मेरे दोस्त ने मेरी भाभी को चोदा-1

(Mere Dost Ne Meri Bhabhi Ko Choda- Part 1)

यह उस समय की बात है, जब मैं अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी के लिए दिल्ली आया था. दिल्ली में मेरे भैया रहते थे उनकी शादी पांच साल पहले हुई थी, लेकिन अभी कोई बच्चा नहीं था. मेरी नौकरी एक कंपनी में लग गई. मेरी ड्यूटी शिफ्टों में लगती थी.

उसी समय मेरा दोस्त मनीष भी नौकरी के लिए दिल्ली आया.
मैंने भैया से पूछा कि उसे जब तक नौकरी नहीं मिलती, वो हमारे साथ ही रह ले?
तो वो मान गए.

मेरा दोस्त और मैं हॉस्टल में रूम पार्टनर थे. इस लिए हम लोग हर चीज़ खुल के बात कर लेते थे, कुछ भी छुपाते नहीं थे. मेरे भैया का बिज़नेस था और भाभी नौकरी करती थीं. भैया बिज़नेस के कारण काफी देर से घर आते थे और भाभी पांच बजे तक घर आ जाती थीं. मैं तो शिफ्ट में ड्यूटी के कारण कभी 6 से 3 बजे तक, तो कभी 3 से 12 और कभी 12 बजे से 7 बजे तक बाहर रहता था. घर में भाभी और मनीष कई बार अकेले रहते थे.

मेरी भाभी की 5 फुट 3 इंच हाइट की थीं और वे ज्यादा पतली नहीं थीं, पर मोटी भी नहीं थीं. भाभी एकदम गोरी थीं. हालांकि मैंने उन्हें बिना कपड़ों के देखा नहीं था, पर उनके बूब्स बड़े लगते थे.

करीब 15 दिन के बाद एक दिन मनीष ने मेरे से पूछा- राज, तुझे कभी भाभी को चोदने का मन नहीं करता?
तो मैंने उसे डांट दिया- क्या बात कर रहा है.. चुप कर.
तब उसने कहा- यार मुझे तो उन्हें चोदने का बहुत मन कर रहा है, देखता नहीं उनके चूचे और चूतड़ कितने मस्त लगते हैं.
तब मैंने कहा- अबे साले, तेरे साथ मुझे भी घर से निकाल दिया जाएगा, कुछ ऐसी वैसी हरकत मत कर देना.
उसने कहा- अगर तू कहे तो मैं उन्हें पटा लूँ.. तब तुझे कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी?
मैंने कह दिया- चल तू पटा ले, अगर वे पटती हैं. पर ध्यान रखना साले अगर अगर कुछ बुरा हुआ तो मैं तुझे छोडूंगा नहीं.
उसने हंस कर कहा- मत छोड़ना.. अगर पट गई तो तुझे भी भाभी की चुत दिलवा दूंगा.

उस दिन हमारी बात खत्म हो गई और हम लोग सोने लगे. अब मैं मनीष की बातें सोचने लगा तो सही में मुझे मेरी भाभी माल लगने लगीं. उनके चूचे चूतड़ सब मस्त लगने लगे. मेरा लंड आज पहली बार भाभी के नाम पर खड़ा हुआ था. काफी देर के बाद मुझे नींद आ गई. सुबह देखा तो मेरा माल निकल गया था.

अब तो भाभी जब सामने आतीं, तो उनको चोदने का मन करता था.. पर मैं कुछ कर नहीं सकता था.

उधर मनीष अब भाभी के साथ किचन में काम करता, बाजार चला जाता, घर के बहुत सारे कामों में भाभी की हेल्प करने लगा.

