चुद गई कुतिया कोठे पर-2

प्रेषिका : उषा मस्तानी

पहले भाग से आगे :

अंकल उठकर पलंग के पास सोफा कुर्सी पर बैठ गए। मौसी ने मेरी चूत पे हाथ फिराया और बोली- तेरी मुनिया तो बड़ी चकाचक हो रही है। बड़े आराम से लेटी हुई है, लगता है जैसे कि हनीमून के मज़े ले रही हो ! चल उठ और धंधा कर साली ! जब तक तेरी मुनिया बुरी तरह से सुजेगी नहीं, तब तक चुद ! उसके बाद तुझे खुद ही नींद आ जाऐगी। चल उठ और ग्राहक के लिए ग्लास बना। मैं खड़ी हो गई। जानी पलंग पर बैठ गया।

मौसी मुस्कराई और अंकल से बोली- यह जानी है ! विदेशी हथियार की स्मगलिंग करता है, तुम्हारे साथ धंधा करना चाहता है ! क्यों पसंद है?

मेरी चूत और गांड में दर्द हो रहा था। मैं लंगड़ाते हुए चल रही थी। मैंने तीन ग्लास में दारू की बोतल से दारू डाली और एक एक अंकल मौसी और जानी की तरफ बढ़ा दिए। जानी कामुक नज़रों से मुझे देखे जा रहा था। उसने मेरे चूतड़ों पर दो तीन बार हाथ भी फेर दिया था। मौसी ने हम दोनों रंडियों को आँख मारी। मौसी ने मेरे को जानी की सेवा करने का इशारा किया। मोंटी अंकल नंगे थे ही ! शोभा मोंटी साहब का लंड चूसने लगी। मैंने पैंट खोल कर जानी का लंड निकाल लिया और चूसने लगी। जानी और मोंटी कुछ कोड भाषा में बातें करने लगे। कुछ देर बाद दोनों काफी खुश नज़र आ रहे थे, उनकी धंधे की बातें ख़त्म हो गई थीं जानी ने एक पांच की गद्दी मौसी को दी और बोला- मौसी तुम्हारा इनाम।

दोनों के लंड चूसने से खड़े हो गए थे।

मोंटी और जानी में कुछ इशारों इशारों में बात हुई। अंकल ने शोभा को उठा दिया और मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। अब मैं कुतिया बनी बिस्तर पर बैठे जानी का लंड चूस रही थी और अंकल मेरी पीछे से चूत मार रहे थे। मुझे बड़ा दर्द हो रहा था, मौसी मुस्करा रही थी और चिल्ला रही थी- अंकल, साली को आज इतना चोदना कि ये दस दस लंड आगे से एक रात में खा सके। टॉप की रंडी बनाना है मुझे इसको। कुछ देर बाद अंकल ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया। अंकल का लंड लोहे की राड की तरह खड़ा हुआ था। जानी ने भी अपना लंड निकाल लिया था। जानी ने मुझे उठाया और पलंग पर उल्टा करके मोटा लंड मेरी गांड में घुसा दिया अंकल ने मेरी गांड पहले ही फाड़ रखी थी इसलिए एक झटके में जानी का पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था।

मैं चिल्ला रही थी, जानी ने मेरी गांड में जोर के 10-15 शोट मारे उसके बाद जानी नीचे था और मैं उसके ऊपर सीधी लेटी थी उसने अपना लंड मेरी गांड में घुसा रखा था। उसने मेरी टाँगें फ़ैला दी और नीचे से धीरे धीरे गांड में धक्के मारने लगा। अंकल अपना लंड पकड़े सामने मुस्करा रहे थे। उन्होंने मेरी चौड़ी टांगों के बीच अपना सुपारा रख दिया और मेरी चूत में ऊपर से अपना लंड पेल दिया। अब मेरी गांड और चूत दोनों में लंड घुसे हुए थे, मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी।

मौसी ताली बजा रही थी और बोल रही थी- अंकल, मज़ा आ गया ! वाकई साली कुतिया लग रही है ! चोद साली को ! याद रखेगी कि मौसी के कोठे पर चुदी थी !

