हीरल

प्रेषक : जीत

मेरा नाम जीत है, अहमदाबाद का रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैंने सोचा कि मैं भी अपनी जिन्दगी के कुछ हसीन पल आप लोगों को बताऊँ ! यह बात तब की है जब मैं कोलेज में था। मेरे साथ एक लड़की थी जिसका नाम हीरल था। उसका रंग कुछ सांवला था पर नैन-नक्श और बदन मस्त था- 34-28-36 मेरी और उसकी अच्छी दोस्ती थी क्योंकि हम स्कूल से साथ में थे। हम आपस में काफी हंसी-मजाक करते थे लेकिन एक बार कुछ ऐसा हुआ जो हम कभी भूल नहीं सकते।

एक बार मुझे मामा के लड़के की शादी में आबू रोड जाना पड़ा। एक हफ्ते का कार्यक्रम था, लड़की वाले बाहर से आये हुए थे, सारा इंतजाम मामाजी ने ही किया था।

जब मैं लड़की वालों के यहाँ गया तो एक लड़की को देख कर चौंक गया क्योंकि वो हीरल थी।

मैं उसके पास गया तो वो भी मुझे देख कर हैरान हुई। उसने बताया कि उसकी मौसी की लड़की की शादी है।

हम दोनों काफी दिनों बाद मिले थे तो हमने कुछ देर बातें की। तभी मामाजी का फ़ोन आया और मैंईरल को अगले दिन मिलने का बोल कर वापिस आ गया। मैंने सोचा कि चलो कोई मिला समय बिताने के लिए क्योंकि शादी के कार्यक्रम दो दिन बाद शुरू होने वाले थे।

दूसरे दिन जब मैं सुबह उससे मिलने गया तो उसने बताया कि वो अपनी मौसी की लड़की रिया और जीजू के साथ माउन्ट आबू जा रही है, रात को वापिस आएगी।

उन्होंने मुझे भी साथ चलने को कहा तो मैंने पहले तो मना किया फिर रिया और अनूप के कहने पर मैं भी उनके साथ चला गया।

रिया और अनूप की अभी नई-नई शादी थी।

हम रास्ते भर काफी हंसी मजाक करते हुए गए। वहाँ पर हम लोगों ने काफी मस्ती की। हमने दो पैडल बोट ले ली। रिया और अनूप बोट पर रोमांटिक हो कर एक दूसरे को चूम रहे थे।

उनको देख कर हीरल थोड़ी शरमा गई। मेरे मन में भी कुछ-कुछ होने लगा था लेकिन इससे पहले हमने कभी एक दूसरे को उस नजर से नहीं देखा था इसलिए मन में संकोच था।

उसके बाद जब हम घूम रहे थे तब मैं मौका मिलते ही उसके वक्ष को छू लेता या चलते-चलते जानबूझ कर हाथ उसके कूल्हों पर मार देता। उसने इसका कोई विरोध नहीं किया।

रात को हम खाना खाकर बस स्टैंड पहुँचे क्योंकि हमें रात वाली बस से वापिस जाना था और मौसम भी खराब हो रहा था।

हमने टिकट ली और बस मैं दो-दो वाली सीटों पर बैठ गए।

मैंने हिम्मत करके धीरे से हाथ उसकी जांघ पर रखा और थोड़ा दबा दिया। उसने कुछ नहीं कहा क्योंकि आगे वाली सीट पर वो दोनों लगे हुए थे, अनूप रिया को चूम रहा था और उसका एक हाथ उसके कमीज़ के अन्दर था। उनको देख कर हीरल भी थोड़ी गर्म हो रही थी।

मैं उसकी जांघ पर हाथ फेरते हुए उसके वक्ष को छूने लगा।

तभी कंडक्टर ने आकर बताया कि बस ख़राब हो गई है इसलिए सुबह जाएगी।

अब हमारे पास रात में वहाँ रुकने के अलावा कोई चारा नहीं था। हमने घर वालों को फ़ोन किया और होटल बुक करवा लिया।

रिया और अनूप बहुत खुश थे।

हम बाहर बगीचे में घूमने निकले, मौसम सुहाना हो रहा था, वे दोनों एकांत देख कर रोमांटिक हो गए और प्यार करने लगे।

रिया मस्त माल थी, अनूप ने उसको वहाँ पर लिटाया, दोनों झाड़ी के पीछे थे फिर हमें सब दिखाई दे रहा था।

अनूप रिया का कमीज़ उठा कर उसके चूचे चूसने में लगा हुआ था, हीरल यह देख कर शरमा कर जाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।

वो रुक गई।

मैंने उसको अपनी तरफ खींचा तो वो मेरी बांहों में आ गई, उसकी आँखें बंद थी और गर्दन झुकी हुई थी, उसकी सांसें तेज चल रही थी।

उसकी छातियों का उतार-चढ़ाव मैं अपने सीने पर महसूस कर रहा था।

मैंने उसकी गर्दन ऊपर की, उसके होंठ कांप रहे थे। मैं अपने होश खो रहा था, मैंने उसके जलते हुए होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसने कोई विरोध नहीं किया। थोड़ी देर में उसने भी मेरा साथ देना शुरु कर दिया।

मैं तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था। हम वहीं पर लेट गए। मेरा एक हाथ उसके वक्ष पर था और दूसरा उसकी कमर पर !

