भूखा लण्ड – एक प्यास एक जनून-1

अमन सिंह
दोस्तो, मेरे द्वारा लिखी गई यह कहानी महज एक कल्पना पर आधारित है, इस कहानी से किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश्य नहीं है लेकिन यह कहानी सचाई को आपके सामने रखती है, जैसे आज कल लोग सोचते हैं, हमारी अन्तर्वासना हमसे कुछ ऐसा करा देती है जिससे हम किसी रिश्ते को नहीं मानते ! रह जाता है तो बस मर्द और औरत का रिश्ता !
ज्यादा समय ना गंवाते हुए आइये शुरू करते हैं ‘भूखा लंड’ एक प्यास एक जनून !
कहानी शुरू होती है निखिल से, वह एक नौजवान लड़का है अच्छे खासे शरीर वाला उम्र 19 साल, कद 6 फुट और 7″ इंच लम्बा तगड़ा लंड और वो बी.टेक कर रहा है।
उसके घर में वो और उसकी बुआ रजनी देवी (35 साल) दोनों रहते हैं। वो अपनी बुआ के साथ इसलिए रहता था क्योंकि उसके फूफा जी का देहांत हो गया था इसलिए माँ बाप ने अपने एक बेटे को उसकी बुआ को सौंप दिया था।
रजनी एक रोचक औरत है एकदम तनी हुई पूरी तरह से फिट ! कोई मर्द उसे देख ले तो उसका लंड तो खड़ा हो जाये और मन करे कि वहीं नंगी करके चोद दूँ !
खैर निखिल कॉलेज का पहला साल पूरा कर चुका था और जवानी का जोर उसकी रगों में दौड़ने लगा था पर उसके मन में कोई एसा ख्याल नहीं था, अपनी बुआ के प्रति कि वो उसे जरा सा भी दुःख पहुँचाए क्योंकि वो उनसे बहुत प्यार करता था और रजनी भी उससे कई गुना ज्यादा प्यार करती थी, उसने उसे कभी अपने भतीजे की तरह नहीं बेटे की तरा पाला पोसा था।
और इसमें बदलाव तब आया जब एक दिन रजनी निखिल के कमरे में सफाई कर रही थी, निखिल सुबह सो कर ही उठा था और बिस्तर पर बैठा सुस्ता रहा था कि उसकी नजर रजनी के स्तनों पर पड़ी, वो न चाहते हुए भी उन्हें देखता ही रह गया।
रजनी- अरे बेटा, क्या अभी तक सो रहा है तू? चल उठ और पढ़ाई की ओर ध्यान दे थोड़ा !
निखिल- बुआ आप भी ना, अभी तो दूसरा साल शुरू हुआ है, अभी कोई फ़िक्र न करो।
रजनी- लेकिन अगर अभी से पढ़ाई करेगा तो बाद में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
निखिल- ठीक है, पढ़ लूँगा बस !
इस बार निखिल के मन में कुछ सिरियस नहीं था, वो उस बात को भूल गया क्योंकि रजनी उसकी बुआ थी।
पर एक दिन उसका एक दोस्त रजत उसके घर आया, उन दोनों को कॉलेज से कोई प्रोजेक्ट मिला था, उन्हें मिल कर उसे पूरा करना था। रजत निखिल के कमरे में उसके साथ बैठा था कि तभी रजनी उनके लिए चाय बना कर लाई।
रजनी- लो बेटा, चाय पी लो पहले !
रजत- ठीक है आंटी जी।
रजनी- अरे निखिल, यह क्या, तुम्हारे बुक शेल्फ पर किताबें कैसे बिखरी पड़ी हैं।
निखिल- कोई बात नहीं बुआ, मैं बाद में ठीक कर दूंगा।
तभी रजनी बुक शेल्फ पर पड़ी किताबों को ठीक करने लगी और रजत की नजर रजनी के चूतड़ों पर पड़ी, वो उसे घूरने लगा।
और तभी निखिल की नजर इस घटनाक्रम पर पड़ी और देख उसे बहुत गुस्सा आया, वो किसी तरह अपने गस्से पर काबू पाकर बोला- रजत यार, मेरा मूड नहीं हो रहा काम करने का इस वक्त… हम फिर कभी करते हैं।
रजत- क्यों क्या हो गया यार?