मेरी गाड़ी बनी हुई थी, मेरे दोनों छेदों में लंड सरपट दौड़ रहे थे। अब मुझे पता चल रहा था कि कोठे की चुदाई क्या होती है। मैं अब पूरी तरह से कोठे की कुतिया बनी हुई थी। दस मिनट दोनों ने एक साथ मेरी चूत और गांड बजाई उसके बाद जानी ने मेरी चूत में और अंकल ने मेरी गांड में लंड घुसा कर मुझे सैंडविच बनाया और दुबारा मुझे दस मिनट तक चोदा। मौसी मेरी चुदाई का आनंद सिगरेट पीते हुए ले रही थी। इसके बाद दोनों ने एक एक करके पानी मेरी चूत में छोड़ दिया। मैं बिस्तर पर लुढ़क गई थी, मेरी चूत अब बुरी तरह से सूज रही थी और गांड भी बहुत दुःख रही थी।

रात के चार बज़ रहे थे। मौसी, जानी और मोंटी दारू पीने लगे, थोड़ी देर बाद दोनों नशे में झूम रहे थे। जानी मौसी से बोला- मौसी, साली की चूत कितनी सुंदर है, सूजी हुई तो और सुंदर लग रही है, एक चुम्मा लेकर आता हूँ !

जानी उठा और उसने मेरी चूत पे एक चुम्मा लिया और बोला- मोंटी साले, चुम्मा ले ! क्या स्वाद आता है !

मोंटी ने भी उठ कर एक चुम्मा मेरी चूत पर लिया। दोनों फिर मौसी के पास जाकर बैठ गए, इस तरह 10-12 बार उन्होंने कभी मेरी चूत पर कभी चुचकों पर चुम्मे लिए। कुछ देर बाद दोनों बोले- मौसी बजा तो बहुत लिया पर बजते हुए नहीं देखा। कुछ ब्लू सीन बनवाओ और जानी ने एक 100 की गडी मौसी के हाथ में दे दी। अंकल और जानी मेरे गले में हाथ डालकर बिस्तर पर बैठ गए। मौसी ने सोफा बिस्तर के पास खींच लिया। दोनों मेरी एक एक चूची पकड़े हुए थे और मसल रहे थे।

मौसी ने कमरे की घंटी बजा दी और राजू को कुछ कहा। थोड़ी देर में राजू, कालू, भूरा और टीनू कमरे में थे। मौसी उठी और शोभा से बोली- चल नंगी हो ! तेरी चुदाई का मुजरा कराती हूँ !

थोड़ी देर में शोभा पूरी नंगी थी।

मौसी गुंडों से बोली- अब तुम सब सोफे पर इसकी गाड़ी चलाओ !

राजू सोफे पर जाकर बैठ गया। उसका लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा हुआ था, शोभा उसके लौड़े के ऊपर जाकर बैठ गई और पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसवा लिया। राजू सोफे पर उछल उछल कर उसकी चूत चोदने लगा और उसकी गांड का छेद दोनों ऊँगली से चौड़ा कर दिया, जिसमें पीछे से भूरा ने अपना लंड घुसा दिया।

अब शोभा को राजू और भूरा साथ साथ चोद रहे थे। शोभा की ऊहं आह से कमरा गूंज रहा। शोभा पुरानी रांड थी, मज़े ले ले कर चुद रही थी और ऊहं आह की आवाज़ निकाल रही थी। शोभा का मुँह सोफे से बाहर निकल रहा था। टीनू ने पीछे जाकर अपना लौड़ा शोभा के मुँह में डाल दिया और उसे चुसवाने लगा। शोभा की चूत गांड और मुँह में धक्के जोरों से चल रहे थे। कालू अपना लंड निकाल कर सहला रहा था।मौसी ने शोभा का एक हाथ खींच कर कालू का लंड शोभा के हाथ में पकड़ा दिया दिया। चार चार लौड़ों से शोभा खेल रही थी। जानी ने मुझे पलंग पर अपने लौड़े पर बैठा लिया। अंकल ने मेरे हाथ में अपना लौड़ा पकड़ा दिया। मैं बेहोशी की सी हालत में थी और अंकल का लौड़ा धीरे धीरे मसल रही थी। अंकल ने पलंग पर खड़े होकर मेरे बाल जोर से खींच डाले और चिल्लाये भोसड़ी की, तुझे बड़ी नींद आ रही है? साली अभी तुझे भी इस रांड की जगह बैठाता हूँ ! ले पहले मेरा लौड़ा चूस।

उन्होंने मेरे मुँह में अपना लौड़ा ठूंस दिया। शोभा की गाड़ी जोरों से चल रही थी, गुंडे बार बार जगह बदल कर शोभा को चोद रहे थे। शोभा की चुदाई देखकर अंकल और जानी गरम हो रहे थे, उनके लंड मेरे मुँह और चूत में दौड़ रहे थे। कमरे की सारी लाइट जल रही थी और कमरा रौशनी से भरा हुआ था।

थोड़ी देर बाद अंकल और जानी ने अपने रस एक एक करके मेरे मुँह में उतार दिए और नशे में झूमते हुए कोठे से बाहर चले गए।

