कमसिन चचेरी बहन की चुदाई-8

(Home Sex: Kamsin Chacheri Behan Ki Chudai- Part 8)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

दोस्तो, आपने मेरी इस होम सेक्स कहानी में अब तक पढ़ा कि मेरी चचेरी बहन अनुराधा मेरे पास चुदने के लिए आ गई थी और मैंने उसकी चूत को चूस चाट कर झाड़ दिया था.
अब आगे…

मैंने अपनी छोटी बहन से पूछा- कैसा लगा अन्नू बहना??
अनुराधा बड़े प्यार से बोली- आई लव यू भैया! बहुत मजा दिया आपने!

उसकी इस बात से मुझे उस पे प्यार आ गया और हम दोनों ने किस करना शुरू कर दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी थी… हम दोनों बाथटब में सट कर बैठे थे.

अनुराधा- भैया… बाथटब में लेट जाओ…
मैं- क्यों?
अनुराधा- प्लीज़… मानो मेरी बात!

मैं अपनी बहना का कहना टाल ना सका, मैं बाथटब में लेट गया… वो किसी तरह खड़ी हुई मेरा हाथ पकड़ कर और वो भी बाथटब में आ गई. मैं लेटा था, मेरा लंड पत्थर की तरह हार्ड था और वो मेरे ऊपर खड़ी थी. मैं समझ गया कि वो क्या करने जा रही है.

मैं- अन्नू… ऐसे मत कर… इस तरह से तुझे बहुत दर्द होगा.
अनुराधा- नहीं होगा… मैं जानती हूँ, तुम होने नहीं दोगे भैया.

मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और वो मेरे लंड के बिल्कुल आगे बैठ गई… मैंने उसे कमर से पकड़ कर उठाया और अपने लंड को उसकी चूत के होंठों पे ले गया.
मैं- देख अन्नू… तुझे पहले थोड़ा दर्द तो होगा ही और ब्लीडिंग भी हो सकती है. घबराना नहीं तुम!
अनुराधा- होने दो भैया… कभी ना कभी तो होना ही है तो आज ही सही… मैं सिर्फ़ तुम्हारे साथ ही ये करना चाहती हूँ.
मैं- लव यू अनु… एक बार मेरा लंड चूस ताकि वो बिल्कुल चिकना हो जाए और आसानी से घुस सके.
अनुराधा- चला जाएगा भैया… मेरी चूत ऑलरेडी बहुत गीली है… बस तुम डालो…

मैंने अपने लंड को अपनी बहन की चूत में डालना शुरू किया आर एक हाथ से उसके कमर पकड़ कर उसे धीरे-धीरे अपने लंड पर बैठाने लगा. साथ ही मैं दूसरे हाथ से उसका हाथ थामे हुए था. उसकी चूत वाकयी में बहुत गीली थी और एकदम टाइट भी थी.
मुझे बड़ी मुश्किल हो रही थी… मेरा लंड जा नहीं रहा था और उसे भी काफ़ी दर्द हो रहा था.

अचानक वो रुक गई… उसने मेरी आँखों में देखा और झटके से मेरे लंड पे बैठ गई. करीब 4 इंच तक लंड अन्दर चला गया.
अनुराधा- आआआहह… इसिसस्स्सी इसस्स्स स्स… आअहह… भैयाअ.आआ… आआ आअहह आ आहाआहहह…
उसकी चूत से ब्लीडिंग होने लगी. उसने मेरे हाथों को जकड़ लिया था और आँखें बंद कर ली थीं. उसकी आँखों से आंसू आने लगे और उससे दर्द होने लगा.

मैं- सॉरी… अन्नू…
अनुराधा- नहीं भैया… थैंक्यू…
हम 5 मिनट उसी पोज़िशन में रुके रहे थे ताकि उसकी चूत मेरे लंड को अड्जस्ट कर ले. उसका ब्लड मेरी जाँघों पर था.

अब मैंने उसकी कमर पकड़ी और धीरे-धीरे झटके मारने लगा. वो भी अब मेरा साथ देने लगी थी और ऊपर-नीचे हो रही थी. अपने हर मूव के साथ उसके चूचे उछल रहे थे. अब वो संभल गई थी और मस्त चुदाई कर रही थी. मैं कभी उसके निपल्स पिंच करता, कभी किस करता.
मैं- आआहाआह… जोर से… स्पीड से…
अनुराधा- आअहह…आअहह… उम्म्म्म… मेरा निकल रहा है.

