मामी की जवानी को लूटा-2

(Mami Ki Jawani Ko Luta- Part 2)

रिश्तों में चुदाई की मेरी कहानी के पहले भाग
मामी की जवानी को लूटा-1
में अब तक आपने पढ़ा कि मैं मामी के साथ शादी में जाने वाला था और इसी वजह से मामी मेरे साथ बाजार शॉपिंग करने गई थीं.
अब आगे..

शॉपिंग करने के बाद हम वापस जाने लगे, लेकिन इस बार हमारे बीच में सामान था, तो मामी का स्पर्श नहीं मिल पाया. घर पहुंच कर मामी अपनी तैयारी में लग गईं और मैं नानी के साथ गप मारने में व्यस्त हो गया. नानी से मैं काफी समय के बाद मिला था, तो बातों में वक्त का पता ही नहीं चला और रात हो गई.

मामा जी घर आ गए. खाना खाने के बाद मामा जी हमें बस स्टैण्ड छोड़ने आ गए. शादियों का सीजन होने के कारण हमें बस नहीं मिल रही थी. आखिर एक स्लीपर वाली बस मिली, लेकिन उसमें एक ही सीट बची थी और अगली बस सुबह की थी. तो हमने उसी बस से जाने का निर्णय किया. हम दोनों बस में चढ़े और बस चलने लगी. हम लोग अपनी सीट पर बैठ गए. सभी लोग सोने लगे बस के कंडक्टर ने हमारा टिकट बनाया और परदा लगा के चला गया.

हम लोग एक की बर्थ पर दो बैठे थे, तो जगह नहीं हो पा रही थी. मामी ने मुझे कहा कि तू सो जा, मैं बैठ जाती हूं.

लेकिन मैंने मना कर दिया और मामी को कहा कि आप ही सो जाओ.
फिर मामी ने कहा कि हम दोनों ही सो जाते हैं.‍. एकाध गड्डे में जगह सैट हो ही जाएगी.

मैं हंस पड़ा. फिर हम दोनों ही लेट गए. जगह इतनी कम थी कि पहले मामी नीचे की तरफ मुँह करके लेट गई और मैं उनकी तरफ मुँह करके लेट गया.

बस में एसी चल रहा था, तो मामी को ठंड लग रही थी, तो वो काँपने सी लगीं. मामी ने मुझसे कम्बल मांगा और हम दोनों सीधे होकर एक दूसरे के बगल में लेट कर एक ही कंबल में घुस कर लेट गए. अब हम दोनों ने बातें शुरू कर दीं.

मामी- समीर तुम सही से तो लेटे हो ना.. कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है ना?
मैं- नहीं मामी.. ठीक है, बस हाथ जरा सा मुड़ रहा है.
मामी- अरे यार मेरे ऊपर रख दे ना हाथ.. लेकिन कोई शरारत मत करना. मुझे याद है, बचपन में पता नहीं रात को तेरा हाथ कहां कहां चला जाता था.

इतना सुनते ही मेरे लंड ने हल्का सा झटका मारा और मैंने हा‍थ मामी की कमर पर रख लिया. मैंने जानबूझ कर मजा लेने के लिए पूछा- कहां चला जाता था मामी मुझे याद नहीं है?
मामी- कहीं नहीं … और अब चुपचाप सो जा.

मेरी हालत खराब होने लग गई थी. जिसके बारे में मैं रोज सोचता था, वो आज मेरे इतने करीब हैं. मेरा हाथ उनके पेट पर था.. पैर से पैर सटे थे. उनके शरीर से एक अलग ही खुशबू आ रही थी. मेरा मुँह उनके गले के एकदम पास था. मेरी उत्तेजना के साथ ही साथ मेरे शिश्न में भी उत्थान आ रहा था, जो मामी की जांघों में धंसा जा रहा था. मेरा तो जी कर रहा था कि अभी मामी के कपड़े फाड़ कर चूत में लंड पेल दूं. मेरे पैर कांप रहे थे. मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था.

