोई मतलब मत निकलना प्लीज।
रणवीर का चेहरा खिल गया और वो मेरे पास बैठ गया। मैं रणवीर से चिपक गई और एक हाथ से उसका लंड को सहलाने लगी और रणवीर मेरी ब्रा में हाथ डाल के मेरे दूध दबाने लगा। धीरे धीरे हम दोनों के बीच की शर्म कम होती गई और हम सेक्स की क्रीड़ा में लीन होते गए। अब हम बिस्तर में लेटे हुए एक-दूसरे को चूम रहे थे।

अब रणवीर ने मेरी चूत की तरफ रुख किया और उसके मेरी चूत पर मुँह रखते ही मेरे जिस्म में बिजली सी दौड़ पड़ी और मैं सिसकारी भरने लगी। रणवीर तो मेरी चूत को ऐसे चाट रहा था, जैसे आज वो इससे कच्चा ही चबा जाएगा।

धीरे-धीरे रणवीर मेरी चूत में उंगली डाल कर अंदर-बाहर करने लगा और मेरी सिसकारियों की गति और तेज़ होने लगी। वो उंगली को आगे-पीछे करते हुए अपनी जीभ से मेरी चूत चाट रहा था।

मैंने रणवीर के बाल पकड़ कर उसको ऊपर खींचा और मैं नीचे झुक कर उसके लंड के पास चली गई और कहा- तुमने तो बहुत चूस लिया है, अब चूसने की बारी मेरी है।
उसका लण्ड इतना बड़ा था कि मेरे मुँह में ही नहीं आ रहा था, पर फिर मैं कहाँ हार मानने वाली थी। मैंने भी जितना अंदर घुसा सकती थी, घुसाया और चाटने लगी।

फिर रणवीर ने मेरी पिछाड़ी को दोनों हाथों से पकड़ा और सहलाने लगा और फिर कहा- चलो और घोड़ा घोड़ी खेलते हैं। तुम घोड़ी बन जाओ और मैं घोड़ा बन कर तुम्हारी गांड मारता हूँ।
मैंने भी बिना देरी किए अपनी गांड उसके लंड के आगे कर उसे घुसेड़ने का आमंत्रण दिया। मेरी चूत से पानी गिर रहा था।

तभी अचानक उसे पता नहीं क्या सूझा, उसने मुझे लिटा दिया और बोला- गांड कैंसिल, पहले मैं तुम्हारी चूत के सर्वे करना चाहता हूँ।
उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मैंने दोनों टाँगें चौड़ी करके कहा- आ जाओ जल्दी।
उसने अपना बड़ा सा लंड एक झटके में मेरी चूत में डाल दिया और ज़ोर का झटका मारा। मुझे थोड़ा दर्द हुआ पर उतना नहीं क्योंकि मैं पहले भी चुद चुकी थी।

मैंने सोचा इस चुदाई को और थोड़ा रोमांचक बनाते हैं, इसलिए मैं ज़ोर-ज़ोर से आवाजें करने लगी- उउऊहह आआईई हाईई मर्र गई पप्लीज! रणवीर बाहर निकालो! बहुत दर्द हो रहा है।
पर रणवीर कहाँ सुनने वाला था। वो तो झटके देने में व्यस्त था और मैं भी उसका पूरा आनन्द उठा रही थी।

फिर थोड़ी देर बाद उसने कहा- क्या हुआ?
मैंने रोता हुआ चेहरा बना कर कहा- बहुत दर्द हो रहा है।
उसने कहा- अच्छा चलो ठीक है, सीधे लेट जाओ। मैं तुम्हारी दोनों टांगें ऊपर कर लेता हूँ। उससे दर्द कम हो जाएगा। मैंने भी सर हिला कर हामी भर दी।
अब उसने अपनी जीभ से मेरी चूत को चाटा और फिर थोड़ी देर उंगली करने लगा, उसी पोजीशन में, ताकि मैं रम जाऊँ।

उसने मेरी टाँगें अपने दोनों कन्धों पर रखी, लण्ड को मेरी चूत की दरार में रखा और फिर मेरे दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर धक्का देने लगा।
उसका लण्ड मेरी चूत में जाने लगा और मुझे बहुत थोड़ा-थोड़ा दर्द होने लगा। मैं जोर से चिल्लाने लगी, और उससे तुरंत अपना लंड निकालने को कहा। पर वो तो शायद मेरी बात सुन ही नहीं रहा था।
और वैसे भी मैं भी नहीं चाहती थी कि वो मेरी बात सुने।

मैंने देखा उसका ध्यान मुझे पर से हट रहा है इसलिए मैंने थोड़ा रोने लगी।
मुझे रोता देख कर, वो रूका और अपना लण्ड उसने बाहर निकाला और पूछा- क्या हुआ?
मैंने बोला- बहुत ज़ोर से दर्द हो रहा है।

