यह कैसा संगम-5

नेहा वर्मा
सुन्दर की ट्रेनिंग के दौरान प्रिया और राधा गोपाल से खूब चुदी थी। सुन्दर ट्रेनिंग से वापस आ चुका था। अब तो गोपाल को सुन्दर की उपस्थिति बहुत खराब लग रही थी।कारण था कि जवान राधा को तो सुन्दर खूब चोदता था पर गोपाल के पल्ले उसकी माँ ही आती थी। जिस पर सुन्दर भी उसे जम के बजाता था।

एक बार राधा की माँ प्रिया ने बातों ही बातों में राधा को कहा कि सिर्फ़ एक बार सुन्दर और गोपाल को वो किसी तरह राजी कर ले कि दोनों उसे एक साथ चोदें, उसकी दिल में बस यही तमन्ना रह गई है।

माँ की बात सुन कर राधा भौचक्की सी रह गई। इतना चुदने के बाद अब इच्छा और बढ़ गई थी। पर वो समझ सकती थी कि माँ की ऐसी इच्छा अधिक मस्ती लेने की थी। वैसे राधा का मन भी बहुत करता था कि दोनों मिलकर उसे एक साथ चोदें तो उसकी भी दिल कली खिल जाये। कितना अच्छा होता कि उसकी चूत और गाण्ड में दो दो लौड़े एक साथ घुस कर चोदें और उसे जन्नत का सुख दें।
पर कैसे यदि गोपाल ने उसे सुन्दर के सामने चोद दिया तो उनमें झग़ड़ा होना स्वभाविक है। इस कारण उसने इसका ख्याल मन मार कर छोड़ दिया था। पर अब उसने अपनी माँ के मन की बात जानी तो उसके दिल में भी खलबली मचने लगी। उसका मन भी तड़पने लगा कि उसके जिस्म में भी दो दो लण्ड एक साथ ठूंसे जाएँ। इस सोच ने उसके दिल को तड़पा दिया और अपनी चूत दबा कर वो वहीं बैठ गई।
क्या हुआ राधा?

यह क्या कह दिया माँ? मुझे तो जोर से चुदने की इच्छा होने लगी है !

तो चल, मेरे कहे अनुसार काम कर। आज ही चुदवाती हैं दो दो लण्डों से !!!

यूं तो प्रिया दोनों से अलग अलग खूब चुदाती थी। शायद यह बात दोनों ही मन ही मन में जानते भी थे। बस इस बात का उसे फ़ायदा उठाना चाहिये। पर वो कहे कैसे? तभी प्रिया के दिमाग में एक तरकीब आई। उसने उसे आजमाने का मन बना लिया। प्रिया ने जब यह बात राधा को बताई तो राधा का मन भी दोनों से चुदाने को कुलबुलाने लगा।

शाम को दोनों खाने पर आ गये थे। दोनों की झिझक उतारने के लिये उन्हें शराब पिलाना जरूरी था। सो काफ़ी देर तक वो दोनों शराब पीते रहे। सुन्दर को जाल में फ़ंसाना बहुत सरल था। सो प्रिया ने सबसे पहले सुन्दर को उत्तेजित किया। वो उसके पास बैठ कर चुपके से उसका लण्ड सहला देती तो सुन्दर भी प्रिया के बोबे दबाने की कोशिश करता।

मेज पर प्रिया अपनी चूचियों को रख कर दबाती तो उसके मम्मे फ़ूल कर सभी को नजर आते। गोपाल का लण्ड भी खड़ा होने लगा था। मम्मी को ऐसे एक्शन करते देख कर राधा भी उत्तेजित होने लगी थी। जब वे सरूर में आ गये तो प्रिया ने अपने नीचे गले के ब्लाऊज के ऊपर से अपना पल्लू गिरा कर अपने आधे उरोज सुन्दर को दिखाये। सुन्दर ने एक झटके से प्रिया को दबोच लिया।

बहुत कड़क माल लग रही हो मेरी जान, चुदा ले मेरी जान ! हिच्च …

प्रिया सुन्दर की बाहों में मचल उठी।

अरे मर जाऊंगी, गोपाल देखो ना… प्लीज मना करो ना।

अरे गोपाल, आजा मेरे यार, आज तू भी आ जा। राधा की माँ मस्त राण्ड है … बेचारी को हम जैसा कहाँ मिलेगा। आजा तू भी इसका रस पी ले।

अरे छोड़ दे सुन्दर, देख राधा नाराज हो जायेगी !

