मेरा गांडू भाई और मेरे चोदू यार-6

(Mera Gandu Bhai Aur mere Yar- Part 6)

This story is part of a series:

बहुत दिनों से लंड न मिलने से मेरी चुत में आग लगने लगी थी. अब मैं किसी अच्छे लंड वाले लड़के की तलाश में थी. इसलिए मैं अब कॉलेज में किसी अच्छे लड़के को ढूंढने लगी, पर उधर मेरे लायक कोई लंड मिला ही नहीं.

उन्हीं दिनों मैंने फिट रहने के लिए और अच्छा फिगर बनाने के लिए जिम जाना शुरू कर दिया.

एक पॉश एरिया के जिम में मैंने मेम्बरशिप ले ली. मैं इस जिम में जाने लगी. उधर मुझे वहां एक लड़का मिला, जो मेरे काम का था.

जिम में वो ही आकर मुझसे बात करता था, तो मैं भी उससे वर्कआउट के तरीके पूछने लगी थी या कभी सपोर्ट देने के लिए उससे बोलने लगी थी. ऐसे ही मैं उस पर डोरे डालने लगी थी.

कुछ दिन बाद ही उसने मुझे प्रपोज़ कर दिया और मैंने हां बोल दी. मुझे तो लंड से मतलब था.

उस लड़के का नाम प्रीत सिंह चड्डा था. सब उसे प्रीत बोलते थे.

वो अमेरिका से पढ़ कर इंडिया आया था. अभी वो कोई काम नहीं करता था, उसके डैडी का कोई ट्रांसपोर्ट का बिजनेस था.

हम दोनों की प्यार मुहब्बत की बातें होने लगी थीं. वो मेरे जिस्म को भी छूने लगा था. मुझे किस भी कर लेता था.

एक दिन उसने मुझसे कहा- चलो हम दोनों घूमने के लिए गोवा चलते हैं.
मैं बोली- नहीं यार … घर वालों से परमिशन नहीं मिलेगी … और मिलेगी भी तो मम्मी बोलेंगी कि मेरे भाई को भी साथ में लेकर जाओ. और भाई होगा तो क्या मज़ा आएगा?
प्रीत- तुम एक बार ट्राई तो करो, शायद परमिशन मिल जाए.
मैं- ठीक है, मैं ट्राई करूंगी

फिर चार दिन ऐसे ही बीत गए.

पांचवें दिन मैंने मम्मी से पूछा- मम्मी हमारे कॉलेज का ग्रुप गोवा जा रहा है, वहां मैं भी चली जाऊं क्या … प्लीज़!
मम्मी- कौन कौन जा रहा है?
मैंने अपनी 4-5 सहेलियों के नाम बता दिए.

मम्मी- कितने दिन के लिए जा रही हो?
मैं- बस 2 दिन के लिए.
मम्मी- ठीक है, मैं तुम्हारे डैडी से पूछ कर बताती हूँ.

दूसरे दिन मम्मी मुझसे बोलीं- ठीक है जाओ. कब जा रही हो?
मैं- मैं डेट पूछ कर बताती हूँ.

मैंने प्रीत को कॉल की और उसे परमिशन की बात बताते हुए पूछा कि गोवा कब जाना है?
उसने कहा कि फ्राइडे को दिन में चलते हैं.
मैं बोली- ठीक है, मैं मम्मी को बता देती हूं.

मैंने मम्मी को बता दिया और उन्होंने रजामंदी दे दी. साथ ही मम्मी ने मुझे दस हज़ार रूपए भी दे दिए.

अब मैं जाने वाले दिन के लिए पैकिंग कर रही थी, तब आदी ने पूछा- कहां जा रही हो दीदी?
मैं- मैं गोवा जा रही हूँ, प्रीत के साथ … तुम मम्मी को मत बताना.
आदी- नहीं … मैं बता दूंगा … तुम मेरे लिए कुछ नहीं कर रही हो … और न ही मुझे बाहर कुछ करने दे रही हो. मैं मम्मी को सब बता दूंगा.
मैं- अरे बेटा, बस मैं गोवा से वापस आ जाऊं, फिर मैं तुम्हारे लिए इंतजाम करती हूं. जो तुम बोलो ओके … मेरी जान, तुम गुस्सा न हुआ करो.

ये कह कर मैंने उसे गाल पर किस की, तो वो थोड़ा शांत हो गया.

