एक सुन्दर सत्य -3

(Ek Sunder Satya-3)

This story is part of a series:

लेखक- स्वीट राज और पिंकी सेन

ज़न्नत को चोदने के बाद मन्त्री ने उसको बताया था कि सब कुछ उनके हाथ में नहीं है, इसके लिए उन्हें अपने बॉस से बात करनी होगी, आखिर यह फिल्म कुछ है ही ऐसी, वो रिस्क नहीं ले सकते।

मन्त्री ने ज़न्नत को बताया कि उसका बॉस बहुत ही ताकतवर आदमी है, सब कुछ उसके हाथ में है।

अभी ज़न्नत की किस्मत किसी और के शरीक-ए-बिस्तर होना था यह बात ज़न्नत पहले से जानती थी पर फ़िर भी मन्त्री जी के सामने ज़न्नत बोली- आप उन्हें मना ही लेंगे ना?

मन्त्री- मैं अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करूँगा पर ये सब इतना आसान तो नहीं है ना। मैं तुम्हें उनके पास ले चलूँगा, आमने सामने बैठ कर बात कर लेंगे।

ज़न्नत बोली- तो क्या उनके साथ भी?

मन्त्री बोला- देखो ज़न्नत, इसके बिना तो संभव नहीं है… यह एक बार की तो बात है, मिल तो लो।

ज़न्नत के पास कोई और चारा भी नहीं था, वो राजी हो गई।

मन्त्री अभी भी ज़न्नत की बगल में लेटकर उसके नंगे मखमली जिस्म पर हाथ ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर फ़िरा रहा था, कभी वो ज़न्नत के वक्ष सहला रहा था, तो कभी उसके नितम्ब पर हाथ घुमा देता।

उसकी नजरें उसके खूबसूरत जिस्म पर फिसलती जाती, वो अपने किस्मत पर रश्क करने लगता कि एक अजीमोशान हुस्न की मल्लिका के हुस्न को पूरी तरह पा चुका था।

वो एक बार फिर से उसके अधरों को चूस रहा था, उसके हाथ ज़न्नत के गुदाज वक्ष को टटोल रहे थे।

इस तरह काफी देर तक ज़न्नत के खूबसूरत जिस्म का आनन्द लेने के बाद मन्त्री वहाँ से निकल गया और जाते जाते बोला- अब मैं सीधा सुप्रीमो से मिलने जा रहा हूँ, आज शाम को ही मुलाकात हो सकती है तुम्हारी उनसे, तुम तैयार रहना। बस उनको खुश कर दो तो समझो फिल्म पास हो गई।

ज़न्नत को छोड़ अब मन्त्री के पास आया और अब सुप्रीमो के सामने बैठा था, बोला- सर मुझे आपको एक फिल्म दिखानी है।

सुप्रीमो बोला- भी क्या बात है, आज फिल्म देखने की बात क्यों कर रहे हो?

मन्त्री के आग्रह करने पर सुप्रीमो फिल्म देखने लगा, जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ रही थी, उसकी आँखों में चमक आती जा रही थी।

अब ज़न्नत का वो सीन चल रहा था, जिसमें ज़न्नत सफ़ेद गीली साड़ी में झरने के नीचे नहा रही थी।
सफ़ेद गीली साड़ी के नीचे उसकी चूचियों के काले निप्पल उभर कर स्पष्ट छवि बना रहे थे।

सुप्रीमो के चेहरे पर चमक बढ़ती जा रही थी और आँखों में वासना नजर आने लगी।

उसकी आँखें ज़न्नत के मखमली बदन और बेइंतहा हुस्न का जायजा ले रही थी, उसकी साँसें तेज हो रही थी।

वो अचानक मन्त्री से बोला- इस ज़न्नत की सैर मुझे करनी है।

मन्त्री बोला- जी हज़ूर, यह ज़न्नत इस फ़िल्म को सेंसर से पास करवाने आपकी सिफ़ारिश लगवाने आई हुई है, आप बोलिए तो आज आपकी शाम ज़न्नत के नाम कर दूँ।

