लिफ्ट का अहसान चूत देकर चुकाया-1

(Sex Story in Hindi : Lift Ka Ahsan Choot Dekar Chukaya- Part 1)

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दोस्तो, मेरी सेक्स स्टोरी हिंदी को पढ़ने के बाद आपके द्वारा भेजी गयी प्यारी-प्यारी कमेन्ट से मुझे हौसला मिलता है और आप सभी के लिये आगे कुछ और लिखना आसान हो जाता है। इसलिये दोस्तो आप अपने कमेन्ट मुझे नीचे दिये गये मेल पर भेजते रहिये ताकि मेरा हौसला कायम रहे।

मैं आप लोगों से माफी भी मांगता हूं कि काफी समय के बाद मैं कहानी आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।
दोस्तो, एक बात और जो मैं सभी से रिकवेस्ट करना चाहता हूं, कि मेरे साथ घटित घटना जिसको मैं आप लोगों के समक्ष कहानी के रूप में परोसता हूँ उसमें अपने आपको महसूस कीजिए और मेरी कहानी की नायिका को लड़के अपने नीचे महसूस करें जबकि लड़कियाँ मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर महसूस करें।

चलिये अब आप लोगों के लिये एक नई कहानी के साथ मनोरंजन करता हूँ।
बात इस जनवरी की है। हमारे शहर की सड़कों की हालत खस्ताहाल है, पूरा शहर खुदा पड़ हुआ है। जाम की हालत तो यह है कि अगर आप 12 बजे रात कहीं शादी की पार्टी में जाने चाह रहे हैं तो नहीं जा सकते; 2-3 घंटे मानकर चलिये कि बरबाद होना ही है. तो सोचिये कि दिन की हालत कैसी होगी।

अब मुझे मेरे ऑफिस जाने के लिये सुबह जल्दी निकलना पड़ता है।

ऐसे ही एक सुबह मैं अपने ऑफिस के लिए घर से निकला कि कुछ दूर जाने पर एक लड़की ने मुझे हाथ का इशारा देकर रूकने के लिये कहा। उस समय वो अपने मुंह को ढके हुयी थी।
मैं उसके पास जाकर रूक गया.

वो बोली- सर, मुझे मेरे कॉलेज जाना है और जाम की वजह से कोई टैक्सी नहीं मिल रही है, क्या मुझे कॉलेज तक छोड़ देंगे?
मैंने उससे उसका रूट पूछा तो उसने मेरे ऑफिस वाले रूट को बताया तो मुझे कोई आपत्ति नहीं हुयी, मैंने उसे बाईक पर बैठने का इशारा किया।
वो इशारा पाते ही बैठ गयी।
मैंने उसके कॉलेज के पास ले जाकर उसे ड्रॉप कर दिया।

दूसरे दिन भी ऐसा ही हुआ, उसने हाथ से मुझे रूकने का इशारा किया, मेरे रूकने पर वो मेरी बाईक पर बैठी, मैंने भी बिना कुछ बोले अपनी बाईक आगे बढ़ा दी और उसके कॉलेज के पास जाकर उसे छोड़ दिया।

तीसरे दिन भी ट्रकों की लाईन लगी हुयी थी जिसकी वजह से पूरी रोड जाम थी। मैं समझ गया था कि आज भी वो टकरायेगी, लेकिन स्टॉपेज पर नहीं दिखी, तो मैंने अपनी गाड़ी आगे बढ़ा दी, थोड़ी ही दूर गया था कि वो पैदल चली जा रही थी और साथ ही साथ पीछे घूम कर देखती भी जा रही थी।

जैसे ही उसे मेरी बाईक दिखी तो उसने एक बार फिर हाथ दिया, मैं रूका और उससे बोला- भाई अपने मुंह से यह पर्दा हटा लो तो मैं भी देखूँ कि मेरे साथ जाने वाली कैसी दिखती है।
मेरे कहने पर वो मेरे सामने आयी और अपने मुंह से ओढ़नी हटा ली।
नाक-नक्शा या चेहरे से देखने पर वो बहुत ज्यादा सेक्सी या खूबसूरत नहीं थी।

तभी उसने पूछा- क्या अब मैं आपके साथ चल सकती हूँ?
मेरे हाँ बोलते ही वो मेरी बाईक पर अपने पैरो को क्रॉस करके बैठ गयी।

रास्ते में वो बोली- क्या आप रोज इधर से जाते हैं?
जवाब में मैंने बोला- तीन दिन से तुम मेरे साथ अपने कॉलेज जा रही हो, तो इसका मतलब मैं रोज इधर से जाता हूँ।
फिर उसने कुछ नहीं पूछा।

