न्यूज़ चैनल की एंकर की चुदाई-1

(News Channel Ki Anchor Ki Chudai- Part 1)

This story is part of a series:

अन्तर्वासना के पाठक पाठिकाओं की सेवा में चूतनिवास का लंड को इकत्तीस बार तुनका कर सलाम.
तीन महीने पहले मेरी एक कहानी अन्तर्वासना में छपी थी जिसका शीर्षक था
चुदक्कड़ टीचर ने पढ़ाये चुदाई के पाठ
यह कहानी बहुत पसंद की गयी थी और बहुत सी लड़कियों के मेल भी आए जिनमें उन्होंने मुझसे उन्ही तरीकों से चुदने की इच्छा ज़ाहिर की थी जो जो उस कहानी में आज़माये गए थे.

उस कहानी ने मुझे तीन नयी रानियां दीं. यह तीनों ही थीं टीवी के एक मशहूर न्यूज़ चैनल की एंकर. लड़की या चैनल का नाम नहीं बता सकता. उनकी गोपनीयता का प्रश्न है. चुदने वालियों के नाम, फोन नंबर और मेल आई डी मैं हमेशा गुप्त रखता हूँ.

इनमें से एक लड़की ने शुरुआत की और फिर इसके ही माध्यम से इसकी पक्की दो सहेलियां भी मिलीं.

इस लड़की का पहले मेल आया- चूतनिवास जी, मैं आपकी कहानी पढ़ के आपकी चुदाई के स्टाइल से बहुत प्रभावित हुई हूँ, इसलिए मैंने आपकी इसके पहले छपी हुई सभी कहानियां भी पढ़ लीं. बहुत आनंद आया. चूत पानी पानी हो गई और आपसे चुदने की इच्छा बलवती हो गई.

उस समय तक मुझे नहीं पता था कि लिखने वाली एक जाने पहचाने टीवी न्यूज़ चैनल में एंकर है.

फिर उसने खुद ही लिखा- चूतनिवास जी, आपसे मिलने से पहले मैं जानना चाहती हूँ कि आप मेरी सीक्रेसी कैसे बनाये रखेंगे. मैं टीवी समाचार के एक चैनल में एंकर हूँ, मेरा चेहरा बहुत जाना पहचाना है. मेरे लिए किसी के साथ सेक्स सम्बन्ध बनाना बड़े रिस्क वाली बात होगी. मैं आपको हैंग आउट पर वीडियो कॉल करती हूँ ताकि आप देख लें कि मैं कौन हूँ.

इतना कह कर इसने हैंगऑउट पर वीडियो कॉल लगायी.
मैंने तुरंत पहचान लिया. वो एक हिंदी समाचार चैनल में अक्सर आती है. काफी अच्छी एंकर है. बहुत ही सुन्दर लड़की है. उम्र करीब 28-30 की. अच्छे गोल गोल बड़े से वक्ष उभार … रहा सवाल फिगर का … तो जब मिलूंगा तभी पता चलेगा.
हैंगऑउट पर या टीवी पर पता नहीं चलता. टीवी एंकर थी तो आवाज़ तो मस्त थी ही.

मैंने कहा- मैं आपसे एक होटल में मिलूंगा. दो रूम बुक करवाए जायँगे. अपने पसंद के होटल में आप अपने लिए रूम बुक करवा के मुझे सिर्फ होटल का नाम बता देना. मैं भी उसी होटल में रूम बुक करवा लूंगा. उसके बाद हम होटल आपके या मेरे रूम में मिल कर संगम करेंगे. होटल पहुँच कर मैं आपको अपना रूम नंबर बता दूंगा. आपका रूम नंबर नहीं पूछूंगा.

उसकी खनखनाती हुई आवाज़ आयी- हाँ यह ठीक लगता है … परन्तु मैं आपके कमरे में नहीं आऊंगी बल्कि आप मेरे कमरे में आएंगे. मैं आपको कमरा नंबर दे दूंगी. एक मेरी साथी लड़की भी आएगी मेरे साथ … वो वीडियो कैमरा लेकर आएगी … अगर अपने कुछ गड़बड़ काम किया तो वो सब कुछ रिकॉर्ड करके पुलिस में शिकायत कर देगी. माफ़ करियेगा चूतनिवास जी, मैं आपको जानती नहीं हूँ इसलिए सुरक्षा के लिए ये करना चाहती हूँ … आपको इसमें ऐतराज़ है क्या?

मैं बोला- नहीं, कोई ऐतराज़ नहीं है … एक मेरी भी शर्त है … और वह यह कि वो हमारी चुदाई की पूरी रिकॉर्डिंग करेगी और एक कॉपी मुझे भी देगी … ये मेरी सुरक्षा के लिए है … कहीं आप चुद कर मेरी शिकायत कर दें कि मैंने आपके साथ ज़बरदस्ती करी. ऐसा न हो कि चुदाई देखते हुए वो भी गरमा कर चुद ले … उसकी चुदाई में तो कोई ऐतराज़ नहीं न होगा आपको.

