जीजा ने मुझे रंडी बना दिया-2

(Jija Ne Mujhe Randi Bana Diya- Part 2)

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कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि मैंने अपनी मां से अपने बॉयफ्रेंड और मेरी शादी के बारे में बात की थी लेकिन मां ने मना कर दिया. जब मैंने इस बारे में अपने बॉयफ्रेंड आशीष से बात की तो उसकी मां ने मेरी मां को रंडी बता दिया.
अब आगे की कहानी:

आशीष की बात सुन कर मैं बोली- तो तुम ही बताओ. अगर पापा काम करने नहीं जायेंगे तो हमारा घर कैसे चलेगा. उनकी मजबूरी है कि उनको इतनी दूर काम पर जाना पड़ता है. वो कई महीनों के बाद घर पर आते हैं और इसी कारण मेरी मां ने अपने कुछ दोस्तों को मदद के लिए रखा हुआ है. मेरी मां का उनसे केवल दोस्ती का व्यवहार है.

मगर मैं ये भी जानती हूं कि इस दौरान मेरी मां और उनके दोस्तों के बीच में कुछ संबंध शारीरिक भी रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मेरी मां ने हमारे घर को कोठा बना कर रखा हुआ है. अगर वो मेरी मां के संबंध बनाते हैं तो बदले में हमारी मदद भी तो करते हैं. हमारी घर की सारी व्यवस्था को देखते हैं. इसमें क्या बुरा है?

मैंने आशीष को बताते हुए कहा- रही बात मेरी बड़ी दीदी की तो मैंने उनके बारे में सिर्फ सुना है. शादी के पहले हमारी एक रिश्ते की मामी है जिसने मेरी बड़ी दीदी से इस तरह का काम करवाया था लेकिन वो भी पैसे के लिए ही. मगर इसमें दीदी की कोई गलती नहीं थी. यह सब मेरी मामी ने ही करवाया था.

वो बोला- तुम अपने बारे में बताओ. जब तुम मुझसे पहली बार सतना में मिलने के लिए आई थी और तुम्हारी चूत की सील टूटी थी तो उस वक्त वो तुम्हारा पहला सेक्स नहीं था. मुझे पता लग गया था. मुझे तुम इस बात के बारे में सच्चाई बताओ कि मुझसे मिलने के पहले और बाद में तुमने कितने लोगों के साथ सेक्स किया है.

उसने पूछा- तुम मुझे सारा सच बताओ, तुम्हारे कितने लोगों के साथ सेक्स संबंध रहे हैं. तुम्हारे घर आने वाले लोगों ने भी तुमको चोदा है या नहीं? वो तुम्हें सेक्स के लिए अप्रोच करते हैं या नहीं? अगर करते हैं तो कितनों के साथ तुमने किया है. मुझे सारी बात सही सही बताओ. अगर तुम सच बताओगी तो मैं वादा करता हूं कि मैं तुमसे शादी कर लूंगा. किसी हाल में तुम्हें नहीं छोड़ूंगा.

मैंने कहा- आशीष जब तुमने पहली बार मुझे सोनम दीदी की शादी में देखा था तब तक मैंने किसी के साथ सेक्स नहीं किया था. मगर कई बार जब मैं लैट्रिन करने के लिए बाहर जाती थी तो कई दारूबाज लोगों ने मेरे साथ छेड़खानी की थी मगर किसी ने भी अपना लंड मेरी चूत में घुसाने की कोशिश नहीं की थी.

जब मैंने पहली बार तुमको सोनम दीदी की शादी में देखा तो मुझे तुम बहुत अच्छे लगे थे. उसी रात की बात है कि जब मैं खेतों में पेशाब करने के लिए गई थी तो दो लड़कों ने मेरी चूत को अपने हाथ से छेड़ दिया था. उन्होंने मेरी पेशाब लगी चूत में जीभ से भी किया था लेकिन किसी ने मेरी चूत को चोदा नहीं था. बस वो मुझसे लिपटे थे. मेरे कपड़े उतारे थे और मुंह से ही सब कुछ किया था.

