जवान लड़की की कहानी: जयपुर की रूपा की अन्तर्वासना-5

(Jawan Ladki Ki Kahani : Jaipur Ki Rupa Ki Antarvasna- Part 5)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अभी तक आपने पढ़ा कि रूपा अपनी सहेली के घर जाने के लिए निकली थी. लेकिन बस में मिले एक युवक से उसका ऐसा जोड़ मिला कि वो अपनी जोरदार चुदाई करवा बैठी.
आगे की कहानी में जवान लड़की की चुदाई का मजा लीजिये.

उस रात पप्पू से चुदवाने के बाद रूपा सहेली के घर जाने की बजाय वापस अपने घर गई. उन फटे और गंदे कपड़ों में सहेली के घर जाती तो सहेली को पक्का शक हो जाता. फटे ब्लाउज़ में बिना ब्रा के सीने को गंदी साड़ी में लपेट कर, साड़ी बिना पेटीकोट के, पैंटी पर बाँध कर वो घर आई.

पप्पू रूपा को घर तक छोड़ने गया था. रूपा की बेटी सो रही थी, इसलिए उसे घर में आने में कुछ तकलीफ नहीं हुई.

फिर 6-7 दिन के बाद वो पप्पू से मिलने उसके घर गई. चुदाई के बाद जब वो पप्पू की बांहों में पड़ी थी तो पप्पू ने उसकी बेटियों के बारे में पूछा.

मुस्कुराते हुए रूपा बोली- तू मेरी बेटियों के बारे में जानने के लिए बेताब है… यह मैं जानती हूँ पप्पू… तो सुन, मेरी एक बेटी हॉस्टल में पढ़ती है और दूसरी घर में रहती है. श्वेता इंजीनियरिंग में है और नीता बी. काम. कर रही है. मैंने तुझसे वादा किया था तो अब निभाने का समय आया है. बोल तू चुदाई का खेल मेरी नीता के साथ कैसे करना चाहता है?

पप्पू ने प्लान पहले ही सोच कर रखा था, रूपा के मम्मों से खेलते हुए वो बोला- चल कोई बात नहीं, सिर्फ़ नीता भी मिली तो कोई गम नहीं, मौका मिला तो श्वेता को भी चोदूँगा. सुन रूपा तू एक काम कर, अपने घर में मुझे तू अपने मायके का फैमली फ्रेंड बना कर रख. फिर 2-3 दिन में घर के लोगों का टाइमिंग ऑबज़र्व कर के प्लान बनाऊँगा.

रूपा ने पप्पू की यह बात मानी और कुछ ही दिनों में पप्पू को अपने घर में मुँह बोला भाई बना के ले आई.

रूपा के पति और बेटी ने रूपा की बात मान कर पप्पू का स्वागत किया. नीता को देख के ही पप्पू का लंड उठने लगा. वो बीस साल की जवान लड़की एकदम उसकी माँ का रूप थी. वहीं रंग, वहीं चेहरा, वहीं आँखें, वैसा ही गठीला जिस्म, बत्तीस के कड़क मम्मे, पतली कमर और गोल गांड. सलवार कमीज़ और ऊंची हील की सैंडल में नीता का वो रूप देख कर पप्पू उसे देखता ही रह गया.

पप्पू ने नोटिस किया कि नीता उसको अजीब नज़र से देख रही थी. उस नज़र से पप्पू समझ गया कि नीता को अपनी जवानी का एहसास है और वो भी मर्द का साथ चाहती है.

इन दिनों में पप्पू ने देखा कि नीता उसे कई बार ध्यान से देखती थी. वो जब वक्त मिले तब पप्पू से बात करने बैठ जाती. पप्पू भी यही चाहता था और वो भी दिल खोल कर नीता से बातें करता था. बात करते वक्त वो नीता का पूरा जिस्म निहारता और नीता भी बिना कोई डर या शर्म के उसके सामने बैठ कर बात करती थी.

