दर्द है, फिर भी चाह है

प्रेषक : रॉकी कुमार

मैं नौकरी की तलाश में हैदराबाद गया हुआ था, वहाँ मैं एक बॉयज़ हॉस्टल में रुका था अपने कुछ दोस्तों के साथ।

जहाँ यह हॉस्टल था वो जगह लड़कियों से हमेशा भरी रहती थी और मैं हमेशा सोचता रहता था कि मुझे कब कोई मिलेगी क्योंकि मेरे बाकी सब दोस्तों के पास एक एक थी, सिर्फ मैं ही था जिसके पास एक भी नहीं थी।

अगले दिन मुझे अपने एच आर से मिलने जाना था, अपनी नौकरी के लिए। मैं अगले दिन वहाँ गया और उन्होंने मुझे बाहर रुकने को कहा।

मैं बाहर आधे घंटे तक रुका, फिर उन्होंने मुझे मेरा जोइनिंग लैटर दिया और मस्त वाली तनख्वाह भी, जो मैंने कभी सोचा नहीं था कि मुझे इतना मिलेगा।

उस दिन मैं बहुत खुश था, सोचा कमरे में जाकर दोस्तों को बताऊँगा। वहाँ जाकर देखा कि सब अपने काम में लगे हुए हैं, सबको अपनी वाली से मिलने जाना था।

सब कुछ देर के बाद चले गए। मैं क्या करता, निराश दिल को लेकर होटल के सामने वाले बार में चला गया। वैसे तो मैं पीता नहीं हूँ, फिर भी आपको सच बता देता हूँ कि मैं एक ग्लास से ज्यादा बीयर नहीं पी सकता, मुझे उतने में ही चढ़ जाती है। और उस दिन तो मैंने दो गिलास पी ली थी, मुझसे चला नहीं जा रहा था, फिर भी मैं कैसे न कैसे कर के बार के बाहर तक आ ही गया। चलना मुश्किल था मगर मैं अपने पूरे होश में था।

बाहर निकलते ही मुझे मेरे दोस्त मिल गए, उन्होंने मुझे बाइक पर बिठाया और अच्छे से कमरे में ले गए।

दूसरे दिन सुबह मैं उठा तो देखा कि मेरा वालेट मेरे पास नहीं है। बहुत दुख हुआ मुझे, उसमें पैसे तो ज्यादा नहीं थे मगर मेरे काम के चीजें जैसे पैन कार्ड, ड्राईविंग लाइसेंस, ये सब खो गए।

इसी के चलते सोच सोच कर मैं काम पर चला गया और वहाँ अपने लोगों के साथ आराम से काम करने लगा।

फिर दोपहर के समय मुझे किसी लड़की का कॉल आया कि उसे मेरा वालेट मिला है और उसमें मेरे बारे में जानकारी थी, इसीलिए वो मुझे कॉल कर पाई है।

मैंने फोन पर ही उसका शुक्रिया अदा किया और कहा- मैं आपको शाम को जरुर मिलूँगा।

वो भी मान गई। शाम को जब मैं उससे मिला मैं तो उसे देख कर पागल सा हो गया।वो ऐसी लड़की थी जिसमें सब कुछ था, उसकी अदा, उसकी फिगर, क्या थी यार, देख कर मज़ा आ गया।

मैंने फिर बहुत हिम्मत कर के उसका फोन नम्बर लिया और फिर धीरे धीरे उसे मैसेज करने लगा, और वो भी मुझे करने लगी। इसी तरह काफी दिनों तक चला और हम अब अच्छे दोस्त बन गए।

एक दिन सुबह उसका मैसेज आया, उसने मुझे उस दिन दिन अपने घर पर बुलाया था ऐसे ही खाने पर।

मैं भी उसके बुलाने से पागल हो गया था, मैं सोचने लगा कि आज मैं यह करूँगा, वो करूँगा वगैरा-वगैरा।

मगर जब उसके घर पहुँचा तब पता चला कि उसका जन्मदिन था।

फिर उसके घर में पार्टी हुई, उसके बाद मैंने उसे कहा- अब मैं जा रहा हूँ, देर बहुत हो गई है।

