लव की आत्मकथा-1

(Love Ki Aatmkatha-1)

This story is part of a series:

हेलो दोस्तो, अन्तर्वासना के सभी मित्रो को मेरा नमस्कार। यह मेरी पहली और सच्ची कहनी है।

मैं नहीं जानता कि मैंने गलत किया या सही, परन्तु मैंने जो भी किया वो लिख रहा हूँ। दोस्तो, मेरा फ़ैसला आपके हाथों में है। अब आपको ही निर्णय करना है कि मैंने सही किया या गलत। ज्यादा बोर न करते हुए मैं अब सीधे अपनी कहानी पर आता हूँ।

मेरा नाम लव कुमार है। मेरा परिवार एक बड़ा परिवार है। मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे पापा, मम्मी, दादा, दादी, चाचा, चाची, दो भाई और चार बहनें है, दो मेरी और दो चचेरी। मैं अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ा हूँ। मेरी उम्र 24 साल है। मेरी एक बहन 20 की और एक 18 की है। बड़ी का नाम स्वाति और छोटी का अदिति।

मेरे मम्मी पापा की तरह मैं और मेरे सभी भाई बहन काफ़ी खूबसूरत हैं। मैं बचपन से ही थोड़ा शर्मीले स्वभाव का हूँ इसीलिए मेरा कोई अच्छा दोस्त नहीं था।

तब मैं ग्यारहवीं में था। जब एक दिन खेलने के लिए जाते समय मुझे रास्ते में एक किताब मिली उसे पलट के देखने पर मेरे होश ही गुम हो गये क्योंकि उसमें लड़कियों की नन्गी तस्वीरें और गन्दे शब्दों वाली कहानियाँ थी।
उस समय मैंने पहली बार सेक्स की एक किताब पढ़ी। मुझे ना जाने क्या होने लगा, मेरा पूरा शरीर एक अनजान सी गर्मी से भर गया। अचानक मेरा ध्यान मेरे अपने लण्ड पर गया, वो दर्द कर रहा था क्योंकि मैंने जीन्स पहन रखी थी और मेरे लन्ड को खड़े होने की जगह नहीं मिल रही थी।

मैंने उस किताब को छुपा कर रख दिया। दोस्तो, उस समय मेरी स्थिति का आप केवल अनुमान कर सकते हैं, मुझे उस समय हस्तमैथुन का कोई ज्ञान नहीं था।

अगले दिन मैंने वो किताब अपने एक साथी को दिखाई। उसने मुझसे वो किताब ले ली और तालाब के पीछे चला गया जहाँ शाम को इक्का-दुक्का लोग ही आते जाते हैं। हम सब खेलने में लग गये। अचानक मुझे अन्कित का ख्याल आया जिसे कि मैंने वो किताब दी थी।

मुझे एक शरारत सूझी। सितम्बर की गर्मी थी, शाम के 7 बजे थे, मैं अन्कित को डराने के लिये चुपके से तालाब के पीछे गया। वहाँ जाते ही मैं दंग रह गया। वो अपने खड़े लण्ड को पकड़ कर आगे-पीछे कर रहा था। उसे देखकर मुझे जोर की हँसी आई। उसने मुझे देखा और हड़बड़ा कर अपने लण्ड को अन्दर किया।

मैंने उससे पूछा- क्या कर रहा था?
तो उसने मुझे कहा- कभी मुठ नहीं मारा है क्या?
मैंने पूछा- यह क्या होता है?

तब उसने मुझे हस्तमैथुन करने का तरीका बतलाया।
मैंने कहा- मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता ! ऐसी गन्दी बातें मत करो।

पर अगले दिन जब नहाते समय जब मैं बाथरुम में था तब अचानक मस्तराम की वो कहानी याद आ गई और मेरा लण्ड खड़ा हो गया। अनायास ही मेरा हाथ मेरे लण्ड को आगे-पीछे करने लगा। क्या बताऊँ यारो ! क्या मज़ा आ रहा था ! करीब 7-8 मिनट ऐसा करते रहने के बाद अचानक मेरे हाथ की गति एकाएक ही बढ़ गई, मेरा पूरा शरीर अकड़ने लगा, अचानक मेरी आँखें बन्द हुई और मेरे लण्ड से कुछ निकला। मेरा पूरा शरीर एक आनन्दमय लहर से भर उठा।

30 सेकंड के बाद जब मैंनें अपनी आँखें खोली तो देखा कि बाथरुम का फ़र्श उजले गोन्द जैसे चिपचिपे पदार्थ से भरा था। मैं डर गया और शाम में अन्कित को अकेले में बुलाकर उसे यह सारी बात बतलाई और उससे पूछा- वो सफ़ेद सा चिपचिपा सा क्या था?

तो उसने बताया- अरे बुद्धु ! वो ही तो वो चीज है जो लड़कियों के पेट में बच्चा पैदा करता है इसे माल कहते हैं।

फ़िर उस घटना के बाद मैं उससे घुलमिल गया। वो और मैं अक्सर सेक्स की बातें करने लगे। वो कहीं से मस्तराम की चुदाई वाली किताब लाता था और हम दोनों उसे साथ बैठकर पढते थे। उसके बाद हस्तमैथुन का दौर चलता था। उसने मुझे सेक्स के बारे में बहुत कुछ बताया।

जब मैं बारहवीं में था तब हमने होली के दिन ब्लू फ़िल्म देखी और उसी के बाद से मेरी जिन्दगी में एक नया मोड़ आया। उस दिन अन्कित ने मुझे बतलाया कि असली मजा तो लड़कियों को चोदने में है।

उसके बाद लड़कियों को देखने का मेरा नजरिया बदल गया।

अब लड़कियों को देखते ही मेरा ध्यान उनकी चूचियों पर जाता था और मेरे लण्डाधिराज एक जोरदार सलामी ठोकते थे।

बारहवीं के परीक्षा के बाद मैं पटना आ गया और स्नातक की पढ़ाई शुरु कर दी। कोचिंग पर मेरे बहुत सारे दोस्त बने और उन्होने हमें साइबर ज्ञान दिया और शुरु हो गया नेट पर ब्लू फ़िल्म, तस्वीरें देखने का सिलसिला। इसी दौरान मैंने अन्तर्वासना डॉट कॉम के बारे में सुना और उस पर गर्मागर्म कहानियाँ पढ़ने लगा।

मैंने मोबाईल फ़ोन पर नेट का कनेक्शन ले रखा था और उस पर अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ा करता था।

अब शुरु होती है लव की जिन्दगी का वो पल जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी ना था।

कहानी आगे जारी रहेगी।

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top