मैंने मामी को हल्के से आवाज दी, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया. मुझे लगा कि या तो वो सो गई थीं, या सोने का नाटक कर रही थीं. खैर जो भी हो, मैं अपने आपको रोक नहीं पाया. मैंने धीरे से अपना हाथ जो मामी की कमर पर था, उसे ऊपर बढ़ाना शुरू किया. मेरे हाथ मामी के स्तन तक पहुंच गए. मैंने बाहर से ही उनको सहलाना शुरू किया. जब कोई आपत्ति नहीं हुई तो बीच बीच में दबाने भी लगा. फिर मैंने अपना हाथ मामी के ब्लाउज के अन्दर डाल दिया और फिर ब्रा के अन्दर करके उरोजों को सहलाने लगा. गले को चूमने लगा. मेरी उत्तेजना बढ़ गई थी मैंने ब्लाउज के दो बटन भी खोल लिए.

मैं अपने लिंग को आगे की ओर धकेलने लगा और अचानक से मेरे लिंग ने मामी की साड़ी पर ही बहुत सारा लावा उगल दिया. मैं शान्त हो चुका था और न जाने मुझे कब नींद आ गई.. पता ही नहीं चला.

सुबह मामी ने मुझे उठाया, हम पहुंच गए थे. हम सामान उठाकर बाहर आ गए. मुझे डर लग रहा था कि मामी क्या सोच रही होंगी.
तभी मामी ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा- बाहर गाड़ी भेज रखी है, जल्दी चलो.

अभी उजाला नहीं हुआ था. बाहर कोई अंकल हमें लेने आए थे, तो हम गाड़ी में बैठ गए. मामी ने बताया कि हमें किसी होटल में जाना है. उसके बाद शादी वाले घर पर जाएंगे. अंकल ने हमें होटल के रूम तक छोड़ दिया.

अब पांच बज चुके थे. मामी ने कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया. मामी मुझसे इस तरह बर्ताव कर रही थीं मानो रात को कुछ हुआ ही नहीं हो.

होटल का ये एक आलीशान कमरा था, जिस पर दो बेड लगे थे. एक सिंगल और एक डबल.
मामी ने कहा- तू सो जा, मैं चेंज करके आती हूं. लगभग ग्यारह बजे हमें निकलना है.

मैं फटाफट डबल बेड पर लेट गया और मामी का इन्तजार करने लगा. मामी ने बाथरूम में काफी टाइम लगा दिया. जब वो बाहर आईं, तो उन्होंने एक सैक्सी सा नाइट सूट पहना हुआ था, जिसका गला काफी गहरा था. वो इस वक्त मुझे किसी अप्सरा की तरह लग रही थीं. मैंने ध्यान दिया कि मामी ने रात वाली साड़ी भी धो दी थी. शायद इसी वजह से वो देर में बाहर आयी थीं.

मैंने चादर उठाकर उनको निमन्त्रण दिया- आ जाओ मामी, यहीं सो जाते हैं.
मामी- तू सो जा, मैं उधर सो जाती हूं. वैसे भी अब तू बहुत बड़ा हो गया है.
ये कहकर मामी अलग सो गईं.

दोस्तो, मेरे साथ यह पहली बार नहीं हो रहा था. मुझे जब भी मौका मिलता, तब तक कुछ ना कुछ हो जाता.

मैंने आज तक कभी सेक्स नहीं किया था. हां मुझे इसके बारे में सब पता तब चल गया था जब मैं छोटा था. गांव में टीवी पर पहले केवल दूरदर्शन चलता था. जो एंटीना से सिग्नल लेता था.. तो एक बार टीवी पर बीएफ चलने लगी थी, शायद बगल में कोई वी सी आर में देख रहा था और हमारी टीवी ने उनके सिग्नल कैच कर लिया था. मैं तभी से सब जान गया था. लेकिन इतने साल बाद भी चूत मारने का मौका नहीं मिला.

ग्यारह बजे हम शादी में चले गए. मामी वहां पर सब को जानती थीं, तो उनके साथ व्यस्त हो गईं, लेकिन मैं एक जगह पर बैठ कर बोर होने लगा. शाम को हम होटल जाकर शादी के लिए तैयार हो गए. मामी वैसे ही हॉट लगती थीं, लेकिन तैयार होकर वे और भी ज्यादा सुन्दर लग रही थीं.

