लड़कपन की यादें-10

(Ladakpan Ki Yaden-10)

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अन्तर्वासना की कहानियाँ सत्य हैं अथवा काल्पनिक इसका निर्णय लेखक का अंतर्मन ही जान सकता है।

सभी पाठकों से अनुरोध है कि कहानी के शब्दों अथवा लेखक के भ्रामक कथनों के आधार पर इनकी सत्यता अथवा काल्पनिकता के विषय में निर्णय ना करें।

इन कहानियों को केवल मनोरंजन की दृष्टि से पढ़ें, इनका आनन्द लें और इनसे किसी प्रकार की प्रेरणा ना लें।

कभी भी अधिक देर तक सैक्स के मैदान में अपने साथी के सामने टिका रहना हो अथवा एक से अधिक साथियों को संतुष्ट करना हो तो पहले दौर के कुछ पहले हस्तमैथुन कर लेने से अगला दौर काफ़ी लम्बा हो जाता है और शारीरिक थकान भी नहीं रहती।

खैर… पुनः कहानी पर आता हूँ।

सोनी अनु को लिंग चूसते बड़ी उत्सुकता से देख रही थी, साथ ही वो खुद भी मादक सिसकारियाँ निकाल रही थी क्योंकि 69 पोजीशन में उसकी योनि में मेरी जीभ छेदन कर रही थी।

कुछ मिनटों के बाद मैंने उसके कूल्हे पर चपत लगाकर उठने का इशारा किया और उसे नीचे लिटाकर उसके नितम्बों के नीचे एक तकिया लगा दिया।

मैं घुटनों के बल बैठ गया और पास पड़ा कामसूत्र का पैकेट खोलकर कंडोम को अपने लिंग पर चढ़ा लिया।

मुझे आज भी याद है कि कामसूत्र नाम का कण्डोम बाज़ार में नया आया था और पुराने फ़िल्म अभिनेता कबीर बेदी और प्रोतिमा बेदी की पुत्री पूजा बेदी ने इस कण्डोम के विज्ञापन में पूर्ण नग्न दृश्य दिये थे।

किसी अनुभवहीन के लिए लिंग पर कंडोम चढ़ाना बहुत मुश्किल काम होता है पर मैं पहले कई बार कंडोम पहन कर हस्तमैथुन कर चुका था इसलिए मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।

अनु और सोनी दोनों उत्सुकतावश मुझे यह करते देख रही थीं।

कंडोम चढ़ाकर मैंने सोनी की टांगों के बीच अपनी पोजीशन ली, अपनी तर्जनी उंगली को उसकी योनि में घुसाकर गीलापन चैक किया।

कामातुर सोनि की योनि पर्याप्त गीली थी इसलिए मैंने अपने लिंग को उसकी भगनासा पर सेट किया और धीरे से लिंग को उसकी योनि में प्रवेश कराया जिसे उसने आनन्द और दर्द मिश्रित सीत्कार के साथ भीतर ले लिया।

मैंने अपने दोनों हाथ उसकी छाती के दोनों ओर बिस्तर पर रखे और पुश-अप्स (एक प्रकार की कसरत) करने के अंदाज़ में अपने लिंग को उसकी योनि के अन्दर-बाहर करने लगा।

अब आगे की कहानी..
कंडोम की वजह से उसे काफ़ी दर्द हो रहा था और हर धक्के के साथ उसकी चीख सी निकल रही थी पर उसने सोचा कि शायद शुरू में ऐसा होता होगा और जल्दी ही अच्छा लगने लगेगा पर ऐसा हुआ नहीं।

मैं भी असहज़ महसूस कर रहा था पर मैं कंडोम हटाने की बात करके उन दोनों को नाराज़ नहीं करना चाहता था इसलिए बे-मन से धक्के लगाता रहा।

कुछ मिनट दर्द सहन करने के बाद सोनी ने कहा– अभि… कंडोम बिल्कुल कम्फ़र्टेबल नहीं…बहुत दर्द हो रहा है…प्लीज इसे हटा कर करो!!

मैंने अपना लिंग बाहर निकाला और कंडोम निकलते हुए बोला– हाँ… मुझे भी अजीब लग रहा है… बिल्कुल मज़ा नहीं आ रहा…!