निखिल- बस ऐसे ही !
रजत- कर लेते है यार… वैसे भी तेरे यहाँ तो काफी अच्छा माहौल है।
निखिल- मतलब?
रजत- कुछ नहीं, चल मैं कल फिर आता हूँ तेरे घर !
निखिल- नहीं यार, हम लोग इसे कॉलेज फ्री-टाइम में ही पूरा कर लेंगे।
और रजत के जाते जाते निखिल का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
खैर यह सब वो जल्दी ही भूल गया और सब पहले की तरह हो गया।
पर एक दिन जब निखिल रात को बाथरूम जाने के लिए उठा और आगे बढ़ा कि उसकी नजर रजनी के कमरे में गई और वहाँ का नजारा देख निखिल की आँखें फटी की फटी रह गई, उसकी बुआ बेड पर सिर्फ ब्रा और पेंटी में सो रही थी।
पहले तो उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वो कमरे में घुसे पर रजनी को गहरी नीद में सोया देख निखिल की हिम्मत बढ़ी और वो कमरे के अंदर घुस गया।
वह इतनी नजदीक से किसी औरत को इस दशा में पहली बार देख रहा था। बुआ का कसा बदन देख निखिल का लण्ड खड़ा हो गया पर थोड़ी ही देर बाद उसे एहसास हुआ कि वो औरत जो उसके सामने है वो उसकी माँ समान बुआ है।
यह सोच कर निखिल कमरे से बाहर आ गया और बाथरूम में जाते ही उससे रहा नहीं गया और उसने जोरदार मुठ मारी लेकिन यह आग मुठ से कहाँ बुझने वाली थी, वो सारी रात मुठ मारता मारता सो गया और जब सुबह उसकी नींद खुली तो रजनी उसके सामने थी और उसके कमरे की सफाई कर रही थी।
पर आज रजनी को अपने सामने देख निखिल का नजरिया बदल चुका था।
रजनी- उठ गया बेटा, चल अब जल्दी से नहा ले, फिर कॉलेज भी तो जाना है।
निखिल- जी बुआ !
और कुछ ही देर बाद निखिल कॉलेज के लिए घर से निकल गया।
पर अब तो उसे हर जगह अपनी बुआ का नंगा बदन दिखाई देने लगा, वो उलझ गया कि वो अब क्या करे और इसी तड़फ में एक महीना बीत गया।
निखिल ने बड़ी कोशिश की कि वो रजनी को ना देखे पर यह बदमाश दिल और यह लण्ड कहाँ किसी की सुनते हैं।
फिर वही हुआ जो होना ही था, निखिल ने इरादा बनाया कि वो अब अपनी बुआ को पटा कर चोदेगा और उसने यह सोचा कि वो पहले  कोशिश करेगा कि घी सीधी उंगली से ही निकल जाये तो अच्छा है।
और जब रजनी और निखिल रात को साथ में खाना खा रहे थे तो निखिल बोला- बुआ, आज खाना बहुत अच्छा बना है।
रजनी- क्या बात है बेटा, आज तो खाने की बड़ी तारीफ की जा रही है?
निखिल- नहीं बुआ, जो सच है वही बोल रहा हूँ।
रजनी- अच्छा तो इसका मतलब मैं पहले खाना सही नहीं बनाती?
निखिल- क्या बुआ, आप भी ! मैं तो आपकी तारीफ ही कर रहा हूँ और आप कैसे कैसे सवाल कर रही हैं !
रजनी- अच्छा बाबा, अब नहीं बोलूँगी कुछ !
