ताऊ की लड़की को चोदा-3

(Tau Ki Ladki Ko Choda- Part 3)

चचेरी बहन से सेक्स की चाहत की इस कहानी के पिछले भाग
ताऊ की लड़की को चोदा-2
में आपने पढ़ा कि मैं अपनी चचेरी बहन को चोदना चाह रहा था और वो भी मुझे अपनी हरकतों से जता रही थी कि वो भी मेरे बिस्तर की रानी बनना चाहती है. वो अपने कमरे में बिस्तर पर नंगी है और मैं की-होल से देख रहा हूँ.
अब आगे:
मैंने ध्यान से देखा कि उसकी चुत पैरों में दबी होने के कारण बहुत हल्की सी दिख रही थी, लेकिन उसके चूचों को मैं बिल्कुल साफ़ देख सकता था. उसके मोटे मोटे चुचे मानो कह रहे थे कि अभी जाकर चूस लूँ.

मनीषा भी की-होल की तरफ ही देख रही थी और मादक सिसकारियां ले ले कर अपनी चुत में बैंगन का मजा ले रही थी.

थोड़ी देर में वो शांत हो गई, मैं भी फिर से मुठ मार कर झड़ गया था. उसने नाइटी पहनी और अपने रूम की लाइट बंद कर दी. मैं भी अपने रूम में आ गया.

उस रात मानो मेरे दिल और दिमाग़ पर सिर्फ़ और सिर्फ़ मनीषा ही छाई हुई थी. अब तक मैं समझ चुका था कि आग दोनों तरफ बराबर ही लगी है, पर ये समझ नहीं आ रहा था कि गरम लोहे पर हथौड़ा कब और कैसे मारूं.

जैसे तैसे रात कटी. अगले दिन रविवार था, सारे दोस्तों ने क्रिकेट खेलने का प्लान बनाया था. मैं भी ब्रेकफास्ट करके क्रिकेट खेलने निकल गया. क्रिकेट खेलने के बाद करीब दोपहर के एक बजे वापस आया.

मैंने 2-3 बार बाहर से आवाज़ लगाई मनीषा दरवाजा खोलने नहीं आई. मैंने नोटिस किया कि दरवाजा अन्दर से सेंटर लॉक के थ्रू बंद है. मैंने डुपलीकेट चाभी से डोर खोला.

मैंने अन्दर आ कर ‘मनीषा मनीषा..’ आवाज़ लगाई, पर कोई नहीं आया. मैंने फिर तीसरी मंजिल पर आकर मनीषा के रूम में जाकर देखा, मनीषा निढाल होकर सो रही थी. उसने वही वाइट नाइटी पहनी हुई थी.

दोस्तो, कसम से सोती हुई वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी. मैंने उसको पहले तो 2-3 मिनट जी भर के घूर के देखा. मैं उसको ऐसे देख रहा था, जैसे मानो उसको पहली बार देख रहा होऊं.
मैं उसके होंठों पर अपने होंठों को ले गया.
दोस्तो क्या बताऊं, उसकी सांसों से निकलती खुशबू मुझे पागल किये दे रही थी. मैंने धीरे धीरे उसके कानों के बगल में सूंघना शुरू किया. उसके बालों से ऐसी सुगंध आ रही थी जैसे मैं किसी गुलाब और जेस्मीन के बगीचे में आ गया होऊं.

अब मैंने उसके होंठों को हल्का किस किया. वाह मुझे ऐसा लगा, जैसे मैंने गुलाब की पंखुड़ी को चूम लिया हो. उसकी सांसों की खुशबू से जी कर रहा था.. बस उसके लबों से निकलती महक को बस सूंघता ही रहूँ.

मैंने हल्के से उसको किस किया. फिर मैंने उसकी गर्दन के चारों तरफ किस किया. मनीषा अभी भी निढाल होकर सो रही थी. अब मेरी नज़र उसके चूचों पर पड़ी. मैंने उसके चुचे जैसे ही छुए मानो मेरे जिस्म में 11000 किलोवाल्ट का करेंट दौड़ गया. उसके हल्के कठोर और नरम चुचे.. आह.. दोस्तो पूछो ही मत.. कितना मजा आ रहा था. मैं शब्दों में बता नहीं सकता.