तभी बरसात शुरू हो गई लेकिन हम प्यार करते रहे हम पूरी तरह भीग चुके थे। तभी हमें ढूंढ़ते हुए रिया आई तो हम अपनी दुनिया में वापिस आए।

रिया हम दोनों को इस हालत में देख कर मुस्कराई, वो काफी खुले विचारों वाली लड़की थी।

रिया को देख कर हीरल शरमा गई।

रिया होटल चलने को बोल रही तो मैंने कहा- थोड़ा बारिश में भीगते हैं, वैसे भी भीग तो गए ही हैं।

वो मान गई और हम लोग काफी देर तक बारिश के मजे लेते रहे।

थोड़ी देर बाद हम होटल पहुँचे और अपने-अपने कमरे में चले गए। हमने एक दूसरे को गुड नाईट कहा और मैंने धीरे से रिया को आँख मारी, वो मुस्कुरा कर चली गई।

मैंने सोचा आज रात तो जो बांहों में है उसको देखते हैं रिया को बाद में मौका मिलने पर देखेंगे।

हम कमरे में पहुँचे मैंने दरवाज़ा बन्द किया।

हीरल भीगी हुई होने की वजह से काँप रही थी, मैंने उसको ऊपर से नीचे तक देखा, उसके बालों से टपकती पानी की बूँदे, उसका भीगा हुआ चेहरा, उसके कांपते हुए होंठ, उसके भीगे हुए कपड़े जिसकी वजह से उसके वक्ष के उभार और उनका उतार-चढ़ाव !

यह सब देख कर मेरा बुरा हाल था, मेरा सात इंच का लण्ड पैन्ट फाड़ कर बाहर आने को तैयार हो रहा था।

तभी उसने कहा- इस तरह देखते रहोगे? गीले कपड़ों का क्या करें? हमारे पास कोई कपड़े भी नहीं हैं।

मैंने कहा- मेरी जान, मैंने सब इंतजाम कर दिया है।

तभी कमरे की घंटी बजी और सर्विस बॉय दो बड़े तौलिये और चादर लेकर आया। वो सामान देकर जाने लगा तो मैंने उसको थोड़ी देर बाद आने को कहा।

मैंने हीरल को कहा वो अपने कपड़े उतार कर तौलिया लपेट ले। वो मेरे सामने शरमाई और बाथरूम में चली गई। मैंने सोचा कि थोड़ी देर और सही, आज रात तो चुदने वाली है ही।

मैंने भी अपने कपड़े उतार कर तौलिया लपेट लिया।

तब मैंने हीरल को बाहर आने के लिए कहा तो थोड़ी शरमाती हुई धीरे-धीरे बाहर आई। वो तौलिये में कयामत ढा रही थी उसको इस रूप में देख कर लण्ड आपे से बाहर हो रहा था मैंने उससे कुछ खाने के लिए पूछा तो उसने मना कर दिया।

फिर मैंने उसे कहा- बाहर बारिश में नहा कर आये हैं तो बाथरूम में शावर ले लेते हैं ! तो थोड़ा फ्रेश हो जायेंगे।

लेकिन वो शरमा रही थी। मैंने सोचा पहले इसकी शर्म दूर करता हूँ फिर शावर लेंगे।

वो चुपचाप गर्दन नीचे और आँख बंद करके खड़ी थी, शायद उसको अंदाज हो गया था कि अब उसके साथ क्या होने वाला है।

मैंने उसे बांहों में लिया और उसके चेहरे पर, गालों पर, गर्दन पर धीरे-धीरे चूमने लगा। उसके हाथों ने भी हरकत शुरू की, उसने मुझे कस कर अपनी बांहों में भर लिया। फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और हम एक दूसरे को चूमने लगे।

थोड़ी देर में मैंने उसके तौलिए की गांठ धीरे से खोल दी और तौलिया नीचे गिर गया। अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। मैंने उसको अपनी गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया।

अब तक वो मेरा साथ देने लगी थी।

बाथरूम में जाकर मैंने शावर चालू किया और हम साथ में नहाने लगे। वो मेरे से लिपट गई मैं उसके पूरे शरीर को मसल रहा था।

