रोहतक वाली सेक्सी मामी की चुदाई का मजा-2

(Rohtak Vali Mami Ki Chudai Ka Maja- Part 2)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

तो मित्रो, आपको इस सेक्स स्टोरी के पहले भाग से मालूम हुआ था कि कैसे मैं अपनी प्यारी मामीजान की मालिश करके आया था।
अब आगे..

मैं रात को करीब 11 बजे पार्टी से हॉस्टल आया और सोने के लिए लेट गया। मैं आप लोगों को बताना चाहूँगा कि मैं अपने रूम में हमेशा नंगा ही सोता हूँ, कुछ भी नहीं पहनता।

तो मैं अपने सारे कपड़े कच्छा वगैरह सब उतार कर सोने लगा, पर नींद नहीं आ रही थी.. तो मैंने अपनी स्कूल टाईम की अपनी एक गर्लफ्रेंड को फोन किया.. वो अब हैदराबाद रहती है। उसके साथ फोन सेक्स कर मुठ मारी और सोने की कोशिश करने लगा, पर नींद अब भी नहीं आ रही थी।

मेरे सामने मामी का चेहरा घूम रहा था, मैं दिन की घटनाओं को याद करने लगा, आज पहली बार उनके बारे में सोचना मुझे उत्तेजित कर रहा था और मैं उत्तेजना से लबरेज उनके चेहरे को अपनी कल्पनाओं में महसूस करने लगा था। वाकयी में मेरी मामी जान किसी हूर की परी से कम नहीं हैं, ये मुझे उस रात महसूस हुआ।

मैं पूरी रात उनके बारे में ही सोचता रहा। अगली रात भी मेरा यही हाल था.. मैं उनकी चुची कैसी होंगी और चुत कैसी होगी, इसी सबके बारे में सोचता रहा। जब मैंने उनकी उभरी हुई गांड के बारे में सोचा तो मैं तो बस पागल सा हो गया।

अह्ह.. हय.. क्या गांड है उनकी.. मैंने दस में से दस नम्बर दे दिए और उस मखमली, गोल, गठीली, गदराई गांड को सोच-सोच मुठ मार ली, पर मेरे लौड़े का अब भी वही हाल था।

मैंने एक दिन में कभी इतनी बार मुठ नहीं मारी थी.. हाय रे मामी जान.. आप की मस्त गांड ने मेरे लंड का क्या हाल कर दिया।

अगली सुबह मैंने मन बनाया कि मैं उन्हें चोदकर रहूँगा। मैंने मन ही मन में बड़बड़ाने लगा- मेरी जान मैं तैयार हूँ तुम्हें पेलने के लिए.. क्या आप तैयार हो मेरा ये लम्बा और मोटा लंड लेने के लिए.. मेरी जान ये आपको भरपूर मजे देगा।

दिन में मैंने उनसे बात की, मुझे उनसे बात करने में भी उत्तेजना बढ़ रही थी और मैं साथ ही साथ बिल्कुल नंगा हो कर मुठ मार रहा था। हय.. क्या आनन्द आ रहा था..!

ऐसा ही सप्ताह भर मैं उनसे किसी ना किसी बहाने नंगा होकर बात करता और मुठ मारता रहता। अब वो भी मेरी बातों में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगी थीं, जिससे मेरी मामी को चोदने की इच्छा बलवती होती गई।

और हो भी क्यों ना.. मामी माल ही ऐसा हैं, जो देखे.. बस उन्हें चोदने की ही सोचे।

फिर एक दिन मैं मामा के घर गया। इस बार मैं सिर्फ अपनी मामी से मिलने गया था और सौभाग्य से दरवाजा भी उन्होंने खोला।

गुलाबी सूट में क्या मस्ती लग रही थीं वे.. मन हुआ कि अभी ही पकड़ लूँ, पर मैंने संयम रखा और अन्दर आ गया।

अब मैं मामी की आँखों में आँख डाल बात कर रहा था.. कुछ देर तो वो नजरें चुरा रही थीं, पर मैं कहाँ मानने वाला था। मैं तो उन्हें चोदना चाहता था, फिर वो भी नजरें मिलाने लगीं। शायद वो भी वही सोच रही थीं, जो मैं सोच रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था।

इतने में भाई आ गया और मुझसे बोला- आ गया, चल घूम कर आते हैं।

जब भी मैं वहाँ जाता था तो हम दोनों हमेशा बाहर चले जाते थे, पर इस बार मैं उससे नहीं बल्कि उसकी मम्मी को निहारने आया था तो मैंने उसे मना कर दिया, अब मैं ज्यादा से ज्यादा वक्त मामी के साथ रहना चाहता था ताकि मैं उनके चूचे, चूतड़ों को मजे से निहार सकूँ।

मैंने खाना भी रसोईघर में खाया ताकि उनकी गांड देख सकूँ।
कसम से क्या माल है मेरी जान.. मेरा मन कर रहा था कि यहीं पूरी नंगी करके चोद दूँ।

एक बात बता दूँ कि मेरी मामी का अभी तक एक भी सफेद बाल नहीं हुआ है, वो डाई भी नहीं करतीं, ये मुझे भी उसी दिन ही पता चला।
मैं उनकी तारिफ कर रहा था- मामी आप तो अभी 20 की लगती हो!
वो बोलीं- अच्छा जी.. तो ये तू मुझे लाईन मार रहा है!
मैं बोला- नहीं मामी सच में..

और यूं ही बातचीत होती रही, तभी मामा के आने का समय हो गया और कुछ ही देर में वो भी आ गए।

फिर सब सोने की तैयारी करने लगे। मैं मामी के साथ सोना चाहता था.. पर सोया भाई के साथ।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अब कैसे मामी को चोदूं और मैं उनके नाम की मुठ मार कर सोने की कोशिश करने लगा, पर नींद कहाँ आने वाली थी.. वो तो उनकी गांड में घुसी थी।

यही सोच दिमाग में चल रही थी कि मैं कब उनको नंगी करूँगा, कब उनके गोल नंगे चूतड़ों को अपने हाथों में लूँगा।

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