हर किसी को चाहिए तन का मिलन-8

(Hindi Porn Story : Har Kisi Ko Chahiye Tan Ka Milan- Part 8)

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अब तक इस हिंदी पोर्न स्टोरी में पढ़ा कि रूपिका और उसका ड्राइवर महेश सुखना लेक के किनारे बैठ गए थे.
हमारे यह प्रेमी जोड़ा अब कुछ देर ऐसे ही बैठने वाले है तो चलिए आपको ज्यादा गर्म माहौल जी तरफ ले चलती हूँ।

रात को 9 बजे दीपिका अपने फर्स्ट क्लास कैबिन से निकली और केविन(अंग्रेज) के कैबिन की तरफ चल पड़ी। उसने कैबिन को खटखटाया केविन ने उसे अंदर आने दिया और फिर दरवाजा बंद कर दिया।
केविन- तो तुम आ गई?
दीपिका- तुम्हें हिंदी आती है?
केविन- हाँ, भारत में कई सालों से हूँ। चलो टाइम बर्बाद मत करो और अपने कपड़े खोलो…
दीपिका- पहले पैसे?
केविन पैसे देते हुए- तुम हिंदुस्तानी लड़कियां पैसों के लिए कुछ भी कर सकती हो ये मुझे पता है इसलिए पहले ही रेडी रखे थे।
दीपिका कपड़े उतारते हुए- बकवास बन्द करो और जो करना है जल्दी करो।
केविन- साली रंडी, बड़ी मस्त चीज़ है तू! आजा पहले तेरे इन मोटे मोटे मम्मों की ही चुदाई करता हूँ।

केविन जो सिर्फ कैपरी में था, उसने कैपरी उतार फेंकी और उसका 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा गोरा लन्ड उछल पड़ा।
“कमीना वायग्रा खा के बैठा हुआ है.” दीपिका ने मन में सोचा पर सोचने का ज्यादा टाइम नहीं था, उसे काम जल्दी निपटाना था और कुछ भी करके केविन को 11 बजे से पहले सुला देना था। दीपिका ने हल्का सा धक्का देकर केविन को उसकी बर्थ पर बिठा दिया और फिर घुटनों के बैठ केविन के लन्ड को पकड़ लिया और मुठियाने लगी।
“रंडी इसके लिए पैसे नहीं दिए हैं मैंने, मुँह में ले लौड़े को चूस!” केविन ने दीपिका को थप्पड़ मारते हुए कहा।

दीपिका को चोट तो लगी पर वो सारा गुस्सा पी गयी और उसने उसके लन्ड को चूसना शुरू कर दिया.
साला अंग्रेज हरामी था एक नंबर का… उसने दीपिका के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसके मुँह मे ही ज़ोरदार झटके लगाने शुरू कर दिए।
“साली रंडी… अंग्रेज का मजा आ रहा है ना… आह…साली… बडी मस्त चीज़ है तू… आह… आह…” वो दीपिका के मुँह को चोदते हुए बोलता जा रहा था।

काफी देर दीपिका की मुँह चुदाई करने के बाद उसने अपना लन्ड उसके मुँह से निकाल लिया और दीपिका को बर्थ पकड़ के झुक कर खड़ा कर दिया और उसकी गांड पकड़ के पूरा लन्ड एक ही बार में दीपिका की टाइट चूत में घुसेड़ दिया- आह… आह माँ… मर गयी… साले रंडी की औलाद आराम से नहीं कर सकता!
वो चिल्ला उठी, दर्द से उसका बुरा हाल था, इधर केविन ने बिना कुछ तरस खाय उसकी चुदाई शुरू कर दी।

“आह… आह… रंडी आज तेरी इस चूत को फाड़ न दिया तो मेरा नाम केविन नहीं… साली बड़ी टाइट चूत है तेरी कोई मेरे जैसा मर्द नहीं मिला तुझे आज तक!” केविन दीपिका को कुतिया की तरह चोदते हुए बोल रहा था.
दीपिका को भी मजा आ रहा था- आह… हराम की औलाद बस इतना ही दम है तेरे में? एक चूत का पानी नहीं झाड़ सकता… आह… आह!
दीपिका की बातों ने अपना असर दिखाया और केविन ने और तेज़ी से चुदाई शुरू कर दी.