निखिल रोज ही रजनी की तारीफ करता और हर वक्त मौके पर चौका मारने की फ़िराक में रहता, वो ज्यादा से ज्यादा समय रजनी के साथ बिताता और इसका फायदा उसे यह हुआ कि कुछ ही दिनों के बाद वो दोनों खुल कर बातें करने लगे।
और तभी एक दिन दोनों बुआ भतीजे को एक शादी में जाना था। निखिल शादी के लिए तैयार हो गया पर जैसे ही रजनी कमरे से बाहर आई तो उसने निखिल की उत्तेजना और बढ़ा दी, हरे रंग की साड़ी में और बिल्कुल टाइट ब्लाउज में उसके गोल गोल सख्त स्तन कैद थे।
यह सब देख निखिल से रहा नहीं गया और बोला- अरे बुआ, क्या लग रही हो आप !
रजनी- धत्त, क्या बोल रहा है? मैं तेरी बुआ हूँ।
निखिल- बुआ जो सच है, वही बोल रहा हूँ, आज देखना आपकी सहेलियाँ आपको देख कर हैरान हो जाएँगी।
रजनी- अच्छा अब चलेगा भी या फिर मेरी तारीफ ही करता रहेगा?
और वो दोनों शादी में चले गये, रजनी बहुत खुश थी पर निखिल के दिमाग में तो उसे चोदने की कामपिपासा सवार थी।
शादी से लौटते लौटते रात के 12:30 बज चुके थे और निखिल अभी भी यही सोच रहा था रजनी को कैसे चोदा जाये।
तभी उसके दिमाग में एक तरकीब आई।
निखिल- बुआ मेरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है, क्या आप मेरी मालिश कर दोगी?
रजनी- बेटा तू ठीक तो है, अगर तू कहे तो डॉक्टर को बुला दूँ?
निखिल- नहीं बुआ, इतनी रात को कोई डॉक्टर नहीं आने वाला, बस थोड़ी मालिश मिल जाये तो सब ठीक हो जायेगा।
रजनी- चल ठीक है, मैं पहले अपने कपड़े बदल लेती हूँ और फिर तेरी मालिश कर देती हूँ।
निखिल- ठीक है बुआ, पर जल्दी करना।
रजनी- हाँ, बस मैं यूँ गई और यूँ आई ! तू इतने बिस्तर पर लेट जा।
यह सुनते ही निखिल मन ही मन मुस्कुराया और अपने कमरे की ओर बढ़ने लगा। उसने जाते ही अपने सारे कपड़े उतारे और सिर्फ अंडरवियर में आ गया, बेड पर उल्टा लेट गया।
तभी थोड़ी ही देर में रजनी कमरे में आई, उसने नाईटी पहनी थी।
निखिल का लंड तो उसे देखते ही डंडे की तरह तन गया।
रजनी- बेटा, अब बताओ कहाँ पर मालिश करनी है?
निखिल- बुआ, मेरे सारे शरीर में दर्द है।
और रजनी निखिल की पीठ की मालिश करने लग गई।
थोड़ी देर बाद निखिल सीधा लेट गया, तब तक उसका लंड पूरी तरह से तना हुआ था और अंडरवियर का तम्बू बना रहा था।
सीधा होते ही निखिल सोने की एक्टिंग करने लगा।
पहले तो रजनी का ध्यान सिर्फ मालिश पर ही था पर जैसे ही उसकी नजर निखिल के खड़े लंड पर पड़ी, वो एकदम से चौंक गई और उसने फटाफट निखिल की बाजुओं की मालिश की और अपने कमरे में चली गई।
यह देख निखिल यह तो समझ गया था कि घी अब सीधी उंगली से नहीं निकलेगा, उसके लिए उंगली टेढ़ी करनी ही पड़ेगी।
अगले दिन सुबह नाश्ते पर रजनी- बेटा, अब तू ठीक है, अब तो कोई दर्द नहीं है ना?
निखिल- नहीं, अब मैं ठीक हूँ, रात आपकी मालिश ने सब ठीक कर दिया, मुझे पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गई।
रजनी- चलो, यह तो अच्छी बात है, तुझे आज कॉलेज भी जाना है।
निखिल- बुआ, एक बात पूछूँ अगर आप बुरा ना मानो तो?
रजनी- हाँ हाँ बेटा, पूछो, इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है?
निखिल- बुआ, फूफा जी का देहांत जब हुआ जब आप महज 28-29 साल ही थी तो फिर अपने कभी दूसरी शादी के बारे में क्यों नहीं सोचा?
