शादी में मौसी की लड़की की चूत चुदाई

(Shadi Mein Mausi Ki Ladki ki Chut Chudai)

मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैं बहुत दिनों से अन्तर्वासना पर अपनी सेक्स कहानी शेयर करने के बारे में सोच रहा था. मुझे सेक्स कहानी शेयर करना नहीं आता था.

फिर मैंने अन्तर्वासना पर कॉलम ‘अपनी कहानी भेजें‘ देखा. मैंने लिंक के माध्यम से कहानी शेयर करना चाही मगर कुछ दिक्कत हो रही थी. फिर मैंने गुरूजी की मदद ली और उन्होंने बताया कि अन्तर्वासना पर कहानी कैसे शेयर की जा सकती है. उसके लिए मैं गुरूजी का आभारी हूं.

दोस्तो, अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है जो मेरी मौसी की लड़की की चुदाई की कहानी है. यह घटना आज से करीब दो साल पहले हुई थी. उस वक्त मैं एक शादी में गया था जहां पर मैं अपनी मौसी की लड़की से मिला.

इस हिन्दी सेक्स स्टोरी को आगे बढ़ाने से पहले में आपको अपने बारे में कुछ बताना चाहता हूं.
मेरा नाम शरद है और मैं बिलासपुर, छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूं. मेरी हाइट 5 फीट 5 इंच है. रंग गेहुंआ है और शरीर सामान्य है.

मेरी रीयल सेक्स स्टोरी उस वक्त घटित हुई जब मैं एक दूर के रिश्तेदार की शादी में गया हुआ था. उस वक्त मैं कॉलेज में अपने द्वितीय वर्ष के एग्जाम देकर शादी में गया था. शादी में मेरी मौसी की लड़की भी आई हुई थी जिसका नाम था श्वेता.

श्वेता अपने कॉलेज के फर्स्ट इयर में पढ़ रही थी. उसकी उम्र 20 के करीब थी और उसकी हाइट लगभग 5’ 2″ रही होगी. मैंने उसके बदन को देखा तो वो काफी हॉट लग रही थी. उसका साइज 34-26-36 का था. शरीर का रंग गेहुंआ था मगर देखने में सेक्सी लग रही थी.

शादी वाले दिन की बात है. आपको तो पता ही है कि शादी में बहुत सारे रिश्तेदार इकट्ठा हो जाते हैं और सबको कहीं न कहीं एडजस्ट करना होता है. सब लोग रात को सोने के लिए जगह देख रहे थे. मैंने अपनी जगह छत पर देख ली थी.

गर्मियों के दिन थे और मौसम सुहावना था. मैं छत पर जाकर लेट गया. छत पर काफी रोशनी थी. कुछ देर के बाद श्वेता ऊपर आई. उसको भी कहीं पर सोने के लिए जगह नहीं मिल रही थी.

वो मुझसे आकर कहने लगी- शरद, मैं तुम्हारे पास ही सो रही हूं. मुझे कहीं और जगह नहीं दिखाई दे रही है.
मैंने कहा- ठीक है. सो जाओ.
उसके पास आते ही मेरा पप्पू राजा मेरी पैंट में मुंह उठाने लगा था.

श्वेता ने अपनी नाइट ड्रेस पहन रखी थी जो उसके बदन से बिल्कुल चिपकी हुई थी. वैसे तो हम दोनों में काफी खुले तौर पर बात हो रही थी लेकिन अभी तक इतने भी नहीं खुले थे कि बात सेक्स तक पहुंच जाये.

इससे पहले जब मैं और वो मिले थे तो मुझे मौसी की लड़की की तरफ इतना आकर्षण नहीं हुआ था. मगर आज तो मेरा मूड ऐसा कर रहा था कि उसकी चूचियों को मसल ही दूं. मेरा लंड मेरी पैंट को फाड़ने के लिए उतारू था.

एक कारण यह भी था कि इससे पहले श्वेता कभी मेरे इतने करीब नहीं आई थी. वो मेरे पास ही आकर लेट गई. कुछ देर तक हम दोनों में इधर-उधर की बातें होती रहीं. उसने बताया कि उसके कॉलेज के एग्जाम महीने भर बाद शुरू होने वाले हैं.

मैंने उससे पूछा कि तुम यहां पर क्यों सो रही हो. उसने बताया कि नीचे सब जगह हाउस फुल हो गया.
यही सवाल उसने मुझसे किया तो मैंने भी कह दिया कि जिस तरह तुम्हें जगह नहीं मिली, उसी तरह मुझे भी नीचे सोने की नहीं मिली.

वो बोली- तो एक बार दोबारा से ट्राई करते हैं. क्या पता नीचे सोने की जगह मिल जाये! यहां पर बहुत मच्छर हैं. रात को नींद नहीं आयेगी.
उसकी बात मुझे सही लगी. मैं भी उसके साथ चलने के लिए तैयार हो गया.

