जिस्मानी रिश्तों की चाह-62

(Jismani Rishton Ki Chah- Part 62)

This story is part of a series:

हैलो पाठको.. मैं सगीर आपी की स्टोरी को आगे बढ़ा रहा हूँ.. मुझे माफ़ कीजियेगा कि आपका मजा कुछ दिन खराब हुआ।

अब तक आपने पढ़ा..

आपी को मैंने एक बार गाली देते हुए ‘बहनचोद’ कहा था और आपी ने आज मुझे बहनचोद बना कर अपना बदला ले लिया था।

अब आगे..

आपी हँसते हुए बोलीं- मैं नहीं तुम खुद हो बहनचोद.. समझे..
यह बोल कर आपी सीढ़ियों की तरफ चल दीं और मैं वहीं दरवाज़े पर खड़ा बेचारा सा मुँह ले कर अपना कान खुजाने लगा।

आपी सीढ़ियों से नीचे उतर गईं और मैं आपी की बात को सोचता हुआ अपने कमरे की तरफ चल पड़ा।
कमरे में जाते ही मैंने अपना लण्ड साफ किया और बहुत थका हुआ होने की वजह से लेटते ही सो गया।

सुबह आँख काफ़ी लेट खुली तो देखा तो टाइम साढ़े ग्यारह का हो रहा था, मुझे बहुत थकान महसूस हो रही थी इसलिए थोड़ी देर रुक कर मैं उठा और नहा कर फ्रेश हुआ।

फरहान मेरे उठने से पहले ही स्कूल जा चुका था.. मैं कपड़े पहन कर नीचे गया तो अम्मी ने नाश्ता दिया.. मैंने नाश्ता करते हुए अम्मी से पूछा- आपी कहाँ हैं?
तो अम्मी ने बताया कि वो यूनिवर्सिटी गई हुई हैं।

कॉलेज तो मैं जा नहीं सका.. तो नाश्ता करने के बाद मैंने सोचा कि दुकान पर ही चला जाता हूँ.. शाम तक दुकान का काम देख लूँगा.. यह सोचते हुए मैंने अम्मी को बताया कि मैं दुकान पर जा रहा हूँ.. और घर से निकल गया।

दुकान पर पहुँच कर दुकान के काम में लग गया.. पर आपी के साथ जो रात को सेक्स किया और जिस तरह आपी को प्यार किया.. वो मेरे जेहन में सारा दिन एक वीडियो की तरह चलता रहा।

दुकान का काम निपटाते हुए मुझे काफी टाइम हो गया.. करीब साढ़े सात हो रहे थे, मैंने मुलाज़िमात को कहा- दुकान टाइम से बंद करके जाएं.. मैं घर जा रहा हूँ।
मैं खुद वहाँ से निकल आया।

रास्ते में मुझे याद आया कि मैंने तो अपने लण्ड का पानी आपी की चूत में ही निकाल दिया था.. तो कहीं आपी उससे प्रेगनेंट ना हो जाएं.. इसलिए बेहतर है कि मैं आई-पिल ले चलूँ।

मैंने मेडिकल स्टोर पर रुक कर उससे टेब्लेट्स लीं.. और साथ अपनी टाइमिंग बढ़ाने वाली कुछ टेब्लेट्स भी ले लीं।
दोनो किस्म की टेब्लेट्स ले कर मैं वहाँ से घर की तरफ निकला और वहाँ से सीधा घर आ गया।

घर आकर मैं आपी को ढूँढने लगा, आपी बावर्चीखाने में काम कर रही थीं।

मैं आपी के पास गया.. पर मेरे कुछ बोलने से पहले ही आपी ने धीमी सी आवाज़ में मुझसे कहा- तुम ऊपर चलो.. मैं ऊपर ही आती हूँ.. यहाँ कोई बात नहीं..
मैं आपी की बात सुन कर उनको ‘ओके’ बोल कर वहाँ से चला गया।

