बुआ ने अपना पति माना

प्रेषक : जुगल किशोर

कैसे हो दोस्तो ! यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम नमन है मैं मुंबई का रहने वाला हूँ, इंजीनियरिंग कर रहा हूँ मुंबई में ही ! मेरा कद 5’9″ है और हट्टा कट्टा नौजवान हूँ। जैसा कि सब कहते हैं, मैं भी सेक्स का बहुत शौक़ीन हूँ। हमेशा मेरे दिलो दिमाग में सेक्स घूमता रहता है, मुझे चूत से बहुत प्यार है।

बात ज्यादा पुरानी नहीं है मेरी छुट्टियाँ चल रही थी, मैं अपनी बुआ के घर गया हुआ था। मेरी बुआ 45 साल की सेक्सी औरत है, इतनी उम्र के बाद भी उन्होंने अपना फिगर मेंटेन रखा है। दिखने में आज भी वो किसी हिरोइन से कम नहीं हैं, आज भी वो देखते ही किसी के भी लंड से पानी छुड़वा सकती हैं। तो जब भी मैं उन्हें देखता हूँ तो सोचता हूँ कि काश मैं इनका पति होता, इन्हें दिन रात चोदता और फ़ूफ़ाजी से कुछ टाइम के लिए नफ़रत कर बैठता हूँ।

चलो अब काम की बात पर आते हैं। मैं अपनी बुआ के घर गया हुआ था, सर्दी के दिन थे, मेरे फ़ूफ़ा बिज़नसमैन हैं, वो सुबह से देर रात तक ऑफिस में ही रहते हैं तो मुझे बुआ के साथ काफी समय बिताने को मिल जाता था उन दिनों। मैं उनसे काफी खुली मजाक कर लेता था।

एक दिन हम दोनों बातों में यहाँ तक पहुँच गए कि मैंने उनसे पूछ लिया कि मेरे फ़ूफ़ा रोमेंटिक हैं या नहीं।

तो वो शरमा गई। इससे मुझे थोड़ी हिम्मत मिली और मैंने टोपिक बदल दिया।

अगले दिन मेरी नींद थोड़ी जल्दी खुल गई तो मैं उठा और रसोई में पानी पीने गया। वापिस लौटते समय मेरी नजर बुआ के कमरे में पड़ी जिसे देख कर मेरा सोया नागराज उठ बैठा। मैंने देखा बुआ कि नाइटी ऊपर उठी हुई थी और टांगे फैली हुई थी जिससे लाल रंग की पैंटी साफ़ दिख रही थी।

मन तो किया कि जाकर झट से पैंटी फाड़ कर खड़ा हुआ लंड अन्दर घुसेड़ दूँ पर मजबूर था। अब मैंने मन में ठान ली कि बुआ को तो अच्छी तरह से लंड से चोद कर ही रहूँगा।

मेरा दिमाग तरकीब सोचने लगा, मुझे उन्हें चोदने का तरीका मिल गया।

मेरी बुआ अगले दिन सुबह 8 बजे चाय बना रही थी, उन्होंने काले रंग की मैक्सी पहन रखी थी, मेरा लंड सुबह में खड़ा हुआ ही था और मैंने पीछे से जाकर उन्हें बाहों मे ले लिया जिससे मेरा खड़ा हुआ लंड उनकी गांड की दरार में जाकर टिक गया।

उन्हें उसका एहसाह हुआ पर वो मेरी नादानी समझ रही थी, मैंने उनको गाल पर एक चुम्बन किया और नहाने चला गया। बाहर आकर मैंने ढीला पजामा पहन लिया, अन्दर चड्डी नहीं पहनी।

बुआ भी नहा कर रसोई में खाना बना रही थी। उनके उभरे चूतड़ देख कर मेरे लंड में फिर से जोश आ गया, मेरा पूरा मन हो गया कि उन्हें चोद दूँ रसोई में खड़े खड़े ही।

मैंने फिर से सुबह वाली हरकत दोहराई लेकिन इस बार बुआ को मेरी नादानी के बजाए मेरे इरादे समझ आने लगे, पर गांड पर मेरा लंड महसूस करके उन्हें कुछ अच्छा लगा शायद, उन्होंने मेरा विरोध नहीं किया, जो हो रहा था, उसे होने दिया।

मैंने उन्हें कस कर दबा लिया अपनी ओर, इससे मेरा लंड दरार में जितना जा सकता था उतना पूरा चला गया। बुआ तो जवान लंड का जोश देख कर मदहोश सी हो गई।

मैंने उन्हें पीछे से गले में चूमना शुरू किया क्योंकि मैंने पढ़ा है कि यह उत्तेजित जल्दी करता है लड़कियों को !

