गाण्ड चुदाई का आनन्द -1

(Gaand Chudai Ka Aanand -1)

This story is part of a series:

नेहा वर्मा

रोहन और साहिल नये नये कॉलेज में आये थे और शहर में ही कॉलेज के पास उन्होंने एक कमरा किराये पर ले रखा था। जवानी का नया नया जोश भी था और वो जवानी का पूरा लुत्फ़ भी उठाना चाहते थे। उन्हें स्वतन्त्र माहौल मिल गया था। मां बाप का कोई डर नहीं, यहां कोई भी कुछ कहने वाला नहीं था। सबसे पहले उन्होंने लुत्फ़ शराब का उठाया। वे दोनों लगभग रोज शाम को एक आधी बोतल ले आते थे और पीते थे। कुछ दिनों के बाद उन्होंने एक सी डी की दुकान से ब्ल्यू फ़िल्म भी किराये पर लाना आरम्भ कर दिया था। एक दिन…

शाम के आठ बजे थे। नहा धो कर वे दोनों ही बोतल खोल कर पीने बैठ गये थे। टिफ़िन आ चुका था। साहिल ने टी वी खोल कर कर किराये पर लाई हुई सीडी प्लेयर पर लगा दी और दारू का दौर चलने लगा। ब्ल्यू फ़िल्म भी चल रही थी। एक के बाद एक चुदाई के सीन आने लगे थे। रोहन और साहिल पर भी रंग चढ़ने लगा।

‘भेनचोद अन्ग्रेज औरतें क्या मस्त होती हैं…’ रोहन गर्म होता हुआ बोला।

‘हाँ यार, साली की चूत तो देख… लगता है अभी चोद डालूं…!’ साहिल अपना लण्ड पजामे के ऊपर से मसलता हुआ बोला। रोहन ने साहिल को देखा, साहिल का लण्ड खड़ा हुआ था। उसे देख कर रोहन का लण्ड भी जोर मारने लगा। पहले तो वो शरमा कर लण्ड दबा रहा था, पर साहिल को देख कर वो भी अपना लण्ड को हल्के हाथों से उपर नीचे करने लगा।

– अन्ग्रेजों का लण्ड भी देख कितना मोटा और लम्बा होता है… अपना तो उनके सामने कुछ भी नहीं है। रोहन ने अपना लण्ड सहलाते हुए कहा।
‘तो क्या हुआ, लण्ड तो तेरा भी बहुत जोर मार रहा है ‘ साहिल ने उसके लण्ड को मसलता हुआ देख कर कहा।
‘अरे ! ये मादरचोद… लण्ड को कैसे चूस रही है… ! हाय मेरा लण्ड भी ये मां की लौड़ी चूस ले…! ‘ रोहन ने अपना लण्ड दबाते हुए कहा।

‘उसे मां चुदाने दे…तू कहे तो…तेरा मसल दूं?’ कहते हुए साहिल ने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। रोहन एकबारगी सिहर गया। उसका हाथ हटाते हुए कहा- मत कर यार ! गुदगुदी होती है।

गुदगुदी तो होगी ही, पर मजा भी तो आता है, साहिल ने अपना हाथ लण्ड के पास रोहन के हाथ पर रख दिया और लण्ड पकड़ने की कोशिश करने लगा। पहले तो रोहन को अच्छा नहीं लगा, पर उसके हाथ की रगड़ से उसे मजा आने लगा। धीरे धीरे रोहन ने विरोध करना बंद कर दिया। अब लण्ड साहिल की गिरफ़्त में आ गया। पाजामे के ऊपर से ही वो लण्ड को सहलाने लगा। रोहन को मजा आने लगा। उसका लण्ड अब फ़ड़फ़डाने लगा।