मैंने अपने कमरे में जाकर में फौरन कपड़े उतारे और वॉशरूम में घुस गया। कुछ लम्हे बाद मैं फ्रेश होकर बिस्तर पर लेट गया और आपी का इन्तजार करने लगा।

करीब दस मिनट बाद आपी कमरे में आईं तो मैं खुशी से आपी की तरफ बढ़ा और उनको गले से लगा लिया। मैंने उनके होंठों पर एक किस की.. तो आपी ने भी किस शुरु कर दी।

कुछ चुम्मियों के बाद उन्होंने रुक कर कहा- सगीर, मैं आज नहीं आ पाऊँगी।
मैंने आपी की गिरफ्त ढीली करते हुए कहा- क्यों आपी.. क्या हुआ है.. आप नाराज़ हो क्या?
आपी ने मेरे बालों में हाथ फेरते हुए कहा- भला अब मैं अपने भाई से कैसे नाराज़ हो सकती हूँ।

मैंने पूछा- फिर आप क्यों नहीं आओगी?
तो आपी ने बताया कि गाँव वाली खाला बस अभी हमारे घर पहुँचती ही होंगी.. और वो रात को भी यहाँ ही रहेंगी।
यह सुन कर मैं पीछे होने लगा..

तो आपी ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और कहा- सगीर मेरे राजा.. क्यों नाराज़ होते हो.. आज नहीं तो कल सही.. कल वो लोग चले जाएंगे और एक मज़े की खबर ये है कि अम्मी.. फरहान और हनी भी उनके साथ जाएंगे.. वो लोग मुझे साथ चलने का कह रहे थे.. पर मैंने मना कर दिया है.. मैं तो अपने भाई को छोड़ कर कैसे जाऊँ.. उसे प्यार कौन करेगा। और वो लोग वहाँ 4 से 5 दिन तक रहेंगे.. शायद खाला का कोई जानने वाला बीमार है.. इस वजह फरहान और हनी को खाला के बच्चों के पास छोड़ कर उनकी तबीयत का पता करने उनके घर जाएंगे।

मैंने आपी की बात सुन कर आपी से कहा- फिर कल सारी रात आपको मेरे साथ रहना पड़ेगा.. क्योंकि पापा तो जल्द ही सो जाते हैं.. और वो सुबह ही उठेंगे।

आपी ने कहा- मेरा सोहना भाई.. क्या मेरे भाई का बहुत दिल करता है मुझे चोदने को.. जो सारी रात रहने का प्रोग्राम बना रहा है।
मैंने आपी से कहा- मेरा बस चले तो मैं आपको अपनी बीवी बना कर रखूँ.. हर रात को आपके साथ सेक्स किया करूँ और आपको सारी रात प्यार करता रहूँ।

आपी ने मुझे बांहों में भर कर कहा- अच्छा मेरे राजा.. कल सारी रात तुम्हारे साथ रहूँगी.. अपने सोहने भाई के साथ.. तुम जितना मर्ज़ी चाहो.. सेक्स कर लेना और मेरे साथ जितना मर्ज़ी प्यार करना.. पर अभी मुझे जाने दो.. खाने का इंतज़ाम करना है.. खाला भी आती होंगी।
मुझे होंठों पर आपी ने किस की और ज़ोर से अपनी चूत को मेरे लण्ड के साथ लगा दी। मैं भी पूरे जोश से उनको चुम्मी करने लगा।

आपी मेरे होंठ ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगीं और मेरी कमर पर ज़ोर-ज़ोर से हाथ चलाने लगीं।

क्योंकि मैंने पूरे ज़ोर से अपना लण्ड आपी की चूत से लगाया हुआ था और हल्का-हल्का रगड़ रहा था.. तो आपी भी पूरे जोश से मुझे रिस्पॉन्स दे रही थीं।

कुछ मिनट इसी तरह किस करने के बाद आपी ने कहा- सगीर अब मैं चलती हूँ.. बहुत टाइम हो गया है।
मेरी गिरफ्त से निकल कर आपी जाने लगीं.. तो मैंने भी गिरफ्त ढीली कर दी और आपी को छोड़ दिया।

आपी दरवाज़े की तरफ जाने लगीं तो अचानक मुझे याद आया कि आपी को वो दवा दे दूँ।
मैंने आपी को आवाज़ दी- आपी एक मिनट रूको..!