रजनी- शादी क्या?
निखिल- मेरा मतलब कि आप दोबारा शादी कर सकती थी पर फिर भी अपने नहीं की?
रजनी गुस्से में- निखिल, यह तुम कैसी बात कर रहे हो अपनी बुआ से !
निखिल- अरे बुआ, आप तो गुस्सा हो गई, आपने कहा था कि आप बुरा नहीं मानोगी।
रजनी- हाँ, मगर बेटा तुम यह भी तो देखो कि तुम अपनी बुआ से क्या सवाल पूछ रहे हो।
निखिल- ठीक है बुआ, मुझे माफ़ कर दीजिये।
रजनी- कोई बात नहीं पर आइन्दा से ऐसी कोई बात मत करना।
निखिल- ठीक है बुआ, मैं आइन्दा अपने ऐसा कुछ नहीं कहूँगा जिससे आपको बुरा लगे ! पर बुआ अब अगर मैंने आपसे पूछ ही लिया है तो आप बता ही दीजिये, वरना यह सवाल मेरे दिमाग में घूमता रहेगा।
रजनी- बेटा, क्योंकि तुम्हारे फूफा जी के गुजरने के बाद मेरे पास जीने की कोई वजह नहीं थी पर फिर तुम्हारे माता-पिता ने तुमको मुझे सौंप दिया जिससे मुझे जीने का मकसद मिला और तभी मेरा सारा ध्यान तुम्हारी परवरिश और भविष्य की ओर चला गया।
निखिल- ओह बुआ… आप बहुत अच्छी हैं।
यह वाकया होने के बाद निखिल परेशान हो गया, वो फ़ैसला नहीं कर पा रहा था कि क्या सही है और क्या गलत !
अगर एक बेटे की नजर से देखे तो वो बुआ जो उसकी माँ समान थी और उसके बारे में यह सब सोचना भी पाप था पर अगर इस मन की अन्तर्वासना को देखा जाये तो तो यह ही सही था। और उसकी अन्तर्वासना की ही जीत हुई उसने बुआ-भतीजे के रिश्ते को ना चुन लंड-चूत के रिश्ते को चुना और तभी से निखिल रजनी को छूने का मौका ढूंढने लगा, जब भी उसे मौका मिलता उसे छूने का या गले लगाने का, मौका न छोड़ता।
कुछ दिन ऐसे ही बीत गये और एक दिन जब निखिल कॉलेज से आया तो उसने देखा की रजनी रसोई में खाना बना रही थी। उसने बिना देर किये रजनी को अपनी बाहों में भर लिया।
रजनी डर कर- कौन है?
निखिल- अरे बुआ, मैं हूँ।
निखिल का लंड खम्बे की तरह खड़ा हो गया और वो रजनी से पूरी तरह से सटा हुआ था।
रजनी- बेटा, अब छोड़ दे मुझे।
निखिल- नहीं बुआ, मैं आपको नहीं छोड़ूँगा।
रजनी छुटने की कोशिश करने लगी पर जैसे ही वो कोशिश करती, निखिल अपनी पकड़ और मजबूत कर लेता। ऐसा करते करते रजनी को निखिल का लंड चुभता हुआ महसूस हुआ।
रजनी गुस्से में चिल्लाई- निखिल छोड़ो मुझे !
और जैसे ही निखिल ने डर कर रजनी को छोड़ा, रजनी ने बिना देर किये निखिल को एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया।
निखिल- पर बुआ, मैं तो सिर्फ मजाक कर रहा था।
रजनी- आइन्दा ऐसा मजाक मत करना।
निखिल गुस्से में अपने कमरे में गया है और कॉलेज की किताबें दीवार पर दे मारी, सीधा जाकर आइने के सामने बैठ गया।
और जब अपना चेहरा उसने आइने में देखा तो उसकी आँखों में गुस्सा भरा था, उसके दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि अब तो वो रजनी को चोदेगा ही चोदेगा !
उसके उस गुस्से और अन्तर्वासना से जगा यह शैतान अब यह तो समझ गया था कि रजनी प्यार से नहीं मानने वाली !
