ॠतु एक बार फ़िर चुदी

लेखक : मुकेश कुमार

मेरे सभी पाठकों को नमस्कार। अन्तर्वासना के माध्यम से में अपनी आपबीती घटनाए लाता रहा हूँ। बहुत से ईमेल आये इसलिए अगली घटना बताने से पहले एक बात बताना चाहता हूँ प्लीज सूसन, मारिया, शर्मीला या ऋतु या किसी के नंबर मत मांगिए, वे मेरी दोस्त हैं। कुछ लोग तो गाली गलौच करने लगते हैं जब मैं मना करता हूँ। आप में से कई, जो सभ्य हैं, की ईमेल मैंने उन्हें फॉरवर्ड की हैं, वो चाहेंगी तो आप से सीधे संपर्क करेगी।

अब आपबीती !

ऑफिस के काम से में बाहर गया था, 26 अप्रैल को तकरीबन सुबह 11:30 बजे लैंड किया तो ऑफिस नहीं जाने का फैसला किया। बॉस को फ़ोन कर बोल दिया कि फ्रेश होकर आऊँगा तो काफी देर हो जाएगी इसलिए अगर आज्ञा दो तो सीधा सोमवार को ही आ जाऊँ?

टूर काफी अच्छा रहा था तो बॉस ने ओके बोला।

एयरपोर्ट से घर जाते हुए अपने एजेंट को फ़ोन किया कि एक मस्त बड़े बोबे वाली रांड का बंदोबस्त कर मुंबई के पास एक रिसोर्ट में ले कर जाना है। घर पहुँचते तक जो फोटो उसने भेजी, उनमें से एक को चुन लिया। दोस्त की गाड़ी ली और लड़की को हाईवे से पिक किया।

बांग्लादेश की माल थी। नाम रेखा बताया, लगता है उसका नाम कुछ और था पर भड़वे ने रेखा बताया। शहर के बाहर एक बीच रिसोर्ट पर गये। रास्ते में उसकी जांघ और चूत को सहलाता रहा। शहर छोड़ने के बाद रंडी ने सीट बेल्ट हटाई और मेरी जीन्स की ज़िप खोली चड्डी से लंड निकाला झुक कर चूसने लगी।

मैं कार बाहरी लेन में ले धीरे धीरे चलाने लगा। मैं गाड़ी के गियर बदल रहा था उसने मेरे लंड का गियर बना दिया, फर्क इतना था कि मैं हाथ से गाड़ी के गियर बदल रहा था और वो मुँह से मेरा।

रिसोर्ट पहुंच कर कमरा लिया और बियर मंगाई। भेनचोद कितनी बियर पीती थी ! लगता था लौड़े से ज्यादा तो बियर की बाटली मुँह में रखेगी। मेरा मन तो उसे बीच पर खुले में चोदने का था पर पुलिस के झमेले में नहीं पड़ना था।

एक सिगरेट खत्म हुई तो रेखा को अपनी ओर खींचा और उसके शर्ट के बटन खोलने लगा। इशारा समझ कर वो उठी और पूरी नंगी हो गई, अपने कपड़े पास रखी कुर्सी पर तरतीब से रख बाथरूम में मूतने गई। मैंने भी कपड़े निकाल दिए, एक सिगरेट जलाई और बियर की एक और बाटली खोली।

रेखा बाहर आई तो देखा कि उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे और पेट पर लकीरें थी जो सीजेरियन ऑपरेशन से डिलीवरी के कारण होता है। रेखा ने घुटनों के बल बैठ मेरा लंड मुँह में ले लिया। वो थोड़ा मुँह खोलती तो मैं बियर डाल देता। जब शेर तन गया तो उठी और मेरे लौड़े पर कंडोम चढ़ा दिया। वो बिस्तर पर लेट गई मैंने उसके पैर उठा लंड चूत में घुसा दिया और ठोकने लगा। मम्मे चूसे तो मेरा मुँह मीठे दूध से भर गया।

“दूध आता है?” मैंने पूछा।

“हाँ, 6 महीने का लड़का है।” रेखा बोली।
फिर मैंने उसके मम्मे नहीं चूसे। सारा ध्यान चोदने में लगा दिया। चुदाई कर बाथरूम में जाकर उसने मेरा वीर्य से भरा कंडोम निकाला और मेरे लंड को साफ़ किया। मूड ठीक करने के लिए फिर बियर पी। लंच करके छोड़ दिया रांड को।
चुदाई से ज्यादा बियर के कारण लड़खड़ा रही थी। पक्का जब बच्चे को दूध पिलाया होगा तो उसको भी बियर का स्वाद आया होगा।
दोपहर में लंड पर तिल का तेल लगा कर गर्म दूध (इस बार गाय का) पीकर सो गया।