मगर उसी वक्त कुछ और लोग भी वहां पर आ गये थे. उनमें से एक दो लोगों ने मुझे पहचान लिया था. उनमें से दो लोग सोनम की चाची के भाई थे. उनके पास मेरी पैंटी रह गई थी. झाड़ियों में मेरी पैंटी उनके हाथ लग गयी थी. फिर उन लोगों ने मुझे मेरी पैंटी वापस करने के बहाने मवेशियों को बांधने की जगह पर बुलाया था.

वहां पर भी उन दोनों ने मेरे कपड़े उतारे थे लेकिन अपना लंड मेरी चूत में नहीं दे पाये थे. उन्होंने मुझे नंगी कर दिया था. हर जगह से मेरे जिस्म को चूमा-चाटा था लेकिन पूरा सेक्स नहीं किया था. बस ऊपर से ही चूम कर मेरे बदन को मसल रहे थे.
आशीष ने पूछा- क्यों, ऐसा कैसे हुआ?

मैं बोली- किस्मत से उसी वक्त मवेशियों को चारा डालने के लिए चरवाहा वहां पर आ गया था. जिसके कारण वो लोग भाग गये और वो मेरे साथ छेड़खानी के अलावा कुछ नहीं कर पाये. उसके चार या पांच दिन के बाद ही मैं तुमसे मिली थी.

तुम तो जानते ही हो कि जब मैं तुमसे मिली थी तो हमारा पहला सेक्स होने ही वाला था लेकिन सोनम ने अपनी मां को बता कर हम दोनों को रंगे हाथ पकड़वा दिया था. वह सब तो तुम्हारे सामने की ही बात है. तुम भी जानते हो कि उस वक्त मेरी कितनी बदनामी हुई थी. उसके बाद सब गड़बड़ हो गया था.

उसके बाद हमारे मिलन में दो महीने का गैप हो गया था. हम दोनों नहीं मिल पाये थे. बीच में मैं अपनी बड़ी बहन के ससुराल में गयी थी. उनके वहां पर कथा हो रही थी. मैं करीब दस दिन तक वहां पर रुकी थी. उसी बीच मेरी दीदी के देवर सुरेंद्र जीजा ने मुझे अपनी बातों में फंसा लिया था.

चाहे मैं शौच करने जाऊं या पेशाब करने, चाहे नहाने जाऊं या सोने, सुरेंद्र जीजा मेरे पीछे पड़े रहते थे. वो मेरे साथ जीजा साली वाले सेक्सी मजाक करते रहते थे. फिर वो मुझे कपड़े दिलवाने के बहाने मेरी मां से पूछ कर मुझे सतना ले गये. वहां पर किराये का रूम लेकर उन्होंने मेरे साथ छेड़खानी करके मुझे गर्म कर दिया.

जब सुरेंद्र जीजा मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी कर रहे थे तभी वहां का मकान मालिक आ गया. उसने हम दोनों को देख लिया. फिर मकान मालिक ने भी ये बोला कि जैसा मैं कहता हूं वैसा करो. फिर मैं सुरेंद्र जीजा और मकान मालिक के साथ चली गई. वहां पर उन दोनों ने मिल कर मुझे ऐसा गर्म किया कि मैं खुद ही अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार हो गई.

तब वहां पर मैंने अपने जीवन का पहला सेक्स किया. वहां पर मेरी पहली बार चुदाई हुई. उन दोनों ने मिल कर मेरी कुंवारी चूत की सील तोड़ चुदाई की. उन दिनों मैंने तुमको फोन करके बुलाया भी था लेकिन कुछ बताया नहीं. मैं तुमसे प्यार करती थी इसलिए मैंने तुमसे वो चुदाई वाली बात छिपा ली.

उसके करीब 20 दिन के बाद तुम सतना में अपनी बुआ के घर सिद्धार्थनगर बढैया में मुझे ले गये. वो हमारा पहला सुहागदिन था. तुमने मुझे उस सुहागदिन में बहुत चोदा और मैंने भी अपनी चूत जमकर चुदवाई थी. मगर उसके पहले मैं चित्रकूट गई थी. घूमने का बहाना था लेकिन मैं तुमसे मिलने के लिए गई थी.