हम नीचे दूसरे कमरे में गये, जहां सामान भरा हुआ था. उस कमरे में थोड़ी सी जगह दिख रही थी कि एक व्यक्ति लेट सके. वहां पर कुछ फालतू गद्दे चादर वगैरा भी पड़े थे.
मैंने उससे कहा कि तुम्हारे लिये तो जगह मिल गई है. तुम तो यहाँ जमीन पर बिस्तर बिछा कर सो जाओ.
इतना बोल कर मैं जाने लगा तो वो बोली- फिर तुम कहां पर जा रहे हो?
मैंने कहा- मैं वापस छत पर चला जाता हूं. यहां पर एक ही के सोने की जगह दिखाई दे रही है.

वो बोली- अरे अब रात के 1 बज गये हैं. थोड़ी ही देर की तो बात है. मेरे साथ ही लेट जाओ. हम दोनों यहीं पर एडजस्ट कर लेंगे.
उसकी बात सुन कर मेरे मन में भी हवस सी जाग गई. सोचने लगा कि शायद किस्मत भी यही चाहती है. इसलिए मैं उसकी बात पर सहमत हो गया.

जगह बहुत कम थी और हम दोनों का चेहरा आमने-सामने था. उसको सहज नहीं लगा तो वो बोली कि शरद तुम जरा ये लाइट बंद कर दो. मैं भी यही चाह रहा था. मैंने फटाक से उठ कर लाइट ऑफ कर दी.

अभी मैं किसी तरह की पहल करने से डर रहा था क्योंकि मुझे भरोसा नहीं था कि श्वेता का रिएक्शन क्या होगा. सोचते सोचते मुझे नींद आ गयी. रात को 3 बजे के करीब अचानक से मेरी आंख खुल गई.

मैंने देखा कि श्वेता ने अपने पैरों को मेरे पैरों के ऊपर रखा हुआ था. उसकी नाइट ड्रेस जोकि एक गाउन जैसी थी, नीचे से उठ कर उसकी जांघों तक आ गयी थी. उसकी कोमल जांघें देख कर मेरा खुद पर कंट्रोल करना भारी हो गया.

धीरे से मैंने अपने हाथ को उसकी कोमल जांघों पर रख दिया. जगह कम होने के कारण हम दोनों लगभग एक दूसरे के साथ सटे हुए थे. कुछ देर तक मैंने अपने हाथ को उसकी कोमल जांघ पर ऐसे ही रखा. मेरे लंड का तन कर बुरा हाल होने लगा.

अब मैंने उसके गाऊन को धीरे से ऊपर खिसका लिया. उसकी कमर तक ले गया मैं उसके गाऊन को. उसकी कमर पर हाथ ले जाकर मैंने हाथ को वहीं पर रख दिया. मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि मैं अपनी कोशिश में कामयाब हो रहा हूं. साथ ही इस बात की खुशी भी थी कि उसकी तरफ से कोई विरोध नहीं हो रहा था.

श्वेता अब धीरे से मेरे बदन के और करीब आ गयी और मेरे बदन के साथ चिपकने लगी. हम दोनों इतने पास आ गये कि उसका चेहरा मेरे चेहरे के करीब आ गया. मुझे उसकी सांसें अपने चेहरे पर महसूस होने लगीं. हमारे होंठ एक दूसरे के नजदीक थे.

मगर अचानक ही उसकी नींद खुली और उसने मेरे हाथों को अपने बदन से अलग कर दिया. वो उठ गयी और बाथरूम की तरफ जाने लगी. मैं सोने का नाटक करने लगा. कुछ देर के बाद वो आयी और दोबारा से मेरे पास आकर लेट गयी.

मैं अभी भी आंखें बंद करके लेटा हुआ था. मेरी गांड फट रही थी कि कहीं इसको मेरी हरकत का बुरा न लग गया हो. मैं ऐसे ही लेटा रहा. फिर कुछ देर के बाद उसका हाथ मेरे सीने पर आ गया. अब मेरी जान में जान आयी. मैंने सोचा कि वो सो रही है.

दोबारा से कोशिश करते हुए मैंने उसके गाऊन में हाथ डाला और अपने हाथों को उसके बूब्स तक ले गया. मेरे हाथ उसके बूब्स को छूने लगे. मेरा लंड एकदम से उछलने लगा. उसकी टाइट चूचियों को छूने से ही मेरा 6 इंच का लंड फनफना उठा.

मेरी वासना बढ़ रही थी और साथ ही हिम्मत भी. मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी चूत पर रख कर देखा. अब तो मुझसे किसी हाल में भी रहा न गया. मैंने उसकी चूत पर हाथ रख कर उसकी चूत को धीरे से सहलाना चालू कर दिया.

