फ़्रेशर मोहिनी की फ़्रेश चूत-2

प्रेषक : देविन देव

एक दिन मैं रात को अपने PC पर काम कर रहा था तो मैंने हिस्ट्री चैक की तो मेरी आँखें खुली रह गई। मैंने देखा उसने कुछ पोर्न साईट यूज की थी। मैंने उन्हें ओपन करके देखा तो ब्ल्यू फ़िल्म चल रही थी। मेरी गान्ड फट गई देख कर ये सब। फिर सोचा कि अब मिलने दो साली को ! और मैंने अपना प्लान तैयार कर लिया उसे कैसे चोदा जाए।

अगले दिन मेरे कॉलेज का ऑफ था, मैं देर तक रात को जाग कर टीवी देख रहा था। सो अगले दिन देर तक सोया रहा। दोपहर में मोहिनी आई और PC यूज करने लगी मैं उसे देखता रहा। फिर मैंने सोचा कि बेटा यह मौका फिर नहीं मिलेगा। आज कुछ कर दे, नहीं तो हाथ से हिलाते रहना।

फिर मैंने उससे पूछा- मोहिनी, 2 दिन पहले तुम नेट पर क्या काम किया था?

वो थोड़ी घबरा गई- नहीं, कुछ नहीं ! मैं तो बस अपने पेपर के लिये ही यूज करती हूँ।

“हाँ मुझे पता है पर उस दिन कुछ और ही काम कर रही थी तुम?”

उसका चेहरा लाल हो गया यह सुन कर- नहीं मैंने तो बस वही यूज किया था !

उसकी शक्ल देख कर ही मुझे लगा कि उस गाण्ड फट चुकी है।

“मैं बताता हूँ कि तुम क्या कर रही थी।”

मैंने वो साईट खोल कर कहा- तुम ये सब देख रही थी। उस समय साईट पर नंगे लड़के-लड़कियों की फोटो लगी हुई थी।

उसने डर कर कहा- प्लीज, मामा को ये सब मत बताना !

“पर तुम डर क्यों रही हो? मैं तो यूँ ही पूछ रहा था बस !”

“नहीं मुझे लगा कि आप मामा को सब बता दोगे !”

“नहीं यह सब तो आम बात है… अब सब को पता होना चाहिए ना कि ये सब होता क्या है और कैसे !”

वो थोड़ा सा हँसी और गर्दन नीचे झुका ली !

“कुछ किया भी है या बस फ़िल्मों से ही मजा लिया है?”

“नहीं ! मैंने ये सब कभी नहीं किया !”

“ओ… तो अब तक तुम फ्रेशर हो?”

वो चुप थी… मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया और कहा- अगर यह तुम्हारे मामा को पता लगा तो वो क्या सोचेंगे तुम्हारे बारे में? कि तुम ये सब करती हो नेट पर?

“क्या आप उन्हें ये सब बता देंगे? पर आप नहीं बताएँगे तो कैसे पता चलेगा उन्हें?”

“सोचना पड़ेगा इस बारे में !”

मैंने सोचा आज फँस गई मैना जाल में… मार ले बेटा इसकी फुद्दी…

“अगर मैं नहीं बताऊँ तो मुझे क्या मिलेगा?”

“जो आप कहो, मैं वो ला दूँगी… बताओ आप !”

“सोच लो, कभी मना कर दो?”

“नहीं, आप बताओ?”

“ओ के, बता दूँगा… तुम परेशान मत हो… तुम्हारे मामा से मैं ये सब नहीं बताऊँगा।”

“थैन्क्स…”

“बैठो आराम से… बातें करते हैं…” हम दोनो ही बैठ गये, वो कुर्सी पर बैठ गई।

“तुम्हारा कोई बॉयफ़्रेन्ड नहीं है?”

“हाँ है, मेरे पड़ोस में ही रहता है।”

“उसके साथ कभी कुछ किया है या नहीं?”

वो चौंक गई, एकदम से शरमा कर- नहीं बस थोड़ा बहुत… बस हम किस ही करते हैं।”

“क्यों? आगे क्यों नहीं?”

“डर लगता है।”

“क्या उसने कभी तुम्हारे बूब्स दबाए हैं…?”

उसने मुस्कुरा कर हाँ में सर हिला दिया !