निखिल ने फ़ैसला किया कि वो कल किसी भी हालत में अपनी बुआ को चोदेगा और सारी रात जागने के बाद उसने एक तरकीब बनाई जिससे रजनी उससे चुदने के लिए मजबूर हो जाये।
अगले दिन जैसे ही निखिल सो कर उठा, नहाने के बाद उसने सारे घर में रजनी को देखा, पर रजनी उसे दिखाई नहीं दी।
पर जैसे ही वो घर से बाहर आया, उसने देखा कि उसकी बुआ पड़ोस की एक औरत से बात कर रही है।
पर उसने न आव देखा ना ताव, अपने बुआ का हाथ पकड़ कर अंदर की ओर खींचने लगा।
रजनी गुस्से में- निखिल, यह क्या बदतमीजी है?
निखिल- पहले मेरी बात सुनो बुआ !
और उसने रजनी को अपने कमरे में लाकर बेड पर पटक दिया।
रजनी- निखिल, तुम इतने बदतमीज कब से हो गये हो? दीखता नहीं था कि मैं किसी से बात कर रही थी, वो क्या सोचेंगी?
निखिल गुस्से में- उन्हें जो सोचना है, सोचने दो, आप पहले मेरी बात सुनो।
रजनी गुस्से में- ऐसी भी क्या बात है कि इतनी बदतमीजी से पेश आ रहे हो?
निखिल- बुआ आई लव यू !
रजनी- क्या कहा तूने?
निखिल- आइ लव यू बुआ ! मैं तड़फ रहा हूँ तेरे जिस्म के लिए ! इसने मुझे पागल कर दिया है।
रजनी पूरे गुस्से में उठी और निखिल को 4-5 थप्पड़ लगाए- निखिल, इतना बेशरम हो गया है तू कि अपनी बुआ के बारे में ये सब बोले
?
रजनी की आँखों से आंसू निकल आए, वो निखिल के कमरे से बाहर आ ही रही थी कि तभी निखिल बोल पड़ा- बुआ, अगर आप इस कमरे के बाहर चली गई तो मैं मर जाऊँगा और मेरी मौत की जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ आप होंगी।
यह सुनते ही रजनी सोच में पड़ गई और रोते हुए बोली- अरे, यह क्या हो गया है बेटा तेरे को? तू क्यों ऐसी बातें कर रहा है? अपनी बुआ को ऐसी बातें बोलते हुए तुझे शरम नहीं आ रही? मैं तेरी माँ समान हूँ तू ऐसा कैसे सोच सकता है !
निखिल- मैं कुछ नहीं जानता, अगर आज आप मेरे साथ ना सोई तो मैं मर जाऊँगा और इसकी जिम्मेदार सिर्फ आप होगी और कोई नहीं !
और यह कह कर निखिल रजनी के पीछे गया और पीछे से उसके गले पर चुम्बन किया।
तभी रजनी ने फिर निखिल को 3-4 थप्पड़ जड़ दिए और उसके कमरे से बाहर निकल आई।
यह देख निखिल के अंदर बैठा शैतान और भड़क गया, निखिल एक बैग में अपने कपड़े डाल कर गुस्से में कमरे से बाहर निकला।
रजनी ने उसे देखा तो वो उसे रोकने की कोशिश करने लगी- बेटा, यह क्या कर रहा है तू? क्यों नहीं समझ रहा कि यह पाप है।
निखिल- अगर यह पाप है तो मैं भी एक पाप ही हूँ।
यह सुनते ही रजनी ने निखिल को एक जोरदार थप्पड़ लगाया।
निखिल पूरे गुस्से में- तू मर गई मेरे लिए और मैं तेरे लिए !
रजनी- बेटा, ऐसा मत बोल… तेरे सिवा मैं किसके लिए जिऊँगी, मैं आज तक तेरे लिए ही जीती आई हूँ।
निखिल- अगर मेरे लिए जीती आई होती तो अब तक मेरी बात मान लेती आप !
रजनी- अरे बेटा, तू क्यों नहीं समझ रहा… मैं तेरी बुआ हूँ और बुआ माँ समन होती है। तू मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकता, यह पाप है।
निखिल गुस्से में- पाप पाप पाप ! माँ चुदा गया यह पाप !