शाम को दूसरे एजेंट से विदेशी (अजरबैजान की) माल मारिया (उसका नाम तो कुछ और था पर मेरी दोस्त मारिया की तरह गुलाबी निप्पल और गुलाबी चूत वाली थी इसलिए मारिया कह रहा हूँ) को उठाया। रंडी के साथ डिस्को गया। खूब पिया और रास्ते में जहाँ मौका मिलता चूमता फिर रात 12:30 बजे तक अपने कमरे पर ले आया। मारिया की चूत चूचे सब गुलाबी थे, सुनहरे बाल पर चूत एकदम साफ़ चिकनी। खूब चाटी, साली ने जितने पैसे लिए वसूल थे।

सीधे कमरे में ले गया तो उसने अपने कपड़े निकाल कर तरतीब से लटका दिए, सिर्फ ब्रा और पेंटी रहने दिए और मेरे जीन्स की बेल्ट खोल कर मेरी जीन्स बोक्सर सहित नीचे खींच दी। तपाक से लंड मुँह में लेकर चूसने लगी, साथ ही हाथों से टी-शर्ट उठाने लगी। मैंने ही टी-शर्ट निकाल दिया। जब मेरा लौड़ा पूरे रंग में आ गया, रंडी उठी और बिस्तर पर लेट गई तथा मुझे खींचने लगी।

मैं बाजू में लेटा तो हाथों से मेरे खड़े शेर को अपनी गुलाबी चूत का रास्ता दिखाया। उसकी क्लीन शेवन गुलाबी चूत में मेरा लंड आसानी से घुस गया और मैं पूरे जोश के साथ चोद रहा था। एक तो मस्त रांड थी उस पर दिन वाली को चोद कर मज़ा नहीं आया था। मारिया अपनी भाषा में और इंग्लिश में ‘फ़क मी, बेबी’ बोले जा रही थी और मैं धकाधक पेल रहा था। थोड़ी देर में मैं लेट गया और वो ऊपर से उचक उचक कर अपनी गुलाबी चूत में मेरे लंड को खा रही थी। जब मेरी पिचकारी चल गई तो वो ऊपर से उठी मेरे लंड पर से कंडोम निकाला और चाट कर साफ़ किया। वो मेरा लंड पकड़े चिपट कर सो गई। थोड़ी देर में मेरी भी आँख लग गई।

वैसे तो मैं रांड को चोद कर छोड़ देता हूँ पर मारिया को जाने नहीं बोला क्यूँकि रात के तीन बज रहे थे और एक तो इंग्लिश भी नहीं समझती थी और ऊपर से बला की ख़ूबसूरत, सोचा अगर मान गई तो इसी पैसे में सुबह एक और शॉट मार लूँगा।

पर सुबह को कुछ और मंज़ूर था।

सुबह आठ बजे के करीब दरवाजे पर घंटी बजी तो निद्रा भंग हुई। नंगी रांड अब भी सो रही थी। मैं सोच रहा था कि शनिवार की सुबह कौन आया होगा? बाई देर से आती है…

उठा तो पैर सीधा मेरे वीर्य से भरे कंडोम पर पड़ा (जो रांड ने फेका था) मुँह से निकल गया ‘फ़क’

शिश्न पर चमड़ी खींच क्राउन कवर किया, फिर बॉक्सर पहनी टी-शर्ट डाला। सिगरेट जलाई और दो कश खींचे। तभी दूसरी बार घंटी बज गई। सिगरेट पीते पीते बाहर गया और दरवाजा खोला तो दंग रह गया।

“हाई जानू, सरप्राइज !” बोलती हुई ऋतु मुझसे लिपट गई। ऋतु मेरी पूर्व पड़ोसन शर्मीला की सेक्सी ननद है। चुदाई के मामले में एक दम बिंदास और बेशर्म !

मेरी पूर्व कहानी ‘शर्मीला की ननद’ आप antarvasnasexstories.com पर पढ़ सकते हैं।

ऋतु सेक्सी टी-शर्ट और लम्बा स्कर्ट पहन कर आई थी। सुबह सुबह लोगों की गन्दी नज़र से बचने के लिए एक स्कार्फ डाला था। हाथ में एक बैग था जिसमें एक एक्स्ट्रा ड्रेस थी। मेरे हाथ से सिगरेट लेकर कश लगाया और मेरे गले में बाहें डाल चूमने लगी। मेरी हालत तो ‘काटो तो खून नहीं’ जैसी थी। बाँहों में सेक्सी दोस्त जिसके मम्मे मेरी छाती पर पिचक रहे थे और जिसकी जीभ मेरे मुँह में थी और अन्दर कमरे में नंगी विदेशी रांड सो रही थी।

शायद शर्मीला होती तो इतना नहीं घबराता, उसे मेरे बारे में पता है पर नहीं मालूम कि उसने ऋतु को क्या बताया है?