“तभी तुम फिल्मों में ये सब देखती हो…”

वो कुछ नहीं बोली पर मुझे पता लग गया कि वो भी मजे लेकर बात कर रही है।

“क्या तुम्हारा मन नहीं करता यह सब करने का?”

“करता तो है पर डर भी लगता है मैंने सुना है कि इस सब में दर्द बहुत होता है…।”

“पर मजे भी तो आते है डियर …” मैंने देखा वो हँस रही थी और गर्म हो रही थी… यहाँ मेरे लोअर में भी हलचल मचने लगी।

“अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें वो मजे दे सकता हूँ।”

मैंने देखा वो अब भी शरमा रही थी।

“पर कुछ प्रोब्लम होगी तो?”

“नहीं, कुछ नहीं होगा… बोलो !”

“पर मुझे कुछ नहीं पता ये सब कैसे होता है।”

“मैं तो सब जानता हूँ ना !”

“पर एक शर्त पर आप वो सब मामा को नहीं बताओगे।”

मैंने कहा- कौन सी बात?

और मैं हसने लगा… बस मुझे मौका मिल गया था आज मोहिनी को चोदने का …

मैं उठा और उसका हाथ पकड़ लिया, वो एकदम से उठ गई। मैंने उसको पीछे से पकड़ लिया। वो शरमाने लगी…यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

“अगर पूरे मजे लेने हैं तो शरमाना छोड़ दो !” उसका विरोध अब खत्म हो गया मैंने उसके लबों पर चुम्बन शुरु कर दिया… और बस वो मस्त होने लगी.. मैंने उसके चूचों को हल्का सा दबाया तो उसने आँखें बन्द कर ली और मेरा हाथ पकड़ कर सीने दबाने लगी। मेरे होंठ उसके होंठों से अलग नहीं हो रहे थे और मैं उसके चूचों को भी दबा रहा था… मैंने थोड़ा जोर से दबाना शुरू किया… उसके मुँह से आवाज निकली आ… आ… आ… आह…

…मुझे जैसे स्वर्ग मिल गया था… आज मेरी मन की इच्छा पूरी जो हो रही थी। पन्दरह मिनट तक हम दोनो यूँ ही लगे रहे।

मैंने उसे बैड पर गिरा दिया और उसकी सलवार में हाथ डालने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया… मैं छुड़ा कर उसकी सलवार खोलने लगा… जैसे ही उसकी चूत पर मेरा हाथ लगा, उसके मुँह से आह निकल पड़ी… मैं उसकी चूत में हाथ से सहलाने लगा… वो गीली हो चुकी थी… मेरे लण्ड का भी बुरा हाल था।

मैंने जैसे ही उसके दाने को छेड़ा, वो मेरा हाथ पकड़ कर दबाने लगी… आह ह हह… आहह ह्ह ह…

अब मुझ से नहीं रहा गया, मैंने उसको उठाया और उसका कमीज उतारने लगा। वो कोई विरोध नहीं कर रही थी… जिन चूचों को मैं देखता था आज वे मेरे हाथ में थे, वो भी नंगे। उसका सफेद बदन देख कर मेरा लन्ड और भी तन गया। वो अब ब्रा में ही थी… उसके बूब्स देख कर मुझे ना जाने क्या हो गया… मैं उसे ब्रा के ऊपर से ही चूमने लगा… वो मस्त होती जा रही थी… और आँखें बन्द कर मजे ले रही थी।

मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिये मेरे सामने दो कबूतर ऐसे निकले जैसे उन्हे पिंजरे से आजाद कर दिया हो। मेरे होश उड़ गये ! क्या मस्त चूचियाँ थी ! मैंने अपनी लाईफ में नहीं देखी। उसकी चूची के उपर हलके भूरे रंग का एक रुपये के सिक्के जितना एरोला था, मैंने हथेली से वहाँ दबाना शुरू किया तो वो मस्त होकर अपना सीना ऊपर उठाने लगी। मैंने दूसरे निप्पल पर चूमना शुरू किया तो वो और जोर से मस्त होकर आवाजें निकालने लगी। मैं उसके लबों को अपने होठों में लेकर चूसता रहा। फिर मैंने उसकी सलवार को पूरा उतार दिया और उसकी चूत पर अपना गर्म हाथ रखा तो मुझे लगा कि आग लगी है वहाँ पर।