मैं और प्रीत ने थोड़ी शॉपिंग की, फिर उसकी कार से गोवा के लिए निकल गए. हम दोनों शाम में 7 बजे गोवा जा पहुंचे. होटल में चैक इन किया और फ्रेश होकर मैंने एक सेक्सी सी नाइटी पहन ली. ये वाली नाइटी आते हुए शॉपिंग में ली थी.

इस नाइटी में मैं बहुत सेक्सी लग रही थी. वो मेरी जांघों तक की थी. इसमें ऊपर दो डोरियां बंधी थीं, जिससे ये बेबी डॉल नाइटी लटकी थी. इस नाइटी में मेरे बड़े बड़े चूचे बड़े मस्त दिख रहे थे.

इसके बाद हम दोनों ने कमरे में ही डिनर किया. फिर मैंने घर पर आदी को कॉल करके बता दिया कि हम पहुंच गए हैं, मम्मी को बता देना.

ऐसे ही 10 बज गए.

प्रीत खाना खाकर वाशरूम चला गया था. वो कमरे में आया और मेरे साइड ने बैठ कर टीवी देखने लगा. साथ ही मेरी जांघ में हाथ रख कर सहलाने लगा. मैं भी उससे कुछ नहीं बोली. उसने धीरे धीरे अपना हाथ ऊपर ले जाना शुरू कर दिया था. फिर उसने मेरी तरफ अपने होंठ बढ़ा दिए, तो मैं उसे किस करने लगी. अब उसका हाथ मेरे मम्मों पर पहुंच गया था.

आज मुझे प्रीत के लंड का मजा मिलने वाला था.

उसने मेरी नाइटी की डोरियों को मेरे कंधे से हटा कर साइड में कर दिया और मेरे मम्मों को दबाने लगा और चूसने लगा. इससे मैं गर्म होने लगी थी.

वो खड़ा हो कर अपनी टी-शर्ट उतारने लगा, तो मैं भी खड़ी होकर उसकी टी-शर्ट उतारने लगी.

मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी नाइटी नीचे गिर गई और मैं पूरी नंगी हो गई. मैंने अपने नंगे हो जाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. बस उसकी टी-शर्ट उतार दी और उसका शॉर्ट्स भी निकाल दी.

अब वो अंडरवियर में था.

उसने मुझे उठाया और बेड पर ले जाकर मुझे लिटा दिया. वो मेरे जिस्म से खेलने लगा.

वो शायद किसी और लड़की के साथ भी काफी बार सेक्स कर चुका था, इसलिए साफ़ मालूम चल रहा था. मतलब उसे सब पता था कि एक लड़की को जैसे खुश करते हैं.

मैं बहुत मज़े में थी. मैंने उसकी अंडरवियर उतार दी और मैं उसका लंड देख कर थोड़ा थोड़ा डर गई. क्योंकि उसका लंड 8 इंच लंबा और अच्छा ख़ासा मोटा था. इससे पहले मैंने इतना बड़ा लंड नहीं लिया था.

वो मेरे मम्मों के बीच में अपना लंड डाल कर मेरे दोनों चूचों को साइड से दबा कर दूध चोदने लगा. ये मेरे साथ पहली बार था जब मेरे मम्मों के बीच में किसी का लंड मुझे मजा दे रहा था.

फिर वो मेरे ऊपर आकर मेरी चुत पर लंड रगड़ने लगा. मैंने लंड की गर्मी पाते ही अपनी चुत खोल दी और उसने धीरे से लंड अन्दर डाल दिया. उसका लंड अन्दर घुसा, तो मेरी चीख निकल गई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
वास्तव में मेरी चुत के हिसाब से उसका लंड बड़ा लम्बा और मोटा था.

वो मेरी चीख को नजरअंदाज करते हुए मुझे चोदने लगा. उसने मुझे अलग अलग पोज़ में करीब 20 मिनट तक चोदा और मेरे अन्दर ही झड़ गया.

मैं चुद कर मस्त हो गई थी और ऐसे ही लेटी थी. फिर मैं उठी और बाथरूम में जाकर शावर चालू करके बाथ लेने लगी.

तभी प्रीत भी वहां आ गया और हम दोनों साथ में नहाने लगे. मेरे जिस्म की आग से उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा. उसने मुझे कमोड पर हाथ रख कर झुकने का कहा और वो पीछे से लंड डाल कर मुझे चोदने लगा. इस बार वो काफी देर मुझे ऐसे ही चोदता रहा, लेकिन वो झड़ा नहीं. हम दोनों थक गए थे, तो मैं तौलिया लेकर बाहर आ गई.