सुप्रीमो तो बेकरार था, वो बोला- शाम को उसे मेरे फ़ार्म हाऊस लेकर आ जाओ।
उधर दूसरी तरफ़:

ज़न्नत तो खुद सुप्रीमो के आगे बिछने को तैयार थी, वो खुश हो गई और मंत्री के जाने के बाद वो वापिस अपने कमरे में आकर बाथरूम में जाकर पूरी नंगी हो गई।

उसका जिस्म संगमरमर की तरह चमक रहा था, वो अपने आप से बातें करनी लगी।

ज़न्नत- मेरे सरताज, एक बार बस आप मेरे हुस्न के जलवे देख लो, फिर तो सारी फिल्म इंडस्ट्री मेरे कदमों में होगी… आज आपको ऐसा मज़ा दूँगी कि जिन्दगी भर कभी भूल नहीं पाओगे।

ज़न्नत ने अपने आपको देखा, अपनी चूत पे गौर किया।

दो दिन पहले ही उसने अपनी चूत को क्लीन किया था, मगर आज उसकी मुलाकात सुप्रीमो से होने वाली थी तो वो किसी तरह की कमी नहीं रखना चाहती थी, वो लग गई अपने काम में !

उसने अपनी बाजू, टांग़ें, बगलों और योनि के आसपास सब जगहों पर एन फ़्रेन्च क्रीम लगा कर साफ़ और चिकना कर लिया।

एक तो वो बेहद खूबसूरत थी, ऊपर से उसका ऐसा चिकना मक्खन जैसा बदन आज, तो सुप्रीमो के वारे न्यारे होने वाले थे।

करीब एक घण्टा वो बाथरूम में रही, खूब अच्छे से नहाई, उसके बाद नंगी ही बाहर आ गई और अपने आप को आईने में निहारने लगी।

उसको अपने बेपनाह खूबसूरत जिस्म पे बड़ा गुमान हो रहा था।

वो बस अपने आप को तैयार करने में लग गई, अब एक फिल्म की हिरोइन को तैयार होने में वक्त तो लगता ही है…
ना जाने कितने घंटे वो बस खुद को तैयार करती रही।

आख़िर वो घड़ी आ ही गई जब मन्त्री जी ने उसे बुलवाया।

ज़न्नत एकदम तैयार हो गई थी, उसने अब दूसरी काली साड़ी पहनी थी, जो बस नाम की साड़ी थी, और ब्लाउज भी एकदम झीने कपड़े का, जिसे आप पारदर्शी भी कह सकते हैं, उसकी गुलाबी ब्रा भी उसमें से साफ दिखाई दे रही थी।

और ऊपर से उसने साड़ी को नाभि के काफ़ी नीचे बँधा हुआ था जिसके कारण उसका चमकता पेट दिखाई दे रहा था।

मंत्री तो बस उसे देखता ही रह गया पर ड्राइवर के कारण कुछ बोल ना पाया।

गाड़ी एक बड़े से फार्म हाऊस पर जाकर रुकी, दरबान ने बड़ी शालीनता के साथ उनका स्वागत किया और सुप्रीमो को खबर दी कि मंत्री जी ज़न्नत के साथ आए हैं।

सुप्रीमो खुद उनको लेने बाहर तक आए और जैसे ही उनकी निगाह ज़न्नत पर पड़ी, वो किसी पत्थर की मूरत की तरह हो गये, एकटक बस ज़न्नत को देखने लगे।

उनका ध्यान भंग मंत्री जी ने किया- हेलो सर…

सुप्रीमो- ऑश… हेलो हेलो… हय मिस ज़न्नत, कैसी हो आप? यहाँ तक आने में कोई तकलीफ़ तो नहीं हुई?