रजनी- बेटे, तू कहे तो मैं तेरी शादी करा देती हूँ जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी !
निखिल- मुझे अगर कोई चाहिए तो वो तू है बुआ… अगर तू मुझे नहीं मिली तो मैं मर जाऊँगा।
रजनी- अरे दुनिया क्या कहेगी, हमें जीने के लायक नहीं छोड़ेगी यह दुनिया !
निखिल- अच्छा दुनिया को बतायेगा कौन? देख बुआ, तेरे पास 5 मिनट हैं, हाँ में जवाब देना… नहीं तो मैं हमेशा के लिए यहाँ से चला जाऊँगा।
यह सुनते ही रजनी रोने लगी और नीचे बैठ गई।
निखिल- प्लीज़ मान जा बुआ, हम दोनों खुशी ख़ुशी अपनी जिंदगी जियेंगे, किसी को कुछ नहीं पता चलेगा।
और इस पर होना क्या था, इस सबके बीच हार तो रजनी की ही थी, निखिल उसका एक ही सहारा था और उसकी जिद के आगे रजनी को हारना ही पड़ा और इस सबके बाद निखिल की ख़ुशी सातवें आसमान पर थी।
निखिल- ओओ बुआ… आई लव यू सो मच… मैं तुझे ज़िन्दगी भर खुश रखूँगा।
निखिल ने देर ना करते रजनी को अपनी बाहों में उठा लिया, बेड पर लेटा दिया और उसे चूमने लगा पर इस पर रजनी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
निखिल- देख बुआ, अगर तू मान गई है तो मेरा साथ भी दे।
रजनी गुस्से में- क्या कहूँ… अपने बेटे समान भतीजे से कि… ‘आजा चोद दे अपनी बुआ को… कर दे नंगी और कर ले ऐश?’
निखिल तभी पीछे हट गया और उसने सोचा की ऐसे मज़ा नहीं आने वाला।
उसने फिर एक प्लान बनाया कि पहले वो अपनी बुआ को ख़ुशी से राजी करेगा और वैसे भी वो मान तो गई ही थी, उसी दिन से वो रजनी को कभी खाना पकाते वक्त पीछे से जा कर चूमता कभी जब वो सफाई कर रही होती तो उसके स्तन दबाता और कभी होंठ चूमता।
निखिल ने उसे अब तक नहीं चोदा यह देख रजनी को अब लगने लगा था कि शायद उसे कुछ दिनों में समज आ जाये और वो ऐसा न करे लेकिन सब वैसा के वैसा ही रहा और अंत में एक दिन निखिल का सबर जवाब दे गया।
वो घर पहुँचा, शाम के लगभग 6 बजे थे और उस वक्त रजनी डिनर के लिए सब्जी काट रही थी। निखिल ने घर में घुसने से पहले मुख्य पॉवर स्विच बंद कर दिया जिससे घर में अँधेरा हो गया उसने अंदर जाते ही रजनी को बाजू से पकड़ा और दीवार से लगा दिया।
रजनी डर कर- कौन है?
निखिल- मैं हूँ मेरी जान !