दीपिका की तो एक एक हड्डी हिल गई पर काम बन गया, आखिर केविन ने थकना शुरू कर दिया और अपने धक्कों की रफ्तार कम करके लम्बे और ज़ोरदार धक्के लगाना शुरू कर दिए.
दीपिका समझ गयी कि इसका काम होने वाला है वो हल्के से झटके के साथ सीधी हो गयी और घुटनों के बल बैठ के केविन के लन्ड को मुँह में लिया और चूसना शुरू कर दिया.
“साली रंडी… आह… आह…” केविन आँखें बंद किए बोल रहा था, यही समय था जब दीपिका को अपनी करामात दिखानी थी, उसने जल्दी से इधर उधर घुमाई केविन की पानी की बोतल पास में ही पड़ी थी। उसने जल्दी से अपना पर्स खोला और नींद की दवाई के दो चार ड्राप पानी में मिला दिए।

काम ठीक से हो चुका था अब सबक सिखाने की बारी उसकी थी… उसने लन्ड को बाहर निकाला और हाथ में ले दो चार ऐसे झटके दिए कि केविन झड़ गया।
केविन थक के बर्थ पर बैठते हुए- बड़ा स्टैमिना है तेरा!
दीपिका- क्योंकि तेरी तरह मैं वायग्रा नहीं खाती न!
केविन पानी की बोतल उठाते हुए- बडी तेज़ है साली तू!

इतना कह के उसने पानी को पी लिया और दो चार पल के बाद बेसुध हो कर बर्थ पर गिर पड़ा। दीपिका ने झट से खुद को साफ कर कपड़े पहने और केविन के समान की तलाशी लेना शुरू कर दी उसे हीरे की आँख खोजने में ज्यादा समय नहीं लगा। बिल्कुल वैसा ही हीरा था जो हेमन्त ने उन्हें दिया था बस असली आँख में सम्मोहित सी कर देने वाली चीज़ थी।

वो कैबिन से बाहर निकलने ही वाली थी कि उसके दिमाग में एक आईडिया आया, उसने जल्दी से एक पेनड्राइव में ओ टी जी डिवाइस लगाई और केविन के मोबाइल का सारा डेटा कॉपी कर लिया और मोबाइल को फिर से केविन जेब में डाल दिया और अपने केबिन में आ गयी।

सिमरन- दीपिका, काम हुआ?
दीपिका- परफेक्टली!
सिमरन- तुमने उसे कपड़े तो पहना दिए न? नहीं तो उसे शक हो जाएगा कि उसके साथ कुछ न कुछ तो हुआ है।
दीपिका- हाँ मेरी जान, सब हो गया। कपड़े भी पहना दिये उसकी पानी की बोतल भी बदल दी और उसके फोन का सारा डेटा भी अब हमारे पास है।
सिमरन- ओह थैंक गॉड… उसने तुम्हें ज्यादा तंग तो नहीं किया?
दीपिका- तंग, और मुझे? इस मामले में उस जैसे एक साथ चार को हैंडल कर सकती हूँ।
दीपिका ने क्लासिक रेगुलर की डिब्बी में से एक सिगरेट निकाली और सुलगा ली.

सिमरन- ईट्स बैड फ़ॉर हेल्थ!
कह कर उसने भी अपने बैग से क्लासिक मेंथोल की एक सिगरेट निकाली और खुले दिल से हँस पड़ी।
दीपिका- तू तो छुपी रुस्तम निकली। अच्छा यह बता कल तूने पहली बार लन्ड का मजा लिया?
सिमरन- हाँ यार, मुझसे तो सब पूछ लिया और देख भी लिया अपने बारे में भी तो बता?
दीपिका- तेरा मतलब है मेरी पहली चुदाई से?
सिमरन- हाँ, यार तू कैसे चुदाई, लन्ड जैसे शब्द खुल्लमखुल्ला बोल लेती है? मुझे तो बड़ी शर्म आती है।
दीपिका- मेरी जान तू भी सीख जायेगी, गंदी बातों में भी चुदाई सा मजा है।

सिमरन- यह तो सही कहा तूने! चल बता भी तुझे किसने और कैसे पहली चोदा था।
दीपिका- यह हुई न बात।
उसने दूसरी सिगरेट सुलगाई और अपनी कहानी शुरू की:

मैं राजस्थान के एक रजवाड़े परिवार से हूँ, बारहवीं क्लास तक घर से ही पढ़ी. अब घर पर पढ़ने के कारण मेरी कोई सहेली भी नहीं थी इसलिए उस टाइम तक मैं बिल्कुल भोली भाली थी। कॉलेज जाने लगी तो सहेलियाँ बनी वो रोज़ चूत और लण्ड का टॉपिक छेड़ देती, अपने अपने बॉयफ्रेंड के बारे बताती और ढींगें मारती उनके लौड़ों के बारे में।
मेरा कोई बॉयफ्रेंड तो था नहीं इसिलए मैं अंदर ही अंदर घुटती रहती, सोचती कि लन्ड कैसा होता है! पर करती क्या हर टाइम कोई न कोई मेरे साथ होता इसिलए किसी लड़के से दोस्ती न हो सकी।

उन्हीं दिनों मेरी नज़र हमारे एक हब्शी नौकर पर पड़ी, वो 6.7 फुट लम्बा और हल्क जैसा चौड़ा दानव था, और सबके सामने बिल्कुल बेफकूफ होने का नाटक करता था, ऐसे नादान बनता था जैसे कोई बच्चा हो इसीलिए उसका नाम ही पड़ गया सिल्ली।
पापा सिल्ली की कई साल पहले अफ्रीका से लाये थे। मुझे लगा इसका लन्ड देख सकती हूँ मैं… इसीलिए मैं कोई मौका तलाशने लगी जहाँ उसे नंगा देख सकूँ. मैं उसे फंसाने की सोच रही थी पर फंसने वाली थी खुद।

तो एक बार हुआ यूँ कि मेरा ड्राइवर बीमार हो गया और पापा ने उसे मेरे साथ कॉलेज भेज दिया. मेरी तो जैसे लॉटरी लग गयी, कॉलेज मेरे घर से कोई 20 किलोमीटर दूर था रास्ते में एक सुनसान जंगल में मैंने कार रोक दी यह कह कर कि मुझे चक्कर आ रहा है और धूप लगने का बहाना करके उसे जंगल में ले गयी और एक चट्टान पर बैठ गयी.
कुछ देर बाद वो वापिस चलने के लिए कहने लगा, मैंने उससे कहा कि मैं वापिस तभी वापिस चलूँगी जब वो मुझे अपना लन्ड दिखाएगा.

पर वो एक नंबर का हरामी था भोला बनते हुए बोला- मालकिन, यह लन्ड क्या होता है?
मैं- सिल्ली, लौड़े को लन्ड कहते हैं चल दिखा मुझे।
सिल्ली- मालकिन मेरे पास नहीं है लौड़ा।
मैं- सिल्ली तू न बिल्कुल गधा है, नुन्नू को लन्ड कहते हैं।
सिल्ली- नहीं नहीं, मैं नहीं दिखाऊंगा।
मैं- क्यों नहीं दिखाएगा?
सिल्ली- मुझे शर्म आती है।
मैं- मुझसे क्या शर्म? चल जल्दी से दिखा मुझे तेरा लन्ड… नहीं तो तेरी शिकायत लगा दूँगी कि तू सोता रहता है।
सिल्ली- नहीं, मुझे शर्म आती है।
मैं- तो तेरी शिकायत कर दूँ पापा से?
सिल्ली- नहीं, पिलीज़ ऐसा मत करना मालिक मारते हैं।
मैं- चल फिर दिखा अपना लौड़ा।
सिल्ली- मुझे शर्म आती है मैं आँखे बंद करता हूँ आप मेरा पजामा नीचे करके देख लेना।

मैंने “ठीक है…” कहा और उसे तब तक आँखें न खोलने के लिए कहा जब तक कि मैं ना कह देती।
मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि मैंने उसे बुद्धू बना दिया। सिल्ली आँखें बन्द करके खड़ा हो गया। मैं उसके पास गई घुटनों के बल बैठी और उसका पजामा नीचे खींच लिया मेरे तो होश ही उड़ गए उसका सोया हुआ लन्ड किसी अजगर की लटक रहा था 5-6 इंच लम्बा और मेरी कलाई जितना मोटा!
काफी देर तक मैं उसे देखती रही।