ज़न्नत भी एक अदाकारा थी और ऐसे मौके पे किस तरह पेश आना है उसे अच्छी तरह आता था।
उसने बड़े ही सेक्सी अंदाज में कहा- नहीं सर नहीं… मुझे कोई तकलीफ़ नहीं हुई और आप से मिलने के लिए तो कोई भी तकलीफ़ उठाने को मैं तैयार थी, थैंक गॉड कि आज आपसे मिलना हो गया।

ज़न्नत ने आगे बढ़ कर सुप्रीमो से हाथ मिलाया और यही वो पल था कि जवान गठीले बदन वाला सुप्रीमो उसके स्पर्श से पिघलता चला गया, वो बस ज़न्नत के मुलायम हाथ को मसलने लगा, उसके चेहरे पे एक क़ातिल मुस्कान आ गई थी।

मंत्री जी- अच्छा सर, अब मैं चलता हूँ, मिस ज़न्नत आप अपनी फिल्म के बारे में सर से बात कीजिए।

मंत्री वहाँ से चला गया और जाते जाते दरबान को हिदायत दे गये कि साहब एक जरूरी मीटिंग में बिज़ी रहेंगे, तो ख्याल रहे कोई डिस्टर्ब नहीं करें…

सुप्रीमो ज़न्नत का हाथ पकड़े हुए अंदर चले गये।

अंदर का नजारा काफ़ी अच्छा था, साजो सजावट खूब थी वहाँ…

और जब वो एक कमरे में पहुँचे तो ज़न्नत बस देखती रह गई… एक आलीशान कमरा जिसके बीचों बीच एक गोल बड़ा सा बेड लगा हुआ था, जिस पर गुलाब की पत्तियाँ से सजावट थी और एक बेहद रूमानी महक से पूरा कमरा महक रहा था।

ज़न्नत- श वाउ सर… आपका रूम तो काफ़ी आलीशान और खूबसूरत है।
सुप्रीमो- अरे नहीं नहीं मिस ज़न्नत, आपसे ज़्यादा खूबसूरत नहीं है। इसकी चमक आपके हुस्न के सामने फीकी है एकदम… सच कहूँ,  जबसे तुमको उस फिल्म में देखा है मेरी रातों की नींद उड़ गई है, बस सोच रहा था एक बार तुम सामने आ जाओ तो मज़ा आ जाए।

ज़न्नत उसके एकदम करीब आ गई उनकी साँसें घुलने लगी थी।

ज़न्नत- मैं आपके सामने हूँ सर… प्लीज़ मेरी फिल्म पास करवा दीजिए, बड़ी मेहनत की है मैंने उसमें… अगर वो पास ना हुई तो मैं कहीं की नहीं रहूँगी।

सुप्रीमो ने ज़न्नत के चेहरे को अपने दोनों हाथों में थाम लिया और उसकी आँखों में झाँक कर बोलने लगा- अरे  आप डरती क्यों हो, मैं हूँ ना, सब ठीक कर दूँगा, बस तुम मुझे सर मत कहो, मुझे जानू कहो, तुम मेरी जान, मैं तुम्हारा जानू!

वह दोनों हाथों से ज़न्नत का चेहरा पकड़ कर दीवानों की तरह चूमने लगा, वो उसके चेहरे को चूमते जा रहा था और ज़न्नत भी धीरे धीरे इस मदहोश आलम में बहती जा रही थी।

अब सुप्रीमो ने ज़न्नत की खूबसूरत गोलाइयों पर अपने हाथ रख दिया, और हलके हलके दबाने लगा और अपने आप से बोल रहा था- कितना हसीं हुस्न है, लाजवाब, आज तो इसमें डूब जाने को मन चाहता है।

और सुप्रीमो ने ज़न्नत को अपनी बाँहों में भर कर सीने से लगा लिया।
ज़न्नत के वक्ष उसके सीने से चिपके थे, और उसके हाथ ज़न्नत के कूल्हों पर थे।
वो अपना हाथ धीरे धीरे गोल गोल घुमा रहा था।
अब वो धीरे उसकी पीठ को सहला रहा था।

ज़न्नत की पीठ पर ब्लाउज की सिर्फ एक डोरी थी, सुप्रीमो ने वो डोरी खींच दी और अब वो ज़न्नत के पीछे आ गया और उसके पीछे चिपक सा गया।

