लिफ्ट का अहसान चूत देकर चुकाया-2

(Lift Ka Ahsan Choot Dekar Chukaya- Part 2)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

मेरी सेक्स स्टोरी हिंदी के पहले भाग में आपने पढ़ा कि एक दिन एक कॉलेज गर्ल ने मुझसे मेरे बाइक पर लिफ्ट मांगी. मैंने उसे कॉलेज छोड़ दिया. वो रोज ही मेरे साथ जाने लगी, मेरा नम्बर भी ले लिया. एक दिन मैं अस्वस्थ था तो नहीं गया, उसका फोन आ गया. कुछ देर बाद वो मेरे घर आ गयी. आगे क्या हुआ मेरी सेक्स कहानी हिंदी में पढ़ें!

उसकी चूत उसके रस से सराबोर थी फिर भी उसकी चूत के अन्दर काफी गर्मी थी। उंगली लगाने भर से ही वो चिहुंक उठी और मेरी उंगली गीली हो गयी।
मैंने एक बार फिर उसकी चूत का रस अपनी उंगली में लिया और उसको दिखाते हुए बोला- सोनी!
वो मेरी तरफ देखने लगी!

अब आगे:

अपनी उंगली उसको दिखाते हुए मैंने मुंह के अन्दर डाल ली और फिर उसके छोटे छोटे दोनों मम्मों को दबाते हुए उसके पेट को चूमते हुए धीरे धीरे मैं योनि प्रदेश में प्रवेश करने लगा।
जैसे ही मैंने उसकी चूत को चूमा, वो मेरे सिर को पकड़कर पीछे हटने लगी, बोली- सर, मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
जितना मैं उसकी चूत के पास अपना मुंह ले जाने की कोशिश करता, वो अपनी गांड टेड़ी करके पीछे हो जाती।

मैं खड़ा हुआ और उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में कस कर भींच दिया और बोला- मजा बहुत मिलेगा, लेकिन नखरा करोगी तो फिर मुझे गुस्सा भी बहुत आता है और तुझे भी तो मेरे लंड को चूसना है और उसका वीर्य चखना है।
इतना कह कर मैंने उसकी चूत को अपनी मुट्ठी से आजाद कर दिया और उसको कुर्सी पर बैठा कर हत्थे पर उसके दोनों पैरों को रख दिया। इस तरह करने से उसकी चूत खुलकर मेरे सामने आ गयी।

उसकी चूत को चूत क्या कहूं… मुनिया कहना ज्यादा अच्छा होगा क्योंकि उसकी चूत बहुत ही छोटी सी थी, लेकिन उठान काफी था।

मैंने उसके हाथ और पैरों को अपने हाथों में जकड़ लिया और फिर खुली हुयी फांकों के बीच अपनी जीभ चलाने लगा, वो अपने जिस्म को काफी हिलाने डुलाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन नाकाम हो रही थी।
मैं अब अपनी जीभ को उसकी चूत के अन्दर डाल रहा था तो कभी उसकी फांकों को चाट रहा था और फिर उसकी छोटी सी पुतिया को अपने होंठों के बीच दबा रहा था।

अब सोनी ने सिसयाना शुरू कर दिया था। अब सोनी अपने जिस्म को आगे की तरफ कर रही थी, उसकी इस हरकत से मुझे समझ में आ गया कि उसमें मस्ती छा रही है। मैंने हौले से उसके हाथों और पैरों को आजाद किया।
जैसे ही उसके हाथ और पैर आजाद हुए, उसने तुरन्त ही अपने पैरों को हवा में उठाया और मेरे सर को पकड़ते हुए बोली- सर और चाटिये, मजा आ रहा है। मुझे मालूम नहीं था कि चूत चटवाने में इतना मजा मिलता है।

उसकी आवाज फंसी-फंसी सी आ रही थी क्योंकि वो अपनी सांसों को काबू में नहीं रख पा रही थी।