अरे आ तो सही, कैसी मस्त लग रही है, बोबे तो मचका ही दे मेरे यार।

प्रिया अब गोपाल की बाहों में आ गई थी। प्रिया ने गोपाल को आंख मार दी।

सुन्दर, साली की चूचियाँ कितनी मस्त है … चोदने को मन करता है।

राधा यह सब बैठी देख रही थी। वो भला चुप कैसे रहती। उत्तेजना से उसका हाल भी बुरा हो रहा था। वो भी झट से उठ खड़ी हुई।

गोपाल, अरे माँ को छोड़ो, उसकी चूचियों को लग जायेगी।

गोपाल ने प्रिया को छोड़ कर राधा को थाम लिया।

अरे गोपाल, ये तो अपनी ही छमिया है, क्या चीज है यारा।

सुन्दर, मेरी तो जान है ये, बस साली को चोदना बाकी है।

सुन्दर चहका- तेरी ही चीज है मेरे दोस्त, कॉमन है यार, जरा चख तो सही।

ऐ नहीं, हिच… ये तेरी चीज है… तू ही चोद इसे…।

गोपाल, यह क्या कह दिया तूने? यह मेरी चीज… तेरी मेरी और राधा की दोस्ती तो जनम जनम का साथ है। मेरी है तो तेरी है। क्यूँ राधा… तू ही बता… हम तीनों अलग हैं क्या?

मेरे तो सुन्दर गोपाल कोई ना और तीजा। गोपाल तुमने यह कैसे सोच लिया कि मैं तुमसे अलग हूँ। मैं हूँ तो मेरी भी माँ भी अलग नहीं है। अब जब सुन्दर ने कह ही दिया है, तो दोस्ती का फ़र्ज निभा दो, मुझे चोद दो मेरे गोपाल।

लो गोपाल, चोद दे यार राधा को, उसका मन मत तोड़ … मै उसकी माँ को चोदता हूँ।

प्रिया ने काम बनता देख कर अपने को पहले चोदने की बात रख दी।

सुन्दर और गोपाल, तुम तो दोनों मेरे बेटे जैसे हो, मैं कैसे तुम्हें अलग अलग कर सकती हूँ। तुम एक साथ ही पहले मुझे चोदो फिर राधा को चोद देना।

अरे वाह क्या बात है आण्टी ! यह देखो मेरा तो लण्ड ही खड़ा हो गया। आपका इन्साफ़ सर आंखों पर।

और गोपाल तुम?

आण्टी मेरा तो लौड़ा कब से खड़ा है … आओ अब सभी कपड़े उतार दें।

सुन्दर ने झट से अपने कपड़े उतार दिये। गोपाल ने भी शरम करना उचित नहीं समझा। दोनों के मस्त लण्ड तन्नाये हुये 120 डिग्री पर इतरा रहे थे। राधा ने नीचे बैठ कर उनका गोपाल का सुपाड़ा खोला और उसे चूम लिया। फिर सुन्दर का सुपाड़ा खोल कर उसे चूमा भी और चूसा भी। दोनों ने मिलकर प्रिया की साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। फिर ब्लाऊज और ब्रा भी निकाल दिया। दोनों ने घुटनों के बल बैठ कर प्रिया की पनीली चूत को प्यार करके चाट लिया। राधा अपनी माँ को देख कर बहुत प्रसन्न हो रही थी। उसने पास जाकर माँ की चूचियाँ सहलाई और प्यार से होंठों पर चूम लिया।