उसके इतना कहने पर मैंने भी उसकी चूत में रस छोड़ दिया और हम दोनों का एक साथ स्खलन हुआ. इसी के साथ उसकी पेशाब भी छूट गई. हम दोनों हाँफने लगे थे… हमारे जिस्म बिल्कुल निढाल हो गए थे.

वो कुछ वक़्त ऐसे ही बैठी रही और जब मेरा लंड पूरा सिकुड़ गया तो मेरे ऊपर गिर गई. उसके चूचे मेरे सीने में दब रहे थे. मैंने उसके चेहरे पर से बाल हटाए और उसे किस किया.

मैं- मैं तुझे हमेशा प्यार करूँगा अन्नू… आई रियली लव यू…
अनुराधा- लव यू टू भैया…

हम किस करने लगे… मैंने हाथ बढ़ा कर उसकी गांड मसलना स्टार्ट किया मगर मैं जानता था कि वो थक गई है. हम दोनों फव्वारा चला कर के वहां यूं ही लेटे रहे. मैंने उसकी चूत को साफ किया. हम काफ़ी देर तक एक-दूसरे के साथ टब में लेटे रहे और पानी हमारे जिस्म से बह रहा था.

मैं नीचे था और वो मेरे ऊपर लेटी थी. उसकी गांड मेरे लंड पर थी, सो अब तक लंड बिल्कुल सख़्त हो गया था. मैं उसके बालों को किस कर रहा था. हमारे हाथ एक-दूसरे के हाथों में जकड़े थे और बाँहें एक-दूसरे से लिपटी थीं.

हम वैसे ही लेटे थे. अब तक अनुराधा की चूत काफ़ी ठीक हो गई थी और उसमें उतनी ताक़त भी आ गई थी. उसकी नजर मेरे लंड पे गई.
अनुराधा- क्या भैया? ये कभी सॉफ्ट होता है भी या नहीं.
मैं- जब तक हम साथ रहेंगे, यह सॉफ्ट नहीं होगा. तुझे खुद ही इसका कुछ करना होगा.

अनुराधा एकदम से घूमी और अब वो मेरी आँखों में देखने लगी. वो मेरी आँखों में देखने लगी और धीरे-धीरे नीचे सरकने लगी. आख़िर वो मेरे लंड तक पहुँच ही गई और उसने अपनी जीभ निकाल कर मेरे लंड का टोपा चाटना शुरू कर दिया और फिर पूरे लंड को लिक करती रही. उसकी आँखें अब भी मेरी आँखों में झाँक रही थीं. हमारी नजरें तब ही अलग होतीं, जब मुझे एकदम से सिहरन सी होती.

आख़िर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लिया और उससे बेतहाशा चूसने लगी. कभी मेरे बाल्स को भी किस करती और अपने उंगलियां मेरे निपल्स पे गोल-गोल घुमाने लगी. मेरी गांड अपने आप ही हिलने लगी, जिससे वो समझ गई कि मेरा झड़ने ही वाला है.

मैं- आअहह… अनन्नु… उ…उ… डोंट स्टॉप… आ आह…

मेरे बाल्स में प्रेशर बनने लगा था और जैसे ही मुझे लगा कि अब मेरा रस भी निकल जाएगा, तभी उसने मेरा लंड मुँह में से निकाल लिया और मेरे लंड को छोड़ दिया.

अनुराधा- इतनी आसानी से नहीं भैया… अभी तो शुरूआत है… तुम्हें मेरे लिए भी कुछ करना होगा. तभी तुम्हें राहत मिलेगी.
मैं- हाँ…कर दूँगा… मगर पहले मेरे लंड का तो कुछ कर.
अनुराधा- उम्म्म आहह… नहीं…लेडीज फर्स्ट… नहीं पता क्या?

इतना कह कर ही उसने फिर मेरे लंड को मुँह में ले लिया और दो बार चूस के ही निकाल लिया. वो मुझे तड़पा रही थी और मैं बेताब था.
अनुराधा- सोच लो.
उसकी आँखों में शरारत और शैतानी दोनों थे. मैं समझ गया कि या तो मैं जैसा यह कहती है वैसा करूँ, या फिर मुठ मार लूँ.
मैंने अनुराधा की बात मानना ठीक समझा, मैं बोला- ठीक है… क्या चाहती है तू मुझसे?