वहां पर एक होटल में रात को जब मैं अपने जीजा के साथ रुकी हुई थी तो रात में तुमसे फोन पर सेक्सी बातें कर रही थी. उस रात को जीजा ने मेरा और तुम्हारा फोन सेक्स सुन लिया था. उनका लंड भी हमारी सेक्सी चैट को सुन कर खड़ा हो गया था. उनसे कंट्रोल नहीं हुआ और उन्होंने मुझे वहीं पर चोदना शुरू कर दिया. मैं तुमसे फोन पर बात करती रही और वो मुझे चोदते रहे.

वहां पर मैंने जीजा से अपनी चूत चुदवाई थी. वैसे तो लॉज हमें बाप-बेटी के रूप में मिला था और मेरे जीजा हैं भी मेरे से उम्र में 20 साल बड़े, लेकिन उन्होंने मेरी चूत चोद दी. फिर चुदाई के बाद लॉज के मैनेजर ने मुझे वहीं बेड पर नंगी देख लिया. उसने भी मुझे चोदने की बात की क्योंकि हमने मैनेजर को बाप-बेटी का रिश्ता बताया था.

लॉज के मैनेजर ने भी मुझे बहुत चोदा. वहां पर ऐसी सिचुएशन हो गई कि उसके साथ ही वहां के नौकर ने भी अपना लंड मेरे मुंह में दे दिया था. उसका लंड भी मुझे चूसना पड़ा नहीं तो मैनेजर हमें रूम से बाहर कर देता. इसलिए मैंने वो सब किया. बस मेरे साथ इतना ही हुआ है आज तक.

अब तुम मुझे रंडी समझो या वेश्या समझो … वो तुम देख लो! लेकिन जो भी सच था वो मैंने तुमको बता दिया है. अब तुम्हें ही देखना है कि क्या करना है.

हां ये बात भी सच है कि मेरे पापा ने एक दो बार मेरी मां को किसी और के साथ रंगे हाथ पकड़ा था. उसके बाद हमारे घर में बहुत लड़ाई हुई थी. मेरी मां ने कीटनाशक दवाई भी पीने की कोशिश की और पापा उस दिन बहुत चिल्ला रहे थे तो सारे मौहल्ले को पता लग गया था कि मेरी मां के पास बाहर के मर्द भी आते हैं. उसके बाद सबको पता लग गया था कि हमारे घर में जो भी मर्द आते हैं वो सेक्स के लिए ही आते हैं.

मेरी बड़ी दीदी भी शायद कुछ वैसी ही रही इसलिए लोग मुझे भी वैसी ही मानने लगे हैं। मेरे बारे में भी वैसा ही सोचते हैं, जैसे मेरी मां और बहन के बारे में सोचते हैं. यही मेरी सच्चाई है जो मैंने तुम्हें साफ-साफ बता दी। मगर मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार करती हूं. मैंने कभी किसी और से प्यार नहीं किया है आशीष. तुमको ही चाहती हूं.

यह बात बात बताने के बाद आशीष मुझसे कई दिन तक नॉर्मल बातें करता रहा.

फिर एक दिन मेरे बड़े पापा की छोटी बेटी के पति जो रिश्ते में मेरे जीजा लगते हैं वो आये हुए थे. मैं टीवी देख रही थी. तभी आशीष का फोन आ रहा था. मगर जीजा ने मेरा फोन उठा लिया. उस वक्त टीवी में कुछ अजीब सी आवाजें आ रही थीं. जैसे सेक्स में आह्ह आह्ह की आवाज होती है वैसी ही आवाज थी वो. आशीष ने वो आवाज सुन ली. मगर वो कुछ बोला नहीं.