उसने मेरा तौलिया भी खोल दिया। अब हम दोनों नंगे थे, वो मेरा लण्ड सहला रही थी, मेरी हालत खराब हो रही थी। मैं उसकी पीठ के पीछे जाकर उसके स्तन दबा रहा था।

हम थोड़ी देर तक नहाते रहे फिर मैंने उसको उठाया, लाकर बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया।

मेरा एक हाथ उसके वक्ष पर दूसरा उसकी चूत पर था। मैं उसके होंठ चूस रहा था। उसकी चूचियाँ एकदम कसी थी, मैंने उनको चूसना शुरु किया तो वो तड़प उठी, उसके मुँह से उत्तेजक आवाजें आ रही थी।

मैंने जब उसके चुचूक को दांतों में दबाया तो वो मचल उठी।

धीरे-धीरे उसको चूमते हुए उसकी चूत तक पहुँचा।

उसकी चूत के बाल मुलायम थे, बालों को हटा कर जब मैंने उसकी चूत के ऊपर जीभ रखी तो उसकी चूत को स्वाद मस्त का देने वाला था। मैंने उसको लण्ड चूसने को कहा तो उसने मना किया।

फ़िर उसको बिठा कर मैं खड़ा हुआ और उसको लण्ड चाटने को बोला।

धीरे-धीरे उसने चाटना शुरु किया, मैंने उसे लॉलीपोप की तरह चाटने को कहा। धीरे-धीरे उसको मजा आने लगा। यह उसका पहला अनुभव था।

फिर हम 69 की अवस्था में आ गए, वो मेरा लण्ड चूस रही थी और मैं उसकी चूत !

मैं उसके दाने को छेड़ रहा था। उसकी चूत तो पहले ही पानी छोड़ रही थी, थोड़ी देर में वो अकड़ने लगी और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

उसके पानी का स्वाद मैं नहीं भूल सकता।

मेरा लण्ड भी काबू से बाहर हो रहा था मैंने सोचा कि अब सही समय है, मैंने उसको सीधा किया और उसकी टांगों को उठा कर लण्ड उसकी चूत के ऊपर रखा और धीरे से धक्का दिया। लेकिन उसकी चूत थोड़ी तंग थी इसलिए बाहर फिसल गया। मैंने थोड़ा थूक लगाया और एक हाथ से उसकी चूत की फांकों को थोड़ा खोला और सही जगह पर रख कर जोर लगाया तो लण्ड का सुपारा अंदर चला गया।

वो थोड़ा चिल्लाई और लण्ड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। मैंने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ ली, उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और धीरे-धीरे दबाव बढ़ाने लगा।

लण्ड आधा अन्दर जा चुका था।

होंठ चूसते हुए मैंने दोनों हाथों में उसके स्तन पकड़ लिए और मसलने लगा। जब उसको मजा आने लगा तो मैंने होंठ छोड़ कर लण्ड को थोड़ा बाहर करके वापिस पूरे जोर से धक्का लगाया और लण्ड उसकी झिल्ली तोड़ कर पूरा अंदर चला गया।

उसके मुँह से जोर से चीख निकली, उसकी आँखों में आँसू आ गए।

वो लण्ड को बाहर निकालने को बोल रही थी।

मैंने उसको कस के पकड़ा और होंठों पर होंठ रख दिए और लण्ड को आधा बाहर निकाल कर दुबारा धक्का लगाया। फिर थोड़ी देर तक उसके होंठ चूसता रहा और उसके चूचे दबाता रहा। उसकी चूत से खून निकल रहा था।

वो थोड़ी देर में सामान्य हुई तब मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरु किये। उसको भी मजा आने लगा और वो भी गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।

मैंने 15-20 मिनट तक उसको चोदा, तब तक वो दो बार झड़ चुकी थी।

मैं भी झड़ने वाला था और मैंने तेजी से चुदाई शुरु कर दी। उसके मुँह से निकलने वाली आवाजें मुझमें और जोश भर रही थी।

30-35 तेज धक्कों के बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया।

हम दस मिनट तक इसी तरह लेटे रहे।

फिर जब हम उठे तो खून देख कर पहले तो हीरल घबरा गई, फिर मैंने उसको समझाया। उसके बाद हम बाथरूम गए।

उस रात हमने तीन बार सेक्स किया, सुबह उसको चलने में थोड़ा दर्द हो रहा था तो मैंने उसको दर्द की गोली दी। फिर हम वापिस आ गए।

यह अन्तर्वासना पर मेरी पहली सत्य कथा है, आपको मेरी कहानी कैसी लगी, अपनी राय भेजिएगा।

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