रोहतक वाली सेक्सी मामी की चुदाई का मजा-5

(Rohtak Vali Mami Ki Chudai Ka Maja- Part 5)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक आपने इस सेक्स स्टोरी में पढ़ा..
मैंने मामी की चुत चोद दी थी और जैसे ही मैं मामी की चुत में झड़ने को हुआ कि कमरे की घन्टी बज गई, शायद मेरी बहन आ गई थी।
अब आगे..

तो मित्रो, मैं मामी जी की चुत में अपने लंड को स्पीड में चला रहा था और छुटने ही वाला था कि तभी कमरे की घण्टी फिर से बजी और मेरा माल छूट गया।

मामी जी ने फटाफट कपड़े पहने और मैं भी जल्दी-जल्दी सब कपड़े पहन कर चादर तान कर लेट गया। हम दोनों ने सब कुछ बहुत जल्दी किया।
मैं सोने की एक्टिंग करने लगा.. कमरे में बहन आ चुकी थी, बस मैं यूं ही लेटा रहा और अब मुझे खुशी थी कि चलो मामी की चुत का चोदन तो हुआ, बेशक मैं उनके बदन का भरपूर मजा ना ले पाया हो, पर अब मैं उनकी चुत कभी भी ले सकता था। यह तो बस शुरूआत हुई थी, अब तो भरपूर मजा मिल ही जाएगा।

फिर शाम को मामी मुझसे नजरें नहीं मिला रही थीं, ना ही बातें कर रही थीं।

अगले दिन मैं यूं ही अपने हॉस्टल आ गया और फिर एक दिन मामी को फोन किया। इस बार मैं उनसे खुलकर बोल रहा था- मामी जी, कैसी रही चुदाई.. आप तो बड़ी ही मस्त गांड की मालकिन हो.. इतना मस्त माल कैसे छिपाए बैठी थीं। मुझे आपकी अभी मस्त चुदाई करनी है।

पर मामी की तरफ से कोई जवाब नहीं आ रहा था। फिर बस हर रोज बस यही बातें होतीं कि क्या पहना है.. पेंटी कैसे रंग की पहनी है, उतार दो।

पर मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मामी की खुल कर चुदाई कहाँ करूँ, घर पर सम्भव नहीं थी।
एक दिन मामी से मैंने फोन पर बात की और होटल में चुदाई करने के लिए उन्हें मनाने लगा, पर उन्होंने ‘नहीं’ कह दिया।
अब मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ?

फिर रात को एक ख्याल आया कि बाहर कोई कमरा किराए पर ले लेता हूँ। बस इसी योजना पर लग गया और मुझे कुछ दिनों में एक शानदार कम कीमत का, बिना किसी रोकटोक वाला कमरा मिल गया।

मैंने मामी को बताया, उनसे कुछ पैसे ले आया और कमरा ले लिया। कुछ सामान भी कमरे में रख दिया। फिर मामी को फोन पर कहा- कमरा सैट है.. बस आप का इन्तजार है। कल सुबह 9 बजे आ जाना।
मामी ने कोई ढंग से जवाब नहीं दिया।

मैं अगली सुबह मामी को लेने ऑटो स्टैंड पहुँच गया और मामी का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद मामी आईं, हय.. क्या क़यामत लग रही थीं।
मुझे देख कर वो थोड़ा चौंक गईं।

मैंने कहा- चलो मामी जान!
मामी- नहीं मेरा स्कूल है।

पर मैं कहाँ मानने वाला था.. मैं जिद करके मामी को ले चला, मुझे भी पता था कि चुदवाना तो मामी को भी है, बस जरा नखरे कर रही हैं।

हम दोनों चल दिए.. मामी को मैं रूम पर ये सोच कर ले आया कि आज उनकी जम कर चुदाई होगी।

कमरे पर लाकर मैंने मामी को थोड़ा रिलेक्स किया, पानी पिलाया और सेब काट कर दिया। वो शायद घबरा रही थीं और उनकी घबराहट भी ठीक थी। उन्होंने कभी इस तरह से किसी गैरमर्द से घर से बाहर चुदवाया थोड़े ही था।

मैं बात करता-करता मामी के पास आया और उनकी जाँघों पर भी हाथ फेरने लगा। मेरा लंड तन कर खड़ा हुआ था। आज मैं निडर था, मैं अपने हाथों को और मजे से चलाने लगा। मामी जान भी इस सबका आनन्द ले रही थीं। मैंने मामी के होंठों पर होंठ रख दिए और मस्त होकर चूसने लगा। मामी भी पूरी मस्ती से मेरा साथ देने लगी थीं।

मैं उनके चूचे भी दबा रहा था.. आप महसूस कीजिए कि क्या आनन्द के पल होंगे वो..!