वो खूब ज़ोर से हंसी … बोली- नो प्रॉब्लम चूतनिवास जी … चुदाई चाहेगी तो चुद ले मुझे क्या प्रॉब्लम है … सहेली है अगर अगर उसको चुदास की गर्मी चढ़ जाये तो चुदाई करे … चुदने का दिल हो तो क्यों न चुदे?

फिर मैंने पूछा- आपको किस नाम से पुकारूँ क्यूंकि आपका असली नाम तो लेना नहीं है.
थोड़ी देर सोचती रही फिर बोली कि आप मुझे बेबी कह सकते हैं … बेबी मेरा घर का नाम है लेकिन ये नाम इतनी लड़कियों का होता है कि कोई रिस्क नहीं है.
मैंने कहा- गुड … लेकिन बेबी नहीं, बेबी रानी.

बेबी रानी फिर से खिलखिला कर बड़े ही दिलकश अंदाज़ में हंसी- मैं जानती हूँ आप सबको नाम के साथ रानी लगाकर सम्बोधित करते हैं … मैंने आपकी सब कहानियां पढ़ ली हैं और मैंने आपके बारे में सब कुछ जान लिया है … आपको गालियाँ देने का बड़ा शौक है न? खुल के दे सकते हैं आप गालियाँ … मुझे अच्छा लगेगा.
मैं बोला- ठीक है मादरचोद वेश्या … अब बोल और क्या क्या जान लिया मेरे बारे में, हरामज़ादी रंडी?

बेबी हँसते हँसते बोली- तुझे लड़कियों की सुस्सू पीना पसंद है ना? तू इसको स्वर्ण अमृत कहता है … तुझे लड़कियों के पैरों से बहुत लगाव है. खूब चूमता चाटता है तू पैर … तुझे झांटों का जंगल अच्छा लगता है … बगलों के बाल भी तुझे पूरे बढ़े हुए अच्छे लगते हैं … और पूछ कमीने?
मैं भी हंसा और बोला- बस बस … मैं समझ गया हराम की ज़नी कुतिया. अब तू होटल का नाम बोल?
बेबी रानी ने कहा- देख कुत्ते … वैसे तो मुझे हर होटल में 50% का डिस्काउंट मिलता है … लेकिन मुझे दिल्ली का मौर्य बहुत पसंद है … ठीक रहेगा न वह होटल?
मैं- ठीक रहेगा … तू मेरे लिए भी रूम बुक करवा देना जान … मुझे 50% डिस्काउंट नहीं मिल सकता … पेमेंट मैं कर दूंगा.
बेबी रानी ने ओके करके कॉल बंद कर दी.

अगले ही दिन उसका कॉल आ गया. चार दिन के बाद दिल्ली मौर्य होटल में दो रूम बुक हो गए थे. मेरे नाम से जो रूम बुक किया था उसकी कन्फर्मेशन मुझे मेल भी कर दी. बड़ी मुश्किल से ये चार दिन गुज़रे.

रोज़ व्हाट्स ऍप पर बात हो जाती थी दिन में कई कई बार, लेकिन लौड़े को तो चूत का इंतज़ार बहुत खल रहा था.

खैर व्हाट्स एप्प पर चुदाई की मस्त बातें करते हुए चार दिन बीत गए. इन चार दिनों में हम दोनों एक दूसरे के खूब करीब भी आ गए. दोनों बहुत आतुर थे कि मिलें और चुदाई की प्यास शांत हो.
वो तो ये सुन सुन के बेचैन हुए जा रही थी कि मैं उसके बदन को कुत्ते की तरह चाटूँगा. यूँ तो बेबी रानी खूब चुदी चुदाई लौंडिया थी लेकिन कभी किसी चोदने वाले ने उसको ऐसे नहीं चाटा था जैसा मेरा वादा था कि मैं चाटूँगा.

नियत दिन दोपहर एक बजे मैं दिल्ली के मौर्य होटल में पहुँच गया और चेक इन करके रूम में चला गया. कुछ समय बाद बेबी रानी का व्हाट्सएप्प मैसेज आ गया जिसमें उसका रूम नंबर था. तुरंत बुलाया भी था.

मैंने एक छोटे से बैक पैक में शैम्पेन की एक बोतल और दो अरमानी परफ्यूम की शीशियां रखीं और बेबी रानी के रूम की तरफ चल दिया. ये सब चीज़ें मैंने होटल में आने से पहले ही खरीद ली थीं. मैं कभी किसी नयी लौंडिया को बिना किसी तोहफे के मिलने नहीं जाता. आखिर चुदने वाली का इतना तो हक़ बनता ही है.