मैंने भी अपनी टीशर्ट व लोअर उतार कर रख दिया। अब हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे। वो मुझे देख कर अपनी आँखें बन्द कर लेती। उसकी चूत में इतना पानी आ गया कि मुझे अब कोई चिकनाई की जरुरत नहीं थी। वैसे भी चुदाई का मजा लेना हो तो बिना कन्डोम के और बिना तेल के बस उसकी चूत के पानी में चुदाई करो क्या मजा आएगा देखना।

मैंने उससे कहा ‘मेरा लन्ड पकड़’ वो उसे पकड़ कर मेरी मुठ मारने लगी। मुझे मजा आ रहा था।

कुछ देर बाद मैंने उसकी टांगों को खोला, उसकी छोटे भूरे बालों वाली चूत देखी… क्या माल है यार। मैं उसके ऊपर लेट गया और उसकी चूत के बाहर अपना लंड रगड़ने लगा। मेरे लंड का टोपा उसकी चूत के पानी से गीला हो गया। मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और दबाने लगा। उसकी टाईट चूत में लौड़ा घुसाने में थोड़ी जान तो लगानी पड़ेगी… उसके मुँह से आवाज आई आ…आह… आ…

मैंने उसे चुम्बन करना शुरु कर दिया ताकि उसके मुँह से आवाज ना आए।

उसने कहा- मुझे दर्द हो रहा है।

“थोड़ा सा होगा बस ! फिर नहीं होगा।” मैंने कहा।

“आराम से करना प्लीज !”

“ओके तुम बस आवाज मत करना !”

फिर मैंने जैसे ही दबाया वो अपने चूतड़ जोर जोर से हिलाने लगी। मैंने उसे कस कर पकड़ा और जोर से एक धक्का लगाया, मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था !

“आ… आअ… आह… मुझे दर्द हो रहा है, बाहर निकालो इसे।” वो पागल सी हो गई और मुझे दूर करने लगी।मैंने उसे पकड़ ही रखा था, वो नहीं छुड़ा पाई, मैं रूका और कहा ‘बस अब नहीं होगा’ मैंने फिर आराम से झटके मारने शुरू किये, वो अब भी कसमसा रही थी पर कम… मैं आराम से उसे चोद रहा था… फिर मैंने थोड़ा तेज से धक्के मारे तो वो और आवाज करने लगी… गांड तो मेरी भी फट रही थी कि कभी कोई आ ना ज़ाए आवाज सुन कर। पर चुदाई में सब कुछ भूल जाते है। मैं रूका और उसके बूब्स चूसने लगा… अब उसे भी मजा आ रहा था। फिर मैंने एक और जोरदार धक्का मारा मेरा लंड पूरा फिर उसकी चूत में घुस गया। वो फिर से मचलने लगी। पर अब मैं रहम के मूड में नहीं था, मैंने पूरे जोर से धक्के मारने शुरू कर दिये, उसके नाखून मेरी कमर में गड़ रहे थे, 3-4 मिनट के बाद उसकी आवाज में मजा था… अब वो भी मजे लेकर चुदवा रही थी…

मैंने पूछा- अब दर्द हो रहा है?

“नहीं…तुम बात मत करो बस करते रहो…”

बस मैं भी मजे ले कर उसके ऊपर होकर चुदाई कर रहा था। दस मिनट बाद उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपनी तरफ भींचने लगी… उसकी चूत पानी छोड़ रही थी। मैंने और तेजी से लंड को चलाना शुरू कर दिया। उसने मुझे तब तक नहीं छोड़ा जब तक वो पूरा नहीं झड़ गई।

2 मिनट के बाद वो कुछ ढीली सी हो गई पर मैं अभी बाकी था, मैंने अपना लंड बाहर निकाला उसे उल्टा कर उसकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया और उसके पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाल कर करता रहा।

कुछ देर बाद मेरा भी पानी निकलने वाला था, मैंने सारा पानी उसकी पीठ पर डाल दिया। कुछ देर हम निढाल पड़े रहे। फिर हमने कपड़े पहन लिये।

वो कुछ नहीं बोल रही थी…

“अब मैं जा रही हूँ !” काफ़ी देर बाद वो बोली।

मुझे बताएँ, आपको यह कहानी कैसी लगी?

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