आठ साल बाद मिला चाची से

प्रेषक : संदीप शर्मा

सारे दोस्तों को मेरा नमस्कार…

पहले मैं आपके मेरे बारे में बता दूं, मैं 26 वर्ष का हूँ, इंदौर में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम करता हूँ। मेरी एक बहुत ही सुन्दर बीवी और एक प्यारी सी बेटी है।

यह मेरी पहली कहानी है, जो कहानी मैं लिखने जा रहा हूँ यह मेरा पहला अनुभव नहीं है लेकिन इस अनुभव ने मुझे यह कहानी लिखने पर मजबूर कर दिया है।

अभी मैं जिन चाची के साथ हुआ मेरा सच्चा किस्सा बयान करने वाला हूँ उन्हें मैंने और उन्होंने मुझे आज से आठ साल पहले ही दिल दे दिया था लेकिन उससे आगे उनके साथ कुछ करने का मौका नहीं मिल पाया था और उनकी जगह कोई और ही मेरे लंड का शिकार हो गई थी, वो कहानी बाद में सुनाऊँगा।

मैं आपको चाची के बारे में बता दूं, चाची का कद 5′.4″ है, 27 वर्ष की उम्र, गोरा रंग और सांचे में ढला हुआ बदन है, चेहरा ऐसा जैसे बनाने वाले ने पूरी फुर्सत से बनाया हो ताकि कहीं कोई कमी न रह जाये, मुस्कुराये तो ऐसा लगे कि जैसे मोती गिर रहे हो और बोले तो ऐसा जैसे कोयल कुहुक रही हो। एक बच्चा होने के बाद भी उनका बदन आज भी बिलकुल सांचे में ढला हुआ है।

बात कुछ दिनों पहले की है जब मैं मेरे चचेरे भाई की शादी में पूरे परिवार के साथ गाँव गया था। शादी का दिन था और हम सभी बारात में नाच-गा रहे थे। तभी किसी शख्स ने मुझे पीछे से बड़ी ही गर्म जोशी से पलटाया और गले मिलने लगा। जब मैंने ध्यान दिया तो देखा कि यह तो मेरे चाचा हैं जो उम्र में मुझसे कुछ ही बड़े होंगे और हमारा रिश्ता दोस्तों वाला ज्यादा था बजाए चाचा-भतीजे के।

चाचा को देखते ही मेरा दिल बाग-बाग हो गया क्योंकि मेरे दिल में यह उम्मीद जागी कि अगर चाचा गाँव में है तो चाची भी गाँव में ही होंगी। मैं बड़ी ही गर्म जोशी से चाचा से मिला और तुरंत ही चाची के भी हाल पूछे और यह भी पूछा कि क्या चाची मुझे याद करती है।

चाचा का जवाब था- वो तुझसे मिलना चाहती है और अगर तू नहीं आया तो वो नाराज हो जाएगी।

चाचा का जवाब सुनकर मेरा दिल किया कि शादी जाये भाड़ में और मैं गाड़ी उठा कर अभी चाची के पास पहुँच जाऊँ।

पर मजबूरी थी कि मैं ऐसा कर नहीं सकता था तो सिर्फ चाची के बारे में सोच सकता था और चाचा से उनकी बातें कर सकता था।

उस दिन शादी निपटाई और अगले दिन हम लोग बारात निपटा कर घर पहुंचे तो कहीं और से पता चला कि वो चाचा आज किसी और शादी में जाने वाले हैं और साथ ही उनके घर के बाकी लोग भी जायेंगे।

चूंकि चाची के बेटे की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी और घर की देखभाल करने के लिए भी कोई नहीं है तो वो घर पर अकेली रहने वाली हैं।

इतना अच्छा मौका मैं कहाँ छोड़ने वाला था, मैंने तुरंत योजना बना ली कि आज मैं इस मौके के फायदा उठा कर ही रहूँगा।

मैंने जल्दी-जल्दी सारे कामे निपटाए और चार बजे के करीब घर से यह कह कर निकला कि मैं दो-तीन रिश्तेदारों के यहाँ होकर आता हूँ, मैं सात बजे तक वापस आ जाऊँगा।

मैंने दो-तीन रिश्तेदारों का नाम लिया ताकि किसी को शक न हो।

मैं घर से एक रिश्तेदार के यहाँ गया और वह दस मिनट बैठ कर सीधे चाचाजी के घर पहुँच गया। जब मैं पहुँचा तो चाचाजी जाने की तैयारी ही कर रहे थे। घर के बाकी सारे लोग तो पहले ही जा चुके थे, बस चाचा और चाची ही घर पर थे।

चाचा ने मुझे देख कर बैठाया और कहा- मैं तो अभी शादी में जा रहा हूँ, जाने की मजबूरी है।

उनकी यह बात सुन कर मैंने मन ही मन खुश होते हुए ऊपर से उदास होने का नाटक किया और कहा- मैं तो ढेर सी बातें करने आया था, आखिर हम पूरे आठ साल बाद मिले हैं !