प्लान के मुताबिक पप्पू ने घर के लोगों का टाइमिंग ऑबज़र्व किया. रूपा का पति सुबह जा कर रात में ही आता था और नीता का दोपहर का कालेज होता था इसलिए वो सुबह घर में ही रहती थी. यह सब देख कर पप्पू ने प्लान बनाया और रूपा को बताया. पप्पू का प्लान सुन कर रूपा खुश हुई और प्लान के मुताबिक चलने का वादा किया.

उन 5-6 दिनों में पप्पू रोज़ दोपहर को रूपा को चोदता था. नीता के कालेज जाने के बाद शाम तक यह मस्ती चलती रहती थी. हालांकि पप्पू खुद शराब नहीं पीता था पर उसने रूपा को शराब पीने की आदत डाल दी. शराब पी कर रूपा नशे में और भी मादकता से चुदवाती थी.

दूसरे ही दिन सुबह पति के काम पर जाने के बाद जब नीता नहाने गई तो रूपा और पप्पू एक दूसरे की बांहों में आ गए. लुंगी के ऊपर से पप्पू का लंड पकड़ कर रूपा ने कहा- पप्पू, आज तुझे मैं अपनी नीता दे रही हूँ. मुझे पता है कि मेरी बेटी गर्म है. मुझे कई बार उसके बिस्तर के नीचे खीरा ककड़ी मिली है. बाथरूम में अभी चूत में उंगली कर रही होगी. तू उसे अब खूब चोद और उसे भी जवानी का मज़ा दे!
रूपा को नीचे बिठा कर अपना लंड उसके होंठों पे रख कर पप्पू बोला- तू अब उसकी चिंता मत कर मेरी रंडी, उसे तो खूब मस्ती से चोदूँगा मैं. मुझे पता है तेरी बेटी है तो वो गर्म चूत तो होगी ही!

बाथरूम के दरवाजे के बाहर नीचे बैठ कर रूपा पप्पू का लंड चूसने लगी और पप्पू की होल से बाथरूम में नीता को देखने लगा. नीता को नहाते देखने के ख्याल से और रूपा द्वारा लंड चूसने से वो यह सोच कर गर्म हुआ कि है तो साली बीस साल की, पर जिस्म एक भरी हुई औरत जैसा है.

पप्पू ने यह भी सोचा कि यह भी उसकी माँ जैसी ही गर्म और नमकीन होगी बिस्तर में.
की होल से पप्पू ने देखा कि कपड़े निकाल कर नीता अपना नंगा जिस्म आईने में देखती हुई सहला रही है. घूम कर अपनी गांड, सीना और चूत को देख कर नीता उनको सहलाने लगी.

पप्पू का लंड नंगी नीता को देख कर और गर्म हो गया जिसे रूपा मस्ती से चूस रही थी. कितनी हरामी औरत थी यह रूपा जो अपने यार को अपनी नंगी बेटी का जिस्म दिखा कर उसका लंड चूस रही थी.

अब पप्पू ने देखा कि नीता अपने मम्मे मसलते हुए साबुन से अपनी चूत को भी सहलाने लगी. ऐसा करते वक्त वो अपनी आँखें बंद कर रही थी और अपने होंठों को अपने दाँतों से दबाती थी. नीता बार बार अपनी चूत में उंगली भी कर रही थी, उसकी गुलाबी, बिना झाँटों वाली चूत गीली थी. उंगली से वो दाना दबा कर सिसकरियाँ भरती और दूसरे हाथ से मम्मे मसलती हुई आँखें बंद करके मस्ती कर रही थी.

यह सब देख कर पप्पू ने रूपा के मम्मे मसलते हुए उसका मुँह चोदना शुरू किया. उसने सोचा कि यह साली अपनी माँ पर गई है, गर्म माल है, कांटे पर आई है, थोड़ा और गर्म करो, इसकी शर्म हटाओ तो चुदवाने को तैयार होगी.
वैसे भी प्लान के मुताबिक घर में सिर्फ़ हम दो हैं और उसकी रूम लॉक है जिससे उसे सिर्फ़ टावल में ही बाहर आना है.

