भाई की कुंवारी साली की सील तोड़ी-4

(Bhai Ki Kunvari Sali Ki seal todi- Part 4)

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अब मैं मन ही मन सोचने लगी कि इनको कैसे मेरे अंदर मन की बात पता हो गई?
यह बात बिल्कुल सच है कि जब जीजा मुझे ड्रेस दिलाने के लिए घर आ रहे थे, जीजा के साथ आने के लिए मैं जब तैयार होने के लिए नहाने गई तो मेरा ध्यान गया कि नीचे मेरे में कुछ बाल हैं चूत में. मैंने पापा के रेजर ब्लेड से अपनी नीचे चूत के बाल साफ किए. और तब अपने आप मन में आ गया जो कमलेश सर ने कहा था कि ‘जब भी मौका मिले किसी भी मर्द के साथ… तो चुदाई करवा लेना, बहुत बहुत मजा आएगा तुझे वन्द्या!’
मुझे एक दम से सुरेन्द्र जीजा का ख्याल आया और उनकी बातों का कि जो सुरेन्द्र जीजा अपने घर में मुझसे बोले थे कि ‘वन्द्या लगता है यही तुम्हें चोद दूं और तुम्हारी चीख निकाल दूं, मेरा बहुत बड़ा लन्ड है लड़कियां तरसती हैं मुझसे चुदवाने को…’
यही यही बात मेरे दिमाग में मन में चलने लगी और मैं एकदम से गर्म हो गई, सिर्फ सोच सोच कर दो बार मेरी पैंटी गीली हो गई, आज लाइफ में पहली बार मेरी पैंटी गीली हो रही थी, मैं दो पैंटी बदल चुकी थी एक घंटे के अंदर! ऐसा क्यों हो रहा यह भी नहीं मुझे मालूम, आज सब यह इस तरह का मेरा पहला एक्सपीरियंस है.
मैं फिर सोचने लगी कि आज मुझे सुरेंद्र जीजा चोदेंगे और मैं इस लिए सिंगल पीस की घुटनों तक की फ्रॉक पहन ली, कि जीजा जहां चाहे फ्राक ऊपर करके मुझे चोद दे, मैं बिल्कुल आज मन में तय कर चुकी थी कि जीजा मुझे चोदेंगे और मैं उनसे उनका लोड़ा घुसवाऊंगी।

पर यह बात मकान मालिक शुक्ला को कैसे पता चल गई मैंने तो कुछ बताया नहीं पर जो मकान मालिक बोले बिल्कुल सच था, अब मैं सोच में पड़ गई की मकान मालिक को मेरे मन के अंदर की बात कैसे पता चली?

तभी वह मुझसे बोले- वन्द्या, दिखने में जो तुम्हारा लुक है वह बहुत सेक्सी है, बहुत हॉट है, कोई भी तुम्हें चोदना चाहेगा।
वो मुझे घूरने लगे और फिर बोले- लगता है वह सुरेन्द्र तुम्हें प्यासी और तड़पता छोड़ गया, चलो मैं आज तुम्हारा काम कर देता हूं और मैं तुम्हें ड्रेस भी दिला दूंगा।

मैं बिल्कुल डर गई कि यह कैसी बात कर रहे हैं? इनकी उम्र 50 साल के ऊपर है और ऐसी बातें कर रहे हैं।
मैं बिल्कुल रोने सी लगी तभी मकान मालिक मुझे ऊपर से नीचे तक घूरने लगे एकटक देखने लगे और मुझसे लिपट गए। तभी उन्होंने मेरे बदन पर जो चादर ढकी थी उसे हटा दिया, मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी हो गई, वो बोले- तू तो बहुत जबरदस्त माल है वन्द्या, आज मुझसे चुदवा लो, वादा है अपने जीजा को भूल जाएगी.
और मेरे होठों को चूमने लगे और मेरे दूध दबाने लगे.

जैसे ही बूब्स को अपने मुंह में भरने लगे मैं उन्हें मना करने लगी. तब उन्होंने मुझे छोड़ दिया लेकिन मकान मालिक मुझे गाली देने लगे, बोले- वन्द्या, तू इतनी बड़ी छिनाल होकर चिल्ला रही है चल आज तेरे घर चलता हूं और तुझे बताता हूं! तीन दिन के अंदर या तो तू अपने घर में खुद बता देना कि मैं यह सब करती हूं, रंडी बनकर चुदवाती हूं, नहीं मैं तेरे घर आकर तेरे मां बाप से खुद बताऊंगा। चल आज तो तू निकल जा!

