नर्क से स्वर्ग

इस सच्ची घटना के द्वारा मैं सबको यही बताना चाहती हूँ कि अगर पति-पत्नी थोड़ी समझदारी से काम लें तो एक नर्क भरी जिंदगी भी स्वर्ग बन जाती है।

डॉक्टर अनुराधा शर्मा

प्यारे दोस्तो, मैं अनुराधा चण्डीगढ़ से हूँ। मैं एक सरकारी अस्पताल में लेडी स्पेशलिस्ट डिपार्टमेंट में हूँ। मैं आपको अपनी दो सहेलियों की सच्ची घटना लिखने जा रही हूँ, जिन्होने मुझे लिखने के लिए इस वेबसाइट के बारे में बताया।

इससे पहले मैंने यह साइट कभी नहीं पढ़ी थी और जब पढ़ी तो पता चला कि ये कहानियाँ अच्छी और मजेदार होती हैं, कुछ सच होती है और कुछ अपने पास से बनाई जाती है, परन्तु एक बात यह भी है कि इन कहानियों के द्वारा हम अपना संदेश भी दे सकते हैं।

इन्हें पढ़ कर मुझे लगा कि मैं इस अन्तर्वासना साइट के द्वारा अपना संदेश उन बहनों तक पहुँचा सकती हूँ जिनका जीवन सिर्फ़ की माँ ना बन पाने के कारण नरक बन जाता है। और अगर वो थोड़ा सा दिमाग़ से काम लें तो उनका जीवन नर्क से स्वर्ग बन जाता है।

मैं प्रार्थना करती हूँ कि मुझसे लड़के बात ना करें और ना ही मेरे बारे में कुछ पूछें। मैं एक बात साफ कर दूँ की माँ बनना सिर्फ़ स्त्री के हाथ में नहीं होता, इसके लिए मर्द का साथ होना भी बहुत जरूरी है।

नेहा और हरमन मेरी बहुत अच्छी सहेलियाँ हैं, वो पंजाब के एक छोटे से गाँव से हैं, वो दिखने में बहुत सुन्दर हैं, और मध्यम परिवार से हैं। नेहा की शादी चण्डीगढ़ के एक बहुत अमीर परिवार में हुई। शादी के पहली रात को ही उसको पता चल गया था कि उसका पति बाहर से तो ठीकठाक है पर अंदर से कमजोर है।

वो शादी के पहले कुछ महीने तो ठीकठाक रहा, पर बाद में उसे बच्चे के ताने मारने लगे, उसे बात बात पर कोसने लगे। वो बहुत ही परेशान हो गई थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे !उसका पति उसके सामने आने से कतराता था और रात को उसे सबके सामने सच्चाई बताने से मना करता था।

एक दिन की बात है, नेहा रसोई में कुछ बना रही थी कि उसके घर से फोन आया, उसके पिता जी ने उसे बताया कि उसके गाँव में उसकी पुरानी सहेली हरमन अपना चेकअप करवाने के लिए चण्डीगढ़ आ रही है और वो 2-3 दिन तुम्हारे पास रुकना चाहती है ताकि वो अपना चेकअप ठीक से करवा सके, अगर तुम्हें और तुम्हारे परिवार को कोई आपति ना हो तो !

नेहा ने अपने पति से बात करके बताने को बोला, उसने अपनी सासू माँ और पति से बात की। पहले तो वो मना कर रहे थे, पर फिर लड़की और उसकी बचपन की सहेली जान कर मान गये।

अगले दिन उसके पिता जी का फोन आया तो उसने नेहा ने हाँ बोल दी। उसके पिता जी ने बताया कि हरमन इतवार की शाम को तुम्हारे घर आ जाएँगे।

नेहा बहुत खुश थी कि उसके गाँव से कोई आ रहा है, और हरमन तो उसकी बचपन की सहेली थी। समय के अनुसार हरमन चण्डीगढ़ बस-स्टैंड पर पहुँच गई और नेहा उसे लेने पहले ही आ चुकी थी।

हरमन नेहा को देख कर बहुत खुश थी, उन्होंने मार्केट से खाने पीने का सामान लिया और घर की तरफ चल दिए। घर में सबने उसका स्वागत किया और नेहा तो उसकी सेवा में लग गई। सारी शाम गाँव और घर वालों का हालचाल पूछने में निकल गई।

रात के 12 बजने वाले थे, हरमन नेहा से बोली- क्या बात है, तुम्हें सोना नहीं अपने पति के पास?