कुछ दिन बाद मैंने पूछा- क्या हुआ कुछ काम बना?
तो बोला- बन रहा है.. जब हम किचन में काम करते हैं, तो कई बार उनके मम्मों और चूतड़ों को अनजाने में छू देता हूँ, तो उन्होंने कभी कुछ बोला नहीं है. अब आगे देखो क्या होता है.
तब मैंने कहा- अरे यार, जब तू उनके साथ होता है, तो अपना फोन मेरे फोन से कनेक्ट कर दिया कर, मैं भी तो सुनूं कि तू भाभी से क्या क्या बात करता है.
उसने कहा- हां कर दूंगा, पर तू गुस्सा मत करना.
मैंने कहा- ठीक है.

दो दिन बाद एक दिन शाम 6 बजे उसका फोन आया, मैंने उठाया तो उधर से कोई आवाज नहीं आई. मैं समझ गया और उधर की बातें सुनने लगा.

मनीष- भाभी, आज बहुत थकी हुई लग रही हैं.
भाभी- हां, आज ऑफिस में काम बहुत था और सर भी दर्द कर रहा है.
मनीष- आप चाहें, तो मैं आपके सर की मालिश कर दूँ.
भाभी- नहीं नहीं.. तुम क्यों परेशान होगे, ठीक हो जाएगा.
मनीष- अरे भाभी आप तो हद करती हैं.. कैसी परेशानी.. आप कपड़े बदल कर आईये, मैं सर की मालिश कर देता हूँ.
भाभी- अच्छा बाबा.. आती हूँ.

फ़ोन कट गया. मैं सोचने लगा मनीष क्या कर रहा होगा, ये सोच कर मेरा लंड खड़ा हो गया. अब मेरा काम में मन नहीं लग रहा था.

तभी फिर फ़ोन बजा. मैं सुनने लगा.
मनीष- भाभी बेड पर लेट जाइये, तो अच्छे से मालिश हो जाएगी.
भाभी- नहीं, अभी चेयर पर ही कर दो.
मनीष- अच्छा.

थोड़ी देर कोई बात नहीं हुई.

फिर मनीष- भाभी अच्छा लग रहा है.
भाभी- हां बहुत अच्छा लग रहा है.

थोड़ी देर के बाद मनीष ने पूछा- भाभी कंधे भी मालिश कर दूँ?
तो भाभी ने कहा- हां, कर दो.
मनीष- भाभी नाइटी थोड़ा लूज़ कर देंगी तो कंधे पर भी आयल लगा दूँ.
भाभी- अच्छा.

थोड़ी देर के बाद मनीष- भाभी थोड़ा आगे झुकिए.
फिर थोड़ी देर के बाद भाभी- अब रहने दो.. बस हो गया.
मनीष- अरे भाभी थोड़ा और करवा लीजिये.. अच्छा नहीं लग रहा है क्या?
भाभी- नहीं अच्छा तो लग रहा है पर अब रहने दो.
मनीष- अच्छा पर अगर आप लेट कर मालिश करवातीं, तो और अच्छा लगता.
भाभी- बाद में कर लेंगे, आज बस रहने दो.

फोन कट गया.

रात में जब मैं घर आया तो भैया भाभी सो चुके थे. मैंने मनीष से पूछा- आज क्या हुआ?
तब मनीष ने कहा- अरे यार, आज तो मजा आ गया, मालिश करते समय मेरा लंड पूरा खड़ा था और कई बार भाभी के कंधे से टकराया भी, लेकिन भाभी ने कुछ नहीं कहा. जब मैंने नाइटी लूज़ करके थोड़ा नीचे खिसकाया था तो भाभी के लगभग आधे बूब्स दिख रहे थे. क्या चूचे हैं यार.. एकदम गोरे गोरे.. भाभी चेयर पर बैठी थीं और मैं उनके पीछे खड़ा मालिश कर रहा था. उस समय भाभी की आंखें बंद थीं. कई बार मैंने अपना हाथ आगे की तरफ खिसका कर उनके मम्मों के ऊपर वाले हिस्से में भी मालिश की. मालिश करते करते जब मैं अपना हाथ और नीचे ले गया, तब भाभी ने कहा कि आज बस रहने दो. फिर बेड पर मालिश करने के लिए बोला, बाद में मतलब उन्हें भी मजा आ रहा था. अब तू देखना, मैं उन्हें जल्दी ही चोद भी दूंगा.