रजनी के स्तन दीवार से चिपके हुए थे निखिल ने और दबाव डाला।
निखिल- बुआ, आज मैं तुम्हें अपनी बुआ से पत्नी बना लूँगा।
यह सुनते ही रजनी यह तो समझ ही गई थी कि आज निखिल उसे चोद कर ही मानेगा।
तभी निखिल अपने कपड़े उतारने लगा और सिर्फ अंडरवियर में आ गया। उसने रजनी की कमीज भी उतार दी और अपना एक हाथ पीछे खड़ा रह कर ही रजनी की चूत पर रगड़ने लगा और दूसरे हाथ से रजनी के स्तनों को दबाने लगा, वो उसे बुरी तरह से चाटने लगा, उसके गले से लेकर कंधे तक चाटता जा रहा था और कभी कभी अपने दांतों से उसके नर्म मांस को काटता ताकि उसकी कुछ आवाज़ निकले।
वह सलवार के ऊपर से ही अपना लंड रजनी के चूतड़ों की दरार पर रगड़ने लगा। उसका लंड अब पूरी तरह से तन चुका था, वो एक डंडे की तरह सख्त हो चुका था।
अब तक निखिल रजनी के पीछे था और उसे दीवार से सटा रखा था, वो उसके गले को चाटता रहा और ऐसा करते करते अब रजनी भी उत्तेजित होने लगी थी कि तभी निखिल ने उसकी सलवार खोल दी और जैसे ही सलवार को छोड़ा वो बिना रुके रजनी के पैरों पर जा गिरी और निखिल ने बिना देर किये अपना 7″ तना लंड अपने अंडरवियर से आजाद कर दिया।
उसने रजनी की पैंटी को पकड़ा और बड़ी तेजी से उसे रजनी की चूत से उसे पैरों तक पहुँचा दिया।
और जैसे ही निखिल खड़ा हुआ तो रजनी की दोनों टांगों के बीच से आता हुआ 7″ का लंड सीधा रजनी की चूत से टकराया।
लंड की गर्मी से रजनी एकदम आगे की ओर बढ़ने लगी पर निखिल ने उसे अपनी ओर खींच कर अपनी बाहों में भर लिया और टांगों के बीच से ही लंड को आगे पीछे करने लगा।
लंड-चूत के इस मिलन ने रजनी को और उत्तेजित कर दिया और वो थोड़ी देर बाद पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और फिर निखिल ने रजनी के स्तनों को भी उसकी ब्रा से आज़ाद कर दिया।
और तभी देर न करते हुए उसने रजनी को गोद में उठाया और अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगा।
निखिल- बुआ देखना, आज की यह रात तुम्हारी ज़िन्दगी की सबसे यादगार रात बना दूँगा।
रजनी- ।-।-।-।-।
निखिल ने कमरे में घुसते ही रजनी को बेड पर लेटाया और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया पर जब निखिल जब बेड की ओर बढ़ा तो उसका लंड देख कर रजनी दंग रह गई।
अब दोनों बुआ-भतीजा कपड़ों से पूरी तरह आजाद थे, रजनी बेड के बीचोंबीच थी, निखिल ने उसकी टांगें पकड़ी और अपनी ओर खींचा और रजनी के गुलाबी होठों का रस पान करने लगा।
थोड़ी देर बाद वो नीचे की ओर बढ़ा और रजनी के स्तन दबाने लगा और कभी स्तन को पूरा मुँह में भरता और तसल्ली से चूसता, कभी दान्त से दबाता जिससे रजनी के मुख से अआह्ह की आवाज निकलती और फिर वो उने लगातार दबाने लग गया और कम रोशनी के कारण उसके स्तन और भी चमक रहे थे।
उसके इस तरह स्तन दबाने से रजनी की उत्तेजना और बढ़ती रही, निखिल ने उत्तेजित होकर स्तनों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में स्तन पूरी तरह से लाल हो चुके थे, रजनी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी।
फिर उसने रजनी की नाभि को चाटना शुरू कर दिया और धीरे धीरे चूत की ओर बढ़ने लगा।
रजनी की चूत पर हल्के हल्के बाल थे, उन्हें देख निखिल और उत्तेजित हो गया और उसने रजनी की चूत में उंगली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी।
इससे रजनी इतनी उत्तेजित हो गई कि उसके चेहरे पर साफ दिखने लगा।
यह देख कर निखिल यह तो समझ गया कि उसकी बुआ आखिरी बार उसके फूफा से ही चुदी है।
निखिल ने रजनी की चूत चाटना शुरू कर दिया और ऐसा होते ही रजनी इतनी उत्तेजित हो गई कि उसके मुँह से आआआ आआआ की आवाजें निकलने लगी और इससे निखिल का जोश और बढ़ गया।
लगभग 10 मिनट चूत चाटने के दौरान रजनी एक बार झड़ चुकी थी।
अब निखिल ने रजनी को बेड के बीचोंबीच लेटा दिया, उसके ऊपर आकर उसकी टांगों को फ़ैलाया और एक तकिया रजनी के कूल्हों के नीचे लगा दिया ताकि लंड चूत की जड़ तक जा सके, फिर देर ना करते हुए लंड चूत पर सटाया, हल्का सा झटका मारा और लंड का ऊपरी सिरा चूत में घुस गया।
इस पर रजनी ने हल्की सी सिसकारी भरी।
यह सुनते ही निखिल ने एक और झटका मारा और लंड थोड़ा और अंदर चला गया, साथ ही देर न करते हुए निखिल ने एक जोरदार झटका मारा और आधे से ज्यादा लंड चूत में घुस गया, इस पर रजनी की चीख निकली !