अब मेरी नज़र उसकी टांगों पर गई. मैंने उसकी नाइटी को धीरे धीरे ऊपर करना शुरू किया. मनीषा की टांगों पर हल्के रोंए थे. उसकी गोरी गोरी टाँगों और उस नाइटी के अन्दर से निकलती मादक गरम हल्की हवाओं में जैसे फूलों की सुगन्ध मिला दी गई हो.

इस बीच मनीषा ने अपनी करवट बदली. मेरी तो मानो जान ही निकल गई. मुझे लगा कि कहीं वो जाग ना गई हो.

मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया. जब मनीषा हल्की शांत सी हो गई तो मैंने फिर से उसकी नाइटी को हल्का सा ऊपर उठाना चालू किया. नाइटी अब जाँघों के नीचे तक आ गई थी. उसकी जांघें इतनी गोरी थी, जैसे दूध की तरह सफेद और संगमरमर की तरह चिकनी हों.

मैं उसकी जांघों पे हाथ फिराने लगा और फिर न जाने क्या हुआ, मैं अपनी जीभ से उसके पैरों को उंगलियों से लेकर जांघों तक चाटने लगा. मुझे उसके जाग जाने का मानो डर ही नहीं रहा.

इस वक्त तो मुझे ऐसा स्वाद आ रहा था जैसे उसके बदन में कूट कूट कर चंदन भर दिया गया हो. तभी मुझे अहसास हुआ कि मनीषा जाग चुकी है. मैं पहले तो थोड़ा हिचकिचाया, पर जब उसने कोई विद्रोह नहीं किया तो मेरे अन्दर भी हौसला आ गया.

अब मैंने उसकी नाइटी को उठाते हुए उसकी जाँघों से ऊपर कर दी, उसने वही पिंक पेंटी पहनी थी. इस वक्त उसकी चुत और मेरे बीच सिर्फ़ वो पिंक पेंटी थी. उसकी हल्की हल्की झांटें भी बाहर आ रही थीं. मैंने हल्के से उसके पेंटी को किस किया.
मेरी बहन की पेंटी से निकलती वो मादक खुशबू मुझे दीवाना बना रही थी. मुझे लग रहा था कि अभी उसकी पेंटी फाड़ दूँ. उस टाइम मेरा लंड फड़फड़ाते हुए काले नाग की तरह बाहर आने को बेताब था.

मैं पागलों की तरह उसकी पेंटी को सूँघे जा रहा था. मैं यह भूल चुका था कि मनीषा को इसकी आहट भी हो सकती है. उसकी गुलाबी पेंटी और उसमें से निकलती मादक खुशबू ने मेरे लंड की नसों को इतना टाइट कर दिया था कि जैसे मेरा लंड फट पड़ेगा.

अब मैंने अपनी बहन की पेंटी हल्के से उतारना चालू किया. धीरे धीरे मैं उसकी पेंटी घुटने तक सरका कर ले आया. मेरी नज़र उसकी नंगी चुत पर टिकी थी.

क्या मस्त चुत थी.. हल्के रेशमी बालों से भरी चुत. उसके वो रोंएदार बाल ऐसे लग रहे थे, मानो उसने अभी तक कभी यहां शेविंग ही नहीं की हो. उसकी चुत पर हल्के-हल्के घुंघराले बाल ऐसे थे, जैसे उन पर कभी ब्लेड नहीं लगाया गया.

मैं उसकी चुत को आंखें बंद करके हल्के हल्के से सूंघने लगा. उसकी झांटें मेरी नाक में घुसकर मुझे छींकने पर मजबूर कर रही थीं. मैंने हल्के हल्के से उसकी चुत को चाटना शुरू किया. मुझे हल्का नमकीन सा स्वाद महसूस हुआ. हालांकि अब तक मैं समझ चुका था कि मनीषा भी अपनी चुत चटवाने का मजा लेने लगी है.