मेरा तो लंड खड़ा हो गया था. मैंने कहा- यार मैं तुझे चोदते हुए देखना चाहता हूँ.
मनीष ने बोला- ठीक है, जब प्लान बनेगा तो तुझे बता दूंगा.. तू जल्दी से आ जाना.

दूसरे दिन जब मैं आया तो मनीष ने बताया कि आज मैंने भाभी को नंगी देखा.
मैंने कहा- कैसे?
तो बोला मैंने भाभी के बेडरूम की खिड़की का दरवाजा थोड़ा एडजस्ट कर दिया, जो बालकनी में खुलता है और अब बंद करने के बाद भी बालकनी से बेडरूम में देख सकता हूँ. आज मैंने देखा, वो नहाने के बाद जब बेडरूम में कपड़े चेंज कर रही थीं, तो पूरी नंगी थीं. क्या गोरा बदन है उनका.. आह.. क्या उछलते हुए चूचे हैं.. जब वे मम्मों को तौलिये से पौंछ रही थीं, मेरा तो मन कर रहा था कि अभी अन्दर जाकर चूसने लग जाऊं. जब वो एक टांग बेड पर रख के अपनी चुत पौंछ रही थीं, तो मत पूछ.. मेरा क्या हाल था. जब वो चुत फैला कर पौंछ रही थीं.. तो लग रहा था, जैसे चुदना चाह रही हैं.. क्योंकि वे उस वक्त अपनी उंगली चुत में अन्दर कर रही थीं.
‘फिर?’
‘फिर क्या.. मैंने बाथरूम में जाके हाथ से अपना माल गिराया. उसके बाद भैया आ गए. वो जब सोने गए तो मैं फिर देखने लगा तो भाभी भैया के बगल में सो रही थीं और कुछ बातें भी कर रही थीं. भैया उनके बूब्स दबा रहे थे और किस कर रहे थे. थोड़ी देर के बाद लाइट बंद हो गई.. और मैं आ गया.

दूसरे दिन मैं 7 बजे आ गया, तो पता चला मनीष आज किसी इंटरव्यू के लिए भिवाड़ी गया था, तो देर होने के कारण वहीं रुक गया है. भाभी नहाने चली गईं और नहाने के बाद बेडरूम में कपड़े चेंज करने लगीं. तो मैं भी खिड़की से देखने लगा. सच में ऐसा लग रहा था कि अभी जाकर चोदने लगूँ.. क्या चूत थी. भाभी की चूत पर थोड़े से बाल भी थे, वहां वो तेल लगा रही थीं.

फिर भैया आ गए और हम लोग खाना खाने के बाद सोने चले गए.

मैं खिड़की पर जा कर देखने लगा, भैया भाभी को किस कर रहे थे और बूब्स दबा रहे थे.
भैया ने भाभी के दूध दबाते हुए उन्हें बताया कि कल से वो पांच दिन के लिए मुंबई जा रहे हैं.. बिज़नेस के काम से जाना पड़ रहा है.

थोड़ी देर के बाद भाभी अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गईं और भैया को चूचे चूसने को कहने लगीं. भैया भाभी के दूध चूसने लगे. फिर उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिए, लेकिन उनका लंड पूरा खड़ा नहीं था. भाभी उसे सहला रही थीं, पर वो पूरा टाइट नहीं हो रहा था. फिर भैया ने भाभी की चुत में उंगली डाल दी और उंगली से चोदने लगे. भाभी की चुत से ढेर सारा पानी निकला और भाभी शांत हो गईं.

अब भैया अपने लंड को भाभी की चुत पर रगड़ने लगे, फिर उनका माल निकल गया. मुझे लगा कि शायद भाभी की चुदाई रोज उंगली से ही होती है.
फिर लाइट बंद हो गई.