वो कुछ नहीं बोली… वो बाथटब की रिम पर बैठ गई और सिर्फ़ नजरें नीचे झुकाकर अपनी झांटों की ओर इशारा किया. मैं समझ गया कि ये अपनी चूत लिक करवाना चाहती है. मैंने उसे अपनी ओर खींचा और टब की रिम पर बैठे-बैठे ही उसके पैरों को फैला दिया. जैसे ही मैं उसकी चूत को मेरी जुबान से लिक करने ही वाला था, उसने मुझे फिर रोक दिया- क्या कर रहे हो?
मैं- दुनिया की सबसे सुंदर चूत को चूसने जा रहा हूँ… यही चाहती है ना तू? तो पैरों को फैला ले और मजा ले…
अनुराधा- नहीं… ये नहीं… मैं इन बालों को हटाना चाहती हूँ.
मैं- अन्नू, तू चाहती है कि मैं तेरी झांटें शेव करूँ?
अनुराधा- सिर्फ चूत के ऊपर ही नहीं… मैं चाहती हूँ कि तुम यहाँ से लेकर वहां तक के सारे बाल शेव करो.

उसने अपनी उंगली से अपनी कमर से लेकर गांड के होल तक इशारा किया. मैं खुश हो गया. मैंने उससे अपनी बांहों में उठाया और किस किया.

मैं- वेट डार्लिंग…

मैं टब से निकला और मॉम की शेविंग किट लेकर आया. तब तक वो टब में लेट गई थी और उसने अपने पैरों टब के वॉल पर रख दिए थे. उसके पैर पूरी तरह से फैले हुए थे. मैंने उसकी ओर देखा… उसकी साँसें तेज चल रही थीं. हर सांस के साथ उसके चूचे ऊपर-नीचे हो रहे थे. उसके ब्राउन निपल्स जो सख़्त हो चुके थे और उसकी चूत चमक रही थी.

दरअसल वो रज छोड़ रही थी. उसकी चूत में से जूस निकल कर उसकी जाँघों पर आ गया था और उसकी चूत में से एक मस्की स्मेल आ रही थी.

मुझे मेरे लंड को उसकी चूत में घुसने से रोकने में बहुत ज़्यादा मुश्किल हो रही थी क्योंकि उसका दूध सा गोरा जिस्म, उसके एक बड़े ऑरेंज जितने बड़े चूचे, उसकी आर्म्पाइट्स में हेयर जो कामुक महक से भीगे थे, उसका भीगा जिस्म चमक रहा था और उसने अपने पैर इस तरह फैला कर रखे हुए थे कि उसका भगनासा भी दिख रहा था.

मैं टब में उतरा और उसके पैरों के बीच बैठ गया. उसने अपने पैर नीचे कर लिए और मेरे दोनों तरफ रख दिए. मैंने उसकी चूत को उंगली से सहलाया तो उसकी मादक सिसकारियां निकलने लगीं. वो बहुत तेज सांस ले रही थी और मेरी उंगली को देख रही थी. मैं उसकी चूत को चीर रहा था.

अनुराधा- हरी अप प्लीज़…
मैंने हाथ वाले फव्वारे से उसकी चूत पे गर्म पानी डाला.
अनुराधा- इसस्सस्स…स… आअहह… उफफ्फ़…
गर्म पानी उसकी चूत में से होता हुआ उसकी गांड से टपकने लगा. मैंने शेविंग क्रीम ली और अपने हाथ से उसके पेल्विस पर लगाने लगा. मेरी उंगलियाँ उसकी चूत पर सांप जैसे घूम रही थी… बस छूकर निकल जातीं. उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं और वो धीरे-धीरे अपने चूतड़ों को हिला रही थी. मैंने उसके पेल्विस से लेकर उसकी गांड के छेद तक क्रीम लगाई और फिर धीरे-धीरे उसकी चूत की हर झाँट को मैं शेव करने लगा. बड़े ही ध्यान से मैं शेव कर रहा था और जहाँ से रेजर पास होता, वो जगह बिल्कुल सिल्की स्मूद हो जाती.

मैंने उसकी चूत की फांकों दोनों पंखों को पकड़ कर फैलाया और उसके साइड में शेव करने लगा… अचानक मुझे महसूस हुआ कि अन्नू की गांड बहुत ज़्यादा हिल रही है. मैं समझ गया कि उसकी चूत पानी छोड़ने वाली है. मैं जानबूझ कर उसकी चूत के आस-पास हल्के से रेजर घुमाने लगा.