शादी हमारे होटल से काफी दूर थी, तो हम ऑटो से वहां चले गए. मौसम काफी खराब हो गया था, किसी भी समय बारिश हो सकती थी. मामी भी अपनी सहेलियों के साथ मजे ले रही थीं और मैं अकेला बोर हो रहा था.

उधर दारू का इंतजाम भी था, तो मैंने पैग लगा दिए, फिर मस्ती से डीजे नाचने लगा. काफी देर हो गई थी, कुछ लोग वापस जा चुके थे और कुछ जा रहे थे.

तभी अचानक तेज बारिश शुरू हो गई. हम भी होटल के लिए निकले, तो हमें कोई गाड़ी नहीं मिली. हम एक घंटे से खड़े थे, हम परेशान हो चुके थे.

मामी की एक फ्रेंड ने हमें देख लिया, तो वो हमारे पास आई. उसने कहा कि बारिश की वजह से अब कुछ मिल पाना मुश्किल है. तुम एक काम करो कि सामने कुछ कमरे बुक करवा रखे हैं, तुम वहीं चले जाओ. कल सुबह अपने होटल में चले जाना.

हमें यही सही लगा.
उसने हमें कमरे की चाबी दे दी.

तेज बारिश की वजह से हम पूरी तरह से भीग गए थे. मामी ने कमरा देखा तो वो और ज्यादा परेशान हो गईं. एक छोटा सा कमरा और उसमें एक कुर्सी और एक छोटा सा बेड था. मैं बाथरूम में गया, तो वहां एक तौलिया मिला. मुझे मैंने तौलिया मामी को दे दिया. ‍हमारे सारे कपड़े और सामान पहले वाले होटल में ही छूट गया था. रात के एक बज चुके थे. गीले कपड़ों में हम रह नहीं सकते थे, ऊपर से ठंड भी लग रही थी.

मामी- शम्मी बेटा, तू एक काम कर, ये तौलिया लेकर जा और अपने कपड़े उतार कर चादर में लेट जा.
मैं- नहीं मामी, ठीक है कोई बात नहीं मैं ऐसे ही सो जाऊँगा.
मामी- तू बीमार हो जाएगा. जैसा मैं बोल रही हूं, वैसा कर.

मैंने तौलिया लिया और बाथरूम में चला गया. अपने सारे कपड़े खोलकर तौलिया लपेटकर बाहर आ गया.

मामी मुझे देखकर मुस्करा रही थीं, मैं जल्दी से चादर में घुस गया.
मैं मामी को देखकर कहने लगा- मामी, आप कैसे रहोगी गीले कपड़ों में?
तो मामी फिर मुस्कराने लगीं.

मामी- गीले कपड़ों में मुझे भी बीमार होने का कोई शौक नहीं है. ला तौलिया वापस दे.
मैंने भी बिना कुछ सवाल किए तौलिया निकाल कर मामी को दे दिया और चादर लपेट ली. मामी अन्दर चली गईं, आज मैंने सोच लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं मामी को चोद कर रहूंगा.

यह सोचते ही मेरा लंड खड़ा होने लग गया. मामी जैसे ही बाहर आईं, मैं देख कर पागल हो गया. उनके शरीर में केवल वही तौलिया लिपटा था. तौलिया उनके उभारों पर तो पूरा था, पर उनकी टांगें पूरी नंगी थीं, भीगे हुए बाल उनसे टपकता पानी, एक हाथ से तौलिया को पकड़े वो मेरी ओर आ रही थीं कि तभी वो पलट गईं. इससे पहले मैं कुछ समझ पाता उन्होंने लाइट बंद कर दी. लेकिन एक नीले रंग का नाइट बल्ब अब भी जल रहा था. उसकी रोशनी ने मामी के यौवन पे चार चांद लगा दिए. दोस्तों मैं तो जैसे पागल ही हो गया था. वो मेरी ओर हाथ से सफेद रंग का तौलिया थामे हुये आ रही थीं. तभी पानी की एक बूंद उनके गालों से फिसलकर सीधे उरोजों के बीच में समा गई. मेरी नजर वहीं रुक गई.