तभी उसका शरीर अकड़ने लगा और बोली- सररर रररर!
बस इतना कह पाई थी और वो ढीली पड़ गयी थी और उसकी चूत से निकलता हुआ रस इस समय मेरी जीभ में गर्म लावे के सामान लग रहा था. मैं बड़ी ही तन्यमयता से उसको अपने मुंह के अन्दर लेता रहा, मैं उसके रस की एक एक बूंद को चाटता रहा और वो मेरे बालों पर अपने हाथ को फेरती रही। जब उसके रस की एक एक बूंद को चूस कर मैं उससे अलग हुआ तो बोली- सर मुझे बहुत मजा आया. तीन चार कहानी पढ़ने पर मुझे ये बकवास और घृणित कार्य लगता था लेकिन अब मुझे अहसास हुआ कि चूत चुदाई के खेल से पहले चूत चुसाई का भी अपना आनन्द है।

“हाँ… और साथ में लंड चुसाई का भी अपना आनन्द है। तुम अब कुर्सी में देखो कि तुम्हारी चूत का रस कही वहां तो नहीं लगा है?”
सोनी अपने हाथ को थोड़ा झटकते हुये बोली- क्या सर आप भी?
“तो मेरा लंड चूसने के बारे में क्या ख्याल है?” अपने लंड को हिलाते हुए उसकी तरफ देख कर कहा।

जैसे ही उसने मेरे लंड को देखा तो बोली- सर ये आपका लंड तो बहुत बड़ा है। कभी कभी आते जाते लड़कों को मूतते हुए नजर पड़ जाती थी तो उनका लंड बहुत छोटा दिखता था।
“अरे… जब लंड टाईट नहीं रहता तो छोटा दिखता है और जैसे-जैसे टाईट होता है, फिर बड़ा हो जाता है।”

“अब बताओ आगे क्या करना चाहती हो? लंड चूसने का आनन्द लोगी या फिर अभी भी?” कह कर मैंने अपनी बात रोक दी।
“नही नहीं… ऐसी कोई बात नहीं है, मैं भी आपके इस लंड को चूसने का आनन्द लूंगी।” उसने अपने हाथ में मेरे लंड को पकड़ा, खोल को पीछे करते हुए अपनी हथेली को मेरे सुपारे से रगड़ा और फिर खोल को सुपारे के ऊपर ढक कर लंड को मुंह में ले लिया।
वो कोशिश तो कर रही थी लेकिन अभी भी उसके दिमाग में कहीं न कहीं, यह बात थी कि वो कैसे लंड को चूसे क्योंकि यहाँ से पेशाब निकलती है।

मैंने कहा- अगर इस तरह करना हो तो रहने दो।
“नहीं नहीं, ऐसा नहीं है, मैं मजा लेना चाहती हूं लेकिन मुझे मालूम नहीं है कि कैसे चूसा जाता है।”

मुझे उसकी बात समझ में आयी, लेपटॉप खुला हुआ था, मैंने इंडियन पोर्न वीडियो.कॉम साईट खोली, जिसमें चूत चुसाई और लंड चुसाई वाली एक 10-15 मिनट की क्लिप चला दी और सोनी से बोला- जैसे जैसे इस क्लिप में जैसे लड़की लंड चूस रही है, तुम भी उसी तरह करो!
और मैंने अपनी पोजिशन ऐसी बना ली कि लैपटॉप पर चलती हुयी क्लिप सोनी को ठीक तरीके से दिखे।

सोनी अब लंड को क्लिप देखते हुए चूसने लगी, करीब 10-11 मिनट के बाद मुझे एहसास हुआ कि मेरे माल निकलने वाला है, ठीक उसी समय क्लिप वाली लड़की ने अपने मुंह को खोल दिया, सोनी भी उसी पोजिशन में अपने मुंह को खोल कर लंड को छोड़ दिया।
मैंने सोनी के सर को पकड़ा और अपने लंड को हिलाने लगा, एक तेज धार मेरे रस की उसके मुंह में सीधा जाकर निकली; मेरे वीर्य से उसका मुंह भर गया।

क्लिप देखते हुए सोनी किसी तरह से मेरे वीर्य को पी गयी लेकिन उसका मुंह बुरा सा बन गया, बोली- मुझे उल्टी हो रही है।
मैंने उसको पानी का गिलास देते और उसकी पीठ को सहलाते हुए कहा- पहली बार ऐसा ही होता है, अच्छा नहीं लगता, उल्टी होती है, स्वाद गन्दा सा लगता है, मुझे भी ऐसा ही लगा था लेकिन अब देखो तुम भी मेरे लिये नई लड़की थी और किस तरह से तुम्हारे रस को पी गया।