उसने मुझे रोका कि अभी मत जाऊँ। उसकी इस बात को सुन कर फिर से मेरे दिल में घंटी बजी।

उसने मुझे फिर किसी से मिलाया और फिर आलतू फालतू बातें हुई।

दूसरे दिन मैं सुबह उठा और अपना मोबाइल लेकर बाहर सिगरेट पीने को निकला तो मैंने मोबाइल में देखा, उसका मैसेज था कि मैं उसे तुरंत फोन करूँ, कुछ जरूरी काम है।

मैंने उसे उसी वक्त फोन किया वो बोली- जल्दी से घर आओ, कुछ काम है।

मैंने उस वक्त कुछ सोचा नहीं और उसके घर चला गया। उसके घर पहुँचने के बाद मैंने उसे हाय कहा और देखा कि उसके हाथ में बीयर की बोतल थी।

वो बोली- शायद तुम पीते नहीं !

मैंने कहा- कौन बोला कि मैं नहीं पीता।फिर हम दोनों छत पर गए और एक-एक गिलास बीयर पी।

मैं धीरे धीरे अपने से बाहर होने लगा, तो मैंने सोचा कि समय क्यों बर्बाद करना, मैंने उसके होंठ पर अपनी उंगली रख दी और कहा- तुम्हारे होंठ सही में काफी रसीले हैं और मजेदार भी !और कहते कहते मैं उसके वक्ष को ताकने लगा पर कहा- माफ करना अगर तुम्हें बुरा लगा तो।

वो कुछ देर चुप रही, फिर बोली- मुझे पता है कल रात जब तुम मुझसे बात कर रहे थे, तब तुम अपना हिला रहे थे। उसकी यह बात सुन कर मेरा मुँह बंद हो गया और मैं कुछ भी न बोल पाया।

वो उठी, मुझे बोली- मेरे पीछे पीछे नीचे चलो।

जब वो नीचे की तरफ जा रही थी तब वो पीछे मुड़ी और दरवाजा बंद करने लगी।जब वो दरवाज़ा बंद कर रही थी, उसका चेहरा मेरे सामने था और मैं उसकी गरम साँसें एकदम से महसूस कर रहा था और उसकी उभरी हुई छाती को भी।मैंने कोई मौका छोड़े बिना उसे चूम लिया उसके होंठों पर, तो वो झट से पीछे हटी और फिर भाग कर आगे निकल गई।

मैं भी उसका पीछा करने लगा, उस दिन उसके घर कोई नहीं था।

वो भागते हुए रसोई में चली गई और फिर हमने वहाँ थोड़ी मस्ती की।

उसने फ्रिज का दरवाजा खोला और पानी निकलने लगी तो मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया, मेरा हाथ उसके पेट पर था और मैं उसके नाभि से खेलने लगा और उसकी गर्दन पर उसे चूमने लगा।

वो अपने सर को ऊपर नीचे करने लगी मगर उसने मुझे रोका नहीं। फिर मैंने अपने हाथ उसके चूचों पर रख दिए, दबाया नहीं, बस हल्के से रखा।फिर मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और फिर उसके सर को मैंने अपने दोनों हाथों से पकड़ा और उसके नीचे के होंठ को मैंने चूमा, फिर ऊपर के होंठ को मैं चूसने लगा।

कुछ देर में वो भी मेरा साथ देने लगी और वो भी मेरे होंठों को चूमने लगी। हम एक दूसरे को करीब दस मिनट तक चूमते रहे और वो दस मिनट मुझे लग रहा था कि मैं आसमान में उड़ रहा हूँ। मैंने उसके बालों को खोल दिया।

मैं अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता था इसीलिए मैंने उसे वहीं जमीन पर लिटा दिया और उसकी नाभि को चूमने लगा।

मैंने उसकी टीशर्ट को हल्का सा ऊपर किया तो वो अपने आप को रोक नहीं पाई और मुझे पकड़ कर चूमने लगी पागलों की तरह।

मैंने फिर उसके पेट पर हाथ फेरना शुरू कर दिया जिससे वो और ही उत्तेजित होती चली जा रही थी। अब मैं उसके गुलाबी निप्पल को देखे बिना नहीं रह पा रहा था।