मैंने फटाफट कपड़े पहने और डरते हुए वहां से निकल आई।

मुझे घर आते हुए बहुत डर लग रहा था कि अब मेरे घर में यह बात पता चल जाएगी, मैं घर कैसे तो घबराते हुए पहुंची। अपनी यह सारी बात तो नहीं पर मैंने इस डर से कि अगर मकान मालिक घर में बता दिया तो पता तो चल ही जाएगा, इसलिए मैंने खुद अपनी दीदी को यह बताया- दीदी मुझे आपके देवर सुरेंद्र ड्रेस दिलाने के बहाने सतना ले गए मैं उनके साथ चली गई तो वह किराए के अपने कमरे में ले गए और फिर मुझसे जबरदस्ती करने लगे और मुझे बोले मैं तुमसे प्यार करता हूं और आज मुझे तुम्हारे साथ सोना है, मैं उनसे लड़ पड़ी छीना झपटी की और रोने लगी चिल्ला दी तब जाकर उनसे कैसे तो बचकर आई हूं।

मैंने दीदी से बहुत सारा झूठ बोल दिया अपने को बचाने के लिए, जबकि सच यह है कि मैं जो बातचीत हुई थी उसके अनुसार मैं अपनी मर्जी से जीजा के साथ गयी थी और मेरा खुद का भी मन था सेक्स करने का.

अब मेरी दीदी ने अपने ससुराल में हंगामा कर दिया. दीदी ने अपने पति से यह सब बात बताई और बोली- तुम्हारा भाई राक्षस है, मेरी बहन के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, वन्द्या बेचारी अभी बहुत छोटी और भोली मासूम है।
बहुत हंगामा हुआ और सुरेंद्र जीजा को सब ने बहुत गालियां दी और बहुत बेइज्जत घर में किया.

फिर मेरी दीदी मुझसे बोली- यह बात मम्मी पापा को वहां नहीं पता होना चाहिए कैसे भी! वन्द्या तुम घर में कोई जिक्र नहीं करना, मैंने यहां उसको बहुत बेइज्जती गाली और सब कर्म करवा दी।
मैं बोली- ठीक है दीदी!
इस तरह से मैंने अपने घर में मम्मी पापा से भाई से सब बात छुपा रखी थी।

अभी इस बात के चार पांच दिन ही हुए थे कि एक दिन दोपहर में मेरे घर के दरवाजे के सामने एक मोटरसाइकिल खड़ी हुई और दरवाजा किसी ने खटखटाया.
इत्तेफाक से गेट खोलने मैं आई, तो देखा सुरेंद्र जीजा का मकान मालिक मेरे दरवाजे के सामने है, मैं उन्हें देख कर डर गई और बहुत ही घबरा गई, मुझे कुछ समझ नहीं आया, मैं उनके सामने हाथ जोड़ कर बोली- आप क्यों आए हैं?
तो वे बोले- तुम्हारे पापा मम्मी से बात करनी है, चलो मुझे उनसे मिलना है।

मैं उनके हाथ जोड़ने लगी, मैं बोली- प्लीज धीरे से बोलिए आप और यहां से चले जाइए. मैं मुंह दिखाने लायक नहीं बचूंगी, मुझे घर से निकाल देंगे, आप मम्मी पापा से कुछ मत बताइए. प्लीज हाथ जोड़ती हूं.
मकान मालिक बोले- ठीक है वापिस चला जाऊंगा, कुछ नहीं बताऊंगा लेकिन एक शर्त पर… तुम मेरे से मिलने आओगी। मुझे खुश करोगी, तुम्हें इतना अच्छे से करूंगा कि तुम जन्नत में रहोगी… वादा, तुम बेवजह डर रही हो, उस दिन सुरेंद्र से घुसवा ही रही थी और किसी से करवाओगी ही तो मुझमें भी कांटे नहीं लगे, सबसे बेस्ट करूंगा, फाइनल बोलो आओगी या नहीं या फिर तुम्हारे मम्मी-पापा से मैं मिलकर जाऊं?

मैंने डर के मारे बिना कुछ सोचे समझे कह दिया- ठीक है अंकल, मैं मिलने आऊंगी। पर प्लीज अभी जल्दी चले जाइए, मुझे डर लग रहा है, मैं पक्का 3 दिन के अंदर आपसे मिलने आऊंगी।
और जाते जाते मकान मालिक बोले- अगर 3 दिन में तुम नहीं आई वन्द्या तो अब मैं तीसरे दिन तुम्हारे घर में सब तुम्हारे कारनामे तेरे मम्मी पापा से बताऊंगा।
वे चले गए, मैंने राहत की सांस ली और फिर मैंने रात में सुरेंद्र जीजा को फोन लगाया, बोली- जीजा वह आपका मकान मालिक मेरे घर आया था और मेरे घर में आकर बोला कि मेरे पापा मम्मी को सब बताना है, मैं बहुत डरी हुई हूं प्लीज जीजा मुझे बचाओ!