इसके 10-15 मिनट उस कमसिन जवानी का नंगा नज़ारा देख कर पप्पू का लौड़ा एकदम गर्म हो गया. अब उसने रूपा को उठाया और जाने के लिए बोला. रूपा नीता का रूम लॉक करके कहीं बाहर चली गई. नीता का रूम बाथरूम के पास ही था, इसलिए वो नहाने जाते वक्त अपने बाकी सब कपड़े बिस्तर पर निकाल कर रख कर सिर्फ़ टावल में नहाने गई थी.

जैसे ही नीता का स्नान पूरा हुआ और उसने अपने सेक्सी जिस्म पर टावल लपेट लिया तो पप्पू आ कर सोफ़े पर बैठ गया.

नीता जब बाथरूम से टावल लपेट कर बाहर आई तो पप्पू को देख कर शर्मा गई पर फिर हल्की मुस्कुराहट दे कर अपने कमरे के पास गई. कमरे का दरवाजा लॉक देख कर वो हॉल क्रास करके अपनी माँ के बेडरूम की तरफ़ गई.

जब वो पप्पू के सामने से गुजरी तब पप्पू उसका गीला जिस्म बड़े ध्यान से देखते हुए आँखों में भरने लगा.
माँ को बेडरूम में ना पा कर नीता वहीं से चिल्लाई- माँ… ओ… मम्मा मेरे कपड़े तो देना. कहाँ हो तुम मम्मी?
आँखों के कोने से पप्पू नीता को देखने लगा. गीले गोरे जिस्म पर लाल टावल लिपटा था, बाल और जिस्म भीगे हुए थे, गोरी टाँगें घुटनों के थोड़े ऊपर तक नंगी नज़र आई उसे.

पूरा हुस्न देख कर पप्पू बोला- क्या हुआ नीता? तुम क्यों इतनी ज़ोर से चिल्ला कर अपनी माँ को बुला रही हो?
पप्पू को अपना भीगा जिस्म देखते देख कर नीता ज़रा शरमा कर कमरे में जा कर बोली- अंकल मम्मी कहाँ है? उसको कहो ना मेरे रूम में आएं.
पप्पू बोला- अरे रूपा तो कुछ काम से बाहर गई है, वो बोली थी कि एक घंटे में आऊँगी, तुम को क्या काम है बोलो?
यह सुन कर नीता धीरे से बोली- ओफ्फ ओह उसको भी इसी समय जाना था? अब मेरे कपड़े? क्या करूँ मैं? क्या पूरा घंटा सिर्फ़ यह टावल लपेटे रहूँ?

पप्पू अब उसके रूम में आ कर नीता को पूरी तरह देखते हुए बोला- क्या हुआ तेरे कपड़ों को बेटी? क्यों परेशान है तू?
पप्पू को अचानक रूम में देख कर नीता पर्दे को अपने आप पर लपेट कर बोली- ओहह अंकल आप क्यों आए यहाँ? अंकल मॉम ने आपको मेरी वार्डरोब की चाबियाँ दी हैं?

नीता की अदा पर मुस्कुराते हुए पप्पू बोला- अरे क्या हुआ? अब तेरी माँ मुझे चाबियाँ क्यों देगी? आखिर हुआ क्या है जो इतनी परेशान हो गई है तू बेटी?
“देखो ना अंकल… उनसे बोला भी था कि वार्डरोब में से कपड़े निकाल कर जाओ. उन्होंने कपड़े भी नहीं रखे और चाबियाँ भी नहीं हैं. अब क्या मैं ऐसे बैठूँ उनके आने तक?”