साहिल, तेरा कैसा है?…लगता तो मस्त है! कैसे पजामे में से बाहर निकलने को बैचेन हो रहा है!’ रोहन ने अपना हाथ साहिल के लण्ड पर रख दिया और उसे दबा दिया। साहिल के मुख से आह निकल पड़ी। उसने कोई विरोध नहीं किया।
दोनो नशे में मदहोश थे। आंखें लाल हो चुकी थी। दोनों धीरे धीरे पास आने लगे और एक दूसरे को नशीली निगाहों से देखने लगे। रोहन के पाजामे का नाड़ा खुल चुका था। साहिल ने रोहन का लण्ड बाहर निकाल लिया। पास में देसी घी का डब्बा पड़ा था, साहिल ने उसमें से थोड़ा सा घी निकाल कर रोहन के लण्ड पर मल दिया और उसे चिकना कर दिया।

अब चिकने लण्ड पर मुठ मारने में साहिल को भी आनन्द आने लगा था। रोहन भी आहें भरने लगा था। अचानक साहिल ने रोहन को चूम लिया और चूमते हुए उसके होंठों तक आ गया। रोहन भी अपना आपा खो बैठा और और उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिये और एक दूसरे को चूमने लगे।

– रोहन, आई लव यू…यार !
– साहिल, चूमते रह, मजा आ रहा है ! इतने दिन तक तू कहाँ था भोसड़ी के?
– मुठ मारने में कितना मजा रहा है, रस निकाल दे मेरे लौड़े का !

– हाँ रे ! बहुत मजा आ रहा है… और घिस दे यार…माँ चोद दे मेरे लण्ड की !’ दोनो के पजामे उतर चुके थे। लण्ड की घिसाई चल रही थी। दोनों के लण्ड फ़ड़फ़ड़ा रहे थे। मुठ अब जोर जोर से मार रहे थे। अचानक साहिल ने रोहन को जोर का धक्का दिया और वहीं चित लेटा दिया और उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से सुपाड़े को चूसने लगा। रोहन तड़प उठा और साहिल को खींचने लगा। साहिल ने इशारा समझा और 69 पोजिशन में आकर अपना लन्ड उसके मुँह में डाल दिया।

दोनो तरफ़ से कस कर लण्ड की चुसाई हो रही थी। इतने में रोहन का शरीर कसमसाया और उसके लण्ड ने लावा उगल दिया। साहिल ने तुरन्त मुँह हटा दिया और हाथ में वीर्य भर लिया। पर साथ में उसका लण्ड मसलता ही रहा। उसके लण्ड के आस पास उसका वीर्य फ़ैल गया था। इतने में साहिल भी छूट गया और रोहन का मुख वीर्य से भर उठा।

रोहन ने वीर्य को मुख से निकाल दिया और गले के पास से बहता हुआ नीचे बिस्तर पर गिरने लगा। दोनों ही झड़ चुके थे। ब्ल्यू फ़िल्म पर किसी का भी ध्यान नहीं था। पास में पड़ा तौलिया उठा कर दोनों ने अपने लण्ड और मुख साफ़ किये और नंगे ही बैठ गये। माहौल गर्म हो गया था। उन दोनों ने अब अपनी बनियान भी उतार कर मरजात नंगे हो गये थे। पंखे की हवा उनके शरीर को सहला रही थी। दोनों के जवान चिकने शरीर और उनकी कसी हुई मसल्स उभरी हुई दिख रही थी।

– मजा आ रहा है ना साहिल…
-हाँ यार, इसमें इतना मजा आता है मुझे तो पता ही नहीं था।
-देख घी लगा कर कितना चिकना लग रहा है तेरा लण्ड, रोहन।
– तू भी लगा ले यार…चल मैं लगा देता हूँ…

रोहन घी निकाल कर साहिल के लन्ड पर मलने लगा। साहिल का लण्ड फिर से तन्ना उठा। साहिल ने रोहन का लण्ड फिर से पकड़ लिया। दोनो फिर से झूम उठे। दोनों एक बार फिर एक दूसरे का मुठ मारने लगे।

अचानक साहिल बोला- रोहन मेरी गाण्ड में खुजली होने लगी है, शान्त कर दे यार ! साहिल ने अपनी गाण्ड रोहन की तरफ़ करते कहा।
रोहन ने घी के डब्बे में से घी निकाल कर उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और घिसने लगा। साहिल के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
‘रोहन यार पेल दे लौड़ा गाण्ड में, मजा आ जायेगा !
– सच ! पेल दूँ क्या?