फिर वो मेरे ऊपर आकर लेट गया और मुझे फिर से चूमा और मेरे होंठों पर अपने होंठ को रखकर चूसने लगा। मैं फिर से अपने दर्द को भुला बैठी थी।
थोड़ी देर बाद उसने फिर चुदाई का प्रोग्राम शुरू किया और मैं भी मज़े लेने लगी।

इस बार उसने मेरा मुँह अपने मुँह से बंद कर दिया था। इस बार वो झटके के साथ डाल रहा था। उसने अभी 4 झटके ही लगाए थे कि मैंने उसकी कमर को अपनी दोनों टाँगों और हाथों से जकड़ लिया और खरोंचने लगी।
वो समझ गया कि मुझे भी मजा आ रहा है। उसने चुदाई की गति तेज़ कर दी। मैंने भी अपनी पकड़ टाइट कर दी।

रणवीर अपने लंड से मेरी चूत को तार-तार कर रहा था, मैं भी उसका पूरा आनन्द उठा रही थी। पर जब 15 मिनट बाद उसने यह सिलसिला खत्म किया, तो मेरी हालत अधमरी सी हो गई थी। वो भी थक कर मेरे ऊपर लेट गया। मैंने उसके सर को अपने हाथों से उठाया और कस कर होंठों को चूमने लगी। वो भी मुझे चूमने लगा। अभी भी उसका लंड मेरी चूत के अंदर ही था।

थोड़ा रुक कर वो मुझे फिर चोदने लगा और मुझे फिर से दर्द होने लगा। हमारा चुदाई का प्रोग्राम फिर ज़ोरों शोरों से शुरू हो गया। इस बार मैंने भी हरकत की और जब वो झटके दे रहा था, मैं अपनी एड़ियों से उसके गांड पर प्रहार कर रही थी।

वो कभी छोटे शॉट मारता, कभी लम्बे झटके देता। चुदाई करते हुए हमें 20 मिनट से अधिक हो गए होंगे। कुछ ही धक्कों के बाद मैं और रणवीर झड़ कर एक-दूसरे के ऊपर गिर गए।
कुछ समय बाद जब उसकी चुदास फिर वापस आई तो उसने कहा- अब तुम घोड़ी बनो, और अब तुम्हारी गांड मारने में मजा आएगा।
पर मैंने कहा- अभी थोड़ा रुको, मुझे थोड़ी देर और मज़े करने दो।

इतना कह कर मैं उसके ऊपर चढ़ गई और 69 की पोजीशन में उसके लंड को दोनों हाथों से पकड़ के चूसने लगी। करीब दस मिनट तक मैंने उसके लंड को चूसा। तब तब रणवीर मेरे चूत के सेवन में लगा रहा।

जब मुझे लगा कि अब मेरी चुदास भी अंगड़ाई लेने लगी है, तब मैंने कहा- आ जाओ मेरे घोड़े, तुम्हारी घोड़ी अब पूरी तरह तैयार है।
मैं घोड़ी बनी और उसने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और पीछे से मेरी चूत में लण्ड डालने लगा।

उसके लण्ड डालते समय मुझे थोड़ा दर्द हुआ पर इस पोजीशन में थोड़ा बहुत दर्द तो सामान्य है। धीरे-धीरे जैसे ही उसने शॉट मारना शुरू किए, हम दोनों को मज़े आने लगे। 15 मिनट बाद वो झड़ गया और मेरे दोनों चूतड़ों के बीच में अपना लंड फंसा कर लेट गया।
मैंने उसे उकसाया- बस इतनी ही ताकत है? थक गए?
रणवीर बोला- हाँ यार, तुम्हारे आलू के परांठों से मिका सारा दम निकल गया। थोड़ी देर रुको फिर हम दुबारा मज़े करेंगे।
मैंने कहा- ठीक है, चलो तुम्हारी बात मान लेती हूँ। तब तक मैं भी बाथरूम से आती हूँ।

मैंने उसे अपने ऊपर से हटाया और बगल में लेटा दिया और उठने लगी। मैंने उठने की कोशिश कि पर थोड़ा का दर्द हो रहा था। जिस वजह से उठने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी।
उतने में रणवीर ने पीछे से अपने हाथों से मेरी गांड दबा दी और कहने लगा- क्या कमाल के चूतड़ हैं तुम्हारे, जी करता है खा जाऊँ इन गोल-गोल नरम-नरम मुलायम से चूतड़ों को।
मैंने कहा- खा लेना, आज की रात यह गांड, यह चूत और मैं सब तुम्हारे ही हैं न।
इतना कहकर मैंने पेशाब करने चली गई।