उसकी योनि सूख गई थी इसलिए मैंने पहले उंगली से और फिर झुककर अपनी जीभ उसकी योनि में घुसाकर फिर से गीला करने लगा।

आजकल चॉकलेट, स्ट्राबेरी, ऑरेंज, पाइनएप्पल और ना जाने किन-किन फ्लेवर के कंडोम आने लगे हैं पर उन दिनों कामसूत्र में एक ही गन्दी बदबू वाला कंडोम होता था जिसकी बदबू काफ़ी देर तक लिंग और योनि से जाती नहीं थी।

सोनी की योनि चूसने से उसे तो अच्छा लगने लगा था पर मुझे उसकी योनि से कंडोम की गन्दी बदबू आ रही थी इसलिए जल्दी ही उठकर मैंने फिर से पोजीशन ली, अपने लिंग पर थूक लगाकर गीला किया और उसकी प्यासी योनि पर रखकर हल्का सा धक्का दिया।

इस बार पूरे आनन्द के साथ उसने मेरे लिंग को स्वीकार किया और मादक सिसकारियाँ निकाल अपने कामातुरता प्रदर्शित की।

मुझे भी इस बार स्वर्ग का सा सुख मिल रहा था इसलिए लिंग को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।

सोनी ने अपने दोनों पैर उठाकर मेरे कूल्हों पर रख दिए थे और उत्तेजक सीत्कारों के साथ रतिक्रीड़ा में मेरा सहयोग करने लगी– वाओ… अभि… ये बहुत अच्छा है… ऐसे ही करते रहो… हर दिन मज़ा बढ़ता ही जा रहा है… यह मज़ा पहले क्यूँ नहीं मिला… आह्ह… कम ओन… चोदो मुझे अभि… और जोर से…!!

ऐसी आवाजों से जोश मिलता है और मैं पूरे जोश के साथ सोनी को चोद रहा था।

थोड़ी देर में कुछ थकावट महसूस हुई तो सोनी के बदन पर लेट सा गया और अपने होठों से उसके होठ व जीभ चूसने लगा।

मेरे दोनों हाथ अब उसके स्तनों के गुलाबी निप्पल मसल रहे थे।

कुछ मिनट चूसने के बाद मैं बैड पर लेट गया और सोनी को ऊपर आने का इशारा किया।

सोनी मेरे ऊपर सवार हुई मेरे लिंग को हाथ से पकड़कर अपनी योनि के मुख पर सेट किया और होठों को भींच कर अपने भीतर प्रविष्ट करा दिया।

मैंने अनु को भी हमारी रति-क्रीड़ा में शामिल होने का न्यौता दिया जिसे उसने स्वीकार करते हुए अपने टॉप और ब्रा उतार फेंके और हमारे खेल में शामिल हो गई।
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अनु सोनी के आगे मेरे सीने पर सवार हो गई और मेरे हाथ पकड़कर अपने उरोजों पर रख लिए जिन्हें मैं बेदर्दी से मसलने लगा।

दोनों के उरोज़ पूरी तरह से कसे हुए और अनछुए थे पर सोनी की तुलना में अनन्या के उरोज़ बड़े होने के कारण उनको मसलने और मुंह में चूसने में ज्यादा मज़ा आता था।

सोनी ने भी अपने हाथ अनन्या के कन्धों पर रख दिए और संतुलन बनाकर अपने कूल्हे उचकाकर मेरे लिंग को अन्दर-बाहर करने लगी।

कुछ मिनटों में मैंने अनु को ऊपर से हटाया और सोनी के गोरे स्तनों की तनी हुई गुलाबी घुण्डियों को मसलने लगा।

सोनी कसमसा उठी– आह्ह… बहुत अच्छा है ये… ऐसे ही करो… मसल दो इनको… वाओ…अभि… यू आर रियली वैरी गुड…!!