मामी ने चादर मेरे नीचे से निकाली और उठाकर अन्दर आ गईं. बेड काफी छोटा था, तो मैं मामी से पूरा चिपक गया था. मैं दीवार की तरफ था, मामी नीचे की तरफ मुँह करके लेट गईं और मैं पेट के बल लेटा था, जिसकी वजह से मेरा हाथ मामी के नीचे दब गया.

मैं मामी की तरह लेट गया और बिना पूछे मामी के ऊपर हाथ रख लिया. लेटने की वजह से तौलिया थोड़ा सा खुल गया था, तो मेरा हाथ उनके नंगे पेट को लग गया. मामी के शरीर की गर्मी मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी. मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था, जो मामी के नितम्बों पर दबाव बना रहा था.

मेरा हाथ मामी के पेट पर चलने लग गया था. मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मैंने हाथ मामी के स्तन पर रख दिया.
मामी ने मेरा हाथ पकड़ लिया- शमीर, ये गलत है, मैं तेरी मामी हूं.
लेकिन मामी ने अपना हाथ नहीं हटाया. मैंने बिना कुछ कहे हाथ और लंड का दबाव बढ़ा दिया. मैंने मामी के शरीर से तौलिया हटा दिया.

मामी ‘नहीं नहीं..’ कहे जा रही थीं, पर मैं अब कहां रुकने वाला था.

मामी ने अपना हाथ हटाया, तो मैंने मामी को अपनी तरफ घुमा लिया और उनके लबों पर अपने लब रख दिए. अब हमारे लब मिल चुके थे. मामी का हाथ मेरी कमर पर आ गया था. मेरा मामी की कमर पर था. उनके स्तन मेरी छाती से चिपके हुए थे. मैंने मामी का हाथ अपने लंड पर रख दिया. मामी ने मेरे लंड को थाम लिया और ऊपर नीचे करने लगीं. मैं मामी के मुँह में जोर जोर से जीभ को घुसाने लगा और मामी भी मेरा साथ देने लगीं.

उनका हाथ मेरे लंड पर जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगा. मुझसे रहा नहीं गया, मैंने मामी को टाइटली पकड़ लिया और अपना सारा माल मामी के हाथ और पेट पर छोड़ने लगा. कम से कम दस सेकंड तक मेरा रस निकलता रहा.

मैं हैरान था क्योंकि जीवन में पहली बार मेरा इतना वीर्य निकला था.
हमारे होंठ अलग हो गए. मुझे बहुत शरम आ रही थी, मैं बिना कुछ किए ही झड़ गया था.

मामी मुस्करा रही थीं. मामी मेरी नजरों को भांप गई थीं, मामी ने अपना हाथ और पेट तौलिया से साफ किया और फिर तौलिया वहीं पर रख कर नंगी ही वाशरूम में चली गईं.

वापस आकर मामी ने देखा कि बेडशीट भी गीली हो गई थी. उन्होंने उसे भी साफ किया. मैं शरम के मारे पेट के बल लेट गया था.

मामी मेरे पास आकर बैठ गईं, मेरी चादर हटाकर उन्होंने मुझे सीधा लेटाया. मेरा लंड अब सिकुड़कर छोटा हो गया था. वो ये देखकर हंसने लगीं. मैंने नजरें झुका लीं. मामी ने लंड पकड़ कर देखा तो उसमे भी वीर्य लगा था.

मामी ने हाथ से पकड़कर चमड़ी को पीछे करके सुपारा बा‍हर निकाला और ऐसे ही पकड़ कर मुझे बाथरूम में ले गईं.

मामी ने नल चला दिया और मेरा मुँह नल की तरफ कर दिया. पानी मेरे लिंग के ऊपर गिर रहा था. मामी मेरे पीछे नंगी खड़ी थीं. उनके स्तन मेरी पीठ से चिपके थे. इसी स्थिति में वो धीरे धीरे नीचे हो रही थीं, उनका बांया हाथ मेरे लिंग पर आ गया और दूसरा हाथ मेरी टांगों के बीच से निकलकर मेरे अखरोटों से खेलने लगा था. वो नीचे बैठ कर ये सब कर रही थीं.

