मन पसंद की चुदाई

प्रेषक : नीरज

सभी साथियों को अभिवादन ! आप सभी को धन्यवाद ! ! आपकी प्रेरणा से मुझे लिखने का उत्साह मिलता है।

ज़रा सोच कर देखिये कि भगवान् ने सेक्स को इतना सुखदायक बनाया कि दुनिया इसकी दीवानी है। यदि यह सुखदायक नहीं होता तो………

दो इंच के खड्डे ने दुनिया को ख़ुद का दीवाना बना रखा है। सारी दुनिया की उत्पत्ति उससे हो गई।

क्या मनुष्य, क्या जानवर और क्या कीड़े मकोड़े….. सभी सेक्स के लिए उत्सुक होते हैं।

और सेक्स …….

इसको जितना तसल्ली से किया जाए उतना ही आनंद दायक हो जाता है।

और इसी सेक्स के कारण कई बार मनुष्य खेदजनक स्थिति में भी आ जाता है।

बहुत सी बार तो किसी में कोई दोष या परेशानी नहीं होती और वो सोचता है कि उसमे कोई दोष है।

यदि तसल्ली से, बिना किसी घबराहट के सेक्स करेंगे तो सेक्स का ख़ुद भी पूरा आनंद ले पाएंगे और साथी को भी सेक्स का पूरा आनंद दे पायेंगे।

जरूरत से ज्यादा उत्तेजित हो जाना, चिन्ता में होना, घबराहट होना और गुप्तांगों में कोई परेशानी होना (घाव या छीलन आदि) ही ज्यादातर परेशानियों का कारण हैं।

इनमे से एक परेशानी है स्त्री के बजाय पुरूष का जल्दी झड़ जाना।

और इस समस्या के निदान है, जो अच्छा लगे उनको अपना कर अनुभव करें —

-कंडोम का प्रयोग करें,

-स्त्री को अपने ऊपर ले लें,

-बैठ कर सम्भोग करें,

-सेक्स करते समय अपने दिमाग को शांत रखें, जरूरत से ज्यादा उत्तेजित न हों और जल्दबाजी न दिखाएँ,

-बहुत जल्दी जल्दी सम्भोग न करें अर्थात ५-७ दिन का अन्तर रखें,

सेक्स में किसी को कुछ ज्यादा अच्छा लगता है और किसी दूसरे को कुछ ओर !

इसलिए अपनी पसंद से दूसरों की तुलना करना बेकार है, यह मत सोचिये कि मुझको कोई बीमारी है।

मैं स्त्री को अपने ऊपर लेना ज्यादा पसंद करता हूँ।

इस आसन में स्त्री सेक्स करते समय जैसे जैसे अपनी गांड चलाती है तो उसकी चूत अदंर से फूलती पिचकती रहती है और लंड को अपार सुख देती है।

दूसरा आसन बैठ कर स्त्री को अपनी जांघों पर बिठा कर सम्भोग करना – इसमे दोनों के मुँह एकदम आमने सामने होते हैं, अतः चूमने में बहुत मजा आता है और पूरा शरीर होता हाथ की पहुँच में है, इस से हम एक दूसरे के पूरे शरीर के टांग से लेकर मुँह तक सहला सकते हैं।

आज मैं आपको जो बताने जा रहा हूँ उससे आप अपनी मन पसंद स्त्री को चोद सकते हैं।

हमारे एक परिचित का गोत्र मेरी मां के गोत्र का था। इसलिए हम लोग उनको मामा कहते थे। उनकी पत्नी का देहांत तीन बच्चों के पैदा होने के बाद, ४५ वर्ष की उम्र में हो गया। तब तक उनके दो लड़के और एक लड़की तीनों की शादी हो चुकी थी। अब मामाजी अकेले रह गए और उनमें सेक्स की प्रबलता देख कर कोई भी बेटा अपने साथ रखने को राजी नहीं था। मामा ५०-५२ के थे।

वो थे भी ज्यादा ही खुले हुए, उनके लिए उनकी बहु भी सेक्स संतुष्टि का एक साधन ही थी। अब अलग रहने से उनके खाने के साथ साथ सेक्स करने की भी समस्या हो गई। रुपयों की कोई कमी नहीं थी तो उन्होंने अपने लिए कोई औरत तलाशनी शुरू कर दी। आख़िर २-३ साल की तलाश के बाद हमारे ही समाज की एक तलाकशुदा ३० साल की औरत से उन्होंने मन्दिर में शादी कर ली।

ये मामी उम्र में मुझसे भी छोटी हैं। कोई सीधा सीधा रिश्ता तो है नहीं। लेकिन मान रखा था।

मामी दिखने में बहुत आकर्षक लगती हैं। जब कभी मेरे साथ स्कूटर पर बैठती तो कंधे पर हाथ रखकर बैठती और स्कूटर हलके से रोकने में भी अपने बोबे मुझसे टकरा देती। ३६+/३८ साइज़ के बोबे मेरी पीठ में गड़ते ही मेरा लंड फन्ना जाता। दिल उछल कर गले में आ जाता।

बात करते करते मेरे हाथो में ताली मार देती। यह जानते हुए भी कि यदि उनके साथ यदि मैं आगे बढूँ तो वो मान जाएँगी, मेरी गांड फटती थी उनसे ऐसी बात कहने में !