काफी दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, जब भी मौका मिलता मैं उसे उसी जगह पर ले जाती और नंगा कर उसका लन्ड देखती.
फिर मेरी एक सहेली ने मुझे बताया कि लन्ड पकड़ने में और चूसने में बड़ा मजा आता है। तो एक दिन फिर मौका पा कर मैं उसे जंगल में उसी चट्टान पर ले गयी। उसकी आँखें बंद करवाई और झट से उसका पजामा उतार दिया और उसके लन्ड को पकड़ कर हिलाने लगी जल्दी ही नर्म नर्म लन्ड काफी बड़ा और लोहे की रॉड जैसा सख्त हो गया, मुझे उसकी मुठ मारने में बड़ा मजा आ रहा था। वो आँखें बंद किये मज़े ले रहा था और आह ओह्ह जैसी आवाज़ें निकाल रहा था.
मैं खुद भी गर्म होती जा रही थी, मैंने कब अपने कपड़े उतार फैंके, मुझे खुद नहीं पता चला.

पर वो चालू था, उसने आँखें खोल ली और डरने का नाटक करने लगा और पाँव पटक पटक कर कहने लगा कि मैंने उसके नुन्नू को खराब कर दिया है कितना सूज गया है। मैं तो अभी तक यही सोच रही थी बेचारा नादान है इसलिए ऐसा कर रहा है।
“सिल्ली कुछ नहीं होगा, मैं अभी तेरे लन्ड को ठीक करती हूँ, चल आ मेरे पास!” मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा और उसके लन्ड को पकड़ लिया.

कितना मोटा लन्ड था, मेरे हाथ में भी मुश्किल से आ रहा था और लम्बा भी काफी जैसे कि काले रंग की लौकी हो। मैंने अपना पूरा मुँह खोल के बड़ी मुश्किल से लन्ड को मुँह में लिया और लॉलीपॉप की तरह उसे चूसने लगी।
वो फिर शांत हो गया और आँखें बंद करके चूसाई का मजा लेने लगा। उसके बड़े मशरूम जैसे गर्म गर्म टोपे को चूसने में बड़ा मजा आ रहा था. मैं मुँह आगे पीछे कर करके लन्ड चूस रही थी बिल्कुल किसी पोर्न स्टार की तरह!

काफी देर तक कुछ नहीं हुआ पर अचानक उसका लन्ड और अकड़ने लगा और उसने झड़ना शुरू कर दिया, उसके सफेद गाढ़े वीर्य से मेरा मुँह मेरे मम्मे सब लथपथ हो गए।
मैं काफी थक गई थी, वहीं पास में एक चट्टान पर बैठ गयी।
इतने दिनों से वो चुपचाप मज़े ले रहा था, उसने कभी कुछ नहीं कहा था.

पर जैसे मैं चट्टान पर बैठी, वो बोला- मालकिन मैं आपके दूधू पी लूँ?
मैं हैरान रह गयी पर मैं उसकी चाल को न समझ सकी, मुझे लगा ऐसे ही कह रहा होगा. मैंने उससे पूछा- क्यों पीना है तुम्हें मेरा दूध?
वो- आपके दूध कितने सुंदर हैं और मुझे भूख लग रही है।
मैं- चल ठीक है… पर बस एक बार पिलाऊंगी।

वो मेरे पास आ गया, मैं चट्टान पर लेट गयी मुझे आज भी याद है कि कैसे उनसे अपने बड़े-2 काले हाथों से मेरा दायाँ मम्मा पकड़ लिया था, बाएँ निप्पल को मुँह में ले चूसने लगा था. और कैसे मेरा पूरा बदन पुरुष के स्पर्श से काँप रहा था, मुझे अजीब सा मजा आ रहा था, ऐसा मुझे आज तक नहीं लगा था इसलिए मैंने उसे नहीं रोका।