मैंने शरीर से पानी को साफ़ किया और सोफे पर आकर चुत खोल कर बैठ गई. प्रीत फिर से मुझे चोदने लगा. थोड़ी देर चोदने के बाद उसने मुझे गोद में उठा लिया और चोदते चोदते मुझे बेड पर ले गया.

वहां उसने मुझे नीचे किया और अपने झटके तेज़ कर दिए. थोड़ी देर बाद वो झड़ गया.

मैं भी दो बार की लम्बी चुदाई से बहुत थक गई थी. हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे. मुझे पता भी नहीं चला कि मैं कब सो गई.

मैं सुबह 9 बजे उठी, तो देखा कि प्रीत मेरे बाजू में ही सो रहा था. वो एकदम नंगा था और उसका लंड खड़ा था.

फिर मैं उठी और प्रीत की टी-शर्ट पहन कर बाथरूम में गई और फ्रेश होकर बाहर आ गई. तब तक प्रीत भी उठ गया था. फिर हम दोनों ने नाश्ता किया और नहा कर रेडी होकर घूमने चले गए.

हम शाम तक बीच पर, मॉल वगैरह में घूमे और फिर रात में क्लब चले गए. हम रात को 9 बजे होटल आ गए.

दिन भर की घुमाई से मैं बहुत थक गई थी, तो मैं आते ही बेड पर गिरी और कब सो गई, पता ही नहीं चला.

करीब 11 बजे प्रीत ने मुझे उठाया और बोला- चलो खाना खाते हैं.

मैं उठी, बाथरूम में गई और फ्रेश हुई. मैं उधर अपने कपड़े उतार कर नंगी ही बाहर आ गई और नाइटी पहन ली.

तब तक प्रीत ने खाना मंगा लिया था. हम दोनों खाना खाकर फ्री हुए और मैं सोफे पर बैठ कर टीवी देखने लगी.

प्रीत बाथरूम चला गया. थोड़ी देर में प्रीत नंगा ही बाहर आ गया. वो मुझे किस करते हुए उठा कर बेड पर ले गया और मेरे बूब्स दबने लगा, किस करने लगा.

थोड़ी देर बाद उसका लंड खड़ा हो गया और वो मेरी चुत पर रगड़ने लगा. अगले ही पल उसने लंड अन्दर डाला और चोदने लगा. उस रात उसने मुझे 3 बार चोदा और फिर हम 2 बजे सो गए.

सुबह हम दोनों ने उठ कर नाश्ता किया और कहीं नहीं गए. आज हम दोनों रूम पर ही रहे थे. दिन में उसने मुझे एक बार चोदा, फिर शाम को हम दोनों क्लब चले गए. वहां खूब एन्जॉय किया.

मैंने प्रीत से कहा- चलो यार … अब चलते हैं.
प्रीत समझ गया और बोला- ओके चलो.

हम दोनों बाहर आ गए. प्रीत ने कहा- चलो लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं.
मैं बोली- ठीक है चलो.
हम कार में बैठ कर हाईवे पर निकल गए … हाईवे पूरा खाली ही था.

उस समय प्रीत एक हाथ से मेरे मम्मों को दबाने लगा और बोला- डार्लिंग एक बात बोलूं, करोगी?
मैं बोली- हां बोलो.

तब उसने मेरे मम्मों पर से हाथ हटा कर अपने पेंट की जिप खोल कर अपना लंड बाहर निकाला और मुझसे बोला- इसे चूसो.

मैं झुक कर उसका लंड चूसने लगी और वो मस्ती से मेरे बालों को सहलाए जा रहा था. मैंने 15 मिनट तक उसका लंड चूसा.

उसने गाड़ी एक जगह रोकी, मैंने उठ कर देखा, तो हम समुद्र के किनारे बीच पर थे. वहां इस समय कोई नहीं था.

प्रीत बाहर उतर गया, तो मैं भी उतर गई. हम दोनों एक दूसरे की बांहों में हाथ बाहें डाल कर बाहर थोड़ा घूमे, इधर उधर देखा, मगर वहां कोई नहीं था.

अब प्रीत ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मुझे किस करने लगा.