मैं उनको चूस रहा था और मैंने इतना अधिक चूसा कि दोनों का मुँह सूख सा गया। अब मैंने उनका सूट उतार दिया.. क्या मस्त चूचे तने हुए थे.. एकदम माल जैसे.. उन पर नीली ब्रा क्या मस्त लग रही थी, ऊपर से उनका गोरा और चिकना बदन इस नजारे में चार चाँद लगा रहा था।

मैं उनके गालों को चूमने लगा और गाल चूमते-चूमते मैंने एकदम से उनकी ब्रा का हुक खोला और निकाल फेंकी। अगले ही पल उनके गोल-गोल नरम-नरम गोरे नंगे चूचे मेरे हाथों में थे, मैं उन्हें मस्त दबा रहा था। फिर मैं उन्हें आम की तरह चूसने लगा। मामी भी इस चूची चुसाई का भरपूर आनन्द ले रही थीं और आज वे ‘बस बस..’ नहीं बोल रही थीं।

अचानक मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया.. मामी ने मेरा हाथ पकड़ा और ‘नहीं..’ कहने लगीं। मुझे भी पता था कि सब लड़कियां ‘ना ना..’ करती हैं पर करवाना सब चाहती हैं।
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मैं चूचे दबाने लगा और चूसने लगा और फिर मामी जी का हाथ नाड़े से खुद ब खुद हट गया, शायद जैसे उसे निकालने की आज मुझे इजाजत दे दी हो। मैंने अगले ही पल मामी की सलवार निकाल दी।

अह.. क्या माल लग रही थीं.. क्या गोरा गदराया बदन.. और आज भी मामी ने वही बैंगनी पेंटी पहनी थी।
सच में दोस्तों आज मामी बड़ा कटीला माल लग रही थीं।

मैं उनके पेट को चूमने लगा.. नाभि के आस-पास चाटने लगा। मामी पूरी गरम हो चुकी थीं और कामुक सिसकारियां भर रही थीं ‘उई उम्म्ह… अहह… हय… याह… अहई..’

अब मैं उनकी टाँगों को चाटने लगा.. साथ ही मैं अपने एक हाथ से उनके चूतड़ को दबा रहा था।
क्या मस्ती भरा अहसास था।

अब मैं उनकी जाँघों को अपने होंठों से चुभला रहा था इससे मामी एकदम मस्ता गईं, वे कहने लगीं- आग लगा दी.. कर दे अब जल्दी से!

मैं मामी की पेंटी को मुँह से निकालने लगा.. वो निकल नहीं रही थी और फिर मामी ने ही अपने हाथों से उसे अलग किया।

यह पहली बार मामी बिल्कुल मूड में थीं, वो खुद चुदवाने के लिए आतुर दिख रही थीं। मैं भी जोश में आ गया और मामी को बेहताशा चूमने लगा।

अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थीं किसी पोर्न फिल्म की हीरोइन जैसी लग रही थीं। मैंने उनकी टांगों को खोला तो उनकी मदमस्त चुत मेरे सामने थी। मैंने ध्यान से देखा कि मामी की चुत थोड़ी काली थी.. झांटें एकदम साफ थीं।

मैं मामी से बोला- मेरे लिए साफ किए है ना!
मामी मुस्कुरा कर बोलीं- ये साफ ही रहते हैं, हाँ पर आज तेरे लिए किए हैं।

मैं मामी की चुत को थोड़ा खोलने लगा तो मामी सिहर उठीं।
अब मैं मामी की चुत के अन्दर वाली ललामी देख सकता था। मैं चुत पर हल्का-हल्का हाथ चलाने लगा, मामी फुल गर्म हो चुकी थीं। मेरी भी हालत खराब थी और मैं मामी की चुत में उंगली को अन्दर ले गया और अन्दर-बाहर करने लगा।
मामी बेचैन होने लगीं और सिसकने लगीं- अम म्मयम.. उईई.. चोद द..दे..!

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अब मैं मामी के सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था। मामी की आँखें बंद थीं और फिर मैंने मामी की आँखें खुलवाईं। मामी मुझे और मेरे नंगे बदन को देख रही थीं और मंद-मंद मुस्कुरा रही थीं। मैं मामी की पप्पी लेने लगा, मामी मुझे बड़े प्यार से देख रही थीं।

वो मुस्कुराते हुए बोलीं- बड़ी बॉडी बना रखी है!
मैं- मामी, आज ये बॉडी आपको निचोड़ेगी।

मामी हंसने लगीं तो मैंने अपना खड़े लंड को मामी के हाथों में रखना चाहा, पर मामी लंड को पकड़ ही नहीं रही थीं।

फिर मैंने थोड़ा जबरन उनके हाथ में लंड रखा और पूछा- मामी कैसा लगा?

मामी कुछ नहीं बोलीं, तो मैं मामी की चुत की तरफ बढ़ा। मामी पूरी नंगी बड़ी मस्त लग रही थीं, तभी मेरे मन में ना जाने क्या आया.. मैं मामी की चुत को चूमने लगा।

मामी भी इसके लिए तैयार नहीं थीं.. वे अभी कुछ करतीं कि मैं एकाएक उनकी चुत चाटने लगा।

मामी इसके लिए वास्तव में तैयार नहीं थीं.. उन्होंने मुझे रोका, पर मैं लगा रहा। अब मामी अपनी आँखें बंद कर बस ये बोल रही थीं कि अह.. ये क्या कर रहा है!