पप्पू ने नीता के माथे पर पसीना देखा. पप्पू रूपा के बिस्तर पे बैठ कर वहाँ पड़ी मैगज़ीन देखते हुए बोला- अरे हाँ यह तो सही है बेटी, पर अब किया भी क्या जा सकता है? अब तेरी माँ आने तक तुझे ऐसे ही बैठना पड़ेगा.

नीता सोच में डूब गई और उसके हाथ से पर्दा छूट गया. पप्पू अब एकदम पास से टावल में लिपटी नीता को देखने लगा. टावल काफी छोटा था, बड़ी मुश्किल से नीता की जाँघों से शुरू हो कर उसके मम्मों के ऊपर तक आया था.
नीता का कमसिन गीला जिस्म, टावल के ऊपर से झाँक रहे मम्मे, उसकी गोरी टाँगें, उसका रूप देख कर पप्पू का लंड लुंगी में उछलने लगा.

नीता के सीने पे नज़र गड़ा कर वो बोला- बोल बेटी, मैं कैसे मदद करूँ तेरी? वार्डरोब तोड़ डालूँ क्या तेरे लिए बेटी?

नीता को पप्पू की बात और नज़र से ख्याल आया कि वो टावल में पप्पू के सामने खड़ी है, पर अब वो बिना झिझक उसी हाल में रूम में घूमते हुए सोचने लगी. कमरे में घूमते वक्त उसकी नज़र पप्पू के तने हुए लौड़े पर पड़ी. वो पप्पू के लंड की तरफ़ देख कर बोली- नहीं… नहीं वार्डरोब ना तोड़ो अंकल… लेकिन कुछ सोचो ना अंकल.

नीता की नज़र अपने लंड पर देख कर अंजान बन कर पप्पू अपने पैर थोड़े और खोलते हुए बोला- एक काम कर सकते हैं बेटी अगर तू हाँ बोले तो. चाहे तो मेरी शॉर्ट्स और बनियान पहन सकती है तू बेटी.
पप्पू को अजीब नज़रों से देखते हुए नीता बोली- क्या.. मैं आपकी शॉर्ट्स और बनियान पहनूँ?
नीता के पास जा कर पप्पू बोला- हाँ, क्यों? कोई प्राब्लम है तुझे? या तुझे इस टावल में ही रहना है नीता?
नीता ज़रा सोच कर बोली- पर अंकल… वो मैं… ठीक है दे दो अपनी शॉर्ट्स और बनियान मुझे.

नीता का हाथ पकड़ कर अपने रूम में ले जा कर पप्पू ने उसे एकदम छोटा बनियान और छोटी सी शॉर्ट्स दी.

नीता शॉर्ट्स और बनियान देख कर दंग हो गई. शॉर्ट्स पे जगह-जगह दाग लगे थे और बनियान भी बड़ी छोटी साइज़ का था.

दोनों कपड़े देख कर नीता बोली- यह कपड़े अंकल? यह शॉर्ट्स तो बिकिनी से भी छोटी है, बनियान कितना छोटा और टाइट है अंकल.
पप्पू नीता के हाथ से कपड़े ले कर बिस्तर पर फ़ैलाते हुए बोला- बेटी अब हमारे पास कोई और चारा भी तो नहीं है, देख कम से कम इससे तेरे बदन पे कपड़े तो होंगे ना? भले ये कपड़े छोटे हैं पर तेरी इस टावल से अच्छे हैं, चल वो शॉर्ट्स और बनियान पहन ले जल्दी.
ये कपड़े पप्पू के नहीं थे, वो ये कपड़े सिर्फ इसी मौके के लिए लेकर आया था.

और कोई रास्ता नहीं था तो नीता कपड़े उठाने के लिए झुकी. जैसे ही वो झुकी, उसका टावल खुल गया. नीता ने झट से टावल से वापस अपना जिस्म ढक लिया पर तब तक उसने पप्पू को अपने नंगे जिस्म का पूरा नज़ारा दिखा दिया था.
वो टावल बाँध कर, कपड़े उठा कर ज़रा शर्माते हुए बोली- उफ्फ, इस टावल को भी अभी गिरना था क्या? पर अब ठीक है… क्या करें? ये कपड़े तो पहनने ही पड़ेंगे… नहीं तो टावल बार-बार खुलेगा. लेकिन अंकल यह दाग धब्बे कैसे हैं इस शॉर्ट्स पर?