“दिनेश को एक दिन के लिए गेस्ट के साथ लोनावाला जाना था तो मैं अपने जान के पास आ गई।” ऋतु बोली और अपना हाथ मेरे बॉक्सर में घुसा मेरे लंड को पकड़ लिया।

“चलो ना अन्दर ऐसी में चलते है, ऐसी है ना? देखो कितना पसीना आ रहा है मुझे !” कहते हुए ऋतु ने सिगरेट का कश लिया और अपने दोनों हाथ उठा कर कांख में अपने पसीने से गीले हुए टी-शर्ट दिखाया। तभी मुझे आईडिया आया, अगर ऋतु को उत्तेजित कर प्यास बढ़ा दूँ तो रांड को देख भड़केगी पर नाराज़ होकर जाएगी नहीं, बाकी मुझे अपने लंड पर भरोसा है।

मैंने पहले अपना फिर उसका टी-शर्ट निकाल दिया और ऋतु की कांख में मुँह लगा जीभ से उसका पसीना चाटने लगा, साथ ही दूसरे हाथ से उसके कबूतर को ब्रा के ऊपर से मसलने लगा। ऋतु के पर्फ़्यूम की खुशबू मेरे नाक में समां गई। ऋतु भी मेरे लंड को मेरी बॉक्सर के अन्दर जोर जोर से हिलाने लगी, साथ ही मेरे टट्टों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी।

मुझे ऋतु के पसीने का स्वाद अच्छा लग रहा था। ऋतु ने हाफ कट ब्रा पहन रखी थी तो उसके चूचो पर आये पसीने को चाटते हुए मेरी जुबान ऋतु के दोनों पहाड़ों के बीच की खाई में प्यास बुझा रही थी। ऋतु से रहा नहीं जा रहा था वो सिसकियाँ भरने लगी… मौका लगता तो मेरे निप्पल अपने थूक से गीले कर देती। मैं एक हाथ उसकी स्कर्ट में डाल जांघों पर फिराते हुए पैंटी के नीचे से चूत और गांड को रगड़ने लगा और उंगली करने लगा।

ऋतु की आवाज़ें सुन अन्दर मरिया जाग गई और नंगी ही बाहर आ गई। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

फिर वो ही हुआ ऋतु ने झट से मुझे अलग किया और नज़दीक में पड़ा मेरे टी-शर्ट से अपनी छाती को ढक लिया।

“यह कौन है?” ऋतु बोली।

“मैं तुम्हें सब समझाता हूँ, पहले इसे जाने दूँ?” मैं सहज होने की कोशिश कर रहा था।

“नहीं, पहले बोलो !”

“यह एक लड़की है, जिसे कल रात के लिए बुलाया था, लेकिन बहुत लेट हो गया इसलिए यहीं सो रही थी।” मैंने कहा।

“इसे जाने को बोलो !” ऋतु ने आदेश दिया।

मैं रांड को पकड़ कर अन्दर ले गया, उसके कपड़े और पैसे उसे दिए और जाने बोला। ज़मीन पर पड़ा कंडोम उठाया और कमोड में डाल कर वहीं बैठ कर सिगरेट पीने लगा। थोड़ी देर में दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई। मालूम नहीं था कि ऋतु है या वो भी गई।

सिगरेट खत्म हुई तो उठा, सीट उठाई बट भी कमोड में डाला, बॉक्सर नीचे कर लंड हाथ में पकड़ मूतने लगा। पेशाब कर चड्डी खींचने ही वाला था कि ऋतु पीछे से लिपट गई और एक हाथ से मेरा लौड़ा पकड़ लिया दूसरे हाथ से चड्डी गिरा दी।

“जब आई, तभी बता देते कि अन्दर लड़की है, जवान मर्द की जरूरत समझती हूँ।” ऋतु ने कहा।

ऋतु अब भी ब्रा और पेंटी में थी, “अपना काम पूरा नही करोगे? देखो अभी भी पसीना आ रहा है अपनी जुबान से पोंछोगे नहीं?” कहते हुए ऋतु ने पेंटी नीचे सरका दी।

मैं वहीं कमोड पर बैठ कर ऋतु की दोनों टाँगे चौड़ी कर चूत पर थूक दिया फिर चाटने लगा। भूखे कुत्ते की तरह चाट चाट कर चूत चूस रहा था। मेरा लंड भी गरम छड़ में तबदील हो चुका था। ऋतु की चूत का पसीना अब चूत के रस में तबदील हो चुका था। जैसे जैसे मेरी जुबान चूत की गहराई में रसपान कर रही थी चूत के शहद से मेरा चेहरा भीग गया।