मैंने ही बात आगे बढ़ाते हुए उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम सोनी बताया और बोली कि वो बी ए थर्ड ईयर में है।
फिर उसके पूछने पर मैंने भी उसे अपना नाम बताया।

फिर वो बोली कि क्या मैं उसे रोज लिफ्ट दे सकता हूँ।
मैं चुप था कि क्या जवाब दूं तभी फिर वो बोली- अगर नहीं हो सकता तो कोई बात नहीं।
मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है, लेकिन तुम्हें लिफ्ट माँगने की क्या जरूरत है?
तो बोली- अगर आप रोज मुझे लिफ्ट देंगे तो मैं कॉलेज डेली आ-जा सकूंगी।

मुझे समझ में आया कि इसे थोड़ी बहुत फान्नेशियल प्रॉब्लम है, तो मैंने भी ओके कर दिया।

कॉलेज के पास उतरते ही उसने मेरा नम्बर मांगा, जिसे मैंने दे दिया और उसने अपने पुराने और टूटे हुए मोबाईल में सेव कर लिया।

अब वो प्रतिदिन मेरे साथ जाने लगी और अब वो मुझसे चिपक कर इस तरह से बैठती कि मुझे अहसास तो होता लेकिन उसने कभी मेरे शरीर से अपना हाथ को टच नहीं किया।
इसी तरह दिन बीतते गये। बीच बीच में मैं उसके घर भी चला जाता था। उसके घर जाने का कारण उसकी जिद थी, इस तरह से उसके घर वाले मुझे जानने लगे और मुझे मानने भी लगे थे। जिस दिन मुझे थोड़ी देर हो जाती तो वो मुझे मिस कॉल कर देती और मैं उसे कॉल बैक कर आने की सूचना दे देता।

लेकिन एक दिन ऐसा आया कि मैं बहुत बीमार हो गया और मैं जा नहीं पाया. जैसा कि अक्सर होता था उसका फोन आया, मैंने आने में अपनी असमर्थता बता दी और जल्दी ठीक होने पर मैं उसे फोन करूंगा, कह कर मैंने फोन काट दिया.

इस समय में घर में अकेला था, मेरी बीवी और बच्ची स्कूल निकल चुके थे, मैं घर में अकेला था और अगर मैं घर में अकेला रहता हूं तो लुंगी के अलावा कुछ नहीं पहनता हूँ। उस समय भी मैं केवल लुंगी में था और लैपटॉप पर अन्तर्वासना पर अपनी और दूसरे लेखकों की कहानी पढ़कर अपना टाईम पास कर रहा था.

कि तभी घर की घंटी बजी, चूंकि मैं लुंगी में ही था और कहानी पढ़ रहा था तो मेरा लंड तना हुअ था। घर की घंटी लगातार बज रही थी तो मैं झल्लाहट में यह भूल गया था कि मैं केवल लुंगी में ही हूं और कहानी पढ़ने के कारण लंड तना हुआ था, मैं गुस्से में उठा और कौन है कहकर मैंने दरवाजा खोल दिया.

सामने सोनी को देखकर मैं हतप्रभ रह गया; मैं जल्दी से अपनी लुंगी को सही करने लगा लेकिन इस चक्कर में लुंगी थोड़ी सी उठ गयी और तना हुआ लंड का बाहरी हिस्सा दिखने लगा। मेरे ख्याल से सोनी की नजर उस पर पड़ चुकी थी।
सोनी यह बोलती हुयी कि मेरी ‘तबियत कैसी है’ कहते हुए तब तक अन्दर आ चुकी थी।

मैं दरवाजे को बन्द करते हुए अन्दर आया, तब तक पलंग के पास पड़ी हुयी कुर्सी पर बैठ गयी और उसकी नजर मेरे लैपटॉप पर पड़ चुकी थी.
और जैसा कि आप सभी को पता है कि एडल्ट साईट पर तस्वीर कैसी आती है।

मैंने कहा- ठीक नहीं महसूस कर रहा हूं.
वो मेरी बात में मुस्कुराई और बोली- तभी अपनी तबियत को सही करने के लिये यह सब पढ़ रहे हैं।
मैंने बात काटते हुए कहा- तुम मेरे घर का रास्ता कैसे पा गई?
“बस पूछते पूछते हुये मैं आपके घर पहुंच गयी, लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि मुझे यह सब देखने को मिलेगा।”

मैं जल्दी से लैपटॉप बन्द करने के लिये सोनी के ऊपर झुका, मैरे उसके ऊपर झुकते ही उसने खींचकर एक सांस ली।
मैंने उसके ऐसा करने का कारण पूछा तो बोली- आपके जिस्म से आती हुयी इसी खूशबू की मैं दीवानी हो चुकी हूं!
और मेरे हाथ को पकड़ कर बोली- आप भी सक्सेना की कहानी पढ़ते हैं?