नीता के पूरे नंगे जिस्म की झलक देख कर पप्पू का लंड और तन गया. होंठों पे जीभ घुमा कर मुस्कुराते हुए वो नीता के पास आ कर टावल की गाँठ पक्की करते हुए बोला- वो दाग काहे के हैं… बाद में बताऊँगा तुझे बेटी, पर एक बात अभी सुन, तू बिना कपड़ों के बड़ी मस्त दिखती है बेटी, दिल करता है तेरा टावल बार-बार निकल जाए.

पप्पू की बात से नीता एकदम फीकी पड़ गई और शरमा कर अपने रूम में कपड़े लेकर दौड़ गई. दरवाज़ा बंद करके बिना लॉक किये वो टावल निकाल कर पप्पू के दिये हुए कपड़े पहनने लगी. सिर्फ़ दो कपड़ों में वो खुद को आईने में देख कर शर्माते हुए फिर बाहर आई.

नीता को उन कपड़ों में देख कर पप्पू खुश हुआ. शॉर्ट्स से सिर्फ उसकी गांड ढकी थी, गोरी टाँगें साफ़ झलक रही थीं, बनियान नाभि तक आया था और टाइट होने से मम्मे उभरे हुए दिख रहे थे और नीता के कड़क निप्पल भी पप्पू को साफ़ दिख रहे थे.

गोल घूम कर नीता का उन तंग कपड़ों में ढका जिस्म देख कर वो बोला- वाह बेटी, क्या अच्छी दिखती हो इन कपड़ों में तुम. कसम से… इतनी मस्त लड़की आज तक देखी नहीं मैंने बेटी.
नीता बार-बार बनियान नीचे खींचती हुई अपनी नाभि को ढकने की कोशिश कर रही थी. सोफ़े पे बैठ कर वो बोली- क्या अंकल आप भी ना? कैसी बात करते हो? मुझे शरम आ रही है आपकी बातों से.

नीता के सामने बैठ कर उसका कमसिन जिस्म निहारते हुए पप्पू बोला- नीता अगर तुझे लड़कों ने इस ड्रेस में देखा तो टूट पड़ेंगे तुझ पर, तेरी जैसी मस्त लड़की उन्होंने कभी देखी नहीं होगी और ना देखेंगे. मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ बेटी, ऐसी कमसिन लड़की को इतने तंग कपड़ों में लड़के देखेंगे तो ना जाने तेरे बदन के साथ क्या करेंगे.

अब और भी शर्माते हुए नीता ने अपनी नाभि छुपाने के लिए बनियान नीचे खींची. पर इससे पप्पू को उसका आधे से ज्यादा क्लीवेज दिखने लगा.
दुविधा में फंसी नीता बोली- हुम्म जाने दो ना अंकल… आज सुबह से आपको कोई मिला नहीं? ऐसे कपड़े पहन कर क्या कोई लड़की बाहर जायेगी? यह तो आज माँ बाहर गई है… इसलिए मैंने घर में यह कपड़े पहने हैं.. नहीं तो मैं ये कपड़े कभी नहीं पहनूँगी.

पप्पू अपनी टाँगें फ़ैला कर अंजान बनते हुए लंड को मसलता हुआ नीता का क्लीवेज देख कर बोला- अरे नीता, तेरी जैसी सैक्सी लड़की कसम से आज तक ना दिखी ना मिली. तेरी बात सच है कि तू ऐसे कपड़े पहन कर बाहर नहीं जायेगी, पर घर में जो मर्द हैं वो तेरा यह कमसिन जिस्म इन कपड़ों में देख कर अपने पर काबू कैसे रख पाएंगे नीता बेटी?

