बेटे के दोस्त पर कामुक दृष्टि-3

(Bete Ke Dost Par Kamuk Drishti- Part 3)

This story is part of a series:

“आंटी, हालांकि आतिफ मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, लेकिन क्या हम केवल वहीं तक सीमित रहेंगे? क्या हम इसके अलावा कुछ नहीं हो सकते?”

शबनम को लगा कि जैसे वह कुछ भी कहेगी उसको रोकने के लिए, वह टूट जाएगा और रोना शुरू कर देगा.

उसने अपनी बाँहें उसके चारों ओर लपेट लीं और अपने सारे शरीर को उसकी ओर धकेलते हुए गले लगा लिया. अंकित ने अपने हाथों को उसकी कमर पर ले जाकर उसे अपनी ओर बढ़ाया. वे एक-दूसरे में खो से गए धीरे-धीरे सहलाते हुए. शबनम की आँखें बंद थीं.

शबनम ने अंकित के कंधे से अपना चेहरा हटाया और उसके सामने आ गई. उसने आधे खुले होंठों के साथ अंकित की आँखों में गहराई से देखा. उसकी आँखें इच्छाओं की आग से जल रही थीं. अंकित को पाने की इच्छा. इस बार और हर बार पूरी होने की इच्छा.

अंकित ने अपने होंठ धीरे से उसकी ओर बढ़ाए. उसने प्रतीक्षा नहीं की और बीच में उनको पकड़ लिया. अंकित ने पहले धीरे से चूमा लेकिन संकोच के साथ.
शबनम ने उसका निचला होंठ अपने मुँह के बीच ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया. वह आश्वस्त हो गया और पूरी तरह से साथ देने लगा.

“आपसे बहुत अच्छी खुशबू आ रही है.” उसने उसे और अधिक कसकर अपने आलिंगन में खींचते हुए कहा. वह सीधे उसकी आँखों में देख रहा था जब वह अपनी लंबी पतली उंगलियों से उसके बालों को सहला रही थी.

उसने उसे प्यार से देखा और फिर उसका चेहरा अपनी हथेलियों के बीच ले लिया. वह अपने होंठ उसकी ओर लायी और उसने उसे स्वीकार करने के लिए अपना मुँह खोला. वह उसे उसी तरीके से चूमता है, जिसके बारे में वह लंबे समय से सपने देख रही थी.

शबनम ने अपनी जबान उसके मुंह के अन्दर घुसा दी और अंकित ने उसको चूसना शुरू कर दिया. उनके होंठों ने एक दूसरे को छूना शुरू कर दिया और उसे लगा जैसे हजारों तितलियाँ उसके पेट के अंदर जाने लगी हैं. शबनम ने उसे जोश से चूम लिया और उसके निचले होंठ को धीरे से काट लिया.

अपनी जीभ की नोक से अंकित ने शबनम के होंठों को महसूस किया और उसे थोड़ा धक्का दिया. शबनम ने अपना मुँह खोला और धीरे से ले अंकित की जबान को अन्दर ले लिया. शबनम अंकित की जीभ को चूसते हुए, उसकी मिठास को चखते हुए, उसके निचले होंठ को चूसती रही.

शबनम का पूरा शरीर खुशी में कांप रहा था और यह चुम्बन अधिक से अधिक उत्तेजित होता जा रहा था. जैसे ही अंकित के हाथ शबनम के पूरे शरीर पर घूमने लगे, वह कमजोर महसूस करने लगी. उसका मन कर रहा था जैसे यहीं अंकित उसके सारे कपड़े उतार कर और वो सब कुछ उसके साथ करे जिसकी इतने दिनों से वो कल्पना कर रही है.

वह उसके धड़कते हुए लंड को महसूस कर सकती थी क्योंकि यह उसके पेट में धक्के मार रहा था. वे अभी भी अपने चुम्बन से अलग नहीं हुए थे. शबनम ने अपने कूल्हों को आगे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया था.
अंकित के हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसके कूल्हों तक पहुँच गए थे और धीरे धीरे सहला रहे थे.

शबनम ने एक गहरी सांस ली और महसूस किया कि अंकित के हाथ उसके सारे अंगों तक एक एक करके पहुँच रहे थे.

उसने अपना मुंह उसके कानों के पास ले जाकर कहा- चलो बेडरूम में चलते हैं. वहां आराम से जो मन होगा वो करना.
यह बोलकर उसने उसके कानों को हल्का सा काटकर उसके पूरे शरीर में एक सनसनी सी फैला दी.