रानी का रूम मेरे वाले फ्लोर पर ही था, कोई चार या पांच कमरे छोड़ के.

जैसे ही मैंने दरवाज़ा पर घंटी बजायी, रूम खुल गया और मेरे सामने बेबी रानी खड़ी थी. उसने एक टी शर्ट और बहुत ही छोटा निकर पहन रखा था, जो मुश्किल से जांघों का ऊपरी भाग ही ढक पा रहा था.

रानी ने पैरों में कुछ नहीं पहन रखा था, नंगे पांव ही थी. बला की हसीन लड़की है बेबी रानी. पांच फुट सात इंच लम्बी, छरहरा मस्त गेहुंआ बदन और दिलकश चूचुक जो शायद 36 D की ब्रा में फिट आते होंगे.
टाँगें एकदम चिकनी और सुडौल और पांव तो माशाल्लाह … क्या बात है … बेहद सुन्दर!
नज़ारा देख कर लौड़ा उछल कूद मचाने लगा. कमीना कई दिनों से इस हसीना की रसीली चूत में घुसने को बेक़रार हुआ जा रहा था.

रानी जितना लैपटॉप के स्क्रीन पर सुन्दर दिखती थी असल में उससे कहीं ज़्यादा सुन्दर थी.

कमरे में घुसा तो देखा एक और लड़की रूम के पिछली तरफ खड़ी थी. उसने एक कैमरा तीन टांगों वाले स्टैंड पर सेट किया हुआ था और कैमरे के पीछे खड़ी हुई हमें देख रही थी.

मैंने उसको भी फ़ौरन पहचान लिया. वह भी अक्सर उसी न्यूज़ चैनल पर अक्सर ही दिखा करती थी. उम्र छोटी थी. होगी 24-25 की, जबकि बेबी रानी करीब 28-30 की थी. उसने भी एक ऊँचा सा निकर और टॉप पहना हुआ था. टॉप के पीछे खूब बड़े बड़े चूचे थे. गोल गोल संतरे जैसे. यह लौंडिया भी काफी खूबसूरत थी और अच्छी फिगर की मालकिन थी. यह शायद कश्मीरी थी जैसा उसके अंग्रेज़ों जैसे गोरे रंग से प्रतीत होता था. साली के सेब जैसे लाल लाल गाल थे. लम्बाई में कम थी, यही कोई पांच फुट दो या तीन इंच.

मैंने उसकी तरफ हाथ उठाकर हेलो कहा और पूछा- सुनो जानम, आपको किस नाम से पुकारूँ? वैसे टीवी पर देखने से मैं आपका असली नाम जानता हूँ लेकिन लूंगा वही नाम जो आप बताएंगी.
हँसते हुए उसने कहा- मैं भी बेबी की तरह अपना घर का नाम बता देती हूँ. गुड्डी बुला सकते हैं आप मुझे!

मैंने कहा- गुड्डी, आपसे मिल कर बहुत अच्छा लगा.
गुड्डी ने उत्तर दिया- मुझे भी आपसे मिल कर अच्छा महसूस हो रहा है.

पलट के मैंने बेबी रानी को झपट के आलिंगन में बांध लिया और उसको गोदी में उठाकर उसके रसीले होंठों से अपने होंठ लगा दिए.

होंठ चूसे तो उसके मुंह की मस्तानी सुगंध भी नाक में आने लगी. आह आह आह !!! मैं मचल मचल के बेबी रानी के होंठ चूस रहा था. उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गयी और ऐसे आगे पीछे होने लगी जैसे वो मेरे मुंह को जीभ से चोद रही हो.

उसको गोदी में लिए लिए और घनिष्ठ आलिंगन में लपेटे लपेटे मैं धीरे धीरे बिस्तर की तरफ सरकने लगा. बिस्तर के करीब पहुँच कर मेने रानी को हौले से लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ के लेट गया.
हमारे होंठ आप में चिपके हुए थे. खूब कस के एक दूसरे को चूस रहे थे, उसके हाथ मेरे पीठ पर जम गए थे और टाँगें मेरी टांगों पर लिपट गयी थीं.

थोड़ी देर के बाद मेरे दिल में रानी का मुखरस चखने की प्रबल इच्छा जागी. मैंने रानी को और ज़ोर से आलिंगन में कसा और एक गुलाटी मार के मैं नीचे हो गया और रानी ऊपर आ गई.
अब उसकी जीभ को चूसना शुरू किया तो उसके मुंह का पानी मेरे मुंह में आने लगा. कितना स्वादिष्ट और मस्त मुखरस था रानी का!