दरवाज़े पर ही आपी रुक गईं और उन्होंने मुड़ कर मेरी तरफ देखा.. तो मैंने कहा- एक मिनट रूको..
मैं जो टेबलेट ले कर आया था.. वो दराज से निकाल कर आपी को दे दी।
आपी ने पूछा- यह क्या है सगीर?

तो मैंने कहा- कल रात को मैंने अपना पानी आपकी चूत में ही निकाल दिया था। ये प्रेगनेंसी रिमूवल टेब्लेट्स हैं.. आप आज याद से एक टेबलेट ले लेना ताकि आप प्रेगनेंट ना हों।

आपी ने कहा- थैंक्स सगीर.. मैं तो भूल ही गई थी। तुमने इतनी खुशी दी है मुझे मेरे राजा कि बता नहीं सकती।

तभी मैंने आगे बढ़ कर आपी के माथे पर चुम्मी की और कहा- आपी आई लव यू.. आप तो मेरी जान हो.. फिर अपनी जान का ध्यान तो रखना है ना।
आपी ने कहा- आई लव यू टू सगीर..
और वो मुझे आँख मार कर नीचे जाने लगीं।

मैंने उन्हें फिर पुकारा- आपी..
‘अब क्या है?’
‘आपी कल रात हम दोनों के लिए ख़ास होने वाली हो सकती है क्या?’
‘कैसी ख़ास?’
‘क्या आप कल मेरे लिए दुल्हन का लिबास पहन सकती हो?’

आपी ने मेरी सोच को समझते हुए कहा- मेरे राजा मैं तो तुम्हारी हूँ इसलिए जो कहोगे वैसा करूँगी.. तैयार भी हो जाऊँगी और तुम्हारी मर्जी के कपड़े भी अच्छे से पहन लूँगी.. और कुछ?
तो मैंने आपी से कहा- बस मेरी जान आप इतना कर दो.. बाकी काम मैं करने जा रहा हूँ।

मैंने आपी को सीधा करके उनके होंठों पर किस की और कहा- मैं आधे घन्टे में आ जाऊँगा.. आप भी तब तक तैयार हो जाना।
आपी ने कहा- ठीक है.. हो जाऊँगी।

अगले दिन शाम को दूकान से निकल कर सीधा फूलों वाली दुकान पर पहुँच गया और वहाँ से फूलों की पत्तियां लीं और आपी के लिए मैंने ‘रेड रोज़’ लिया और वहाँ से सीधा में ज्वेलरी की शॉप पर गया और वहाँ से आपी के लिए मैंने इयर-रिंग्स लिए और साथ गारमेंट्स की शॉप से दो ब्रा के सैट खरीद लिए और सीधा घर आ गया।

घर आया तो आपी अपने रूम में थीं.. और रूम अन्दर से लॉक था। मैंने नॉक किया.. तो आपी ने थोड़ा सा दरवाज़ा खोला।
मैंने आपी से कहा- आप तैयार हो गईं कि नहीं..
तो आपी ने कहा- अभी नहीं बाबा.. बस 20 मिनट में हो जाऊँगी।
मैं आपी को वो जो चीज़ें लेकर आया था वो दे दीं और कहा- आप इनको पहन लो.. ये मैं आपके लिए ही लाया हूँ।
आपी ने वो चीजें ले लीं और मुझे ‘थैंक्स’ कह कर दरवाज़ा बंद कर लिया।