एक बार फिर मैं कुर्सी पर बैठ गया और उसको अपनी जांघ पर बिठा कर मैं उसकी पीठ को सहलाता रहा। थोड़ी देर तक ऐसे करते रहने के बात उससे बोला- अगर तुम्हें पेशाब आयी है तो जाकर कर लो।
वो उठी, मैंने उसे इशारे से बाथरूम का रास्ता बताया और वो बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी।
उसके पीछे पीछे मैं भी बाथरूम की तरफ चल दिया।

वो बाथरूम के अन्दर घुसी और दरवाजा बन्द करने लगी, मैंने उसे रोकते हुए कहा- क्या यार तुम सोनी, मुझे भी पेशाब लगी है।
“तो ठीक है, पहले आप कर लो, फिर मैं कर लूंगी।” कह कर मुड़ते हुए बाहर आने लगी तो मैं उसे रोकते हुए बोला- अब जब तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी हो और मैं तुम्हारी चूत चाट चुका हूं तो अब क्या शर्माना? चलो दोनों साथ करते हैं। तुम इस नाली के पास कर लो, मैं पॉट पर कर लेता हूँ। मैं और तुम्हारी भाभी चुदाई करने के बाद जब कभी भी पेशाब लगती है तो दोनों साथ ही कर लेते हैं।

मेरी बात सुनने के बाद वो वहीं नाले के पास बैठ गयी और मैं पॉट पर खड़ा होकर मूतने लगा।
शर्र… शर्र… की आवाज आ रही थी। हम दोनों की पोजिशन ऐसी थी कि मैं उसे मूतता हुआ देख सकता था और वो मुझे मूतते हुए देख सकती थी और उसकी नजर मुझे पेशाब करते हुए देख ही रही थी और मैं उसे।
लेकिन मैं देख उसे कम रहा था, सोच ज्यादा रहा था।

वो मूतने के बाद उठी, उसके उठते ही मेरी तंद्रा भंग हुयी, तब तक मैं भी कर चुका था और आदत के अनुसार अपने लंड को हिला रहा था, ताकि बची-खुची बूंद भी निकल जाये।
वह मेरे पास आई और पूछने लगी- आप अपने लंड को क्यों हिला रहे थे?
मैंने कहा- बची-खुची बूंदों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था। और तुम क्या करती हो?
“आप को तो पता होगा?”
“मुझे कैसे पता होगा कि तुम क्या करती हो?”

“अरे जो भाभी जी करती है, वही मैं करती हूं!”
“भाभी जी तो बहुत कुछ करती हैं, तुम अपनी कहो?”
“मैं पैन्टी पहनती हूँ और इस तरह रगड़ कर बची खुची बूंदों को साफ कर लेती हूं!” कहते हुए दरवाजे पर लटके हुए पर्दे से उसने अपनी चूत साफ कर ली।

मैंने बाथरूम से बाहर आकर सिगरेट जलाई और कश लेने लगा, फिर मैंने सोनी को भी कश लगाने के लिये बोला, पहले तो वो मना करने लगी लेकिन मेरे जिद करने के कारण उसने सिगरेट हाथ में ली और जैसे जैसे मैं बताता जा रहा था, उसने सिगरेट को अपने होंठों के बीच लेकर एक कश लिया.
लेकिन उसने तेजी के साथ अपनी सांसों को अन्दर लिया, बस फिर क्या था, वो जोर से खांसने लगी।

मैंने उसके हाथ से सिगरेट ली और एक बार फिर उसकी पीठ को थपथपाने लगा। किसी तरह उसकी खांसी रूकी लेकिन उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे।
मैंने सोनी को एक बार फिर अपनी एक जांघ पर बैठाया और उसके आँसू के एक बूंद को अपनी उंगली में लेकर उसके मुंह के अन्दर डाल दिया और बोला- इसका स्वाद कैसा था?
वो बोली- शायद आपके वीर्य के रस जैसा।
फिर मैंने कहा- देखो, पहली बार कुछ भी करोगी, अजीब सा कुछ अलग सा लगेगा, लेकिन एक दो बार के बाद वही मजा देने लगेगा।

मैं सोनी की पीठ सहला रहा था और यह सोच रहा था कि यह अभी अनछुई है और अगर यह चुदने को तैयार हो गयी तो इसकी चूत से खून निकलेगा इसलिये मैं चाहता था कि किसी पुराने कपड़े का इंतजाम कर लूं ताकि उसको बाद में फेंका जा सके!
इत्तेफाक से एक पुराना कपड़ा मिल भी गया, मैंने उसे पलंग पर बिछा दिया.