उनको चोदने की इच्छा बहुत थी इसलिए उनके बारे में बहुत सोचता था। सोते समय भी कई बार उनके बारे में सोचते सोचते सो जाता और गुसलखाने में नहाते समय कई बार उनकी सोच ले कर उनके नाम से मुठ मारी।

एक बार बरसात के सुहाने मौसम में, रात को खिड़की से छन कर आती मद्धिम रोशनी में उनको याद करते हुए आँख बंद कर के पत्नी के साथ लेटा हुआ था। उनको याद करते करते लंड में कठोरता आ गई। मैंने आँखें खोली तो पास में मामी को सोते हुए पाया। मैं उनके ख्यालों में इतना खोया हुआ था कि जाने पत्नी को कहीं भेजकर कब वो पास आकर सो गई पता ही नहीं चला।

मेरी तबियत बाग़ बाग़ हो गई। मैं करवट लेकर उन पर अधलेटा हो गया और उनके होटों पे अपने होंट रख कर चूसने लगा, लंड तन कर अकड़ गया। उन्होंने भी मेरे होंट चूसने शुरू कर दिए। मैंने उनके बोबे दबाने शुरू कर दिए और धीरे धीरे उनके ब्लाउज के बटन खोलता गया। उनकी तरफ़ से कोई प्रतिवाद नहीं हुआ तो लंड नई औरत के अहसास से एक दम टन्ना गया।

फ़िर उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्लाउज और ब्रा उनके शरीर से अलग कर दी। होंट और जीभ एक दूसरे के मुँह से अलग ही नहीं हो रहे थे। बहुत जोर लगा कर मुँह को हटा कर उनके बोबों पर लाया और चूसने लगा। फ़िर एक हाथ से उनका दूसरा बोबा दबाता रहा। और दूसरा हाथ उनके पेटीकोट को ऊँचा करने में लग गया। पेटीकोट को सरका कर नाभि तक ले आया और उसी हाथ से उनकी चूत सहलाने लगा, उनके मुँह से सीत्कार निकलने लगी जो मुझको और भी कुछ करने के लिए उत्साहित करने लगी।

उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और धीरे धीरे दबाने लगी तो मैंने अपने पायजामे और अंडरविअर का नाड़ा खोलकर लंड उनके हाथ में पकड़ा दिया। लंड स्टील के माफिक हो गया।

मन सात समंदर की लहरों पर मचलने लगा। सीत्कार और आहों ने कमरे को एक नए तराने से भर दिया। उनकी चूत पनीली होने लगी। मैं अपनी जीभ से उनका बदन चाटने लगा। उनकी नाभि में जीभ घुसेड़ कर हिलाने लगा।

तो वो मेरा लंड छोड़ कर मुझको अपनी बाँहों में लेकर जकड़ गई। और इतनी जोर से चिपक गई कि यदि मैं उठ जाता तो वो भी मेरे शरीर से जुड़ी हुई उठ जाती। उन्होंने अपना मुँह मेरी गर्दन पर चिपका दिया और चूसने लगी, मुझको अपने आपको सम्हालना भारी पड़ गया, मुझे लगा कि जैसे मैं सूर्य के सामने खड़ा जल रहा हूँ।

हम दोनों के शरीर से जैसे धुंआ उठने लगा, हम पसीने में नहा गए।

मेरा लंड उनकी चूत के दरवाजे पर दस्तक देने लगा। तो उन्होंने लंड को अपनी चूत के मुँह पर अड़ा लिया। और अपने चूतड़ उठाने लगी। मैंने भी लंड पर दबाव डाल कर पूरा लंड उनकी चूत में देता चला गया।