वो आँख मारती हुई बोली।

फिर नेहा रोने लगी और उसे अपनी बात बताने लगी कि उसका पति नामर्द है और उसके कारण उसे बहुत बातें सुननी पड़ती हैं।

हरमन समझ गई और उससे बोली- तुम चिंता ना करो, मेरे पास इसका इलाज़ है, बस तुम मेरे साथ चलना, मैं तुम्हारी समस्या दूर कर दूँगी।

वो मान गई।

अगले दिन हरमन नेहा को लेकर एक पार्क में जा कर बैठ गई और बोली- जैसी तुम्हारी आज हालत है, कभी मेरी भी ऐसी ही होती थी, फ़र्क इतना था कि मेरा पति काम के सिलसिले में बहुत दिन बाद घर आता था और फिर वो मुझे वक्त कम देता था, जिस कारण मैं शादी के दो साल बाद भी माँ नहीं बन सकी थी।

मैंने एक दिन उनसे साफ कर दिया कि मैं माँ बनना चाहती हूँ तो बोले कि मुझे कुछ दिनों का वक्त दो, मैं कुछ ना कुछ करता हूँ।

अगले चक्कर में हरमन का पति मेरे पास हरमन को साथ लेकर आये और मुझसे बात करने लगे।

बात करने पर मुझे पता चला कि उसका पति भी नामर्द तो नहीं पर उसमें शुक्राणुओं की कमी है, वो बच्चा पैदा करने में असमर्थ है।

फिर भी मैंने उसके टेस्ट लिए और उन्हे दोबारा आने को बोला। अगले ही सप्ताह वो अकेला आया और मैंने उसे बताया कि हरमन तो माँ बन सकती है पर तुम पिता नहीं बन सकते क्योंकि तुम्हारे वीर्य में पूरे शुक्राणु नहीं हैं।

वो शर्म के मारे लज्जित होने लगा और मुझे पूछने लगा कि मैं क्या करूँ?

मैं उसे समझाया कि तुम हरमन को साथ लेकर आना, मैं तुम दोनों को समझा दूँगी।

वो बोला- नहीं, आप हरमन के सामने यह बात ना करना !

फिर मैंने उससे पूछा- अगर हरमन किसी और के साथ सेक्स करे तो तुम्हें कोई एतराज़ तो नहीं होगा?

वो बोला- मुझे तो कोई ऐतराज नहीं है पर हरमन माने, तब ना !

मैंने उसे समझा दिया और बोला- तुम हरमन को मेरे पास भेज देना, मैं समझा दूँगी।

वो मान गया और दो दिन बाद वो हरमन को लेकर मेरे पास आया। मैंने दोनों को बिठाया और समझाया- तुम माँ तो बन सकती हो पर इसके लिए तुम दोनों को कुछ कुर्बानी देनी होगी।

वो एक दूसरे का मुँह देखने लगे, फिर बोले- कैसे कुर्बानी?

मैं उन्हें साफ–साफ बता दिया कि तुम्हारे गर्भाशय में इसके वीर्य को संवर्धित करके डालना होगा और अगर वो काम कर गया तो ठीक है, वरना तुम्हें बच्चे के किए किसी गैर मर्द से सम्भोग करना होगा।

पहले तो वो मना करने लगी पर मेरे समझाने पर वो मान गई। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने सारी प्रक्रिया पूरी की।

इस तरह 4-5 सप्ताह बाद जब हरमन ने चेकअप करवाया तो सौभाग्य से पता चला कि वो गर्भवती हो गई है तो उसकी और उसके पति की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो खुशी खुशी घर को चले गये।

इस तरह हरमन ने नेहा को अपनी बीती बताई और नेहा को मेरे पास लेकर आ गई। पहले तो हरमन ने अपना चेकअप करवाया, फिर उसने नेहा को मेरे साथ मिलवाया। नेहा से मिल कर और उसकी बात जानकर मुझे बहुत दु:ख हुआ।