मैंने मनीष को फ़ोन करके बताया कि आज क्या हुआ तो वो बहुत खुश हुआ कि भैया पांच दिन नहीं रहेंगे तो भाभी को चोदने का मौका मिल जाएगा.
उसने बोला कि तू रात की ड्यूटी ले ले.. लेकिन जाना नहीं, जब मैं फोन करूँ तो आ जाना और खिड़की से देखना, कैसे मैं भाभी को चोदता हूँ.
मैंने भी दो-तीन दिन की छुट्टी ले ली लेकिन भाभी को बताया कि रात की ड्यूटी है.

अगले दिन भैया मुंबई चले गए. मनीष शाम तक आ गया. वो भाभी को बताने लगा कि इन्टरव्यू सही रहा, हो सकता है.. नौकरी मिलने में कुछ दिन और लग जाएं.. उम्मीद है कि दसेक दिन के बाद नौकरी मिल जाएगी.

भाभी ने कहा- बधाई हो … आज तो पार्टी होनी चाहिए.
मनीष ने कहा- ठीक है.

भाभी ने खाना बाहर से मंगवाया. खाना खाने के बाद मैं ड्यूटी चला गया. एक घंटे के बाद लगभग ग्यारह बजे मैं वापस आ गया. मैं अपनी चाभी से दरवाजा खोलकर अन्दर आ गया. अन्दर देखा मनीष भाभी के कमरे में था और दरवाजा भिड़ा हुआ था.

मैं सीधे खिड़की के पास आ गया और अन्दर देखने लगा. भाभी लेट कर कोई मैगजीन पढ़ रही थीं और मनीष पास में बैठा कुछ बातें कर रहा था, लेकिन मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था. वो भाभी के कंधे को सहला रहा था, जैसे मालिश कर रहा हो.. लेकिन भाभी थोड़ी देर में उसके हाथ को हटा दे रही थीं और कुछ कह भी रही थीं. शायद कह रही थीं कि नहीं रहने दो, मालिश की जरूरत नहीं है.

थोड़ी देर के बाद मनीष उठा और गुडनाईट करके अपने कमरे में आ गया. फिर भाभी ने अपना कमरा बंद कर लिया. हम लोग खिड़की के पास आ गए तो देखा कि भाभी अपने कपड़े चेंज करने जा रही थीं. पहले उन्होंने कुर्ता उतारा, फिर सलवार उतार दी. अब वे सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं, थोड़ी देर तक ऐसी ही टहलती रहीं, फिर बाथरूम में चली गईं. थोड़ी देर के बाद फ्लश की आवाज आई और फिर भाभी ब्रश करती हुई बाहर आईं. लेकिन केवल ब्रा पहने हुई थीं, पैंटी नहीं. भाभी ब्रश करते हुए कुछ सोच रही थीं, बीच में अपनी चुत को फैला कर कुछ चैक कर रही थीं.

मनीष बोला- देख भाभी की चुत गीली लग रही है, इसका मतलब भाभी गर्म हो रही हैं.

भाभी बराबर अपनी चुत को सहला रही थीं. फिर बाथरूम में जाकर ब्रश करने लगीं, उसके बाद शायद नहाने लगीं.. क्योंकि शावर की आवाज आ रही थी. करीब बीस मिनट के बाद बाथरूम से बाहर आईं.

ओ माय गॉड.. वो पूरी नंगी थीं, गोरे गोरे बूब्स, बड़े बड़े चूतड़.. थोड़े से बालों के साथ छोटी सी चुत.. क्या रंगीन नजारा था.

हम दोनों के लंड पूरी तरह से खड़े थे मनीष कह रहा था- मन कर रहा है अभी जाकर साली को चोद दूँ.. लेकिन थोड़ा वेट करता हूँ.. शायद पट जाए.
मैंने बोला- तू तो चोद लेगा लेकिन मैं क्या करूँगा.. मुझे तो हाथ से ही काम चलना पड़ेगा.

मेरी इस चुदाई की कहानी में आपको कैसा लगा.. प्लीज़ मुझे मेल भेज कर लिखिएगा.

कहानी जारी है.
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