सुबह के पाँच बज़ रहे थे लेकिन मेरी तो अभी गाड़ी और बजनी थी। मौसी जाते जाते राजू से बोली- मैं तो सोने जा रही हूँ राजू, कालू को बुला ला और इसे बजाना हो तो तुम दोनों बजा लो ! जब से यह नई रांड आई है अपने लंड सहला रहे हो। जितना मन हो उतना चोदो कुतिया को, रांड तो अब यह बन ही गई है लेकिन नीचे मेरे पास वाले कमरे में चोदना।

राजू मुझे गोद में उठाकर नीचे कमरे में ले आया, जहाँ जमीन पर पुराने गद्दे पड़े हुए थे। थोड़ी देर में कालू भी उधर आ गया, राजू ने पीछे से मेरी फटी गांड में लंड घुसा दिया और कालू ने आगे से मेरी चूत में लंड डाल दिया। मैं अधमरी हालत में दोनों से चुदने लगी सुबह सात बजे तक दोनों ने मुझे बुरी तरह से नोचा और चोदा, उसके बाद मैं गहरी नींद में सो गई।

अगले दिन रात को नौ बजे मेरे चूतड़ों पर मौसी ने जोर से हाथ मारा और बोली- रंडी रानी ! उठ जाओ और कितनी देर तक लेटोगी।

मैं घबरा कर उठ गई। मौसी बोली- थोड़े कपड़े पहन लो और खाना खा लो।

मुझसे उठा नहीं जा रहा था, किसी तरह मैं उठी और मौसी से बोली- मौसी, मुझे वापस भेज दो !

मौसी मुस्कराई और बोली- वापस जाकर क्या करोगी? अभी तो तुम चल भी नहीं पा रही हो, ऊपर से तुम्हारी चूत और सूज रही है ! थोड़ी ठीक हो जाओ तब जाना। चल अच्छा फ्रेश हो, फिर बात करती हूँ।

किसी तरह मैं उठी और खाना खाया। उसके बाद दुबारा सो गई। मुझे काफी थकान महसूस हो रही थी। खा पीकर मुझे नींद आ गई। अगले दिन सुबह दस बजे मौसी आई उनके साथ छोटा खलील भी था। मौसी बोली- क्यों, बॉम्बे नहीं जाना है। ये छोटा खलील बॉम्बे जा रहा इसकी गाड़ी में चली जा। तुझे अपनी चंपा बार में नचवाएगा। नाच भी करियो और धंधा भी बहुत मज़ा आएगा। साले ने तुझे 5 लाख में खरीदा है।

छोटा खलील मुस्करा रहा था, मौसी से बोला- मौसी, दो घंटे साली को चोद लूँ फिर डालकर ले जाऊंगा।

मौसी मुस्कराई और बोली- लोंडी अब तेरी है दो क्या दस घंटे चोद ! तेरे गुरु मोंटी ने कल इसकी गांड और चूत दोनों सुजा दी हैं।

खलील मुस्कराया और उसने मेरी चुदाई शुरू कर दी। खलील ने दो बार मेरी चूत और दो बार मेरी गांड मारी। साथ ही साथ बोला- हरामजादी मौसी ने भी एक दिन में अच्छी खासी चूत का भोंसड़ा बना दिया है, डांस शो में कितना मज़ा आ रहा था तेरी मारने में और आज तेरी भोंसड़ी बनी हुई है।

बारह बजे तक उसने चोद चोद कर मुझे अधमरा कर दिया था। उसके बाद उसने मुझे गाड़ी में बांधकर डाला और मुंबई लेकर चल गया।

खलील ने मुझे चंपा बार में नाचने के लिए छोड़ दिया। मजबूर होकर मुझे यहाँ नाचना पड़ा। रात बारह बजे तक नाचती थी। उसके बाद एक-एक घंटे की मेरी चार बुकिंग होती थीं और सुबह छः बजे तक मैं चुदवाई जाती थी।

चार दिन बाद खलील और उसका एक साथी मुझे और दो लड़कियों को मस्ती के लिए खंडाला ले जा रहे थे, रास्ते में एक जगह गाड़ी रोककर सब लोग दारू पीने लगे और हम लड़कियों से अपने लंड चुसवाने लगे। थोड़ी देर बाद दूसरी पार्टी के लोग आ गये और गोलीबारी शुरू हो गई। खलील और उसके साथी को गोली लगी और वो वहीं ढेर हो गए। मैं गाडी के नीचे छुप गई। मेरे साथ वाली लड़की को दूसरी पार्टी के लोग उठा के ले गए। थोड़ी देर बाद मैं बाहर निकल कर आ गई और बस पकड़ के वापस अपने गाँव चली गई। आज मैं एक खुशहाल जिन्दगी जी रही हूँ। मेरी आप सबसे यह प्रार्थना है

“धंधे से नफरत करो, धंधे वाली से नहीं”

आपकी उषा रांड

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