वो उठी और अंकित उसके पीछे जल्दबाजी में उठा. अंकित का हाथ पकड़ कर बेडरूम की तरफ बढ़ गयी.
वह अपने बिस्तर पर लेट गई और उसे अपने शरीर के ऊपर खींच लिया.

एक हल्की हंसी के साथ शबनम ने अंकित से कहा- मैं बहुत दिनों से ये कल्पना कर रही थी कि तुम मेरे साथ ये सब कर रहे हो. और तुम भी जानते थे कि तुम ऐसा कुछ ना कुछ करोगे. है ना?
अंकित ने अपने शरीर को शबनम के ऊपर इस तरह से रखा कि उसका खड़ा लंड उसकी चूत के ऊपर रहे. कपड़ों के ऊपर से ही धीरे धीरे रगड़ते हुए उसने कहा- मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ आंटी. अपने बहुत तड़पाया है मुझे, अब जब हम यहाँ तक आ गए हैं, तो आपको लगता है कि आपको ऐसे ही जाने दूंगा?

“बिलकुल नहीं … ऐसा मुझे नहीं लगता.” एक पल रुक कर उसने फिर कहा- लेकिन अगर तुम ऐसा करोगे, तो शायद अब मैं सह नहीं पाऊँगी.

यह कहकर उसने अंकित को अपने ऊपर खींच लिया. उनके मुंह दुबारा एक दूसरे में जुड़ गए और एक दूसरे में खो गए.

यह कहना मुश्किल था कि किसके हाथ किस समय कहाँ पर हैं. उनके हाथ एक दूसरे के शरीर में इस तरह से खोये हुए थे जैसे किसी खजाने की खोज कर रहे हों. और ये काफी हद तक सही भी था. खजाने से बड़ी कोई चीज़ वहां पर छुपी हुई थी. और उन दोनों को खजाने से ज्यादा उसकी जरूरत थी.

चुम्बनों के बीच में वो थोड़ा सा खिसकी और अंकित के हाथों को अपने हाथों में लेकर अपनी कमर से लेकर ऊपर गले तक रगड़ती हुई ले गयी और वापस लायी. अपने होंठों को चुम्बन से आज़ाद करते हुए शबनम ने अंकित के चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए कहा- आई लव यू!
“आई लव यू टू!” अंकित ने जवाब में कहा.

शबनम ने मुस्करा कर अंकित के दोनों हाथों को अपनी छातियों पर रख कर कहा- यही चाहते थे ना तुम! लो जी भर कर खेलो इनसे. पहले लेकिन थोड़ा आराम से. उसके बाद तुम्हारी जो मर्ज़ी वो करना.

अंकित को और किसी भी निर्देश की जरूरत नहीं थी. शबनम के गले को सहलाते हुए उसका एक हाथ शबनम के कुरते के अन्दर चला गया. उसने उसकी एक चूची को पकड़ कर और निप्पल को हल्के से दबा दिया. उसने अपने होंठों को दूसरे निप्पल के ऊपर रखा और कपड़ों के ऊपर से ही चूसने की कोशिश करने लगा.

शबनम की चूत में आग लग गयी थी. अपनी पूरी ज़िन्दगी में वो कभी इतनी उत्तेजित नहीं हुई थी. अंकित के स्पर्श से उसकी चूत में बाढ़ आ गयी थी. उसने अपना हाथ नीचे किया और अंकित के फड़कते हुए लंड को अपने हाथों में ले लिया. वो लोहे जितना कड़ा था. उसने पूरे लंड की लम्बाई को पहले अपनी उँगलियों से महसूस किया और फिर उसको अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया.

अंकित लगातार उसके निप्पल से खेल रहा था. चूँकि ये उसके पूरे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा था, उसकी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी. ये सब कुछ उसको किसी अलग ही दुनिया में भेज रहा था. उससे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

उसने अंकित को धीरे से धकेल दिया और एक शर्मीले लेकिन वासनापूर्ण तरीके से अपना कुर्ता पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचने लगी. उसके बड़े स्तन ब्रा में बमुश्किल ही समाये हुए थे.
अंकित ने मुश्किल से सांस ली, जब उसने अपने पूरे जीवन का सबसे कामुक दृश्य देखा. अब उसके और इस शानदार चीज़ के बीच में केवल एक ही वस्त्र था. अंत में उसने अपना हाथ पीछे ले जाकर ब्रा के हुक को खोल दिया.