अब मैंने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए और उसके बगल में नंगा होकर लेट गया. मैंने अपना लंड मनीषा के हाथों से सहलाना शुरू किया. क्या बताऊं दोस्तो.. उसके हाथों का मेरे लंड पर स्पर्श पाते ही जैसे मेरा 6 इंच का लंड 7 इंच का हो गया. मेरे लंड से कुछ बूँदों की फुहार सी छूट पड़ी.

मुझे कुछ शक तो हुआ कि मनीषा जाग रही है. अब मैंने अब अपनी सारा डर दूर करते हुए अपनी जीभ धीरे धीरे उसकी चूत के अन्दर देनी शुरू की. थोड़ी देर में उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी. मेरे मुँह की सारी लार उसकी चूत में आ जा रही थी. अब मैंने उसकी चूत में उंगली देना शुरू किया. मैंने जैसे ही मनीषा की चूत में उंगली डाली, मनीषा हल्की सी हिली. मेरी तो मानो गांड ही फट गई हो.

थोड़ी देर के लिए मैं रुक गया. फिर थोड़ी देर बाद मनीषा शांत हो गई, तो मैंने उसकी चूत में फिर से उंगली करना शुरू किया. अब मेरी लार से उसकी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि मेरी उंगली उसकी चूत में आराम से अन्दर बाहर हो रही थी.

मेरा लंड मानो उसकी चूत के अन्दर जाने की ज़िद कर रहा था. उसकी चूत इस वक्त मेरे सामने पूरी खुली पड़ी थी. उसकी नाइटी उसके कमर से भी नीचे थी. मैंने होश गंवाते हुए पास की टेबल पर रखी क्रीम की डिब्बी उठाई और अपने लंड पर क्रीम लगाकर उसकी चूत के मुँह पर सुपारा फिराना चालू किया. उसकी चूत ऐसी थी मानो उसने कभी लंड का स्वाद नहीं चखा था.

मुझे मालूम हो चुका था कि मनीषा जाग रही है, फिर भी मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और हल्का सा ज़ोर लगाया. मेरा लंड थोड़ा सा ही घुसा था कि मनीषा के मुँह से तेज सी चीख निकली. मैंने झट से अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और पूरी ताक़त के साथ के और ज़ोर का झटका दे दिया.

इस बार मेरा पूरा लंड मनीषा की चूत के अन्दर था. मनीषा दर्द से चिल्ला रही थी, पर मैंने हाथों से उसके मुँह को दबा रखा था. मनीषा मेरी बांहों से निकलने के लिए अपना पूरा ज़ोर लगा रही थी, पर मेरी मजबूत बांहों ने उसे इस तरह पकड़ रखा था कि छूटना तो दूर, वो हिल भी नहीं पा रही थी.

मेरा अन्दर का शैतान मानो पूरी तरह जाग रहा था. मुझे उसके दर्द का थोड़ा भी ख्याल नहीं रहा. मैं मानो पागल कुत्ते की तरह बस अपनी कमर आगे-पीछे किए जा रहा था.

मनीषा की आंखों से आंसुओं की धार से मेरा पूरा हाथ गीला हो चुका था. लेकिन मैंने फिर भी उसका मुँह दबाए रखा. मुझे डर लग रहा था कि कहीं उसकी चीख बाहर ना चली जाए. पूरा बिस्तर खून से लाल हो चुका था.

थोड़ी देर बाद मैंने मनीषा को समझते हुए अपनी पकड़ कमजोर की. दर्द से कराहते हुए उसने मुझसे मेरा लंड बाहर निकालने की गुहार लगाई. बिस्तर पर खून देख कर तो जैसे उसकी जान ही निकल गई, पर मैंने उसको समझाते हुए शांत किया.
मैं बोला- बस थोड़ी देर बर्दाश्त कर ले.
उसने बोला- पंकज मुझे ज़रा भी अहसास नहीं था कि तू यूं ही अचानक डाल देगा.. अरे कम से कम संभलने का मौका तो दिया होता.

फिर वो हल्की नाराज़गी सा मुँह बना के मुस्कुराने लगी, मैं समझ चुका था कि बात बन चुकी है.