मम्मी, अब प्यार से चुदवा लो, कर लो अपनी इच्छा पूरी। आपकी तरकीब काम में आ गई। आज हो जाने दो अपन सभी का संगम।

गोपाल बिस्तर पर जाकर पहले सीधा लेट गया। प्रिया ने उसका तना हुआ लण्ड हिला कर देखा। बहुत टाईट हो रखा था। वो अपनी टांगें खोल कर उसके लण्ड के ऊपर आ गई। अपनी चूत के पटों को फ़ैला कर उसमे गोपाल का लण्ड पिरो लिया। फिर उसके ऊपर लेट गई। गोपाल ने एक धक्का लगा कर प्रिया की चूत में अपना पूरा लण्ड घुसा दिया। प्रिया गोपाल के ऊपर लेट गई और अपनी गाण्ड खोल दी। अब सुन्दर की बारी थी। उसका भारी लण्ड प्रिया को अपनी गाण्ड में बहुत अच्छा लगता था। सुन्दर ने अपने लण्ड का सुपाड़ा प्रिया की गाण्ड पर दो तीन बार रगड़ा मारा और उस पर रख कर दबाव डाल दिया।

सुन्दर का मोटा लण्ड अन्दर घुसता चला गया। प्रिया के मन में ठण्डक होने लगी। उसकी दिली इच्छा पूरी हो गई थी। सुन्दर ने अपना लण्ड प्रिया की गाण्ड में घुसा कर धीरे धीरे चोदना आरम्भ कर दिया था। उसके धक्कों से गोपाल का लण्ड अपने आप ही प्रिया की चूत चोदने लगा था।
प्रिया गोपाल के गले में हाथ डाल कर उससे चिपक सी गई थी। चुदाई की मस्ती में उसके मुख से इस्स्स्स उह्ह्हह्ह जैसी चीखें सी निकल रही थी। राधा यह सब देख कर बेहाल हुई जा रही थी। उसकी चूत पानी गिराने लगी थी। सोच रही थी कि कुछ देर बाद जब उसकी चुदाई होगी तो कैसा मजा आयेगा?

राधा भी यह देख देख कर तेज सिसकारियाँ भरने लगी थी।

चोदो, मेरी माँ को जोर से चोदो, साली का कचूमर निकाल दो… छोड़ना नहीं… चोदो राण्ड को।

प्रिया चुदते हुए चीख भी रही थी।

सुन्दर… फ़ाड़ डाल साली गाण्ड को… जोर से चोद ना …गोपाल फ़ोड़ दे मरी इस भोस को … इस्स्स्स … आह हाय राम, दोनों ने चोद दिया रे… अरे साले मार ना जोर से…

प्रिया की जिन्दगी में पहली बार था कि उसे दो दो लण्डों का सुख नसीब हो रहा था। पहली बार था कि जब सुन्दर और गोपाल दोस्ती के नाम पर एक दूसरे के सामने यूँ नंगे होकर अपनी प्रिय दोस्त राधा की माँ को चोद रहे थे और अब राधा भी दोनों से एक साथ चुदने वाली थी।

अब सुन्दर और गोपाल ने अपने स्थिति बदल ली थी अब सुन्दर प्रिया की चूत चोद रहा था और गोपाल उसकी गाण्ड मार रहा था। कितनी देर तक आखिर प्रिया चुदती। दोनों से एक साथ चुद कर वो अति-उत्तेजित हो गई थी। कुछ ही देर में प्रिया जोर से झड़ गई। इस तरह झड़ने में जैसे प्रिया की जान ही निकल गई थी। दोनों की पिलाई से वो थक कर चूर हो गई थी। फिर एक एक करके राधा ने लण्ड पर मुठ्ठ मार कर दोनों का वीर्य निकाला और प्रिया का मुख खोल कर उसे पिला दिया। प्रिया आधी आंखें खोले बड़े प्यार से राधा को देख रही थी।