शबनम के स्तन अभी भी बहुत खूबसूरत थे और एक हॉर्मोन से भरे लड़के को काबू में करने के लिए बहुत थे. शबनम के स्तन सच में बिना किसी कमी के बहुत ही खूबसूरत कसे और चमकते हुए स्तनों को देख कर अंकित का मुंह खुला रह गया. उसके निप्पल एकदम सही आकर के थे और रेड वाइन के रंग के थे. वो जैसे अपने आप में न्योता दे रहे थे.

अंकित को लगा कि जैसे वो कोई दिवास्वप्न देख रहा हो. वो भूखी नज़रों से उनकी तरफ एकटक देखे जा रहा था. उसका लंड उसकी पैंट के अन्दर तड़प रहा था.

शबनम ने अपने स्तनों को अपने हाथों में लिया और उनको अंकित की तरफ करते हुए एक मुस्कान के साथ कहा- जैसा सोचते थे वैसे ही हैं या अलग?
“आंटी जितना सोचा था … उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत!” उसने एक भूखे की तरह उसके स्तनों की तरफ देखते हुए कहा.

अंकित की बात सुनकर शबनम एक नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्मा गयी, वो केवल यही कह पाई- ये तुम्हारे लिए हैं.
शबनम के निप्पल बड़े और कड़े हो गए थे. वो जैसे खुद को चूसने, चबाने और काटने का न्यौता दे रहे थे.

अंकित ने अपने सर को नीचा कर के पहले स्तनों पर चुम्बन लिया और फिर अपनी जबान निकल कर दोनों निप्पलों को एक एक करके चाटने लगा. उसके बाद उसने एक निप्पल अपने मुंह में लिया और उसको चूसने लगा.
“ओह आंटी! कितने स्वादिष्ट हैं ये.” अंकित के मुंह से ये आवाज़ आई.

शबनम खुद को संभल नहीं पा रही थी. वो इस समय नौवें आसमान पर थी- इनको चूसो अंकित … इनके साथ जो करना है, करो। अब से ये सब तुम्हारा है।
वह अपनी सिसकती आवाज में अंकित से कह रही थी. उसने उसे अपनी ओर और ज्यादा खींच लिया और इसके साथ शबनम के हाथ अंकित की गांड तक पहुँच गए.

उसने अपने निचले आधे हिस्से को उसके ऊपर धकेल दिया और ऐसा महसूस किया जैसे उसके कपड़ों के ऊपर से कुछ अंदर चला गया हो.
“उम्म्म!” शबनम के मुंह से केवल यही आवाज़ निकल पाई.

अंकित शबनम के स्तनों के साथ इस तरह से खेल रहा था जैसे की एक बच्चा बॉल के साथ खेलता हो.

शबनम के दिमाग से ये नहीं निकल पा रहा था की ये रिश्ता उसके लिए वर्जित है, लेकिन ये उसे और अधिक उत्तेजना दे रहा था.

वह एक निप्पल चूस रहा था और उसकी उँगलियाँ दूसरे स्तन के नरम मांस को सहला रही थीं. उसने एक निप्पल पर चुटकी ली और स्तन को सहलाते हुए हाथों से पकड़ लिया. वह इसी तरह करे जा रहा था, अपने होठों को एक निप्पल से दूसरे को निप्पल तक, चूमता रहा, चाटता रहा, चूसता रहा, चुटकी लेता रहा, पकड़ता रहा और जोर-जोर से सहलाता रहा।

“हाँ अंकित, अपनी जबान से करो बेटा.” उसने बेदम होकर कहा.
अंकित ने अपने जीभ की नोक से उसके निप्पल को जोर जोर से चाटा तो उसे लगा जैसे उसकी चूत के अंदर तूफान आ गया हो. शबनम ने उसे और जोर से पकड़ लिया और उसके पूरे शरीर को अपने अन्दर धकेलने की कोशिश करने लगी.
यह सब शबनम के लिए असहनीय था.

अंकित उसके दोनों स्तनों को एकसमान रूप से बिना एक भी इंच छोड़े, चूस रहा था.
जैसे-जैसे अंकित उसे चूस रहा था, चाट रहा था, और बीच-बीच में उन्हें काट भी रहा था, शबनम का सारा शरीर हिल रहा था. “आह अंकित! ऐसे ही बेटा.” उसके मुंह से यही आवाज़ निकल रही थी.

कहानी जारी रहेगी.
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