मैंने अपनी कमर को फिर से आगे-पीछे करना शुरू किया. अब मनीषा ने भी मेरा पूरा साथ दिया. उसने भी कमर हिलाना शुरू किया. अब मैंने उसको अपनी बांहों में समेटा और उसको किस करना शुरू कर दिया. हमने एक दूसरे को किस करना शुरू कर दिया. सेक्स का मजा भाई बहन उठाने लगे.

कुछ ही देर तक बहन की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था. मैंने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाला. लंड बाहर निकालते ही मैं बिस्तर पर झड़ गया.
हम दोनों एक दूसरे को देख कर सिर्फ़ मुस्कुरा रहे थे.

मैंने उससे अपनी हरकतों के लिए उससे माफी माँगी. तो उसने भी हंसते हुए कहा- ईडियट बताना तो चाहिए था. जैसे ही तूने डाला, मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी.. तू बिल्कुल पागल है. कम से कम कुछ इशारा तो करना चाहिए.. ऐसा कोई करता है क्या? देख तो कितना खून निकला है.. सारा बिस्तर खून से लाल हो गया है.. और कितना दर्द हो रहा है मुझे.. पागल कहीं का.

मैंने भी हंसते हुए उससे फिर से माफी माँगी, फिर उसको गले से लगाया और कहा कि वैसे तुझे भी मज़ा आया ना.
“धत तेरी की… मजा न आया होता तो तू टच भी कर पाता?” बोलते हुए शर्मा के उसने अपना मुँह दूसरी तरफ फेर लिया.
मैंने उसको फिर किस करना शुरू किया. इस बार वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

किस करते करते हम दोनों मेरे रूम में आ गये. मैं उसके गर्दन के चारों तरफ किस कर रहा था, पागलों की तरह उसके चुचे दबा रहा था.

करीब 10-15 मिनट तक हम एक दूसरे को किस करते रहे. मैं कभी उसके होंठ को, कभी उसकी गर्दन के चारों तरफ किस करता रहा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. वो मेरे भी होंठों को और छाती को पागलों की तरह चूमे जा रही थी. मैंने धीरे धीरे उसके चूचों को चूसना शुरू किया. उसके चुचे हल्के से टाइट हो चुके थे. मैं अब धीरे धीरे नीचे की तरफ सरका.

दोस्तो, अभी शाम के करीब 5 बज रहे थे. रूम खाली होने की वजह से सिर्फ मेरी और मनीषा की सिसकारियों से गूँज रहा था. वो आंहे भरते हुए मेरा नाम लेकर सिसकार रही थी.

अब मैंने उसकी कमर को किस करना शुरू किया. हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतारे. अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे खड़े थे. मेरा लंड मानो आसमान छू रहा था. मनीषा कभी मुझे देखती, कभी मेरे खड़े लंड को देखती. हम दोनों फिर से एक दूसरे से चिपक गये.

मनीषा नीचे होते हुए थोड़ी देर मेरे लंड को घूरा, फिर बोली- पंकज, कितने दिन से इसे पूरा देखने की मेरी तमन्ना आज जाकर पूरी हुई है.

इससे पहले कि मैं कुछ बोलता, मनीषा ने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया. मेरे मुँह से मानो एक आहह सी निकल पड़ी.
दोस्तो, ऐसा मज़ा.. आह.. पूछो मत. ये अहसास मैं बता नहीं सकता, कितना मज़ा आ रहा था.

मनीषा हल्के हल्के मेरे लंड को पूरा अन्दर तक लेने की कोशिश कर रही थी. मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था.

अब हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गये. मैं उसकी चुत को पागलों की तरह से चूस और चाट रहा था और वो भी मेरे लंड और पोतों को पूरे मज़े से अपने मुँह में लेकर चूस रही थी.

फिर मैंने उसको सीधा बिस्तर पर लेटाया और उसकी कमर के नीचे दो तकिया लगा दिए. अब उसकी खुली चुत मेरे सामने थी. मैंने उसका चेहरा देखा, मानो ऐसा लगा कि उसको इसी दिन का इंतज़ार था.