वैसे सभी लोग सो रहे थे, फिर भी मुझे थोड़ा सा डर लग रहा था कि किसी ने देख लिया तो मुसीबत हो जायेगी. फिर भी वासना के वश होकर मैं उसकी चूत को सहलाता रहा. कुछ देर के बाद मुझे उसकी चूत में कुछ गीला सा लगने लगा.

मौसी की लड़की की चूत से पानी बहना शुरू हो गया था. उसकी चूत चिकनी हो चली थी. नंगी चूत पर हाथ फिराते हुए मुझे इतना मजा आ रहा था कि मेरे लिए अब यहीं पर ही रुक जाना संभव नहीं था.

जब मुझसे बर्दाश्त न हुआ तो मैंने सोचा कि जो होगा देखा जायेगा. मैंने उसको अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों को चूसने लगा. मगर हैरानी की बात थी कि वो मेरा साथ देने लगी. जिस तरह से मैं उसके होंठों के लिए प्यासा था वो भी मेरे होंठों को वैसे ही चूस रही थी.

कुछ देर तक हम एक दूसरे के होंठों का रस पीते रहे. फिर उसने खुद ही मेरी पैंट की तरफ हाथ बढ़ा दिया. मेरी चेन को खोल कर हाथ को अंदर डाल दिया. उसका हाथ सीधा मेरे लंड पर जा लगा. उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको दबाने लगी.

मैं पागल सा हो उठा. उसके होंठों को काटने लगा. उसकी चूचियों को जोर से दबाने लगा. श्वेता ने मेरे अंडरवियर में हाथ डाल कर मेरे लंड को अपने हाथ में भर लिया. वो मेरे लंड को अपने हाथ से आगे पीछे करने लगी.

मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी और वो मेरे होंठों जोर से काटने लगी. जब उससे भी रहा न गया तो वो धीरे से मेरे कान में सिसकारते हुए बोली- बस शरद, अब मेरी चूत में अपना हथियार डाल दो!

मैंने अपनी पैंट को खोल कर थोड़ा नीचे किया और अपने लंड को अंडरवियर के ऊपर से बाहर कर लिया. मैंने अंडरवियर को हल्का सा नीचे किया और श्वेता की चूत पर लंड को लगा दिया. मैं उसकी चूत पर लंड को रगड़ने लगा.

अब मैं भी उसकी चूत को चोदने के लिए मरा जा रहा था. मैंने उसकी चूत में लंड को रखा और एक ही धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया.
वो दबी आवाज में कराहने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आराम से यार … दर्द हो रहा है.

उसकी चूत के दर्द को ध्यान में रखते हुए मैं वहीं पर रुका रहा. तब तक मैं उसके होंठों को पीता रहा. कुछ देर के बाद फिर मैंने लंड की हरकत उसकी चूत में करनी शुरू कर दी.

अब मैंने लंड को थोड़ा बाहर खींचा. शिश्न को उसकी चूत के अंदर ही रख कर एक धक्का फिर से मारा. लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसा दिया और उसके होंठों को चूसने लगा. अब मैंने लंड को उसकी चूत में आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

दो मिनट के बाद उसकी चूत खुद ब खुद मेरे लंड की तरफ उठ कर आने लगी. उसको मजा आने लगा था. मैंने उसकी चूत की चुदाई चालू रखी और वो भी मेरे लंड को चूत में लेकर मजे लेती रही.

15 मिनट तक मैंने उसकी चूत को चोदा और जब मैं झड़ने को हुआ तो मैंने पूरा जोर लगा कर उसकी चूत में लंड को घुसेड़ते हुए धक्के लगाना शुरू कर दिया. वो झड़ने लगी और उसके कुछ अन्तराल पर ही मेरे लंड से भी वीर्य निकल पड़ा.

मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चूत में झाड़ दिया. अब हम दोनों की आंखों में नींद नहीं थी. हम एक दूसरे के होंठों को पीते रहे. मैं उसकी चूचियों को दबाता रहा. उनसे खेलता रहा. एक घंटे के बाद दोनों ही चुदाई के मूड में आ गये.

उस रात को हमने चुदाई का दूसरा राउंड भी किया जिसमें मैंने 20 मिनट तक अपनी मौसी की लड़की की चूत को चोदा. फिर सुबह हो गई और कुछ आहट सी होने लगी तो हम लोग अलग होकर विपरीत दिशा में मुंह करके लेट गये.

मौसी की लड़की की चूत मुझे इस तरह से अचानक ही मिलेगी मुझे इसका यकीन नहीं हो रहा था. शादी के दौरान मैंने उसको अपना लंड भी चुसवाया. उसकी गांड में उंगली भी की.

वो किस्सा मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊंगा.

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