ऋतु की चूत मेरे लंड की प्यासी हो रही थी, वहीं घुटनों के बल बैठ लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। थूक थूक कर मस्त गीला करती, हाथों से मलती और फिर चूसने लग जाती।

मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल अकेले वस्त्र से भी आज़ाद किया, दोनों बोबों का मर्दन करता तथा झुक कर गांड में उंगली डाल देता। ऋतु से अब सहन नहीं हो रहा था तो उसने मेरी ओर पीठ कर मेरे लंड को अपनी चूत के हवाले कर कूद कूद कर चुदाई शुरू कर दी। ऋतु की सीत्कार और हमारी जांघों की ‘फट-फट’ से पूरा बाथरूम गूँज रहा था। उसके मम्मे संभल ही नहीं रहे थे। ऋतु की चूत ने पानी छोड़ दिया।

ऋतु मुड़ी और अपना मुँह मेरी ओर कर फिर लंड अपनी चूत में डाल दिया। मुझे चूमते हुए मेरा मुँह अपने थूक से भर दिया। फिर मेरी बाँहों में झूलते हुए कूदने लगी और चुदाने लगी।

मैंने बाथरूम में कई बार सेक्स किया पर कमोड पर पहली बार उन्मुक्त सेक्स के मज़े ले रहा था। चूँकि मैं सिर्फ रंडियों के साथ सेक्स करते वक़्त ही कंडोम पहनता था इसलिए ऋतु और मैं बिना किसी प्रोटेक्शन के मजे कर रहे थे।

“रानी, मेरा निकलने वाला है !” मैंने ऋतु के कान चाटते हुए कहा।

“अन्दर ही छोड़ दो, अभी सेफ है !” कूदते हुए ऋतु ने जवाब दिया।

थोड़ी देर में मेरे गरम वीर्य से ऋतु की चूत भर गई। वो और मैं दोनों मुस्कुराये और एक दूसरे से लिपट कर कमोड पर ही बैठे रहे। जो खेल ऋतु की कांख का पसीना चाटने से शुरू हुआ, अब हम दोनों को पसीने से तर बतर कर चुका था। मेरा लौड़ा अब भी ऋतु की चूत में था और धीरे धीरे सिकुड़ रहा था। तभी ऋतु को सूसू आ गया और मेरा लंड बाहर आ गया तथा उसके मूत से नहा गया। फ्लश कर हम बाथरूम से बाहर आये।

मुझे नहीं मालूम था कि पास वाला फ्लैट, जिसमें शर्मीला, ऋतु की भाभी, रहती थी, वह मालिक मकान ने अपनी तलाकशुदा बेटी को दे दिया है। शायद मेरे टूर पर होने के वक़्त शिफ्ट हुई होगी। मेरे और ऋतु के उन्मुक्त बाथरूम सेक्स के दौरान ऋतु की सीत्कारों ने उसके कान खड़े कर दिये और हो सकता है उत्तेजित भी किया हो?

बहरहाल इसी कहानी पर रहते हैं, हमने खाने के लिए पिज्जा आर्डर किया, वोदका निकाली और कोल्ड ड्रिंक के साथ मिला कर कमरे में आ बिस्तर पर एक दूसरे की बाँहों में एक ही गिलास से पीने लगे। साथ सिगरेट के कश और चुम्मा-चाटी चल रही थी।

मैंने पूछा, “दिनेश मजे नहीं देता है क्या?”

“नही ऐसा नहीं है, दिनेश का लंड भी मस्त है और चोदता भी अच्छा है पर वो इतना बिंदास नहीं है। जैसे, अगर वो चूत चाट लेगा या मैं उसका लंड चूस लेती हूँ तो फ्रेंच किस नहीं करेगा, वो गांड नहीं मारता है। पर ऐसे चुदाई रोज़ करता है और मुझे संतुष्ट भी करता है।” ऋतु ने जवाब दिया।

“मैं संतुष्ट करता हूँ?” मैंने मज़ाक में प्रश्न दागा।

आँख मारते हुए ऋतु बोली, “तुम तो कमीने हो, तुम्हारी चुदाई में कोई सीमा नहीं है।”

खाना खाकर थोड़ी देर मस्ती और छेड़खानी की, फिर गर्म हो गए। इस बार चूत के साथ गांड भी मारी। ऋतु ने सारा माल गांड में ही निकलवाया। शाम को मैं उसे उसके पति के आने से पहले घर छोड़ आया।

हैप्पी चोदिंग

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