नीता ने शरमा कर बनियान अपने सीने पे खींचा, जिससे उसकी नाभि नंगी हो गई. असल में नीता को मर्द का साथ चाहिये था. जब से उस पर जवानी आई और जबसे मर्द उसको अजीब नज़रों से देखने लगे थे, तबसे वो मर्दों से अपनी तारीफ सुनने को लालियत हो गई थी.

जब कोई लड़का उस पर फिकरा कसता या भीड़ में कोई उसका बदन छूता तो उसे अच्छा लगता था. वो चुदाई के बारे में सब जानती थी. जब तक श्वेता यहाँ थी, वो दोनों बहनें अक्सर चुदाई की बातें करती थीं, पर जबसे श्वेता हॉस्टल गई तब से वो अकेली पड़ गई थी.

अब जब से पप्पू घर में आया था, उसकी नज़रों से नीता समझ गई थी कि यह मर्द उसे चाहता है. वो भी पप्पू पर पहली नज़र में फ़िदा हो गई थी. इसलिए वो पप्पू से खूब बातें करती और आज भी बिंदास हो कर वो सिर्फ़ शॉर्ट्स और उस छोटी सी बनियान में उसके सामने बैठी थी.
आज पप्पू अगर कुछ करना चाहे तो नीता ने फ़ैसला किया था कि वो झूठा नाटक करेगी पर उसे सब करने देगी. आज उसकी माँ भी घर में नहीं थी तो उसे कोई डर भी नहीं था. अपनी नंगी टाँगें सहलाती हुई नीता बोली- क्या आप भी ना अंकल? अब जाने दो मेरी बात, आपने इन धब्बों की वजह नहीं बताई, कैसे लगे यह धब्बे यहाँ अंकल?

यह पूछते हुए नीता ने अपनी टाँगें खोल कर उंगली अपनी चूत के ऊपर शॉर्ट्स पे लगे धब्बे पे रखी.

पप्पू आ कर नीता के पास बैठ गया. नीता के जवाब और हरकत से वो समझ गया कि नीता शर्माने वाली लड़की नहीं है. वो जवानी में कदम रखती हुई ऐसी लड़की है जो मर्द का साथ चाहती थी.

नीता के कंधे पर हाथ रख कर नज़र उसकी चूत और मम्मों पर बारी बारी घुमाते हुए पप्पू बोला- अरे इतनी क्या जल्दी है बेटा, सब होने के बाद बता दूँगा. मेरी बात का जवाब दे बेटी, तुझे ऐसे देख कर घर का यह मर्द अपने आप पे काबू कैसे रख सकता है? ऐसा कसा हुआ गोरा जिस्म इतने कम कपड़ों में देख कर मेरी तो हालत मस्त हो रही है बेटी.
पप्पू के स्पर्श से नीता सिहर गई. उसे मर्द का स्पर्श तो अच्छा लगा पर शर्माते हुए वो बोली- क्या अंकल आप भी? मैं तो आपकी बच्ची जैसी हूँ और आप यह कैसी बात कर रहे हैं मुझसे? यह सब बातें जाने दो, चलो हम टीवी देखते हैं.

नीता ने रिमोट ले कर टीवी ऑन किया. रिमोट लेने के बहाने नीता और पप्पू में लड़ाई शुरू हुई. नीता ने घूम कर रिमोट छुपाया और पप्पू पीछे से उसे दबोचते हुए रिमोट लेने की कोशिश करने लगा. नीता ने भी रिमोट नहीं छोड़ा तो पप्पू रिमोट लेने के बहाने नीता का जिस्म अपनी बांहों में ले कर दबाने लगा. इससे नीता की गांड पर उसका लंड रगड़ रहा था.

इस खींचा तानी में उसने नीता के सीने पर भी हाथ फिराया.

जवान लड़की की चुदाई की मेरी सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है, मुझे कमेन्ट भेजिए.
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कहानी जारी है.

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