साहिल घोड़ा बन गया। रोहन ने अपना कड़कता लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पर रख दिया। उसकी चिकनी मस्कुलर गाण्ड पर हाथ फ़ेरा और लण्ड गाण्ड के फ़ूल पर दबाने लगा। छेद चिकना था, लण्ड अन्दर घुस पड़ा।

-मजा आ गया रोहन, चोद डाल साली हरामी गाण्ड को। रोहन ने जोर लगाया और लन्ड घी की सहायता से अन्दर घुसने लगा।
साहिल दर्द से भरे स्वर में बोला- तेरी तो टाईट गाण्ड है… मेरे तो लण्ड की भी मां चुद जायेगी यार, कहीं छिल ना जाये?
-हाय रे, रोहन, दर्द होता है, पर पेल दे लण्ड, इस की तो मां दी फ़ुद्दी।

रोहन ने लण्ड बाहर निकाल कर फिर से अन्दर पेल दिया। और अब धक्के चल निकले। साहिल की गाण्ड चुदने लगी। रोहन का लौड़ा फूलने लगा और कड़कने लगा। साहिल को भी अब दर्द कम हो रहा था। पर उसे गाण्ड मराने में मजा आ रहा था। साहिल का लण्ड भी नीचे फ़ुफ़कारे भर रहा था, लन्ड नीचे लटकता हुआ फ़ड़क रहा था। कुछ ही देर में रोहन का वीर्य छूट पड़ा और साहिल की गान्ड में भरने लगा। रोहन झड़ चुका था।

अब दोनों ने अपना पोज बदला और साहिल का कड़कता लण्ड रोहन की गाण्ड में टिका था। रोहन की गाण्ड टाईट नहीं थी, फिर देसी घी का असर, लण्ड फ़क से रोहन गाण्ड में घुस गया, रोहन एक बार तो दर्द से कराह उठा पर सम्भल गया।
साहिल अपना लण्ड रोहन की गाण्ड में पेलने लगा। रोहन गान्ड चुदाई को एन्जोय कर रहा था। वो धीरे से नीचे पांव पसार कर पेट के बल लेट गया और अपनी आन्खे बंद कर ली और गाण्ड मराने क भरपूर आनन्द लेने लगा।
साहिल रोहन की पीठ पर लिपट कर लण्ड पेल रहा था। गाण्ड के फ़ूल की चमड़ी लण्ड के साथ साथ बाहर निकल रही थी और अन्दर जा रही थी। दोनों के चिकने शरीर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे।

अचानक साहिल के लण्ड ने पिचकारी छोड दी और वीर्य निकल पड़ा। साहिल हाय कह कर रोहन की पीठ से चिपक गया और वीर्य रोहन की गान्ड में भरने लगा। साहिल अब पूरा झड़ चुका था। उसका लण्ड अपने आप बाहर आ गया था। अब साहिल और रोहन आराम से बैठ गये। उन्होंने शराब का अन्तिम जाम बनाया और आज के मजे के नाम पर चीअर्स करके पीने लगे।

आज दोनों जवानी का पूरा लुत्फ़ उठा कर सन्तुष्ट थे। जाम समाप्त हो चुका था और अब टिफ़िन की तैयारी हो रही थी।

वो दोनों इस बात से अन्जान थे कि उन्हें किसी जगह से मेरी दो आंखें उन्हें ये सब करते हुए देख रही थी। इस दौरान मैं दो बार अपनी भोसड़ी में अंगुली डाल कर रस निकाल चुकी थी।… हमेशा की तरह मैं उन दोनों से चुदने का कोई बढ़िया प्लान बना रही थी… उन्हें अपने चक्कर में लेकर दो दो लण्ड का मजा लेने का प्लान।
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