मैं एक वन पीस ड्रेस पहन कर आई थी. प्रीत ने मेरी ड्रेस की चेन खोल दी और मेरे कंधे से ड्रेस को सरका दिया. अब ड्रेस मेरी कमर तक थी और मेरे चूचे एकदम नंगे थे. प्रीत मेरे मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा.

थोड़ी देर बार उसने मेरी सैंडिल के साथ ड्रेस को गाड़ी में डाल दिया. अब मैं पूरी नंगी थी, वो भी खुले आसमान के नीचे. ये पहली बार था, जब मैं कहीं बाहर खुले में चुद रही थी.

उसने मुझे नीचे बैठने को कहा और लंड बाहर निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया. मैं लंड चूसने लगी.

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थोड़ी देर बाद उसने मुझे खड़ा किया और कार की डिग्गी पर मुझे झुका दिया.

उसने पीछे से अपना लंड मेरी चुत में डाला और अपने दोनों हाथ से मेरे कंधे को पकड़ कर मुझे चोदना चालू कर दिया. दस मिनट बाद ही वो झड़ गया.

मुझे चोदने के बाद वो उठा और गाड़ी में बैठ गया. वो मुझसे बोला- चलो अब चलते हैं.

मैं बोली- मुझे कपड़े तो पहन लेने दो.
वो बोला- गाड़ी में ही पहन लेना, अभी ऐसे ही बैठ जाओ.

मैं नंगी ही गाड़ी में बैठ गई और हम चले आए. रास्ते में मैंने कपड़े पहन लिए. कोई दो बजे रात को हम दोनों रूम पर आ गए.

मैं सीधा बाथरूम गई और नहाने लगी. प्रीत भी वहां आ गया और फिर हम साथ में नहाकर बाहर आ गए. मैं नंगी ही सोने के लिए बेड पर चली गई.

फिर सुबह उठी तो प्रीत मेरे साइड में ही सो रहा था. मैंने उसे उठाया- चलो, आज वापस जाना है.

तब उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मेरे मम्मों को दबाने लगा. मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया. सुबह सुबह सबका लंड खड़ा ही होता है.

मैं उठी और उसके लंड को अपनी चुत पर लगाकर बैठ गई और झुक कर उसको किस करने लगी. थोड़ी देर बाद मैं लंड पर उछलने लगी.

थोड़ी देर में वो झड़ गया और हम दोनों में बाथरूम चले गए. फिर नहा-धो कर बाहर आए, रेडी हुए और वापस मुम्बई के लिए निकल आए. इस तरह से प्रीत के साथ में 2 दिन गोवा में चुदा कर वापस आ गई थी. वापस आते समय मैं अपने भाई के लिए एक गिफ्ट ले आई थी, जो मैंने उसे आते ही दे दिया था.

उस रात में मैं प्रीत से कॉल पर बात कर रही थी. उसने मुझसे कहा- वीडियो कॉल करो.
मैंने की, तो वो बोलने लगा- कपड़े उतारो चूचे दिखाओ.

मैं आईने के पास खड़ी होकर उससे बातें कर रही थी. हम दोनों वही सब सेक्स की बातें कर रहे थे. मैं पूरी नंगी हो कर उससे बात कर रही थी.

तभी आदी जाग गया और मुझे देखने लगा.

मैंने उसे देखा, तो मैं प्रीत से बोली- अच्छा चलो … कल बात करेंगे. मैं सोने जा रही हूँ.
वो बोला- ठीक है.
उसने कॉल कट कर दी.

मैं आदी से बोली- क्या देख रहे हो?
उसे ये बोल कर मैं आईने में अपने बाल संवारने लगी.

आदी- कुछ नहीं दीदी, आप मेरे लिए वहां से कुछ लाई नहीं?
मैं- लाई तो थी, सुबह दी थी न तुम्हें.

मैं नंगी ही जाकर बेड पर उसके बाजू में लेट गई.

आदी- वो नहीं, आप बोल कर गई थीं कि वहां से आकर मेरे लिए कुछ करोगी. आप कब करोगी?
मैं- अरे आदी बस … इस बार मम्मी पापा को बाहर जाने दो, फिर मैं तुम्हें पक्का किसी से चुदवाऊंगी.
आदी मेरे मम्मों को दबाते हुए बोला- पक्का न?
मैं- हां बेटा … और चलो अब सो जाओ.

मैं उठी, कपड़े पहन कर मैं भी सो गई.

अब मैं आदी के बारे में सोचने लगी थी कि अब इसके लिए लंड कहां से लाऊं.