सुरेंद्र जीजा बोले- तुमने तो मुझे को मेरे घर में मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा, मैं तुम्हारा चेहरा भी नहीं देखना चाहता और दोबारा मुझे फोन भी मत लगाना। तुमने सब झूठ बोला कि मैं तुम से जबरदस्ती कर रहा था, जबकि तुम ड्रेस के बदले मुझसे चुदवाने को तैयार हुई थी, पर तुम ऐसा क्यों किया, मैं अब कभी जिंदगी में अपने घर में सर उठा कर नहीं रह सकता।

मैं बहुत शर्मिंदा हुई और बोली- सॉरी जीजा, मैं डर गई थी कि वह मकान मालिक ने मुझे धमकी दी थी कि सब बता देगा, तो मैंने डर के मारे दीदी को कह दिया कि तुम मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे थे। मुझे माफ कर दो सॉरी, और प्लीज कैसे भी मकान मालिक को अपने रोको।

जीजा बोले- वह बहुत हरामी और गंदा मकान मालिक है, वह नहीं मानेगा, कैसे भी तुम्हें उससे मिलना ही पड़ेगा, वह किसी सूरत में नहीं मानने वाला।
तो मैं बोली- वह क्या मेरे घर आ जाएगा?
तो जीजा बोले- हां पक्का आ जायेगा, वैसे तुम क्या बोली हो मकान मालिक से?
मैं बोली- मैंने बोला कि मैं 3 दिन के अंदर मिलने आऊंगी, पक्का वादा, अभी चले जाओ।
तो जीजा बोले- तुम चली ही जाना, नहीं वह तीसरे दिन आ जाएगा.

मैं बहुत डर गई और मैं सुरेंद्र जीजा को बोली- प्लीज मेरे साथ चलना, प्लीज जीजा आप मेरे साथ रहना, वरना मैं अपने आपको नहीं छोडूंगी और भाग जाऊंगी।
तो जीजा बोले- मेरा मन तो नहीं करता पर तुम कहती हो तो चलो तुम्हारे साथ चलूंगा।
और जीजा कैसे भी तो तैयार हुए.

तीसरे दिन मैं बोली- मैं आपको सतना बस स्टैंड में मिलूंगी, आप आ जाना और अपने मकान मालिक के पास ले चलना।

तीसरे दिन मेरे मन में फिर से वही सब ख्याल आने लगा कि आज मुझे चोदेंगे मकान मालिक, सिर्फ उन्हीं का सोच कर मेरे अंदर कुछ खलबली सी और गुदगुदी सी भी हो रही थी, वो जो बोलकर गये थे, वही सब सोच-सोचकर मैं बिल्कुल अंदर से ना जाने क्यूं उत्तेजित हो रही थी, मेरी पैंटी गीली हो गई.

मैंने बहुत अच्छे से मेकअप किया, आज मैंने रेड कलर की स्कर्ट और ऊपर व्हाइट टॉप पहना नीचे मैंने ब्रा नहीं पहनी, सिर्फ पैंटी पहनी और जल्दी सुबेरे 9:00 बजे मम्मी से झूठ बोलकर बहाना बनाकर मैं सतना गई।
तभी वहां मुझे बस स्टैंड के पास काफी हाउस के सामने थोड़ी देर में सुरेंद्र जीजा अपनी बाइक लिए खड़े मिले, मैं उनके साथ बैठ गई.
जीजा बोले- आज वन्द्या… तुम बहुत हॉट लग रही हो एक नंबर की, तुम पूरा मन बना कर आज मेरे मकान मालिक से चुदवाने आई हो! क्या मस्त सेक्सी ड्रेस पहना है, मुझे नहीं दोगी क्या?
मैं कुछ नहीं बोली.

फिर कुछ पल बाद मैं बोली- जीजा, आप वहां कमरे में मेरे साथ रहना!
तो वह बोले- वह बहुत हरामी पागल है, तुम्हारा दिमाग तो ठीक है, मकान मालिक तुम्हें चोदेगा, तुम्हारे साथ सोएगा और मैं वहां खड़ा देखूंगा? क्या पागल नजर आता हूं तुम्हें, मैं नहीं रहूंगा।
मैं बोली- प्लीज जीजा, तुम नहीं रहोगे तो मैं फिर लौट के घर नहीं जाऊंगी.
तो जीजा बोले- चलो देखता हूं!
अब मकान मालिक के घर पहुंच गए.

मेरी पहली बार की चूत चुदाई की स्टोरी जारी रहेगी.
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