मैं भी अपने रूम में चला गया और बेडशीट ठीक करके पूरे बिस्तर पर फूलों की पत्तियां बिखेर दीं.. बल्ब की रोशनी भी बंद कर दी। मैंने धीमी वाली लाईट ऑन कर दी और आपी का इन्तजार करने लगा।

तभी आपी की आवाज़ आई- सगीर..
तो मैं भाग कर नीचे गया तो आपी दरवाज़े से मुँह निकाले खड़ी थीं। मैंने पूछा- क्या हुआ आपी?
तो आपी ने कहा- मुझे वॉशरूम से हेयर ब्रश पकड़ा दो.. मेरा वाला तो मिल ही नहीं रहा है।
मैंने कहा- ओके..

मैं वॉशरूम की तरफ चला गया.. वहाँ से ब्रश ले कर मैं वापिस आया तो देखा कि आपी के कमरे का दरवाज़ा खुला है। मैं अन्दर गया तो हैरान हुआ कि आपी रूम में नहीं थीं। मैंने टीवी लाउन्ज में भी देखा.. आपी वहाँ भी नहीं थीं।

तब अचानक मेरे जेहन में आया कि कहीं ये सोच कर मेरे रूम में ना चली गईं हों कि मैं वहाँ ही आ जाऊँगा।

मैं सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर गया तो कमरे में वो ही मद्धिम लाईट ऑन थी।
मैं अन्दर चला गया..

अन्दर जाते ही मैंने देखा तो मेरी खुशी की इंतिहा ही नहीं थी.. आपी घूँघट में बिस्तर पर बैठी हुई थीं.. एकदम दुल्हन की तरह का ब्लैक कलर का लहंगा पहने हुए वो बेहद खूबसूरत लग रही थीं।

मैं समझ गया कि आपी ने मुझसे छिप कर रूम में आने के लिए मुझे नीचे बुलाया था।

मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और बिस्तर की तरफ बढ़ने लगा। बिस्तर के पास पहुँच कर मैं आपी के पास बिस्तर पर बैठ गया और आपी का घूँघट उठाने लगा। मैंने आहिस्ता-आहिस्ता आपी का घूँघट उठाया और मेरे मुँह से खुद बा खुद ही निकल गया।

‘आपी.. आपको मेरी नज़र ना लग जाए.. आप इंतिहा खूबसूरत लग रही हो.. आप मेरी जान निकाल लोगी आपी.. कसम से..’

मेरे पास एक गोल्ड का छल्ला था.. जो कि मैं कभी-कभार पहना करता था.. मैं उठा.. वो छल्ला अपनी दराज से निकाला और आपी के पास जा कर मैं बैठ गया।

मैंने कहा- इस वक्त मेरे पास मेरी बीवी को देने के लिए इस छल्ले से कीमती और कोई चीज़ नहीं है..
और यह कहते ही मैंने छल्ला आपी का हाथ को पकड़ कर आपी की उंगली में पहना दिया।

उस छल्ले को आपी ने किस किया और कहा- ये मेरी ज़िंदगी का सब से अनमोल तोहफा है और आज का दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे बेहतर दिन है। मैं ये सब कभी नहीं भूल पाऊँगी.. और मैं अब शादी नहीं करूँगी.. मेरी शादी आज तुमसे हो गई है बस..

आपी की आँखों से आंसू निकलने लगे जो मैंने गिरने से पहले ही थाम लिए और कहा- मेरी जान रो ना आपी.. आप प्लीज़.. आपके आंसू मुझसे नहीं देखे जाते।

मैंने आपी के आंसू साफ कर दिए, मैंने आपी से कहा- अब इजाजत दें.. तो आपको आज मैं फिर से अपनी बीवी बना लूँ?
आपी ने कहा- हाँ सगीर प्लीज़ मुझे अपनी बीवी बना लो..

दोस्तो, बताओ मजा आ रहा है न..आपके ईमेल का इन्तजार रहेगा।
वाकिया जारी है।
[email protected]

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