आशीष ने सोचा कि मेरे जीजा मुझे चोद रहे हैं. उन्होंने मेरी चूत में लंड डाला हुआ है और मैं उनसे भी अपनी चूत को चुदवाने में लगी हुई हूं. उस वक्त टीवी की आवाज ही ऐसी हो रही थी. मुझे तो पता भी नहीं चला कि ये सब कब और कैसे हो गया. फोन अभी भी चालू था क्योंकि मेरे जीजा ने फोन नहीं काटा था. आशीष आधे घंटे तक वो सारी आवाजें सुनता रहा.

फिर जब मैंने आशीष को फोन किया तो उसने मुझे बहुत डांटा और मुझे गाली देने लगा. वो पूछने लगा कि तुम्हारे घर में कौन है अभी तो मैंने बता दिया कि मेरे जीजा हैं. वो समझा कि मैं अपने जीजा से चुदवा रही हूं. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था. मैंने उसको हर तरह से यकीन दिलाने की कोशिश की लेकिन उसने मेरी बात का यकीन नहीं किया. उसने कहा कि आज के बाद वो कभी मेरे पास फोन नहीं करेगा. उसने मेरे साथ रिश्ता खत्म करने की बात कही.

मैं तीन तक आशीष को फोन करती रही लेकिन उसने मेरा फोन नहीं उठाया. मैं बहुत परेशान रहने लगी थी. मेरा मन उससे बात करने के लिए करता था लेकिन वो मुझे गलत समझ रहा था. उसके बाद मैंने एक सुबह 4 बजे के करीब फोन किया तो उसने मेरा फोन उठा लिया. मैं उससे रोते हुए कहने लगी कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं.

मेरे मन में बहुत ग्लानि हो रही थी. मैंने उसको बोलने का मौका भी नहीं दिया और सारी बात उससे अपनी तरफ से ही कहने लगी. उसको समझाया कि उस दिन मेरे बड़े पापा के दामाद रूम में बैठे हुए थे लेकिन उसने मेरे साथ कुछ भी गलत नहीं किया. वो बस बेड पर लेट कर टीवी देख रहे थे और उन्होंने मेरी चूत को छुआ तक नहीं. हमारे बीच में सेक्स जैसा कुछ भी नहीं हुआ.

जब मेरी सारी बात खत्म हो गई तो वहां से आवाज आई कि मैं आशीष नहीं उसके चाचा का लड़का विजय हूं. मैं हैरान रह गई. मैंने सारी बात विजय को बता दी थी ये सोच कर कि आशीष को बता रही हूं. उसके बाद मुझे ध्यान आया कि आशीष ने कई बार विजय के बारे में बताया था. वो उसके साथ ही रहता था और वहीं पर दोनों साथ में जॉब करते थे.

विजय कहने लगा कि भाभी मुझे आपके और आशीष के बारे में सब कुछ पता है. आप मुझ पर भरोसा कर सकती हो.
वो बार-बार मुझे भाभी कह कर बुला रहा था तो मैंने उस पर विश्वास कर लिया. मुझे अच्छा लग रहा था कि वो मुझे समझने की कोशिश कर रहा है.

उसके बाद मेरी विजय से रोज ही बात होने लगी. हम लोग फोन पर दो दो घंटे तक बातें करते रहते थे. मैं दुखी थी और विजय से बात करके मेरा मन हल्का हो जाता था.

ऐसे ही मैं विजय से खुलने लगी. सारी बात उसको बताने लगी. वो भी मेरी सारी बात सुनता था और मुझे समझाता था और कहता था कि वो आशीष और मेरे बीच में जो गलत फहमी हो गई है वो भी दूर कर देगा. उसके बाद उसने मुझसे पूछा कि आशीष के साथ मेरा पहला सेक्स कब हुआ था.

मैंने विजय को सारी बता दी कि कैसे आशीष और मैं बिना कपड़ों के पहली बार पकड़े गये और फिर कैसे आशीष ने सतना में पहली बार मेरी चूत की चुदाई की थी. मैंने हर एक बात विजय को बतानी शुरू कर दी. वो भी मेरी बात ध्यान से सुन रहा था. उसको बता कर मैं भी मन हल्का फील करती थी. इसलिए मुझे उस पर विश्वास हो गया था. मैंने अपने सारे राज उसको बताना शुरू कर दिये.

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
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