चाची के साथ हिंदी में सेक्स, हिंदी चुदाई की कहानी

(Chachi Ke Sath Hindi Me Sex, Hindi Chudai ki Kahani)

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मेरा नाम आशीष है, मैं गुजरात से हूँ। इस वक्त मेरी उम्र 28 साल की है और मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच की है।

मैं जब 20 साल का था, तब से मेरी चाची पर लाइन मार रहा हूँ, पर मुझे डर रहता था कि यदि चाची ने चाचा को बोल दिया, तो मेरी पिटाई होगी और मैं बदनाम हो जाऊँगा सो अलग!

मेरी चाची की उम्र 39 साल है.. चाची का फिगर 32-32-40 का है.. उनके मम्मे छोटे हैं और गांड बहुत बड़ी है। मेरी चाची को कोई बच्चा नहीं था।

मैं जब भी चाची के घर जाता हूँ तो मेरी चाची मुझे बड़े प्रेम से बैठाती हैं, मुझसे बात करती हैं और मुझे चाय पिलाती हैं।

चाची की उठी हुई गांड के चलते मेरा लंड बहुत मजबूर था। इसलिए मैं प्रयास करता था कि किसी भी तरह का काम करते वक्त चाची को टच करूँ। इस पर मेरी चाची कोई विरोध भी नहीं करती थीं।

मेरी चाची बहुत ही हँसमुख स्वभाव की थीं। मेरी चाची के घर में ही मेरी दादी माँ भी रहती थीं। दादी माँ बहुत भक्ति भाव वाली थीं। उनका पूरे दिन पूजा-पाठ चलता रहता था।
चाचा का थोक का कपड़े का व्यापार था। उधर चाचा जी को पूरे दिन काम की पड़ी रहती थी, वो रात को दस बजे तक घर वापस आते थे और सुबह 11 बजे चले जाते थे। चाचा जी दोपहर में भी घर नहीं आ पाते थे।

चाची की शादी को 18 साल हो गए थे अब तक कोई बच्चा नहीं हुआ था, उन्होंने बहुत दवाईयां लीं.. पर कोई फायदा नहीं हुआ था।
जब भी मैं अपनी चाची से पूछता था कि चाची आपको बच्चा क्यों नहीं होता है?
तो चाची बोलतीं- क्या मालूम.. हमारे नसीब में औलाद होगी ही नहीं, इसमें मैं क्या कर सकती हूँ!

एक दिन इसी तरह की बात पर जब मैंने उनसे बच्चे के लिए पूछा तो चाची मेरी सामने घूरने लगीं।
मैंने एक टोटका बताते हुए कहा कि ऐसा कर देने से बच्चा हो ज़ाता है।
तो चाची पूछने लगीं- तुम्हें किसने बोला कि ऐसा करने से बच्चा हो जाता है?
मैंने कहा- सब बोलते हैं।

चाची बोलीं- बात तो तेरी सही है.. लेकिन मुझे बच्चा फिर भी नहीं होगा।
मैंने पूछा- क्यों?
चाची बोलीं- जो तू बोल रहा है ना.. मैंने वो भी कर लिया है।
‘तो प्राब्लम क्या है?’
चाची बोलीं- प्राब्लम तेरे चाचा में है।

मैंने बोला- ओह.. तो क्या अब कुछ नहीं हो सकता?
तो बोलीं- हो तो सकता है, पर..!
मैंने बोला- पर.. क्या?

इस पर वो कुछ नहीं बोलीं, बस खड़ी हो गईं और जाने लगीं।
मैं उनसे जानने की कोशिश करता रह गया और वो बिना कुछ बोले सब्जी लेने बाजार चली गईं।

मैं भी चला गया.. पर मुझे अपने दिल में आग सी लग गई थी। घर पहुँचने के बाद मैंने सोचा तो समझ आया कि चाची क्या बोल रही थीं, उनके ‘हो तो सकता है..’ का मतलब शायद ये था कि उनके साथ चाचा के अलावा कोई और सेक्स करे, तो बच्चा हो जाएगा। मतलब चाचा बच्चा पैदा करने में अक्षम थे।

मैं दूसरे दिन चाची के घर गया, तो उस वक्त दादी माँ सोफे पर जाप कर रही थीं।
दादी ने मुझे देखा तो कहा- आओ आशीष बेटा.. कैसे हो?
मैंने बोला- ठीक हूँ।

मैं चुपचाप बैठ गया और कुछ नहीं बोला तो दादी मुझे गुमसुम देख कर बोलीं- यदि तुम्हें टीवी देखना है.. तो मैं दूसरे कमरे में चली जाती हूँ।
मैंने बोला- ठीक है।

तो दादी चली गईं.. थोड़ी देर के बाद चाची आईं और बोलीं- अरे आशीष कब आए, कैसे हो!

मैंने मुस्कुरा कर चाची को देखा, आज चाची बड़ी मस्त लग रही थीं। वे येल्लो साड़ी पहने हुए थी और एकदम पटाखा लग रही थीं।
मैं उन्हें घूरने लगा तो चाची हँसते हुए किचन में चली गईं और मेरे लिए पानी लेकर आईं।

मैंने पानी पिया और उनकी तरफ देखने लगा। वे भी कुछ देर मेरे बोलने का इन्तजार करती रहीं।

मैं बोला- दादी माँ क्या अब बाहर आएँगी?
चाची ने कहा- अब शायद दो घंटे तक बाहर नहीं आएँगी।

मैं समझ गया कि मौका है। फिर मैं उधर से उठ कर छत पर चला गया। चाची की छत की दीवारे ऊँची उठी हुई थीं। मैंने ऊपर जाकर छत का दरवाजा देखा.. वो बंद था।

वहाँ एक टीन शेड के नीचे सब पुराने कपड़े, चाचा का सामान आदि सब फ़ालतू सामान पड़ा रहता था। उधर काफ़ी जगह खाली भी थी।

मैं वहाँ जाकर वहाँ बैठ गया.. मुझे पक्का मालूम था कि चाची यहाँ जरूर आएंगी। अभी मैं दस मिनट ही बैठ पाया कि और चाची नींबू पानी का शरबत लेकर आईं और हँस कर बोलीं- अच्छी जगह पर बैठे हो!
मैंने लंड सहलाते हुए बोला- हाँ आप भी बैठो ना!
चाची ने मुझे लंड सहलाते हुए देखा तो वे बोलीं- एक बार नीचे दादी माँ क्या कर रही है.. मैं देखकर आती हूँ।

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