ममेरे भाई के लण्ड से फिर चुदी

Mamere Bhai Ke Lund Se Fir Chudi

मामा के घर भाई से चूत चुदाई-1

मामा के घर भाई से चूत चुदाई-2

मामा के घर भाई से चूत चुदाई-3

हैलो दोस्तो.. मैं आपकी दोस्त रंजीता फिर से अपने रिश्ते के भाई से चुदवाने की कहानी ले कर आपके सामने हूँ।

आपको तो मालूम ही है कि मैं हरियाणा से हूँ।

सबसे पहले मेरी कहानी अन्तर्वासना पर प्राकशित करने के अन्तर्वासना का शुक्रिया।

मेरी पिछली कहानी
‘मामा के घर भाई से चुदाई’
के लिए मुझे काफ़ी ईमेल मिले.. उन सभी को सुधि पाठकों को भी धन्यवाद।

अब मैं अपनी नई कहानी सुनाने जा रही हूँ।

जैसा कि मैंने पिछली कहानी में बताया था कि नवीन ने मुझे खेत में चोदा।

मैं मामा के घर से अपने घर आ गई.. अपने घर आने के बाद नवीन से मेरी एक बार बात हुई, दूसरी बार जब नवीन ने फोन किया तो मम्मी उसके फोन को सुनने चली गईं।

वो फोन हमारे पड़ोस का लैंड-लाइन नम्बर था। उस दिन नवीन ने मेरी मम्मी से ही बात की और फिर उसके बाद फोन नहीं किया.. क्योंकि अब मैं फोन पर नहीं जा सकती थी।

अब मैंने 12वीं में एडमिशन ले लिया था और मैं पढ़ाई पर ध्यान देने लगी।
इसी तरह काफ़ी वक्त बीत गया।

अब मैंने अपना मोबाइल ले लिया था.. यह टाटा इंडीकॉम का फोन था.. और नवीन ने भी टाटा का ही फोन ले लिया।

एक दिन नवीन ने पड़ोस वाले फोन पर फोन करके मेरा मोबाइल नम्बर ले लिया.. तब से हम दोनों बात करने लगे।
उस वक्त टाटा टू टाटा अनलिमिटेड फ्री था।
अब हम रोज बात करते थे..

मेरे इम्तिहान आ गए थे.. तब उसने मेरा इम्तिहान का सेंटर पूछा तो मैंने उसे बता दिया।

इम्तिहान वाले दिन वो मुझसे मिला.. हम दोनों काफ़ी खुश थे।

उसने मुझे गिफ्ट दिया..
लेकिन मैंने कहा- मैं क्या करूँगी इसका.. अगर माँ को पता चल गया तो मेरी शामत आ जाएगी।

उसने कहा- माँ को बोल देना.. सहेली ने दिया है…

वो मुझसे रोज मिलता था।

इम्तिहान के आखिरी वाले दिन वो मुझे बाइक पर बिठा कर घर तक छोड़ने आया।
उसको देख कर माँ भी बहुत खुश हुईं।

हम काफ़ी वक्त बाद मिले थे।

माँ पड़ोसन आंटी के पास चली गईं और मैं और नवीन मेरे कमरे में आ गए थे।

तभी नवीन ने मुझे पकड़ लिया और जबरदस्त चुम्बन करने लगा।

मैं भी उसका साथ देने लगी।

फिर उसने मेरे मम्मों को दबाना चालू कर दिया।

दस मिनट हम यूँ ही करते रहे.. फिर हम अलग हुए।
फिर वो चला गया।

कुछ दिन बाद माँ को बाहर जाना पड़ा।

मेरा भाई भी हॉस्टल में रहता था और दादा-दादी गाँव गए हुए थे।
इसीलिए माँ ने हमारे साथ रहने के लिए नवीन को बुला लिया।
मैं बहुत खुश थी।

नवीन सुबह ही आ गया।
माँ सुबह जल्दी ही चली गई थीं।
नवीन ने मुझे देखते ही मुझे बाँहों में ले लिया।

हम एक-दूसरे की बाँहों में समा गए।
हम चुम्बन करने लगे.. तभी मेरी छोटी बहन ऋतु आ गई.. वो डर गया।

तब मैंने कहा- डरो मत.. ऋतु को शुरू से ही सब मालूम है।

वो बोला- पहले क्यों नहीं बताया।

मैंने हँसते हुए कहा- तुझको किसी का तो डर होना चाहिए था.. उस वक्त इसीलिए नहीं बताया था।

अब कमरे में ऋतु भी हमारे साथ ही थी।
वो हमको देख रही थी कि हम क्या कर रहे हैं।

नवीन ने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।

वो मेरे कपड़े उतारने लगा।
मैं सिर्फ़ ब्रा-पैन्टी में रह गई।
फिर उसने अपने कपड़े उतारे और वो सिर्फ अंडरवियर में रह गया।
फिर उसने मेरी ब्रा-पैन्टी भी उतार दी.. उसने अपना अंडरवियर भी उतार दिया।