काफी देर हो गई थी इसलिए किसी के आने के डर और थकान के कारण अब मैं आज के इस खेल को समाप्त करना चाहता था इसलिए सोनी को नीचे गिराया, कूल्हों के नीचे तकिया लगाया, अपना लिंग रस से सराबोर योनि के मुख पर लगा कर अन्दर घुसा दिया और जोरदार धक्कों की बारिश कर दी।

‘आह्ह… अभि… फाड़ दो मेरी नूनी को… फ़क मी…हार्डर…!!’ सोनी उत्तेजनावश तेज-तेज आवाजें करने लगी और एक-डेढ़ मिनट में ही सीत्कारों के साथ फिनिश हो गई।

कुछ ही क्षणों में मुझे भी अपना अंत निकट लगने लगा इसलिए वीर्य अन्दर छूटने के जोखिम से बचने के लिए तुरंत अपना लिंग बाहर निकाल लिया और हाथ से हिलाकर अपने कामरस की दो-तीन-चार पिचकारियाँ उसके पेट छोड़ दी।

तब आज की भांति वीर्य को मुँह में लेने का चलन सामान्य जीवन में और तब के वीडियोज़ में भी नहीं होता था और कुछ वर्षों बाद जब मैंने यह क्रिया पहली बार एक वीडियो में देखी, तब काफी अजीब भी लगी और गन्दी भी।

मैं आज भी अपनी पत्नी के साथ सहवास करते समय इसे पसंद नहीं करता हूँ।

फिर से कहानी पर आता हूँ…
मैं पास में ही लेट गया और बिना साफ़ किये ही बैड पर लेटा हांफता रहा।
सोनी धीरे से उठी, टॉयलेट में जाकर अपना बदन धोकर बाहर आ गई और कपड़े पहनने लगी।

मैं भी उठा और टॉयलेट में जाकर अपने हाथ और लिंग को धोकर बाहर आया।

तब तक अनन्या और सोनी दोनों कपड़े पहन चुकी थी।

पहले हम तीनों ने कंडोम का निस्तारण किया, बैड और टॉयलेट को ठीक किया जिससे किसी को शक नहीं हो और फिर वहीं बैठकर आनन्द की चर्चा करने लगे।

अगले बारह-तेरह दिन हम तीनों ने लगभग रोज़ विभिन्न आसनों में कई बार सैक्स किया।
फिर दोनों बुआएँ अपने-अपने घर चली गईं और हम तीनों अलग हो गये।

मेरा सैक्स दर्शन का खेल फिर शुरू हो गया पर अब उसमें ज्यादा मज़ा नहीं आता था।

खैर… हम तीनों फोन पर एक दूसरे से जुड़े रहे।
अगले साल फिर दोनों आई, दोनों के बदन में जबरदस्त निखार आ गया था।
इस साल भी हमने अठारह-बीस दिन सैक्स का भरपूर आनन्द लिया।

एक साल बाद अनन्या की और उसके दो साल बाद सोनी की शादी हो गई।

अनन्या गुजरात के एक प्रसिद्ध शहर में और सोनी शारजाह (UAE) में अपने वैवाहिक जीवन में बहुत खुश व पूरी तरह से संतुष्ट जीवन जी रहीं हैं।

सोनी की शादी के एक साल बाद मेरी शादी भी हो गई और मैं भी अपने वैवाहिक जीवन का आनन्द उठा रहा हूँ।

अनन्या व सोनी की शादी होने के बाद भी मेरी शादी होने के पहले तक हमने आपसी सहमति से सम्बन्ध बनाये।

मेरी शादी के बाद आवश्यकता नहीं होने के कारण हम तीनों ने कभी शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाये, हालाँकि आज भी हम जब मिलते हैं तो अपने सुनहरे पलों को याद करते हैं, उनकी चर्चा करते हैं…

इस कहानी के लेखन और विशेषकर सम्पादन में अन्तर्वासना के ही एक लेखक ‘प्रीत आर्य’ ने मेरी बहुत मदद की इसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूँ।
प्रीत आर्य जी की कहानियाँ आप यहाँ पढ़ सकते हैं!