चुदने की तेज़ चाह, मेरे प्यार से भरपूर चुम्बन, प्रगढ़ आलिंगन और जीभ चुसाई से उसके मुंह में रस बहुत ज़्यादा निकल रहा था. यूँ कहना चाहिए कि चुदाई के लिए रानी के मुंह में भर भर के पानी आ रहा था.

रानी ने अपना मुंह ऊपर उठाया और फुसफुसाई- राजे इतने ज़ोर से भींचता है कि सांस घुटने लगती है … अगर मेरी सांस रुक जाती तो मेरे भूत से सेक्स करना पड़ता.
मैंने कहा- जानू … साँस रुके तेरे दुश्मनों की … वैसे मज़ा तो आता है न ज़ोर से आलिंगनबद्ध होने में?

मुस्करा के रानी ने मेरी नाक की नोक पर जीभ घुमाई, फिर मेरे सीने पर सर रख के बोली- हूँ … हूँ … राजा हूँ … बहुत अच्छा महसूस होता किसी तगड़े मर्द की तगड़ी बांहों में.
रानी ने चेहरा मेरे सीने पर रख दिया और प्यार से मेरे निप्पलों पर उंगलियां फिराने लगी- राजे, मैं तो सोचती थी कि तू मिलने के फ़ौरन बाद मुझे नंगी कर देगा … मगर तू थोड़ा अलग निकला बाकी लड़कों से … अभी तक न मेरे कपड़े उतरे न तेरे … दस मिनट तो हो गए होंगे चुम्बन में … कोई दूसरा लड़का तो अब तक चुदाई के बाद झड़ भी चुका होता!

मैं हंस कर बोला- बेबी रानी, मैं इसलिए अलग हूँ क्यूंकि मैं लड़का नहीं हूँ … बावन साल का अधेड़ आदमी हूँ जिसने अनेक लड़कियों को चोदा है … जल्दी क्या है रानी … तुझे आराम से चख चख के चोदना चाहता हूँ … किसी स्वादिष्ट चीज़ का पूरा मज़ा लेना हो तो उसको धीरे धीरे स्वाद ले लेकर खाना चाहिए या जल्दी जल्दी? दूसरे लड़कों की तरह मैं चुदाई के लिए तरसा हुआ नहीं हूँ.

“रानी थोड़ा उठ न … तेरे लिए एक छोटी सा भेंट लाया था जो तुझे नंगी देखने से पहले देना चाहता हूँ … मेरा दिल करता है किसी भी लड़की को रानी बनाने से पहले उसको एक अपनी ख़ुशी वाला तोहफा दूँ … हालाँकि तेरी सुंदरता के सामने ये गिफ्ट बहुत मामूली सी है फिर भी हिम्मत करके देना चाहता हूँ … बड़े दिल से लेकर आया था.” मैंने बेबी रानी के होंठों पर उँगलियाँ फेरते हुए कहा.

रानी का गला रुंध आया. कान में धीमी आवाज़ में फुसफुसाई- राजे तू खुद ही है न इतना बड़ा तोहफा … और किसी तोहफे की क्या ज़रूरत थी राजे … वैसे मैंने अंदाज़ लगा लिया कि तू क्या गिफ्ट लाया है.
मैंने रानी का मुंह चूम कर कहा- अच्छा? तूने कैसे अंदाज़ा लगाया?

रानी ने मेरी नाक को पकड़ के हिलाया और बोली- बुद्धूराम, तेरी सब कहानियां पढ़ने के बाद पता लग गया न कि या तो तू मेरे लिए पायल लाया होगा या कोई परफ्यूम. मुझे तेरे बारे में सब कुछ मालूम चल गया तेरी कारगुजारियां पढ़ के ही. उदाहरण के लिए तुझे लड़कियों के पैर चूमना बहुत पसंद है. झांटों के बाल, बगल के बाल चूसना बहुत अच्छा लगता है. क्यों सही है न कुत्ते?

मैंने बेबी रानी को बाँहों में जकड़ लिया- ओह हो जासूस मैडम जी. क्या कहने आपके! तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त.
मैं उसको फिर से चूमने के मूड में आया ही था कि रानी ने मेरी छाती पर हाथ रख के धकेला और खुद को अलग करके कहा- राजे के बच्चे अब दे भी दे न गिफ्ट. नहीं तो यह गाड़ी आगे कैसे बढ़ेगी.

उठकर मैंने अपने हैंडबैग में से परफ्यूम की शीशी निकाली और रानी के जांघों के बीच में रख दी- रानी को सौ में से सौ नंबर. बिल्कुल सही अंदाज़ा लगाया.
“राजे राजे डार्लिंग, बहुत बढ़िया वाला परफ्यूम है. थैंक्स. लव यू राजे.” रानी ने शीशी को अपने गालों से लगाते हुए कहा.

कहानी जारी रहेगी.
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