हम दोनों नंगे थे.. एक-दूसरे की बाँहों में हम चूमा-चाटी करने लगे।

हम एक-दूसरे की जीभ चूसने लगे.. मैं मदहोश होने लगी।
फिर वो मेरे मम्मों को चूसने लगा ओर बेरहमी से मसलने लगा।

मेरे मम्मे लाल हो गए… उसका लंड पूरा मोटा और कड़क हो चुका था।
फिर हम 69 अवस्था में आ गए और दस मिनट बाद उसने मेरे घुटने मोड़ कर मेरी चूत पर लंड रखा और एक करारा धक्का मारा…

अभी उसके लंड का सुपारा ही अन्दर गया था कि मुझे दर्द होने लगा क्योंकि मैं काफ़ी वक्त बाद चुदवा रही थी।

उसने मेरा मुँह अपने होंठों से बंद कर दिया और एक और तगड़ा झटका मारा।

अबकी बार पूरा लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया।
मुझे बहुत ज़्यादा दर्द हुआ.. मेरी आँखों से आँसू बहने लगे।

वो मेरे ऊपर ऐसे ही लेटा रहा।

करीब 5 मिनट बाद मेरा दर्द कम हुआ.. वो हिलने लगा और मुझे भी मजा आने लगा।
अब मैं भी उसका साथ देने लगी।

अब वो रफ़्तार से धक्के लगा रहा था।

फिर नवीन ने स्थिति बदली और मुझे घोड़ी बना कर पीछे से अपना लंड.. मेरी चूत में पेल कर चोदने लगा।

लगभग 5 मिनट चोदने के बाद वो नीचे लेट गया और मुझे लंड पर बैठा कर कूदने को बोला।

मैंने वैसा ही किया… 5 मिनट बाद उसने मुझे गोद में उठाया और लंड पर बैठा कर खड़ा होकर चोदने लगा।

कुछ वक्त बाद उसने मुझे फिर बिस्तर पर गिरा दिया और मुझे धकापेल चोदने लगा।

फिर कुछ ही देर में हम दोनों झड़ गए, उसने अपना सारा पानी मेरे अन्दर ही निकाल दिया।

हम दस मिनट तक यूँ ही लेटे रहे।
फिर हम बाथरूम गए और अपने को साफ़ किया।

फिर हम बिस्तर पर आ गए… और हमने खाना खाया।

कुछ देर प्यार मुहब्बत की बातें कीं और फिर चालू हो गए।

इस तरह सारा दिन उसने मुझे बहुत बार चोदा और शाम को माँ का फोन आया कि वो कल आएगी।

अब रात में मैंने और ऋतु ने खाना बनाया।

नवीन बाहर चला गया था। वो 30 मिनट बाद आया, वो 4 बियर लेकर आया।

वो बियर पीने लगा, हम दोनों उसको देख रहे थे.. वो बोला- तुम भी पी लो…

मैंने सोचा अच्छा मौका है.. घर पर कोई नहीं है.. सो मैं भी पीने लगी और साथ में ऋतु भी पीने लगी।

हमने बियर ख़तम की.. मैंने 3 मग लिए थे.. मुझे और ऋतु को नशा होने लगा।

हम तीनों को नशा होने लगा।

हमने खाना खाया और बिस्तर पर आ गए।

मैं पूरी नशे में थी और चुदाई की मस्ती में चूर थी।

हम दोनों एक बिस्तर पर ही थे.. ऋतु हमारे बराबर में खाट पर ही लेटी थी।
ऋतु मेरी राजदार थी.. और हम दोनों बहनों में अच्छी बनती थी।

ऋतु उस वक्त जवानी की दहलीज पर थी, वो मेरी हर बात मानती थी।

अब नवीन मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे कपड़े उतारने लगा और मुझे नंगा कर दिया।

मैंने कहा- अपने भी कपड़े उतारो..

तो वो बोला- तुम ही उतार दो…

मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए।

अब हम दोनों नंगे थे.. उसने मुझे बिस्तर से नीचे खड़ा किया और लंड मेरे मुँह में दे दिया।

मैं उसके लवड़े को चूसने लगी… मुझे उसका लौड़ा चूसना बहुत अच्छा लग रहा था.. मैं चूसती रही।

दस मिनट बाद उसने अपना पानी मेरे मुँह में निकाल दिया… मैं सारा माल पी गई।

ऋतु को भी नशा हो चुका था। वो हमारी चुदाई देख कर अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी।

फिर नवीन ने मेरी चूत चाटी.. मैं थोड़ी देर में ही झड़ गई और वो सारा रस पी गया।

फिर हम चूमा-चाटी करने लगे… वो मेरे मम्मों को चूसने और काटने लगा।

वो मेरे पूरे जिस्म को चूमने और काटने लगा।

फिर उसने लंड को चूत पर रख कर शॉट मारा.. लंड थोड़ा सा अन्दर गया .. फिर दूसरा शॉट मारा.. फिर लंड पूरा अन्दर चला गया।