तभी वो बोली- इसको आप पलंग पर क्यों बिछा रहे हो?
मैंने थोड़ा झूठ बोलते हुए कहा- तुम्हें और मुझे एक बार और यह खेल खेलना है तो तुम्हारा और मेरा वीर्य निकलेगा और बिस्तर को गन्दा कर देगा।

इतना कह कर मैंने उसे सीधा लेटने को कहा, वो लेट गयी और मैं उसके बगल में लेट गया। मैंने उसके सर के नीचे अपने हाथ रख दिया और अपनी टांग को उसके पैरों के ऊपर इस तरह से रख दिया कि मेरे लंड की गर्मी उसकी चूत महसूस कर सके।
साथ ही बोरो-प्लस की ट्यूब रख ली, उसकी चूत इतनी मुलायम और कोमल थी कि मैं अपने लंड की जोर आजमाइश उस कोमल और मुलायम चूत के साथ नहीं करना चाहता था।

मैंने अपने दूसरे हाथ से उसके बालों को सहलाते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और जैसे ही उसके होंठ को चूसना शुरू किया ही था कि उसका मोबाईल बजा.
मेरा मूड खराब हो गया… हांलाँकि सोनी ने भी मोबाईल नहीं उठाया.

और फिर हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने में व्यस्त हो गये।

पर उसका मोबाईल बार-बार बज रहा था, हार कर मुझे कहना पड़ा- सोनी, फोन उठा लो!
कह कर मैं लेट गया.
सोनी ने हैलो बोला तो दूसरे तरफ से भी हैलो की आवाज आयी, चूंकि मैं सोनी से चिपका हुआ था तो उसके मोबाईल से आने वाली आवाज को मैं साफ साफ सुन सकता था।

दूसरी तरफ से भी एक लड़की की आवाज आई, बोल रही थी- सोनी, कहां पर हो तुम, इतनी देर हो गयी है और तुम अभी तक कॉलेज नहीं आयी।
“नहीं पूजा, आज मैं कॉलेज नहीं आ सकती!” सोनी ने अपनी आवाज को नार्मल करते हुए कहा.
“क्यों क्या हुआ?”
“कुछ खास नहीं, वो जो सर मुझे कॉलेज तक ड्रॉप करने आते थे, मैं उनके यहाँ आयी हूँ।”
“ओह… कुछ खास?” दूसरी तरफ से आवाज आयी.
“हाँ वो बीमार हैं तो उन्हें देखने आयी थी।”

“ठीक है, देख लिया हो तो अब आ जाओ!” पूजा बोली.
सोनी ने कहा- नहीं आ सकती।
“क्या कहा? तुम नहीं आ रही हो, क्या बात है, कुछ है क्या वहां? कही ऐसा तो नहीं कि सेक्सी कहानी पढ़ते पढ़ते तुम्हारी चूत में खुजली शुरू हो गयी हो?” एक सांस में उसने सब बोल दिया.
तभी सोनी बोली- क्या पूजा, कुछ भी बोलती है। घर पर सभी लोग हैं।
“सॉरी यार, मैं मजाक कर रही थी।”
“यार… एक अच्छी सेक्सी स्टोरी पढ़ रही थी अन्तर्वासना पर… तो सोचा कि तुम्हें बता दूं। ठीक है, कल मिलते हैं तब तुम्हें वो स्टोरी पढ़वा दूंगी।” कह कर उसने फोन काट दिया।

सोनी ने फोन एक किनारे रख दिया और मेरी तरफ देखने लगी।
मैंने भी छेड़ते हुए कहा- बता ही देती कि हाँ… चूत की खुजली मिटा रही हूँ।
“आप भी न…” कह कर मेरे सीने के बाल जोर से खींच दिए।

कहानी जारी रहेगी.
दोस्तो, मेरी सेक्स स्टोरी इन हिंदी कैसी लग रही है? कृपा करके मेल के माध्यम से मुझे अपने विचार बतायें।
धन्यवाद
आपका अपना शरद सक्सेना
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