अब मैंने उसके टीशर्ट को पूरा ऊपर उठा दिया, मुझे उसकी चूचियाँ थोड़ी थोड़ी दिखने लगी।

मैंने उसके एक चूचे को अपने एक मुँह में भर लिया और हल्के हल्के काटने लगा।

फिर मैंने उसके एक स्तन को ब्रा से बाहर निकाल लिया और फिर उसके निप्पल पर जीभ फेरने लगा जिसके कारण वो गर्म होने लगी और गीली भी। मैंने फिर उसके निप्पल को अपनी जीभ से ऊपर की तरफ धकेलने लगा और साथ ही साथ दूसरे स्तन को अपने हाथ से दबाता रहा।

फिर मैंने उसको पलट दिया और उसकी पीठ को चूमने लगा और फिर उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया और फिर उसके पूरे वक्ष को चूमता रहा और अपने हाथों से चूचों को दबाता रहा।

फिर वो खुद पलट गई और उसने मेरा शर्ट उतार दिया और अपनी जींस भी उतार दी।

उसको देख कर मैंने भी अपनी जींस उतार दी। अब हम सिर्फ एक कपड़े में थे। अब वो मेरे ऊपर चढ़ गई और चूमने लगी। वो मेरे छाती को चूमने लगी और मैं उसकी चूचियों को देखता जा रहा था वो जिस तरह से लटक रही थी।

उन्हें देख कर मैं अपने आपको रोक ही नहीं पा रहा था, जिसके कारण मैंने उसे लेटा दिया और मैं उस पर फिर से चढ़ गया और उसके चूचो को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। उसने मेरे सर पर हाथ रखा और मुझे अपने चूचों पर दबा लिया। जिसके चलते मैंने उसके चूचों को और कस कस कर चूसना शुरू कर दिया।

वो इतनी मदहोश हो चुकी थी कि वो सीत्कार भरने लगी और मदहोशी में उसने अपनों हाथ को मेरे कूल्हों पर फ़िराने लगी और मेरा अन्डरवीयर उतारने की कोशिश करने लगी जो मैंने उसे नहीं करने दिया।

अब वो काफी गर्म हो चुकी थी, उसने मुझे धक्का दिया और फिर मुझ पर आकर लेट गई और फिर मेरे हाथों को उसने कस कर पकड़ लिया और फिर मैंने उसे अपने से खेलने दिया।

वो अपने हाथों को मेरे जिस्म पर रगड़ने लगी और फिर धीरे धीरे नीचे गई और मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी।

मैं भी उसकी तरह पागल सा होने लगा था, मैंने उसे रोकना चाहा मगर वो रुकी नहीं। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

उसने अपनी पेंटी खुद ही उतार दी जो काफी गीली हो चुकी थी और मुझे अपने ऊपर ले लिया।

मैं फिर धीरे धीरे उसकी चूत की तरफ बढ़ा और फिर उसकी चूत के होंठों को अपने उंगलियों से अलग किया और एक उंगली मैंने अंदर डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा।

उसने मेरे हाथों को कस कर पकड़ लिया और वो अपने होठो को चबाने लगी। अब मैंने और थोड़ा अंदर किया जो मुझे उसे देख कर लग रहा था कि मैंने शायद ज्यादा ही कर दिया। उसकी आँखों से आँसू आने लग गए, उसे देख कर मैं फिर रुक गया और पूछा- सब ठीक तो है ना?

वो उठी और मुझसे लिपट गई और बोलने लगी- यह उसका पहली बार है और खून आ रहा है, काफी दर्द भी हो रहा है।

मैंने उसे उठाया और बाथरूम लेकर गया और उसकी चूत को साफ़ किया, फिर मैंने उससे पूछा- आगे कुछ करना है या फिर यहीं तक काफी है?