फिर सभी उठे और एक एक दौर शराब का और चला। गोपाल और सुन्दर दोनों ही जल्दी से चुस्त दुरुस्त हो गये। राधा इतनी देर तक दोनों का लण्ड चूस चूस कर उन्हें खड़ा करने की कवायद करने लगी। और अब तो वे दोनों अपना लण्ड खड़ा करके राधा को एक साथ चोदने के लिये तैयार थे।

राधा पहले से ही नंगी खड़ी थी। सुन्दर पीछे से चिपक गया और गोपाल आगे से चिपक गया।

मुसकराई- क्या खड़े खड़े ही चोदोगे? कोई स्टूल तो ले लो।

स्टूल की क्या आवश्यकता है?

मैं उस पर अपनी एक टांग रख दूंगी तो मेरी चूत और गाण्ड एक साथ खुल जायेगी, फिर जम कर चोदना।

ऐ गोपाल, राधा को मेरी बीवी नहीं बल्कि रण्डी समझ कर चोदना, उसे मस्त कर देना।

तू चिन्ता मत कर, जैसे वो तेरी है वैसे ही वो मेरी भी तो है ना।

राधा ने अपनी टांग स्टूल पर रख ली। तभी पीछे से सुन्दर का लौड़ा उसकी गाण्ड में घुसता महसूस हुआ। तभी गोपाल ने भी आगे से उसकी चूत पर लण्ड चिपका कर हल्के से धक्का दे दिया। जवान थी वो, सभी कुछ चिकना और गीला था। राधा ने एक दमदार सिसकी ली। उसकी रसदार जवानी लौड़ा खा कर मस्त होने लगी।

मार डाला रे ! सुन्दर ठीक से गाण्ड में घुसा ना।

तभी गोपाल ने राधा को दबोच लिया और पीछे से सुन्दर ने पीठ पर जोर लगाया। राधा चीख उठी।

हाय मम्मी, चोद डाला रे … जरा प्यार से गोपाल … कैसा मजा आ रहा है।

कुछ ही देर में दोनों के लण्ड सटासट अन्दर-बाहर आ जा रहे थे। राधा बुरी तरह से चुद रही थी। उसे अब तो खड़े रहने में भी तकलीफ़ हो रही थी। पर इस आसन में एक तेज चुदाई का आनन्द था। दोनों आगे पीछे से दनादन लण्ड मार रहे थे। राधा दोनों के लण्ड खाकर अपने आप को धन्य महसूस कर रही थी। हाय क्या ही मीठा मीठा सा आनन्द आ रहा था। गाण्ड और चूत की मस्त चुदाई हो रही थी। राधा अपनी बाहों का हार गोपाल के गले में डालकर उससे चिपटी जा रही थी।

अवस्था बदली और साथ ही आसन भी। सुन्दर नीचे लेट गया और राधा लपक पर सुन्दर पर चढ़ गई और उसका लौड़ा अपनी चूत में घुसा डाला। गोपाल ने भी बिस्तर पर चढ़ कर राधा की गाण्ड में अपना लण्ड पेल दिया। राधा को इस आसन में बहुत आराम मिल रहा था। वो तो सुन्दर के ऊपर जैसे लेट गई।
गोपाल और सुन्दर उसे जोर-जोर से चोदने में लगे थे। राधा जैसे इस चुदाई को आत्मसात कर लेना चाहती थी। बड़ी अत्मीयता से वो चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी। उसकी सीमा टूटने वाली थी। राधा के शरीर में लहरें सी चलने लगी थी। फिर वो अचानक चीख सी उठी। वो भी अपने आप को रोकते रोकते भी झड़ने से नहीं बचा पाई। उसका काम रस धीरे धीरे रिसने लगा।

गोपाल ने कहा- बस राधा झड़ चुकी है, अब उसे तकलीफ़ मत दो।

अरे, मैं भी झड़ने वाला हूँ।

तो ऐसे नहीं, अपनी राधा को माल नहीं पिलाओगे?