मैं उसकी बात सुनकर हंसा।
वो कुछ समझी नहीं इसलिये वो चुप रही।

मैंने उससे पूछा- तुम भी सेक्सी कहानी पढ़ती हो?
“हाँ, मेरी एक सहेली है, वो ही अपने मोबाईल पर मुझे पढ़ा देती है।”

मैं एक और कुर्सी लेकर उसके बगल में बैठ गया, वो कहानी पढ़ने में व्यस्त हो गयी, मैं उसे टोकते हुए बोला- अगर कहानी पढ़ती हो तो मजा भी ले चुकी होगी?
“नहीं!” कह कर वो फिर कहानी पढ़ने लगी।

मैं उससे कुछ कहना चाहता था कि उसने मेरा हाथ पकड़ कर दबा दिया। मैं समझ चुका था कि उसे अभी कहानी पढ़नी है। मैं चुपचाप उसे पढ़ते हुए देखता रहा, वो कहानी पढ़ते हुए अपनी शलवार के ऊपर से ही अपनी चूत को अंगूठे और पहली उंगली से हल्के से मसल देती।
कहानी पढ़ते हुए कई बार उसने ऐसा किया और उसको देख कर मैं भी अपने लंड को मरोड़ दिया करता था।

जब वो कहानी पढ़ चुकी तो मेरी तरफ घूमी, उसकी आंखें काफी लाल हो चुकी थी, मुझे उसकी आंखों में एक नशा सा दिखने लगा।

कहानी पढ़ने के बाद वो बोली- जो कहानी में लिखा है वो सही में होता है?
मैंने कहा- हाँ चुदाई तो सही में होती है।
“मैं चुदाई की बात नहीं कर रही हूँ।”
“फिर?”
“यही बुर को चाटना, लंड को चूसना?”
“क्यों नहीं, बहुत मजा आता है यह सब करने में! तुमने कोई सेक्सी मूवी देखी हो तो उसमें भी ऐसा ही होता है।”

“मैं नहीं मानती, क्योंकि उसके बदले उन लोगों को पैसा मिलता है। हकीकत में ऐसा नहीं होता।”
“बिल्कुल होता है!” मैंने उसके कधे में हाथ रखते हुए कहा।

फिर भी वो मेरी बात से सन्तुष्ट न हुयी और बोली- मैं यह कैसे मान लूं कि कोई लड़का या लड़की आपस में पहली बार मिले हों और मिलते ही एक दूसरे की बुर और लंड को चाटना और चूसना शुरू कर देते हों?
“क्यों नहीं, चुदाई का मजा चुसाई और चटाई में ही तो होता है। नहीं तो चूत के अन्दर लंड का दो ही मिनट का तो काम होता है, लंड गया चोदा और बाहर। फिर तो पूरा मजा खत्म… जबकि इन सब क्रियायों को करने के कारण चुदाई के खेल का आनन्द दुगुना हो जाता है।”

“क्या आप भी यह सब करते हो?”
“क्यों नहीं, बहुत मजा आता है।”
“आप मुझे समझाने के लिये झूठ बोल रहे हैं।”

मैं समझ चुका था कि कहानी पढ़ने के बाद उसके ऊपर खुमारी बढ़ रही है और अगर मैं थोड़ा सा इस समय संयम रखा तो कुछ मिलने की सम्भवना हो सकती है, इसलिये उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- नहीं, मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ।
“ठीक है!” वो बोली।

इतना उसके बोलने से मेरा हृदय बैठने लगा, मुझे लगा, संयम बरतना मंहगा पड़ गया।
तभी सोनी बोली- अगर आप सच कह रहे है तो मुझे वीर्य चाट कर दिखाइये?
“वीर्य तो मैं चाट लूंगा, अगर तुम साथ दो!”
इस जगह पर मैंने संयम को बॉय-बॉय कहा और सीधा उससे बोला।

वो बोली- कैसा साथ?
तो मैंने उसे बताया- देखो इस समय मेरे इस पूरे घर में मैं अकेला लंड वाला हूं और तुम चूत वाली, और अगर तुम मुझे चूत का रस चाटते हुए देखना चाहती हो तो अपनी चूत को मेरा साथ देने के लिये मनाना होगा।
मेरा इतना बोलना था कि वो शर्मा गयी और अपने सिर को झुका लिया।