तभी निखिल ने रजनी के होठों को अपने होठों से मिला दिया और एक और जोरदार झटका मर कर सारा लंड चूत में घुसा दिया और लंड धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा।
थोड़ी देर बाद उसने रजनी के होठों को छोड़ दिया और तभी रजनी भी आःह्ह्ह आअह्ह्ह आःह्ह्ह आअह की लम्बी लम्बी सिसकारियाँ भरने लगी।
रजनी को ऐसे देख निखिल समझ गया कि बुआ भी अब मज़ा लेने लगी है और उसने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी।
रजनी- आःह आअह्ह आःह्ह अह्ह्ह आःह्ह
निखिल- मज़ा आ रहा है ना मेरी जान?
रजनी: आःह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आःह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आःह्ह्ह
और जोश में आकर रजनी भी निखिल के झटको का जवाब देने लगी और पूरा कमरे ठप ठप ठप ठप और आःह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आःह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आःह्ह्ह आवाजों से गूंजने लगा।
थोड़ी देर के बाद निखिल ने लंड को चूत से निकाल कर गाण्ड पर सटाया तो रजनी उछल पड़ी और गाण्ड ना मरवाने का संकेत दिया। इस पर निखिल ने रजनी को उल्टा लेटा दिया और अब उसका पेट तकिये पर था और जैसे ही उसने रजनी की टांगों फ़ैलाया, रजनी सोचने लगी कि यह मेरी गाण्ड भी मारकर ही मानेगा पर निखिल ने लंड चूत पर सटाया और बोला- जब तक तुम नहीं मानोगी तब तक तुम्हारी गाण्ड नहीं मारूँगा।
यह कहते ही निखिल पूरा का पूरा लंड अपनी बुआ की चूत में घुसा दिया और झटके मारने शुरू कर दिये।
पूरा कमरे फिर से ठप ठप ठप ठप और आःह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आःह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आःह्ह्ह आवाजों से गूंजने लगा और लगभग 20 मिनट की ठुकाई में रजनी 3 बार झड़ चुकी थी। निखिल भी रजनी की योनि में ही झड़ गया और जोरदार आनन्द भरी चीख के साथ पूरा कमरे शांत हो गया और निखित निढाल होकर रजनी के ऊपर ही लेटा रहा।
थोड़ी देर बाद निखिल उठा, उसने रजनी को सीधा लेटाया और होंठ चूसने लगा।
फिर उसने रजनी को गोद में उठाया और बाथरूम में चला गया।
वो दोनों एक साथ नहाए।
रात के 8 बज चुके थे, फिर दोनों ने सारे काम निपटाए और डिनर किया, तब तक रात के 9:30 हो चुके थे।
फिर रजनी अपने कमरे में जाने लगी पर निखिल ने उसे बाजू से खींचा और कहा- बुआ मैंने कहा था ना कि आज की रात तुम्हारे लिए एक यादगार रात होगी।
यह कहते कहते उसने रजनी को गोद में उठाया और अपने कमरे की ओर बढ़ने लगा।
निखिल- आज से तुम यहीं मेरे साथ सोया करोगी।
उस रात निखिल ने सुबह के 4 बजे तक रजनी की जमकर ठुकाई की।
आगे की कहानी जानने के लिए कि कैसे निखिल ने अपनी बुआ को बेशर्म बनाया और उसकी गाण्ड मारी, कृपया मुझे बताएँ कि आपको अब तक की कहानी कैसी लगी।
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