फिर मैंने उसे उसके पति के साथ आने को बोला। वो मान गई।

अब नेहा मेरे पास अपने पति के साथ आई और मैंने उनके कुछ टेस्ट लिए और रिपोर्ट आने के बाद मिलने को बोला।

2-3 दिन बाद नेहा अपने पति के साथ मुझे मिली, मैंने नेहा को बताया- तुम्हारे पति के शुक्राणु बहुत कम हैं, पर हम कोशिश कर सकते हैं।

मैंने उसके साथ भी वही संवर्धित वीर्य वाली प्रक्रिया अपनाई और 20 दिन बाद मिलने को बोला।

20 दिन बाद टेस्ट लिए तो पता चला कि नेहा के अण्डाणु को उसके पति के शुक्राणु निशेचित नहीं कर पाए हैं।

इससे नेहा बहुत नाराज़ और उदास हो गई और बाहर चली गई। उसका पति मेरे पांव पकड़ कर बोला- इसका ज़िमेदार मैं हूँ डॉक्टर, आप कुछ भी कीजिए पर मैं नेहा को उदास नहीं देख सकता।

मैंने कुछ देर सोचा और नेहा के पास चली गई। उसे समझाया और वापिस अपने कैबिन में आ गई। मैंने दोनों को एक साथ समझाया कि अगर तुम बुरा ना मानो तो एक रास्ता है, अगर नेहा किसी और के साथ सेक्स करे तो यह माँ बन सकती है।

वो दोनों एक दूसरे का मुँह देख रहे थे और बोली- आपका दिमाग़ तो ठीक है, अगर किसी को पता चल गया तो हम कहीं के नहीं रहेंगे।

मैंने उसे समझाया कि तुम चिंता ना करो, मेरे पास एक लड़का है जो तुम्हारी मदद भी करेगा और किसी से कुछ भी नहीं कहेगा। उसे पैसे की जरूरत है और वो पैसे के लिए अपना वीर्य भी बेचता है। अगर तुम कहो तो मैं बात करूँ।

वो दोनों एक दूसरे को देख रहे थे। फिर नेहा का पति बोला- मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है पर नेहा को पूछ लो !

नेहा ने हाँ में सिर हिला दिया।

समय के अनुसार मैंने लड़के से बात की और नेहा और उसके पति ने नेहा के मासिक धर्म होने के दस बारह दिन बाद का शिमला का टूअर बना लिया और 3-4 दिन वहीं रहने की बात भी की।

मैंने सारी योजना लड़के को समझा दी और लड़का वहाँ पर समय के अनुसार पहुँच गया। लड़के ने उनकी 3-4 दिन पूरी सेवा की और पैसे लेकर चला गया।

नेहा और उसकी पति खुश थे। कुछ सप्ताह बीतने पर जब मैंने नेहा का चेकअप किया तो पता चल गया कि नेहा गर्भवती हो चुकी है। नेहा का खुशी के मारे कोई ठिकाना नहीं रहा।

अब उसके घर पर सभी खुश थे। नेहा ने हरमन को बताया कि वो माँ बनने वाली है।

फिर नेहा और उसके पति ने मेरा धन्यवाद किया।

कुछ दिनों बाद नेहा का मुझे फोन आया और लड़के को धन्यवाद करने के लिए मिलने को बोली।

मैंने उन्हें मिलवाया तो नेहा ने उसे और पैसे दिए और बोली- तुम्हारी वजह से मैं माँ बन पाई हूँ। मैं तुम्हारा यह अहसान नहीं भूल सकती।

दोस्तो, इस सच्ची घटना के द्वारा मैं सबको यही बताना चाहती हूँ कि अगर पति-पत्नी थोड़ी समझदारी से काम लें तो एक नर्क भरी जिंदगी भी स्वर्ग बन जाती है।

आपको मेरी सहेलियों की कहानी कैसे लगी, जरूर लिखना और प्लीज़, लड़के मुझे गंदी बातें ना लिखें।

इस कहानी को पीडीएफ PDF फ़ाइल में डाउनलोड कीजिए! नर्क से स्वर्ग

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