इस बार मैंने थोड़ा तेल उसके चुत की अन्दर तक लगाया और थोड़ा तेल अपने लंड पे भी लगाया. इसके बाद मैंने अपना लंड मनीषा की चुत पर रखा और उसके गले में बांहें डालकर उसके कानों में फुसफुसाया- अब तो तू तैयार हो ना!

मनीषा ने अपनी आंखें बंद करते हुए हल्के से कहा- पंकज फाड़ दे मेरी चुत को.. आज एक बार में ही पूरा डाल दे. मैं वो दर्द दुबारा महसूस करना चाहती हूँ पंकज प्लीज़ एक बार में ही पूरा डालना.

इतना सुनते ही मैंने मनीषा को पूरी तरह से अपनी बांहों में जकड़ लिया और अपनी कमर को थोड़ा ऊंचा किया. अपने सुपारे को मनीषा की चुत के मुँह पे ले गया और पूरा ज़ोर लगा के एक ही बार में पूरा लंड मनीषा की चुत में ऐसा घुसता चला गया, जैसे गरम सरिया किसी प्लास्टिक को चीरता हुआ पूरा अन्दर तक चला जाता है.

इस बार मनीषा चिल्लाई नहीं, लेकिन एक हल्की सी आहह भर कर उनसे मुझे भी पूरी ताक़त के साथ जकड़ लिया.

थोड़ी देर मैंने अपना लंड उसकी चुत में ऐसे ही घुसा रहने दिया. उसके बाद मैंने अपनी कमर को हिलाना शुरू किया. शायद अब मनीषा को भी मज़ा आ रहा था. वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी. उसने भी अपनी कमर को हिलाना शुरू किया. फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला, जैसे ही मैंने अपना लंड बाहर निकाला मानो एक अजीब सी मादक खुश्बू सारे कमरे में फ़ैल गई.

अब मैंने उसको घुटनों के बल बिठा दिया. दोस्तो इसको ऑन बेड डॉगी स्टाइल कहते हैं. मैंने अपना लंड फिर से उसके चुत पे टिकाया और धीरे धीरे अन्दर डाल दिया. अब उसकी चुत हल्की सी फ़ैल चुकी थी, तो ज़्यादा टाइट महसूस नहीं हो रहा था. मेरा लंड अब आसानी से अन्दर बाहर जा रहा था.

थोड़ी देर तक उसको चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था, तो मैंने मनीषा को बताया कि मैं झड़ने वाला हूँ.. क्या करूँ?
उसने अपना मुँह खोला और कहा- अपना पूरा माल मेरे मुँह में डाल दे.. तेरा ताज़ा ताज़ा माल मैं पीना चाहती हूँ.

ये सुनते ही मैंने पूरा का पूरा माल उसके मुँह में डाल दिया और उसने एक घूँट में ही मेरा पूरा माल पी लिया.

बहन के साथ सेक्स के बाद मैं निढाल हो गया था. हम दोनों थोड़ी देर बिस्तर पर यूं ही नंगे पड़े रहे.

दोस्तो, मैं उन दिनों को कभी भी भूल नहीं सकता. उस दिन के बाद हम रात भी एक ही कमरे में सोते और रात को भी कितनी 3-4 बार सेक्स करते. मैंने उसको अगले दिन बाथरूम में भी चोदा. मनीषा के 12 वीं में अच्छे मार्क्स तो नहीं आए थे, लेकिन आज वो एक सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर है. उसकी शादी हो गई है और उसके एक डेढ़ साल की लड़की भी है. वो आज भी जब घर पर आती है तो मुझसे पहले की तरह ही हंस के बात करती है. उसका हज़्बेंड भी उससे बहुत प्यार करता है. शादी के बाद भी मौका मिलता है और उसका मन करता है तो वो मुझे चुद जाती है.

दोस्तो, ये बहन की चुदाई की कहानी आप लोगों को कैसी लगी, मुझे ज़रूर ईमेल कीजिएगा.
मेरी ईमेल आईडी है.
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