रणवीर के घर पर इंडियन टॉयलेट था। वो भी उल्टा (उलटे से मतलब आम तौर पर बाथरूम सीधा होता है, पर इसका आड़ा था। मतलब अगर आप पेशाब करने के लिए बैठोगे तो आपका मुँह दीवाल की तरफ हो जाता है और आपकी गांड दरवाजे की तरफ)
मैं बाथरूम में बैठी और पेशाब करने लगी। पेशाब करके जैसे ही उठने वाली थी, पीछे से रणवीर आया, मेरी दोनों टाँगों और जांघों के बीच में उसने अपना हाथ फंसाया और मुझे वैसे का वैसे उसी पोजीशन में उठा लिया।
मैंने बोला- क्या कर रहे हो?
रणवीर बोला- कुछ नहीं अपनी गांड से प्यार फरमा रहा हूँ।

यह सुन कर मैं खिलखिला कर हँसने लगी और रणवीर मुझे बिस्तर पर ले आया, बोला- तुम इसी पोजीशन में मेरी लंड पर बैठो और मज़े करो, तब तक मैंने तुम्हारे दूध सहलाता हूँ।
मैंने उसके लंड पर अपनी चूत फँसा कर बैठ गई और ऊपर-नीचे करने लगी। वो मेरे चुचूकों को अपनी उँगलियों से मरोड़ रहा था। हल्का का चुबहना हो रहा था और मजा भी आ रहा था।
मैंने भी चुदाना जारी रखा, जब तब मैं थक कर उसके ऊपर गिर नहीं गई।

जब हम दोनों एक-दूसरे के ऊपर लेटे थे, तब मैंने बातों-बातों में रणवीर से कहा- तुम्हें पता है, मैं तुम्हें हमेशा से पसंद करती थी। पर तुमसे कभी कहा नहीं, क्योंकि तुम शादीशुदा हो। शायद तुम मुझे गलत न समझ लो।
रणवीर बोला- पसंद तो मैं तुम्हें आज भी करता हूँ और करता था। पर क्या करता? श्रेया के कारण मजबूर था।
‘अच्छा यह बताओ, श्रेया कब आने वाली है?’
रणवीर ने बताया- बुधवार की तो शादी है, इसलिए उससे पहले तो आएगी नहीं।

मैं समझ गई यानि बुधवार तक तो रणवीर अकेला है, इसलिए अगर मैं चाहूँ तो इस समय का पूरा सदुपयोग किया जा सकता है। फिर मैंने बात यह सोच कर टाल दी कि सुबह देखेंगे, क्या करना है? अभी तो लंड मेरे साथ सो रहा है।
मैंने रणवीर से बोला- यार भूख लग रही है, कुछ खाने को ले आओ।

रणवीर गया और आलू के परांठे ले आ आया। एक-एक टुकड़े कर हम दोनों एक-दूसरे के हाथों से खाने लगे। थोड़ी देर बाद जब हमारा पेट भर गया तो दोनों साथ आकर लेट गए।
रणवीर का लंड फिर मेरी चूत चोदने के लिए फड़फड़ा रहा था। रणवीर ने देरी किए बिना मेरी चूत का रंगारंग प्रोग्राम फिर से पूरे तामझाम के साथ शुरू कर दिया।

करीब तीन राऊँड के बाद हम दोनों बहुत थक गए और फिर हम दोनों वहीं निर्वस्त्र एक दूसरे से लिपट कर बांहों में बांहें डाल कर सो गए। पूरी रात रणवीर का लंड मेरी गांड के आस-पास मंडराता रहा और सुई की तरह मुझे चुभता रहा। शुरुआत में तो मैं अलग करती रही, पर फिर मुझे आदत सी पड़ गई और मैंने उससे आजाद छोड़ दिया। सुबह नींद खुली तो 11 बज गए थे पर उठने का मन नहीं कर रहा था। मुझे इस बात का तो एहसास था कि श्रेया अभी नहीं आने वाली और आज शनिवार है, ऑफिस भी नहीं है।
मैं उठी तो देखा रणवीर का लंड फिर से तना हुआ था। मैंने उसको अपने मुलायम होंठों से किस किया और बिस्तर से उठ गई।

गोदरेज में से एक नाईट गाउन निकला, फ्रेश हुई और फिर रणवीर के लिए चाय बना कर और फिर उसके लंड पर बैठ कर उसको किस करते हुए ‘गुड मॉर्निंग’ कहा और चाय दी।

आगे मैं आपको बताऊँगी कैसे मेरे चुदैल दिमाग ने 10 दिन तक रणवीर के साथ जी भर के चुदाई की। आप लोगों को मेरे जीवन का यह हिस्सा कैसा लगा? जरूर बताइएगा।
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