तो चाचा बोले- तू बैठ कर अपनी चाची से बात कर और अगर हो सके तो आज रात यहीं रुक जा क्योंकि तेरी चाची भी रात भर अकेली ही रहेगी।

मैं थोड़ी सी न-नुकर करने के बाद मान गया और मैंने चाचा को विदा कर दिया। उसके बाद मैं और चाची घर के अन्दर आ कर एक ही खाट पर बैठ कर बात करने लगे और बिलकुल दोस्तों वाले अंदाज में एक दूसरे के साथ मस्ती करने लगे, एक दूसरे को छूने लगे और एक दूसरे को पकड़ कर खींचने लगे।

इसी बीच दो बड़ी ही अच्छी बातें हो गई, एक तो हल्की सी बारिश शुरू हो गई और दूसरा उनका एक साल का बेटा जाग गया।

बारिश शुरू होने के कारण मैंने घर पर फ़ोन कर के कह दिया- मैं आज रात को यहीं रुक जाऊँगा और सवेरे ही घर आऊँगा।

घर पर तो शादी के बाद का माहौल था, बहू घर आई थी और जेठ होने के नाते मेरी कोई जरूरत भी नहीं थी, तो घर वालो को कोई आपत्ति नहीं हुई।दूसरी अच्छी बात यह हुई कि उनके बेटे के जागने से चाची को बेटे को दूध पिलाने के लिए ब्लाउज के बटन खोलने पड़े और इसका मैंने भरपूर फायदा उठाया। जब चाची दाईं तरफ के दूध से उनके बेटे को दूध पिला रही थी तो मैंने बगल में लेट कर दूसरे दूध में मुँह लगा लिया और उनके दूसरे दूध से दूध पीने लगा।

मुझे ऐसा करते देख कर वो एकदम से चौंक गई और बोली- यह क्या कर रहे हो?

मैंने लेटे-लेटे ही जवाब दिया- मैं भी तो आपका बेटा हूँ चाची ! क्या इन पर मेरा भी हक़ नहीं है?

मेरी बात सुन कर चाची बोली- तुम्हारा पूरा हक़ है लेकिन मैं वो हक़ मैं तुम्हें बेटे के तौर पर नहीं देना चाहती।

चाची की बात सुन कर मैं समझ गया कि गोटी निशाने पर बैठी है और उसके बाद चाची उनके बेटे को सुलाने में व्यस्त हो गई और मैं उनका दूध पीने में।

थोड़ी देर में उनका बेटा सो गया तो चाची बेटे को लेकर दूसरे पलंग पर सुलाने के लिए चली गई अब तक बारिश भी तेज हो गई थी और मेरे शैतानी दिमाग ने चाची के साथ और मस्ती करने का एक और तरीका सोच लिया था। जैसे ही चाची बेटे को सुला कर आई मैंने कहा- चाची मुझे बारिश में नहाना है !

तो वो बोली- नहा लो !

मैंने कहा- लेकिन अकेले नहाना बारिश में अच्छा नहीं लगता ! कोई साथ देने वाला हो तो मजा आये।

चाची मेरा इशारा समझते हुए बोली- ठीक है, मैं भी चलती हूँ !

मुझे तो मानो मुँहमांगी मुराद मिल गई थी।

चूंकि हमारे गाँव में घरों के बीच में एक खुला आँगन बना होता है जहाँ कोई छत नहीं होती तो बारिश का पानी सीधे घर में आ रहा था और बारिश में नहाने के लिए हमें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं थी और इस बात की भी कोई चिंता नहीं थी कि कोई बाहर वाला यह सब देख लेगा।

जब चाची ने हाँ कही तो मैं अपने कपड़े उतारने लगा, तो चाची बोली- यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- मैं और कपड़े लेकर नहीं आया हूँ !

चाची बोली- ठीक है !

और मैंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए सिर्फ अण्डरवीयर और बनियान पहने रहा। चाची यह देख कर बोली- क्या ये गीले नहीं होंगे?

मैंने कहा- होंगे तो लेकिन पूरा नंगा कैसे हो जाऊँ?

तो चाची बोली- रुको, मैं तुम्हें चाचा की बनियान और लुंगी दे देती हूँ, वो पहन लो।

चाची ने मुझे चाचा की बनियान और लुंगी दी और मैं तुरंत ही नहाने के लिए तैयार हो गया और बारिश में आ गया।

फिर मैंने चाची से कहा- आप भी आओ !

तो वो बोली- मैं भी साड़ी उतार कर आती हूँ !

और साड़ी उतार कर वो भी बारिश में भीगने लगी। चाची को बारिश में भीगते देख कर तो मेरी लुंगी में तम्बू बन ही चुका था और बारिश में उनका गोरा गठा हुआ बदन ऐसा लग रहा था जैसे कि स्वर्ग से कोई अप्सरा जमीन पर आकर बारिश में भीग रही हो।

सच कहता हूँ दोस्तो, अगर इन्द्र ऊपर से उन्हें तब देख रहा होगा तो सोचता होगा कि यह स्वर्ग में क्यों नहीं है..।

खैर मैं उन्हें देख कर अपने होशोहवास तो लगभग खो ही चुका था, तो मैं बोला- चाची, यह गलत बात है ! मैं लगभग नंगा हूँ और आपने पूरे कपड़े पहने हैं !