ज़न्नत चिंहुक उठी, वो अपने नीचे गिरते ब्लाऊज को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वो तो अब तब नीचे गिर चुका था और सुप्रीमो के हाथ उसके नंगे बदन पर रेंगने लगे, धीरे धीरे, उधर उधर, ऊपर से नीचे, और नीचे से ऊपर, उसके हाथ ज़न्नत के यौवन को छू रहे थे।

सुप्रीमो उसके कन्धों को चूमने लगा, कभी वो उसके कानों को अपने दांतों के बीच दबा लेता, कभी उसके गालों को चूम लेता।
अब सुप्रीमो के होंठ ज़न्नत के सुलगते होंटों को चूस रहे थे।

उन दोनों की रासलीला शुरू हो गई थी, ज़न्नत भी खुलकर उनका साथ दे रही थी।

कब सुप्रीमो ने ज़न्नत की साड़ी खींच, पेटिकोट का नाड़ा खोल उसको बेपर्दा कर दिया, अब ज़न्नत के बदन पे सिर्फ़ एक कच्छी थी,
पता ही नहीं चला कि कब सुप्रीमो ने खुद भी अपने कपड़े उतार दिए।

अब दोनों एक दूसरे की बाहों में बेड पर ऐसे लिपटे पड़े थे जैसे चंदन के पेड़ से साँप लिपटा हुआ हो।

सुप्रीमो ज़न्नत को बेतहाशा चूम रहा था और ज़न्नत सिसकारियाँ ले रही थी, नागिन की तरह कमर को लहरा रही थी।

सुप्रीमो होंटों का रस निचोड़ कर अब उसके मद मस्त चूचों को दबा रहा था, उनको चूस रहा था।

ज़न्नत- आ अई जानू… उफ… सर… आप सच में बहुत ज़्यादा सेक्सी हैं!  आअम्फ़…आह… इतनी सी देर में आपने मुझे कितनी गर्म कर दिया, आह… मेरा जिस्म जलने लगा है…

अब वो धीरे धीरे अपने होठों को उसके बदन पर ऊपर से नीचे की तरफ ला रहा था, और हाथ ज़न्नत की पैंटी में थे, और वो उसकी चिकनी चूत को अपने हाथों से महसूस कर रहा था और उत्तेजित हो गया था।

ज़न्नत की आँखें बंद थी, वो अब धीरे धीरे कभी खोल कर देखती और फिर बंद कर लेती। अब सुप्रीमो ज़न्नत के पैरों के बीच में बैठ गया और उसकी पैंटी उतारने लगा, उसके कूल्हों के नीचे दोनों हाथ लेजा कर उसकी पैंटी को उतार दिया।

अब ज़न्नत की ज़न्नत सी फ़ूली चिकनी चूत सुप्रीमो के सामने थी, उसमें से गुलाब की खुशबू आ रही थी क्योंकि ज़न्नत नहाने के बाद अपनी चूत गुलाबजल से धोकर आई थी।

ऐसी मखमली गद्देदार चूत देखकर सुप्रीमो पागल सा हो गया, वो दीवानों की तरह चूत चाटने लगा, वो अपने हाथ से चूत के ऊपरी मोटे लबों को मसल देता और चाटते जाता।

ज़न्नत की चूत अब कामरस छोड़ने लगी थी और उस पर पानी चमक रहा था।
सुप्रीमो जैसा मर्द तो उस देख कर और उग्र हो गया, उसकी ज़ुबान अपने आप उस चिकनी चूत के अन्दरूनी लबों को चाटने लग गई।

अब तो ज़न्नत हवा में उड़ने लगी थी, उसका रोम रोम सुलगने लगा था।

सुप्रीमो ने चूत को चाट चाट के इतना मजबूर कर दिया कि वो बस बहने लगी, उसकी धारा सुप्रीमो पीने लगा जैसे समुद्र मंथन से अमृत निकल रहा हो।

ज़न्नत कमर को उठा उठा कर मज़े लेने लगी।

जब यह रस पूरा चाट कर सुप्रीमो ने साफ कर दिया तब कहीं जाकर ज़न्नत शिथिल हुई।
कहानी जारी रहेगी।

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