नई औरत के अहसास और उनके मुँह से लम्बी मादक आह ने मेरे मन को सातवें आसमान पर उड़ा दिया। अब मैं अपने घुटनों को मोड़ कर उनकी जांघों के नीचे लाता गया फ़िर जब मेरे घुटने उनकी जांघों के नीचे आ गए तो अपने हाथ उनकी बगल में टिका कर उनको बोला कि अपने हाथों से मुझको मत छोड़ना फ़िर अपने हाथों को कोहनी से सीधा करते हुए उनको अपनी जांघों पर ले आया और बैठ गया। मैं तकिया दीवार के सहारे सीधा लगा कर उसका सहारा लेकर बैठ गया और वो मेरी जांघों पर मुझको अपने हाथो से कसे बैठी थी। मैंने उनके चेहरे को पकड़ कर अपने होंट उनके मुँह से मिला कर उनकी जीभ अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और हाथ उनके बदन पर छुआते हुए सहलाने लगा। तो वो अपने बदन को उत्तेजना के मारे लहराने लगी। दोनों पहली बार एक दूसरे से चिपके थे इसलिए अलग होना मुश्किल हो रहा था। लंड अंदर चूत की गहराई में डूबा हुआ मस्त हो रहा था।

अब मामी पिघलने लगी, मेरे चेहरे और गले पर जगह जगह चूमने और चूसने लगी। फ़िर धीरे धीरे जांघों को टाइट करते छोड़ते हुए चूत को हरकत देने लगी। मैं भी अपने हिप्स को धीरे धीरे धक्के की स्थिति में हिलाने लगा। मैंने अपने हाथ उनके शरीर से हटा कर उनके बोबों पर लगा दिए। उनके दोनों बोबे मेरे दोनों हाथों से दबे जा रहे थे। होंट उनकी जीभ पर और उनके हाथों में मेरा शरीर कसा हुआ। कही भी हवा जाने भर की भी जगह नहीं थी।

उनकी चूत ज्यादा गीली होती गई और उस गीले चिकने गरम पानी में लंड डुबकियां लगा कर नहाने लगा। उनका गदराया शरीर मेरी रग रग में आग भरता गया और मेरा लंड उनकी चूत को गहरे तक खोद कर कुवें में से पानी निकालने लगा। उनका शरीर तनता चला गया। फ़िर थोड़ी देर बाद उनके होंट, उनके हाथ ढीले हो गए। और उनका शरीर मेरे बदन पर ढल गया।

थोड़ी देर तक मैंने उनको समंदर की लहरों और सातवें आसमान की उड़ान का मजा लेने दिया, उनके बोबे धीरे धीरे दबाता रहा।

फ़िर लगभग ३-४ मिनट बाद मैंने उनका चेहरा उठाया और अपने होंट उनके होटों से मिला दिए। उनके शरीर में फ़िर हरकत होने लगी। शरीर जो ढुलका पड़ा था फ़िर कसाव आने लगा। मैंने अपना एक हाथ हमारे बीच में उनकी चूत पर लाकर उँगलियों से चूत के चारों और सहलाने लगा, मामी में आग फ़िर भड़कने लगी।

अब मैंने अपने शरीर को थोड़ा पीछे झुका कर कोहनी बिस्तर पर लगा दी और थोड़ा आगे सरक कर लेटता गया और उनको ऊपर ले लिया।

मैंने उनके बोबे थोड़ा जोर दे कर दबाने शुरू किए। फ़िर थोड़ी देर बाद दोनों हाथ उनकी कूल्हों की गोलाइयों पर सहलाते हुए घुमाने लगा।

फ़िर उत्तेजना के मारे वो अपने हिप्स को हाथों से बचाने के लिए इधर उधर करने लगी। तो लंड को मजा आने लगा। मैं नीचे से धक्के लगाने लगा। उनके भी हिप्स तेज चलने लगे तो मैंने अपने हाथों में मामी को जकड़ लिया और अपनी जीभ उनके मुँह में देकर धीरे धीरे धक्कों की रफ़्तार बढ़ाता गया। मामी का शरीर फ़िर अकड़ने लगा और ढीला पड़ता गया, मैं नहीं रुका लेकिन धक्के पूरी ताकत से लगाने लगा और ८-१० धक्कों में मैं भी जाने किधर उड़ने लगा।

मेरा पूरा शरीर नए अहसास से सुहागरात की जैसे तरंगित था।

फ़िर जब नींद से आँखें खुली तो मेरी बगल में मेरी पत्नी सोई हुई थी।

लेकिन वो नया अहसास ३-४ दिन तक मुझको तरंगित किए रहा।

आप भी किसी की यादों में इतना खो कर उसकी चुदाई कर सकते हैं।

कर के देखिये फ़िर बताइए ………….

न सिर्फ़ मर्द बल्कि औरतें भी ऐसा कर सकती हैं और नए अहसास से ख़ुद को तरो ताजा कर सकती हैं………।

आपका – नीरज

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