वो गुस्सा हो गई, बोली- आज मैं तुम्हें आज जाने नहीं दूँगी।

मैंने उसकी बात मान ली और फिर मैंने उसकी चूत में दो उंगलियाँ डाल दी, जिससे उसकी चूत से फिर से खून आने लग गया। कुछ देर के बाद मैंने उसकी चूत को फिर से धोया और उठा कर बिस्तर पर लेटा दिया।

मैंने कुछ बर्फ की और उसकी चूत पर रगड़ने लगा। बर्फ के रगड़ने से उसे काफी मज़ा आ रहा था, वो अपने आप को नहीं रोक पा रही थी, मुझे बोल रही थी- मुझे कुछ करो, मुझसे नहीं रहा जाता।

मैंने फिर भी उसकी बात नहीं मानी और फिर मैंने उसकी चूत के पंखुड़ियों को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। अब वो आपे से बाहर हो गई और बुरी तरह चिल्ला चिल्ला के चोदने के लिए बोल रही थी- आज मेरी फाड़ दो कुछ भी हो, आज मेरी चूत को फाड़ देना।

फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा और अपने हाथों से उसके चूचों को दबाने लगा।

वो बोल रही थी कि उसकी फाड़ दो, मगर मैं ऐसा नहीं करना चाहता था क्योंकि पहली बार वो चुदने जा रही थी इसीलिए।

मुझे उसके दर्द का भी ख्याल था। फिर मैंने हल्के से अपने लंड को अंदर किया और उसके चूचों को दबाता रहा।

उसकी आँखों से आँसू निकलते रहे, फिर भी उसे और अंदर चाहिए था।

मैंने उसे पलट दिया और फिर मैंने अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ना शुरू कर दिया और फिर मैंने पीछे से उसकी चूत में देना चाहा मगर दर्द के कारण मैंने उसे पीछे से भी नहीं दिया। वो दर्द के मारे चिल्ला रही थी मगर फिर भी उसे चाहिए था।

मैंने फिर उसकी एक टांग उठा कर पेलने की सोची मगर उसमे तो उसे और भी दर्द हुआ।मैं उसके दर्द को देख कर अंत में रुक गया और फिर मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया और उसके चेहरे पर चुम्बन किया।

मैंने उसे कहा- तुम्हें बहुत दर्द होगा, मेरा लंड बहुत बड़ा है, तुम्हें बहुत दर्द होगा।

पर वो नहीं मान रही थी और जिद किये जा रही थी कि नहीं मुझे अभी चाहिए। मैंने उसे कहा- इस बार नहीं पर अगली बार पक्का !

और उसे फिर कस कर गले लगा लिया

ताकि उसे अपनापन महसूस हो।

मैंने उसे फिर अपनी छाती पर लिटा दिया और उसके बालों के साथ खेलने लगा ताकि उसे अच्छा लगे।

जो भी किया मैंने इसलिए किया ताकि उसे दर्द न हो, मगर नीचे मेरा लण्ड नीचे उसकी चूत के लिए तरसता रह गया।

फिर वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी और जब वो खेल रही थी तो मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था तो मैंने उसे कह ही दिया- इसे चाटो।

फिर उसने मेरी खुशी के लिए वो भी किया और फिर उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और फिर मैंने उसके मुँह में ही अपना सारा माल निकाल दिया।

उसके बाद मुझे बड़ी खुशी मिली।

फिर अंत में मैंने उसे पूछा कि वो मुझसे प्यार क्यों ले रही है जबकि उसकी शादी किसी और के साथ होने वाली है?

वो बोली- जरुरी नहीं है कि मेरे पति ने आज तक किसी लड़की के साथ नहीं किया होगा, सो मैं फिर उसे अपनी सील क्यों खुलवाऊँ? मैं उसी से अपनी सील खुलवाना चाहती हूँ जिसे मैं अच्छे से जानती हूँ।

उसने मुझसे माफ़ी मांगी क्योंकि वो मुझे खुशी नहीं दे सकी।

मैंने उसे कहा- असली खुशी सेक्स में नहीं है, असली खुशी प्यार लेने और प्यार देने में है।

उसके बाद हम दोनों ने फिर से कोशिश की और हम सफल रहे। फिर हमने 4-5 बार सेक्स किया और काफी मज़े किये।

अन्तर्वासना की कहानियाँ आप मोबाइल से पढ़ना चाहें तो एम.अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ सकते हैं।

Leave a Reply