मेरा लंड फिर से पूरी तरह से कड़क हो गया था. फिर खड़े होकर मामी ने मेरा चेहरा अपनी तरफ कर दिया. वो मेरे होंठों को चूमने लगीं, मैं भी उनका साथ देने लगा.

कुछ देर बाद वो फिर नीचे बैठ गईं और बिना हाथ लगाये मेरे लंड को मुँह में ले कर चूसने लगीं. ऐसा करते हुए वो मेरी आंखों में देख रही थीं. मैंने मामी के बाल पकड़ लिए और उनके मुँह में नद के झटके मारने लगा. कभी कभी मामी के गले में ज्यादा अन्दर पेल देता, तो वो मेरे लंड को बाहर निकाल लेतीं और जोर जोर से सांस लेने लगतीं. फिर गपाक से लंड अन्दर ले लेतीं. मेरा रस निकलने वाला था, पर मैंने बाहर नहीं निकाला और मामी के मुँह में ही पिचकारी मार दी.

मामी ने मुँह से बाहर निकाल कर हाथ से मुठ मारनी शुरू कर दी. बाकी का सारा वीर्य उनके स्तनों पर गिर गया.

हम दोनों थक चुके थे. मेरा लिंग फिर से छोटा हो गया था. मामी ने उसे साफ किया और हम कमरे में आ गए.

मामी और मैं लेट गए, लेकिन इस बार मामी का हाथ मेरे ऊपर था. मैं उनके स्तनों को चूसने लगा और एक उंगली मैंने उनकी चूत पर भी डाल दी. वो गीली हो रखी थी.

मैं उंगली अन्दर बाहर कर रहा था और मामी सिसकारियां ले रही थीं. मामी और मैं 69 की पोजीशन में आ गए.

मामी मेरे ऊपर थीं, मैं मामी की चूत चाट रहा था और वो मेरे लंड को चूस रही थीं. मेरे लंड ने फिर से विकराल रूप धारण कर लिया था.

मामी की चूत से निकलने वाली खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी. मामी सीधी होकर लेट गईं और मुझे अपने ऊपर खींच लिया. मैं लिंग को मामी की योनि के अन्दर घुसाने लगा, लेकिन वो इधर अधर चला जाता.

फिर मेरी प्यारी मामी ने मेरे लंड को रास्ता दिखाया. पचाक की आवाज के साथ मेरा पूरा लंड मामी की योनि में घुस गया. मामी ने अपने दांतों से होंठों को दबा दिया, आंखें बन्द कर दीं और मेरी पीठ पर नाखून रगड़ने लगीं. मैं भी पूरी जोर आजमाइश के साथ अपने वर्षों पुराने सपनों को हकीकत में तब्दील करने में जुटा था. मैं धीरे से बाहर लंड निकालता और फिर पूरी ताकत के साथ अन्दर पेल देता.

‘पच पच.. आह आह..’ की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था. आखिर वो समय आ ही गया, जब हम दोनों ने एक साथ पिचकारी मार ली. उस समय ऐसी स्थिति थी कि मामी ने मुझे.. और मैंने उन्हें पूरे जोर से जकड़ा हुआ था. हम दोनों ही असीम तृप्ति को पा रहे थे.

मैं मामी के ऊपर ही निढाल होकर बिना लंड बा‍हर निकाले लेटा रहा. वो दिन मेरे जीवन का सबसे हसीन दिन था. आज मैं छब्बीस साल का हो गया हूं, दिल्ली में नौकरी करता हूं और मैंने मामी के बाद चार चूत और चोदी हैं, लेकिन मामी की चूत चुदाई का मजा ही कुछ और था.

मेरी इस चुदाई की कहानी पढ़ कर किसी ने अपना लंड हिलाया हो या चूत में उंगली की हो, तो मेरा कहानी लिखना सफल होगा. दोस्तो, मुझे ईमेल करके जरूर बताना कि आपको मेरी कहानी कैसी लगी. मैं अन्तर्वासना को भी धन्यवाद कहना चाहूँगा.
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