तो चाची बोली- ऐसी बात है तो मेरे कपड़े भी अपने जितने कर दो।

चाची के इतना कहने की देर थी और मैं सबसे पहले उनके पीछे गया और उन्हें मेरे कड़क लंड का अहसास उनके नरम नितम्बों पर कराया, उस अहसास को महसूस करके चाची की सिसकी ही निकल गई थी। मैंने पीछे से एक हाथ लेकर चाची के पेट पर हाथ चलाते हुए उनकी नाभि पर पकड़ लिया और दूसरा हाथ उनके गीले बदन पर चलाते हुए उनके ब्लाउज के बटन एक एक कर के खोलने लगा और उनके दोनों दूध एक ही हाथ से एक एक कर के दबाने भी लगा।

मेरी इस हरकत से चाची बारिश में ऐसे तड़पने लगी जैसे पानी के बिना मछली। चाची धीरे धीरे सिसक सिसक कर कहने लगी- राजा अब मत तडपाओ ! और मत तरसाओ !

लेकिन मैं चाची को पूरी तरह से भोगना चाहता था तो उनकी बातें अनसुनी करके मैं उनके ब्लाउज को उतारने और दूध दबाने का काम करता रहा। उनका ब्लाउज उतारने के बाद मैंने अपनी बनियान भी उतार दी और चाची को अपने शरीर से चिपका कर एक हाथ से उनके पेट को पकड़ कर उनके गले को चूमने लगा और दूसरे हाथ से उनके दूधों को दबाने लगा।दोस्तो, यकीन मानिये, मैंने कई औरतों और लड़कियों को चोदा है लेकिन ऐसा अनुभव मुझे आज तक किसी के साथ नहीं मिला था। मैं चाची को चूमता रहा और मेरा दूसरा हाथ फिसलता हुआ उनके पेटीकोट पर गया और उसे ऊपर करने में जुट गया।

इसके बाद मैंने चाची की पेंटी में हाथ डाल कर उनकी चूत में ऊँगली करना शुर कर दिया। उस समय ठण्ड का सा मौसम था और बारिश भी हो रही थी लेकिन जब मैंने उनकी चूत में ऊँगली डाली तो ऐसा लगा जैसे मैंने किसी जैम लगी गरम डबल रोटी के बीच में हाथ डाल दिया हो। मैंने ऊँगली चाची की चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दी और चाची ने और बुरी तरह से मचलना शुरू कर दिया। मुझे लगा कि चाची झरने वाली है और मैं इस धुली हुई चूत का रस बेकार नहीं जाने देना चाहता था तो मैंने चाची की पैंटी उतारी और उन्हें सामने करते हुए उनके गर्म होंठों पर मेरे होंठ रख कर उन्हें चूसना शुरू कर दिया और दूसरी तरफ मेरी उंगलियाँ उनकी गीली चूत में अन्दर बाहर होती ही जा रही थी। मैंने यह काम सिर्फ कुछ सेकंड किया होगा कि चाची ने मुझे कस कर पकड़ लिया। मैं समझ चुका था कि अब इनके झरने का वक्त आ चुका है तो मैंने उन्हें आँगन में ही जमीन पर लेटा दिया और उनका पेटीकोट ऊपर कर के उनकी धुली हुई चूत को चूसने लगा।

मुझे चूत चूसता देख कर वो बोली- यह गन्दी है, इसमें मत चूसो !

लेकिन उनके मना करने में भी हाँ और करो की मांग थी। मैंने उन्हें अनसुना करते हुए चूसना चालू रखा और अब उनके दोनों हाथ मेरे सर को उनकी चूत पर दबा रहे थे और वो मस्ती में मस्त होकर रज्जजा और चुस्सो ! और जोर से ! और जोर से कर रही थी…।

मैं उन्हें चूसता रहा और वो मेरा सर दबा कर चीखती रही और फिर एक लम्बी चीख के साथ झटके मारने लगी और हर झटके पर ढेर सा रस मेरे मुँह में आने लगा। जब वो पूरी तरह से झड़ गई तो बड़े प्यार से मेरे सर को पकड़ कर अपने पास लिया और मेरे होंठों को चूम कर बोली- आज तुमने मेरा जीवन धन्य कर दिया !

और मेरा जवाब था- अभी तो सिर्फ शुरुआत है चाची ! पूरी रात तो अभी बाकी है…….

दोस्तो, यह थी मेरी चाची के साथ चुदाई की सच्ची कहानी की पहली कड़ी !

आप मुझे अपनी राय जरूर बतायें कि आपको मेरी कहानी कैसी लगी…।

कहानी के थोड़ा लम्बा होने और उसमें अहम् बात के बजाय अन्य बातों (भूमिका बांधने) के अधिक होने की माफ़ी चाहता हूँ और आपको यकीन दिलाता हूँ की इसके आगे की कड़ियों में आपकी इन शिकायतों में से एक को जरूर दूर कर दूंगा।

धन्यवाद,

संदीप शर्मा

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