अब वो मुझे दनादन ठोकने लगा.. वो मुझे दस मिनट.. इसी अवस्था में ठोकता रहा।

फिर उसने मुझे अपने लंड पर बैठाया और मुझसे कूदने को बोला, मैं उसके लौड़े पर जंप करने लगी।

फिर उसने मुझे कुतिया बनाया और पीछे से हथियार लगा कर चोदने लगा।

मेरी गाण्ड बहुत ही आकर्षक है.. बिल्कुल करीना की तरह…

जब वो मुझे पीछे से चोद रहा था.. तो उसका मन मेरी गाण्ड मारने का करने लगा।

उसने मुझे चोदते हुए कहा- मैं तेरी गाण्ड मारना चाहता हूँ।

मैंने कहा- नहीं.. प्लीज़ बहुत दर्द होगा…

वो बार-बार मुझे मनाता रहा.. लेकिन मुझे बहुत डर लग रहा था।

तब उसने रफ़्तार से शॉट लगाने शुरू किए। मैं समझ गई कि वो झड़ने वाला है।
मैं पहले ही झड़ गई थी।

उसने अपना पानी चूत में ही निकाल दिया। उसने मुझे पूरे 30 मिनट तक चोदा।

फिर 10 मिनट रुकने के बाद उसने मुझे लंड चूसने को बोला.. मैं लंड चूसने लगी।

थोड़ी देर में ही उसका लंड खड़ा होने लगा.. क्योंकि मैं लंड अच्छी तरह से चूस रही थी।

वो बोला- मुझे तेरी गाण्ड फाड़नी है।

मैंने कहा- बहुत दर्द होगा।

वो बोला- आराम से डालूँगा…

मेरे मन में भी कहीं न कहीं गांड मरवाने की चाह तो थी.. सो मैं मान गई।

तब उसने आयल की शीशी ली और मेरी गाण्ड पर अच्छी तरह तेल लगाया और फिर अपने लंड पर भी तेल डाल लिया।

अब उसने कहा- मेरे लंड की तेल से मालिश कर दे।

मैं लौड़े की मालिश करने लगी.. लंड चिकना हो गया।

उसने मुझे घोड़ी की अवस्था में करके लंड गाण्ड के छेद पर रख कर धक्का मारा…
अभी सुपारा ही अन्दर गया था कि मेरी चीख निकल गई।

वो रुक गया.. उसने कहा- ऋतु टीवी चालू कर दे और आवाज बढ़ा दो।

ऋतु ने अपनी चूत में ऊँगली निकाली और टीवी चला कर आवाज तेज कर दी।

अब फिर से उसने मेरी कमर पकड़ कर शॉट मारा और अबकी बार आधा लंड गाण्ड में चला गया।

मैं चीखने लगी.. मुझे बहुत ज़्यादा दर्द हुआ।

वो 5 मिनट रुका रहा और मेरे मम्मों को सहलाने लगा।

फिर जब मैं थोड़ी सामान्य हुई तो उसने लंड बाहर खींच कर तेज धक्का मारा और पूरा लंड मेरी गाण्ड में उतार दिया।

मैं बहुत ज़ोर से चीखी.. मुझे लगा कि मैं तो मर गई।

कुछ देर रुकने के बाद उसने लंड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया।

वो मुझे धीमी रफ़्तार से चोदने लगा।

फिर उसने रफ़्तार बढ़ानी शुरू की और तेज-तेज शॉट मारने लगा।

दर्द के मारे मेरा बुरा हाल था.. मेरी टाँगें दर्द से कांप रही थीं।
मैं रोती रही.. लेकिन वो शॉट मारता रहा।

कुछ देर बाद लंड ने गाण्ड में जगह बना ली थी।
अब मेरा दर्द भी कम होने लगा।
अब मुझे मजा आने लगा…. वो मुझे लगतार ठोकता रहा।

मेरा बुरा हाल था.. मैं थक गई थी।

करीब 20 मिनट बाद वो और तेज रफ़्तार से ठोकने लगा।

मुझे लगा कि ये झड़ने वाला है और कुछ ही देर में वो मेरी गाण्ड में ही झड़ गया।

वो मेरी पीठ के ऊपर ही लेटा रहा।

करीब 15 मिनट बाद हम अलग हुए और बाथरूम में जाकर अपने आप को साफ़ किया।

फिर हम बिस्तर पर आ गए… मेरी गाण्ड में बहुत जलन और दर्द था।

थोड़ी देर में वो फिर शुरू हो गया.. पूरी रात उसने मुझे सोने नहीं दिया.. कभी मेरी गाण्ड तो कभी चूत मारता रहा।

सुबह 5-00 बजे हम नंगे ही सो गए।

फिर 9 बजे हमको ऋतु ने उठाया… हम नहा कर फ्रेश हो गए.. फिर चाय ली और खाना खाया…

मेरे से ठीक से चला भी नहीं जा रहा था…. क्योंकि पूरी रात नवीन ने मुझे जबरदस्त तरीके से चोदा था।

मेरी कहानी आपको कैसी लगी..
प्लीज़ ईमेल कीजिएगा।

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