मैंने अपने दोनों हाथ बोबे दबाने में लगा दिए, वो तो आपे से बाहर हो गई, उन्होंने पीछे हाथ ले जाकर मेरा लंड जोर से पकड़ लिया। मैंने अपना पजामा खोल दिया और लंड को आजाद कर दिया। मैंने बोबे दबाते हुए उनकी मेक्सी को ऊपर उठा कर कूल्हों को सहलाया। वाह क्या एहसास था ! मेरा लंड सीधा गांड को छू रहा था जो बुआ को मदहोश कर रहा था। मैंने बुआ को गोद में लिया, बेडरूम में ले आया और उन्हें बिस्तर पर पटक दिया।

मेरी इस हरकत से वो ओर उत्तेजित हो गई। मैंने झट से अपना शर्ट उतार कर फेंक दिया। बुआ को मेरे जंगलीपन का एहसास हो गया, वो कहने लगी- आज तो मजा आने वाला है, लगता है !

और कहते हुए मेरा लंड पकड़ कर सुपारा बाहर निकाल लिया जो लाल हो गया था, उसमें से चिकना पानी निकल रहा था जिससे मेरे लंड को चिकनाई मिली। बुआ ने मेरे लंड को जल्दी से मुँह में घुसेड़ लिया। में कुछ देर तक मुँह को चोदता रहा, साथ ही उनकी चूत में उंगली भी डाल रहा था, उन्हें बहुत मजा आ रहा था, अपने मुँह से वो आह उह ओह अह की आवाजें निकाल रही थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी। मेरा लंड बहुत सख्त हो चुका था, मैंने उन्हें धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी टांगों के बीच में चूत चूसने आ गया।

बुआ के लिए यह नया अनुभव था जिसे देख कर बुआ इतनी उत्तेजित हो गई कि मुझे गाली देकर कहने लगी- चूस ले इसको ! पूरा घुसा ले अपने मुँह मेरे भोसड़े में ! चूस चूस चूस मादरचोद ! चूस डाल मेरी लाडो को ! तेरा फ़ूफ़ा तो भेनचोद बिना दिमाग का है, उसे तो कुछ आता ही नहीं है ! मेरा पति तो आज से तू ही है ! तू ही मेरी प्यास बुझाएगा आज से। आई लव यू नमन !

यह सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया, मैं ओर जोर से चूसने लगा, उन्होंने मुझे कस कर चूत पर दबा लिया, मैं समझ गया कि इनका छुटने वाला है, मैंने अपनी उंगली घुसेड़ दी और पूरे दम से हिला दिया उन्हें !

वो तो मेरी हरकत से अपने होश खो बैठी और मुझे पास खींच कर काट लिया मेरे होटों पर ! मैंने उन्हें खुद से दूर किया और लंड को चूत दिखाई जो हल्के बालों में छुपी हुई थी। मैंने लंड को चूत के मुँह पर रखा और एक हल्का झटका लगा दिया। चूत गीली होने से मेरा 9 इंच का लंड 4 इंच तक अन्दर चला गया। फ़ूफ़ा का लंड छोटा होने के कारण मेरे लंड से बुआ की चीख निकल गई। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ टिका कर जोरदार चुम्बन किये और थोड़ी देर लंड अंदर डाले पड़ा रहा। वो चुम्बन का मजा ले ही रही थी कि मैंने एक दमदार झटका दे डाला जिससे मेरा खड़ा लंड पूरा चूत में समां गया।

बुआ दर्द के मारे जोर से चीख उठी, मैंने प्यार से उन्हें चूम चूम कर शांत किया और फिर कुछ देर ऊपर पड़ा रहा।

फिर तो बुआ ने जलवे दिखाने चालू किए, अपने कूल्हे हिला कर लण्ड और अन्दर लेने लगी। फिर मैंने अपनी मर्दानगी दिखा पूरा लंड बाहर निकाला और एक दमदार झटका फिर दिया। इस बार दर्द कम पर मजे का सागर उमड़ पड़ा।

बुआ जैसे लंड चूत में लेकर खुश सी हो गई। शायद यह उनकी पहली दमदार चुदाई थी।मैंने अपनी चोदने की रफ़्तार बढ़ाई, बुआ ने टांगें जितना हो सके, फैला कर लंड को अन्दर लेने की कोशिश की और मैं इशारा समझ गया। मैंने दोनों पैरों को पकड़ कर लंड को अन्दर दबा दिया चूत में और बुआ के होटों को चूम लिया। फिर मैंने लंड अन्दर ही रखते हुए बुआ को घोड़ी बना दी।

मैंने बुआ को इस तरीके से भी जमकर चोदा। कुछ देर बाद मैंने बुआ को कहा- मेरा लंड अब पानी छोड़ने वाला है।

बुआ हंसते हुए बोली- चलो पता चला, इसका छुटता भी है !

मैं हंस दिया और बुआ की गांड के छेद पर अपना वीर्य छोड़ दिया और बुआ के ऊपर ही लेट गया।

बुआ मेरे लंड से बहुत खुश थी। फिर हम, जब भी मौका मिलता है, चुदाई जरूर करते हैं।

धन्यवाद।

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