सिल्ली बिल्कुल भी सिल्ली नहीं था, कुत्ता मेरा मम्में चूसते हुए अपने लन्ड की मेरी चूत पर रगड़ रहा था और रगड़ता जा था, मुझे स्वर्ग जैसा मजा आ रहा था. मैंने आँखें बंद कर ली पर मेरी आँखें बंद करने की देर थी कि उसने एक जोरदार झटका दे मारा, मेरा दर्द से बुरा हाल हो गया ऐसा लगा कि कोई डंडा मेरी चूत में घुस गया हो।
मैं रो रही थी, छूटने की कोशिश कर रही थी पर उसने मेरी दोनों बाजुओं को अपने हाथों से चट्टान पर जकड़ रखा था और टाँगे टाँगों में फंसा रखी थी।
“सिल्ली प्लीज़ ऐसा मत कर, मुझे दर्द हो रहा है मर जाऊंगी मैं!” मैंने रोते हुए कहा।

पर वो तो जैसे सुन ही नहीं रहा था, उसने धक्के मारने शुरू कर दिए, मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी पर वो धक्के मारता ही जा रहा था, मारता ही जा रहा था. कोई रास्ता न पा कर मैंने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया और उसके बेरहम घस्सों को सहने लगी. धीरे-2 दर्द के साथ साथ मुझे मजा भी आने लगा। फिर दर्द की जगह सिर्फ मजा रह गया मैं भी अनजाने में ही कमर उठा उठा कर उसका साथ देने लगी।
वो इतने कस कस के धक्के मार रहा था कि फच- फच- फच- पट- पट- पट की आवाज़ गूँज के मेरे कानों तक पहुँच रही थी. मैं बेबस महसूस कर रही थी पर मैंने पहली बार झड़ने का अनुभव किया तो उसके मज़े में बेबसी की भावना भी कहीं लुप्त हो गयी. उस समय मैं चाहती थी कि बस ऐसे ही मेरी चुदाई होती रहे और मैं झड़ती रहूँ!
पर हर चीज़ जो शुरू होती है, उसे खत्म भी होना होता है, सिल्ली भी अपने चरम पर पहुँच गया, उसने मेरे स्तनों को कस के भींच लिया और लम्बे-2 झटके देते हुए झड़ गया।

सिल्ली और मैं काफी देर तक वहीं बैठे रहे. टाइम देखा तो दिन के 2 बज रहे थे, अब मैं कॉलेज तो जा नहीं सकती थी इसलिए मैं और सिल्ली घर वापिस आ गए।

अकीरा उर्फ़ सिमरन- यार तेरे नौकर ने ही तुझे चोद दिया। तुझे बुरा लगा होगा?
शालिनी उर्फ़ दीपिका- पहले लगा… पर उस हरामी ने कुछ ऐसा किया कि मेरी सारी शर्म जाती रही और पक्की लन्ड खोर बन गयी।
सिमरन- उसका लन्ड काफी बड़ा था क्या?
दीपिका- हां… पर तेरे यार जितना नहीं, पर लन्ड था काफी बड़ा।

सिमरन- अच्छा एक बात बता कि क्या सचमुच लन्ड का साइज मैटर करता है?
दीपिका- सच बोलूँ तो करता है। मजा तभी आता है जब चूत का दाना और बच्चे दानी दोनों साथ में झटके खाएं।
सिमरन- सच सच बता कि तुझे विक्रांत का साइज कैसा लगा?

दीपिका- सिमरन अगर वो मर्द सही है तो समझ कि तेरी लाइफ सेट है किसी और लन्ड को खोजने की ज़रूरत नहीं। बल्कि तेरे लिए तो उसका लन्ड ओवर साइज्ड है हर बार चुदाई के बाद तेरी हालत खराब हो जाया करेगी।
सिमरन- तुझे कभी प्यार नहीं हुआ?
दीपिका- अभी तक तो नहीं… जिस मर्द का लौड़ा पसंद आया, वो मर्द पसंद नहीं आया और जो मर्द पसंद आया वो मेरी चूत को पसंद नहीं आया।

शालिनी हसंते हुए यह बात तो कह गयी पर अकीरा उसकी आँखों को देख समझ गयी कि शालिनी की यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। पर अकीरा ने पूछना ठीक नहीं समझा उसने बात बदल दी और दोनों प्लानिंग करने लगी कि आगे क्या करना है।

दोनों को पता था कि आगे और मुश्किलें आएँगी पर दोनों में बेमिसाल हिम्मत थी।

दोस्तो, आगे और चुनौतियाँ इनके सामने पेश होंगी और उनके हल आपको हर बार हिलाने के लिए मजबूर कर देंगे।
हिंदी पोर्न स्टोरी जारी रहेगी.
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