आप अपनी प्रतिक्रिया, अपने कमेंट मुझे मेरे email एड्रेस पर, facebook मैसेज द्वारा अथवा Hangouts मैसेज द्वारा दे सकते हैं.
मुझे प्रतिदिन कई पुरुष व महिला पाठकों के email मिल रहे हैं जिसमें अधिकतर मेरी कहानी की सत्यता को जानना चाहते हैं, उनसे मैं यही कहना चाहता हूँ कि कहानी का आनन्द उठायें, अधिक गहरे में ना जाएँ।

कुछ पुरुष व महिला पाठकों ने मित्रता का ऑफर भी दिया जिन्हें मैं स्वीकार करता हूँ।
आप मुझसे email से facebook व Gmail Hangouts द्वारा भी जुड़ सकते हैं।

कुछ लड़कों ने अपने लिए भी कोई जुगाड़ करने का आग्रह किया पर उनको मैं पहले ही बता चुका हूँ कि मैं कोई एजेंट या दलाल नहीं अतः मुझसे ऐसी आशा नहीं रखें।

कुछ पाठकों ने संबंधों में सैक्स (Incest) की कहानी लिखने के लिए नाराजगी भी व्यक्त की पर उन्हें मैं केवल इतना ही कहूँगा कि मेरे अनुमानतः आज के समाज में यह बहुत आम (common) है और लगभग हर जगह प्रचलन में है।

यह ऐसी उम्र के हर उस युवा लड़के-लड़की की कहानी है जो सैक्स के प्रति जिज्ञासु और उतावले रहते हैं। उनके कुछ दोस्त या सहेलियाँ जो सैक्स का आनन्द ले चुके हैं या कुछ जो झूठे ही अपने सैक्स सन्बन्धों का बखान करते हैं वो भी उनकी प्यास को और बढ़ा देते हैं और ऐसे में हर लड़के-लड़की को यही लगता है कि जब सब यह कर रहे हैं तो वो पीछे क्यों रहें।

ऐसे में बॉलीवुड की फ़िल्में और इन्टरनेट आग में घी का काम करते हैं।
तब ऐसे युवाओं को जहाँ आसान सैक्स मिले, वो उसका आनन्द लेते हैं।

इस स्थिति में घर के सगे रिश्तों में, या करीबी रिश्तों में सैक्स सम्बन्ध बनना एक अत्यंत सुरक्षित विकल्प है, ऐसे सम्बन्ध गुप्त रूप से पूर्ण आनन्द देते हैं और अधिकतर मामलों में किसी को पता भी नहीं चलता।

कुछ विवाहितों (विशेषकर महिलाओं) का असंतुष्ठ सैक्स जीवन भी उन्हें परिवार में ही किसी अन्य सदस्य से सम्बन्ध बनाने को प्रेरित करता है।

मेरा व्यक्तिगत मानना है कि शारीरिक आवश्यकतानुसार आपसी सहमति व समझ से शारीरिक सुख व मानसिक संतुष्टि के लिए सैक्स चाहे किसी के भी साथ किया जाये, बुरा व गलत नहीं होता।

यह तभी गलत होता है जब दोनों सैक्स साथियों में से कोई भी स्वार्थवश उस सम्बन्ध का गलत फायदा उठाए और अपने साथी को आर्थिक, शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना पहुँचाए।

मेरा सभी पाठकों विशेषकर महिलाओं से अनुरोध है कि संबंधों का आनन्द उठायें, केवल दिल की आवाज़ ही ना सुनें, समझदारी से सही व सुरक्षित साथी चुनें।

चाहे कोई भी परिस्थिति हो अपने साथी को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित न करें, अपने साथी के सम्बन्ध बनाने अथवा अलग होने के फैसले का सम्मान करें।

कुछ दिनों पहले दिल्ली की एक घटना पढ़ी जिसमें एक ऑनलाइन टैक्सी प्रदाता कंपनी के एक टैक्सी ड्राईवर द्वारा अपनी ग्राहक एक महिला से बलात्कार किया गया।
मैं इस प्रकार की घटना का पूरी तरह से विरोध करता हूँ और ऐसे बलात्कारियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने का आग्रह करता हूँ.

सैक्स एक आनन्द है जो कि सहवास करने वाले दो अथवा अधिक साथियों द्वारा सुख व शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आपसी सहमति द्वारा किया जाता है, इसमें जोर-जबरदस्ती का कोई स्थान नहीं।
सैक्स में अपने साथी को आनन्द देना, उसे संतुष्ट करना ही सैक्स का सच्चा आनन्द उठाना है।
अभी इतना ही…

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