अब उसकी गांड जोर से हिल रही थी और अचानक ‘आअह्ह्ह्ह्ह… भाई…ईई… मैं गई… अह…’ अनु झड़ गई.
एक मिनट बाद उसने अपनी आँखें खोलीं. उसकी सांसें अब भी तेज चल रही थीं और उसके पैर मेरी कमर को जकड़े हुए थे.
मैं- अभी और भी बाकी है… शेव करूँ या!
अनुराधा- करो…
मैं- डॉगी स्टाइल में आजा…
अनुराधा- पहले शेव तो कर लो…
मैं- उसी के लिए कह रहा हूँ मैं… तेरी गांड के आस-पास भी झांटें हैं, उन्हें भी शेव करनी हैं.

वो तुरंत डॉगी स्टाइल में आ गई. अब उसकी गांड बिल्कुल मेरे सामने थी. पर्फेक्ट हार्ट शेप की उसकी गांड और उसके बीचों-बीच उसकी सुंदर चूत दबी थी. मैंने उसकी गांड को किस किया और मसलना स्टार्ट किया. अपने हाथ से उसकी गांड को मैंने फैलाया और फिर उसके चूत के नीचे के झांटें शेव करने लगा. उसी दौरान मैंने उसकी गांड में उंगली डाली तो वो चिहुंक गई- ऊऊउककचह… भैया… नहीं…
मैं- देख… तेरी चूत अब बिल्कुल स्मूद एंड सॉफ्ट हो गई है.

उसने अपने हाथ से चैक की- वाउ…
मैं- अब मेरी बारी…

मैंने उसकी गांड के सहारे घुटनों के बाल खड़ा हुआ और उसकी चूत में से उसका जूस अपने हाथों से निकाला और अपने लंड पर लगाया ताकि स्मूद हो जाए…

मैं- आज ये लंड तेरी गांड में जाएगा…

इतना कह कर ही मैंने लंड को उसकी गांड पे टिका दिया और धीरे-धीरे धक्के मारने लगा.
अनुराधा- आअहह… आह उउफ़फ्फ़ उफ़फ्फ़… उफ…धीरेए… ईईई… आअहह आअह मरर गई…

मेरे हर धक्के में लंड उसकी गांड में घुसता जाता. हर झटके से उसकी आवाजें बढ़ती जा रही थीं. उसके चूचे नीचे झूल रहे थे और मैं उन्हें मसल रहा था. मैंने स्पीड बढ़ा दिया…
अनुराधा- आहहाआह आह… आहाहा… आह… और… जोर से एयेए… उहह… उउफ्फ़… डाल दे… अया… रांड हूँ मैं तेरी… अया…डाल्लो… पूराआ… आहा आहा…
मैं उसकी गांड चोदता रहा- आआआहह… अया… तेरी गांड बहुत टाइट हैई… तेरी गांड में हो छोड़ रहा हूँ…

मैंने उसकी गांड में अपना रस छोड़ दिया और उसकी चूत भी रो पड़ी, उससे नहीं सहा गया तो वो चीख पड़ी और टब में गिर गई. मैं उसकी गांड के ऊपर गिर गया.

मेरा लंड अब भी उसकी गांड में ही था… हम दोनों बहुत ज़्यादा थक गए थे. अनुराधा की आँखों में आंसू आ गए थे मगर होंठों पर स्माइल भी थी. वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर लेटा था. उसमें ताक़त नहीं बची थी कि वो उठ पाए, तो मैंने उसे कमर से पकड़ कर उठाया और दीवार से सटा के खड़ा करके फव्वारा स्टार्ट कर दिया… हम अब भी हाँफ़ रहे थे… क़िसी तरह हम दोनों ने फव्वारा का मजा लिया और बिस्तर पर आकर नंगे ही गिर गए.

कुछ मिनट बाद जब जान में जान आई तो वो बोली- भैया, एक बात कहूँ?
मैं- हाँ बोल…
अनुराधा- तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाओगे?

मैंने हंस के उसे अपनी बांहों में भर लिया और हम सो गए. फिर वो घर चली गई और सुबह 8 बजे आ गई. मेरे मम्मी-पापा तब भी नहीं आए थे सो हम दोनों ने फिर से दो बार सेक्स का मजा लिया.

उस दिन मैं अपनी सिटी जाने के लिए निकल गया. मेरे साथ वो यादें थीं, जो मैंने अपनी बहन अन्नू के साथ बिताई थीं. पहले मैं सिर्फ़ उसके जिस्म से प्यार करता था, मगर अब मैं सचमुच उससे प्यार करने लगा हूँ.

मेरी होम सेक्स कहानी पर आपके विचार आमंत्रित हैं.
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