अरे हां यार …

सुन्दर ने राधा की चूत से लण्ड निकाल लिया और उधर गोपाल ने भी राधा की गाण्ड से अपना लण्ड निकाल लिया।

पहले गोपाल राधा के उरोजों के पास बैठ गया। प्रिया ने गोपाल का लण्ड पकड़ा और उसकी मुठ्ठ मारी। दो चार मुठ्ठ में ही गोपाल का वीर्य छलक उठा। राधा ने उसका लण्ड जल्दी से अपने मुख में ले लिया। उसका सारा वीर्य अपने गले से नीचे उतार लिया। अब सुन्दर ऊपर आया। राधा ने उसका लण्ड अपने मुख में लेकर जोर से चूसा और फिर सुन्दर के लण्ड से ढेर सारा लावा उगल पड़ा। उसे भी राधा ने पी लिया।

अब सभी स्नानघर में नहा रहे थे। बाहर निकले तो फ़्रेश थे। भोजन परोसा गया। सभी को भूख लग आई थी सो जम कर भोजन किया।

प्रिया ने कहा- आज तो सभी दोस्तों का संगम हो गया है। सभी आपस में मिल गये हैं। इसी खुशी में कल हम एक पार्टी रखेंगे, इस संगम को हमेशा याद रखेंगे।

आण्टी फिर तो आप दोनों छेदो में लण्ड लोगी ना? मेरा और मेरे प्रिय दोस्त सुन्दर का? गोपाल ने प्रिया की चमचागिरी की।

सुन्दर, मैं भी लूंगी… आगे से भी और पीछे से भी, सच यार बहुत मजा आता है। राधा भी चहकी।

तो हम मित्र फिर किस बात के है। हम तो हैं ही रोज चोदने के लिये।

फिर प्रिया ने कहा- यह तो मेरा और राधा का सौभाग्य है कि हमें तुम दोनों सच्चे मित्र मिले। दोनों ही भरपूर जवान, मस्त लण्ड लिये हुये, हमारी भोसड़ी को चोदने के लिये।

नहीं आण्टी, यह तो हमारा भाग्य है जो आप जैसे सच्चे मित्र हमें मिले।

आण्टी ने कहा- तो मेरी बात मानो, हमारी मित्रता और पक्की करने लिये सुन्दर और गोपाल आज रात को ही एक दूसरे की गाण्ड चोदेंगे।

फिर हंसते हुये बोली- बोलो मन्जूर है?

गोपाल ने कहा- मैं तो सुन्दर का प्यारा लण्ड लेने को तैयार हूँ, पर उसे लण्ड चूसना भी होगा और चुसाना भी होगा अपना मोटा लौड़ा।

सुन्दर ने भी इसी बात का समर्थन किया कि मुझे तो गोपाल का लण्ड बहुत प्यारा लगा। देखना मैं तो उसे चूस चूस के ही झाड़ दूंगा।
गोपाल को गाण्ड मराने में शर्म जरूर आ रही थी, पर वो क्या करता, वो बोला- राधा और आण्टी, आप हमें नहीं देखो, मुझे शर्म आती है।
हमें तो देखना है ! गाण्ड मराते लड़कों को हमने कभी नहीं देखा है। और इसके बाद तो आप दोनों को हमारे सामने मुठ्ठ भी मारना है … फिर …
बस बस… आप नहीं मानेंगी?

अब गोपाल घोड़ी बना हुआ था और उसकी गाण्ड के पीछे सुन्दर का मोटा लण्ड फ़ड़फ़ड़ा रहा था। राधा और प्रिया की नजरें उन दोनों पर जमी हुई थी। कुछ ही देर में गोपाल की गाण्ड सुन्दर मार रहा था। राधा और प्रिया सभी एक दूसरे को चोदने के कारण बहुत खुश नजर आ रही थी।
समाप्त
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