दोस्तो, सच में चुत चाटने में बहुत मजा आ रहा था, हालांकि कोई टेस्ट नहीं था.. पर वासना और अन्तर्वासना की कहानियों का असर था, जिस वजह से मैं अपने आपको पहली बार चुत चाटने से रोक नहीं पाया।
मामी भी पहली बार अपनी चुत चटवा रही थीं वो अपनी टांग खोले चूतड़ों को मस्ती से हिला रही थीं।

फिर मैं आँख उठा कर मामी को देखने लगा और बोला- आज नहीं छोड़ सकता डार्लिंग..

बस इतना कह कर मैं मामी के भगनासे को अपने होंठों में दबाने लगा। मामी को जैसे कंरट लगा और मामी आवाज निकालने लगीं- ऊ..अम अम अम् उम्म..
मैं भगनासे को चचोरता हुआ मामी की चुत में अपनी उंगली को आगे-पीछे करने लगा।

मामी अब बोल उठीं- डाल भी दे अब..
पर मैं चुत से खेल करता रहा और फिर वो एकदम से इठ गईं.. शायद झड़ गई थीं।

मैं उन्हें फिर से चूमने लगा.. चुचि का सेवन करने लगा और चुत की फांकों को खोल कर चाटने लगा। मैं अपने लौड़े को मामी के हाथों में देने लगा.. पर वो पकड़ ही नहीं रही थीं।

मैं उनसे लौड़े को चूसने के लिए कहा, पर वो नहीं मानी। मैं फिर से उनकी चुत की तरफ आ गया और चुत खोल कर लंड डालने लगा। सुपारा फंसाया और लंड धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की कोशिश करने लगा। मामी ने मुझे बहुत जोर से पकड़ लिया था, जैसे मुझ में समाना चाहती हों। मैं उनकी चुत में लंड को आगे-पीछे करने लगा और अपनी रफ्तार बढ़ा दी।

मेरा लंड मामी की फुद्दी को चीर रहा था और मामी चुत चुदवाने का भरपूर आनन्द ले रही थीं। मामी मस्ती में आवाज निकाल रही थीं।

मैं भी और जोश में झटके जोर से मारने लगा। तभी मामी ने मुझे जकड़ा.. शायद मामी झड़ चुकी थीं, पर मैं अपना लंड पेलता रहा। पूरे कमरे में ‘पच.. पच..’ हो रही थी।

कुछ देर बाद मैं अब झड़ने वाला था और दो-तीन धक्कों के बाद मैं मामी की चुत के अन्दर ही झड़ गया। उत्तेजना इतनी अधिक थी कि झड़ने के बाद भी मैं झटके मारता रहा। फिर मेरा लंड बैठ गया और मैं और मामी नंगे लेट कर बातें करने लगे।

अब मैं मामी को बीच-बीच में चूमता रहा और लौड़ा फिर से तैयार किया, मामी भी तैयार हो उठी थीं। अबकी बार मैंने उनकी चुत अलग-अलग पोज में ली.. पीछे से चोदने में तो कसम से आनन्द ही आ गया।

चिकने और मखमली गोरी चमड़ी वाले चूतड़ों पर से चुत को चोदने के क्या कहने.. समझो जन्नत का अहसास था।

मैंने मामी को 4 बार चोदा और फिर 6 बजे जाने के लिए वो तैयार होने लगीं। पता नहीं मेरे मन में क्या आया कि मैंने उनकी पेंटी को अपने पास रख लिया। मामी नंगी ही मुझसे पेंटी लेने की कोशिश करती रहीं और मैं यहां से वहां भागता रहा।

कसम से आनन्द आ रहा था.. पर मैंने मामी को पेंटी नहीं दी। मामी नंगी ही कमरे में मेरे पीछे दौड़ते हुए लेने की नाकाम कोशिश करती रहीं और फिर बिना पेंटी के सलवार पहनते हुए बोलीं- रख ले.. और खा ले इसको!

मैं उनके पास गया.. उन्हें चूमा और कहा- इसको मैं चुदाई की निशानी के तौर पर अपने पास रखना चाहता हूँ।
फिर वो मुस्कुरा कर चल दीं।

अब तक मैंने मामी को 60-70 बार चोदा होगा, कभी कमरे में, कभी मामी के घर पर, तो कभी अपने घर, पर मामी ने आज तक मेरा लंड नहीं चूसा.. पर मुझे विश्वास है कि वो एक दिन मेरा लंड जरूर चूसेंगी और वो सब मैं आपके सामने जरूर लिख कर पेश करूँगा।

मैं तो खुद को बहुत नसीब वाला मानता हूँ कि मुझे एक ऐसी अप्सरा की चुत और एक बार गांड मारने का मौका मिला, जिसने पति के अलावा किसी को चुत नहीं दी हो। हालांकि गांड तो मैं बस एक बार ही मार पाया.. क्योंकि इसके बाद उन्हें कुछ बवासीर की दिक्कत हो गई थी।

आपको मेरी पहली सेक्स स्टोरी कैसी लगी.. कुछ गलतियां हुई होंगी, माफ करना और अपने सुझाव जरूर लिखिएगा।
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धन्यवाद

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