तभी मुझे एक आईडिया आया कि क्यों न किसी कॉलब्वॉय को बुलाकर आदी को उससे चुदवा दूँ. लेकिन मैं कॉलब्वॉय को अपने घर पर नहीं बुलाना चाहती थी. इसलिए अब मैं कोई जगह ढूंढने लगी और साथ में कोई प्लेब्वॉय भी खोजने लगी थी, जो गांड मारने में निपुण हो.

फिर मुझे ऑनलाइन साइट पर एक कॉलब्वॉय मिला. वो मुम्बई का ही था. उससे 5 हज़ार में बात हो गई. मुझे उसको बस डेट और जगह बतानी थी. लेकिन मेरे पास कोई जगह नहीं थी.

कुछ दिन ऐसे ही निकल गए.

फिर एक दिन मैंने प्रीत से पूछा- तुम्हारे फार्महाउस पर कौन रहता है? उधर फैमिली वाले जाते है क्या?
प्रीत- हां जाते हैं, लेकिन अभी तो सब पंजाब गए है. तुमने खुद भी तो मेरे साथ जाकर देखा है … उधर कोई नहीं रहता है. यहां मैं और मेरा भाई ही हैं.
मैं- अभी फार्महाउस खाली है क्या?
प्रीत- हां खाली है … क्यों क्या हुआ?
मैं- क्या मैं वहां एक दिन रह सकती हूं … प्लीज़ डार्लिंग.
प्रीत- हां रह सकती हो, हम कल ही चलते हैं.
मैं- नहीं … मुझे वहां एक काम है … अकेले.
प्रीत- तुम्हें क्या काम है?
मैं- मैं नहीं बता सकती.

ऐसे ही थोड़ी देर बहस चलती रही, फिर मैंने बोल दिया कि मेरी एक फ्रेंड है, वो अपने बीएफ से मिलना चाहती है, लेकिन उसे कोई प्लेस नहीं मिल रहा है. जब मैंने उससे तुम्हारे फार्म हाउस के लिए कहा, तो उसने मुझसे कहा कि हां तेरे बीएफ का फार्महाउस ठीक रहेगा, वहीं पर चलते हैं.

प्रीत मेरी बात सुन रहा था.

मैं- प्लीज़ जान … एक दिन की ही बात है.
वो मान गया और उसने कहा- शाम को चाबी ले लेना.
मैंने शाम में उससे चाबी ले ली और रात को उस कॉलब्वॉय को सब डिटेल्स दे दी.

अब दूसरे दिन मैं मम्मी से बोली कि मैं अपनी सहेली के यहां जा रही हूँ. मुझे शाम को देर हो जाएगी, इसलिए मैं आदी को भी साथ लेकर जा रही हूँ.
मम्मी ने हां कर दी.

मैं और आदी, आदी की बाइक से वहां 11 बजे पहुंच गए.

उसका फार्महाउस सिटी से बाहर था, ऐसी जगह देख कर आदी बोला- दीदी ये किसका है … और यहां क्यों ले आई हो?
मैं- चलो … अन्दर बताती हूँ.

मैं अन्दर गई, मैं वहां पहले भी प्रीत के साथ आ चुकी थी, सो मुझे सब पता था.

मैं सीधा प्रीत के रूम में गई और उसकी अल्मारी से प्रीत की टी-शर्ट निकाल कर ले आई. मैंने अपने कपड़े उतार कर एक टी-शर्ट पहन ली.

थोड़ी देर बाद मुझे कॉल आया- हैलो मेम … मैं आ गया हूं. आप कहां हैं?
मैं बोली- रुको मेरा फ्रेंड आ रहा है, वो तुम्हें लेकर आएगा.

मैंने आदी से कहा- बाहर जाओ, एक लड़का आ रहा है, उसे लेकर अन्दर आओ. उसके सामने तुम मुझे दीदी मत बोलना, तन्नू बोलना … ओके!
आदी- ठीक है.

आज मेरे भाई की गांड मराने का सीन मुझे देखना था. इस घटना का मजा आपको भी मिलेगा कि एक भाई अपनी बहन के सामने कैसे गांड मराता है. इधर और भी बहुत कुछ हुआ था. जिसे मैं अगले भाग में तफसील से लिखूँगी.

इस सेक्स कहानी से आपको कितना मजा आ रहा है, मुझे आपके मेल का इन्तजार रहेगा.
[email protected]
कहानी जारी है.

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