मैं समझ चुका था कि वो चाहती है, मैंने तुरन्त ही उसको पकड़ा और अपने से चिपका लिया, उसने भी मुझे जकड़ लिया। मैं उसकी गांड को दोनों हाठों से भींचने लगा और उसकी शलवार के ऊपर से ही उसके छेद में उंगली करने लगा।

फिर मैं कुर्सी पर बैठ गया और उसको अपनी दोनों टांगों के बीच में लाते हुए बोला- सोनी, मजा लेना है, तो शर्माना मत।
उसने मुझे सहमति देने के लिये अपना सर हिलाया।

मैंने बिना वक्त गंवाये उसकी कुर्ती को उतार दिया। नीचे उसने जगह-जगह फटी हुयी ब्रा पहने हुए थी जो उसके मुसम्मबी जैसे मम्मों को छिपाने का भरकस प्रयास कर रही थी।
मैंने उसके पेट को सहलाया और उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मो को सहलाने लगा।

“सीईईई ईईई ईईइ…” करते हुए उसने अपने हाथ को मेरे हाथ के ऊपर रख दिया। मैंने उसके मम्में छोड़ कर उसे अपने से चिपकाया और उसके ब्रा की हुक खोल दिया।
अब मेरे सामने उसकी टाईट या कठोर चूची थी, जिसके निप्पल तने हुए थे जो इस बात का संकेत था कि उसके अन्दर भी ज्वार फूट रहा है।

मैं उसके मुसम्म्बी जैसे मम्मों को बारी बारी अपने मुंह को अन्दर लेने लगा और साथ में उसके चूतड़ को दबाता भी जा रहा था और बीच बीच में उसके छेद में शलवार के ऊपर से ही उंगली डालने की कोशिश कर रहा था, जबकि उसकी बाँहें मेरी गर्दन के ईर्द-गिर्द थी।

निप्पल पीते पीते मैंने उसकी शलवार का नाड़ा खोल दिया, शलवार सरसरा कर उससे अलग हो गयी और एक मटमैली सफेद पैन्टी, जिसका हाल भी उस ब्रा की तरह था, अब उसके जिस्म में रह गयी थी।
मैंने उसके जिस्म से उस पैन्टी को अलग किया और हाथ में लिया तो उस पैन्टी में उसका रस लगा हुआ था और शायद पहले का भी जब भी कभी वो कहानी पढ़ कर या सोचकर उत्तेजित होती रही होगी और उसका रस उसके अन्दर से छूटने के बाद पैन्टी में लगता रहा होगा, वही रस उसे परेशान करता रहा होगा जिसकी वजह से उसे अपनी बुर को खुजलाना पड़ता था और इसलिये उसकी पैन्टी में जगह-जगह छेद बन चुका था।

अब वही रस सूख चुका था और जिसकी वजह से पैन्टी की वो जगह काफी टाईट हो चुकी थी। और अब उसकी उसी पैन्टी में एक बार फिर वही रस लगा हुआ था जो यह बताने के लिये काफी था कि मेरे हाथों के स्पर्श ने उसके जिस्म का क्या हाल किया होगा और वो कितना ज्यादा उत्तेजित हुयी होगी कि एक बार फिर उसकी चूत ने रस छोड़ दिया।

मैंने उसकी पैन्टी से उस ताजे रस को अपनी उंगली पर लिया और उसको दिखाते हुए बोला- जब दो जिस्म का मिलन होता है तो यही वो रस है जो और उन्माद पैदा करता है। हालाँकि यह रस भी उसी पैन्टी से लिया हुआ था जहाँ पहले से ही अनगिनत रस सूख चुके थे और देखने में भी अच्छा नहीं लग रहा था, फिर मैंने बड़ी सफाई से उसकी पैन्टी से उंगली को पौंछा और उसकी चूत की फांकों को अंगूठे से सहलाते हुए और साथ ही उसकी चूत के अन्दर उंगली डालने की कोशिश कर रहा था।

उसकी चूत उसके रस से सराबोर थी फिर भी उसकी चूत के अन्दर काफी गर्मी थी। उंगली लगाने भर से ही वो चिहुंक उठी और मेरी उंगली गीली हो गयी।
मैंने एक बार फिर उसकी चूत का रस अपनी उंगली में लिया और उसको दिखाते हुए बोला- सोनी!
वो मेरी तरफ देखने लगी!
अपनी उंगली उसको दिखाते हुए मैंने मुंह के अन्दर डाल ली और फिर…

कहानी जारी रहेगी.
दोस्तो, मेरी सेक्स स्टोरी इन हिंदी कैसी लग रही है? कृपा करके मेल के माध्यम से मुझे अपने विचार बतायें।
धन्यवाद
आपका अपना शरद सक्सेना
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